🔴 ताजा खबर
खबरें लोड हो रही हैं...

अहिंसा को दुनिया में विस्तार देने के लिए राजगोपाल का नागरिक अभिनंदन

  * जापान द्वारा 40वां निवानो शांति पुरस्कार की घोषणा पर विख्यात गांधीवादी राजगोपाल का नागरिक अभिनंदन अहिंसा को दुनिया में विस्तार देने के लिए राजगोपाल का नागरिक अभिनंदन..


भोपाल. राजागोपाल पी व्ही जी को न्याय और शांति की सेवा में उनके असाधारण कार्य के लिए दुनिया की प्रतिष्ठित संस्था निवानो पीस फाउंडेशन, जापान ने 40वां निवानो शांति पुरस्कार दिये जाने की घोषणा की है, इस उपलक्ष्य में गांधी भवन, भोपाल में उनका नागरिक अभिनंदन किया गया. इसके साथ ही सर्वधर्म सद्भावना मंच एवं समस्त समाज सेवी संस्थाओं के संयुक्त तत्वावधान में होली मिलन का आयोजन किया.

वरिष्ठ पत्रकार राकेश दीवान ने विख्यात गांधीवादी राजगोपाल पी.व्ही. का परिचय देते हुए कहा कि राजगोपाल जी को लोग प्यार से राजू भाई कहते हैं.इन्हें याद करते हुए कबीर की याद आती है. कबीर जैसा जीवन और कबीर गायन में वे रचे-बसे हैं. वे कथककली नृत्य में परांगत हैं, इसलिए वे अपनी भाव-भंगिमा से अपने विचारों को व्यक्त कर पाते हैं. उन्होंने चंबल में हिंसा के ताने-बाने को अहिंसा के माध्यम से खत्म किया.यह दुनिया का अतुलनीय काम है.उन्होंने गांधीवादी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया, जो देश-दुनिया में अहिंसा के माध्यम से शांति, समानता एवं न्याय के लिए काम कर रहे हैं.


गांधीवादी राजगोपाल पी.व्ही. ने कहा कि अपने लोगों से मिला प्यार किसी भी पुरस्कार से बड़ा होता है.पुरस्कार का तीन महत्व इस समय है.पहला, आज सरकार द्वारा हर सामाजिक आंदोलन को दबाया जा रहा है, जबकि मानव अधिकार की बात संविधान में है.अलग-अलग तरह से संस्थाओं को परेशान किया जा रहा है, ऐसे समय में इस पुरस्कार का महत्व है. यह पुरस्कार गांधी जी के काम को स्वीकार करने का महत्व है, जब देश में उन्हें नकारने की बात हो रही है.तीसरी बात यह है कि यह पुरस्कार दुनिया में अहिंसा को महत्व देता है. आज देश में नफरत से बाहर आकर प्रेम एवं भाईचारे को बढ़ाने की जरूरत है.आज मैं चार स्तरीय तरीके से अहिंसा पर काम कर रहा हूं. यह मेरा पूरा जोर है कि सत्ता को कैसे अहिंसक बनाया जाए?  


वरिष्ठ पत्रकार लज्जा शंकर हरदेनिया ने कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी हिंसा के शिकार देश जापान है, वह अहिंसा के महत्व को समझता है.ऐसे देश से राजगोपाल को सम्मान मिलना देश के लिए गौरव की बात है. गांधीवादी विचारक सुश्री अनुराधा शंकर ने कहा कि मंच का काम मील का पत्थर है. राजा जी का काम सभी को जोड़ता है.राजा जी आज के जमाने के कबीर हैं.वे जिनसे मिलते हैं, उनको जोड़ते हैं. भारत माता में हम सभी लोग है.उन्होंने देश को जागृत किया है. समाज के अंतिम तबके के अधिकारों के लिए काम किया है. जापान का जो सम्मान पूर्वी दुनिया का नोबेल है. सद्भावना मंच के संयोजक महेन्द्र शर्मा ने कहा कि राजगोपाल जी ने गांधीवादी एवं सर्वोदयी विचारों को दुनिया में विस्तार दिया है.


भंते सागर थेरा जी ने कहा किं सभी धर्मों के व्यक्ति यहां मंच पर है, अपने-अपने सिद्धांत एवं मतों के अनुसार चलते हुए इंसानियत की बात कर रहे हैं.भोपाल इस तरह का आयोजन करने वाला इकलौता शहर है.फादर आनंद मुटुंगल ने कहा कि देश को शांतिमय एवं भाईचारा वाला देश बनाने की जरूरत है. राजगोपाल जी को जिस अहिंसक मूल्यों के लिए जापान से जो सम्मान मिला, उसे जीवन में अपनाने की जरूरत है. प्रो. मनोज जैन ने कहा कि राजगोपाल जी को सम्मान मिलने से देश गौरवान्वित हुआ है.सर्वधर्म सद्भावना मंच के हाजी हारुन ने कहा कि इस वक्त देश में कुछ लोग आग लगाने की की कोशिश कर रहे हैं, तो हम पानी डालने का काम कर रहे हैं.गदर करने वाले चंद लोग होते हैं. हम प्यार मोहब्बत की बात करते हैं.देश सदियों से धर्मनिरपेक्ष रहा है.

इस मौके पर प्रदेश भर से आए नागरिकों एकता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष रन सिंह परमार, लेखक शैलेन्द्र शैली, जमीयत उलेमा के प्रदेश प्रमुख, संत पुजारी संघ के अध्यक्ष दीक्षित जी, पूर्व विधायक महेश मिश्रा सहित कई गणमान्यों ने अपने विचार व्यक्त किए. इस अवसर पर सैकड़ों नागरिक उपस्थित हुए. कार्यक्रम का संचालन सतीश पुरोहित ने किया.

आलोक कुमार


पूरे बिहार में दलित गरीबों भूमिहीनों को दस डिसमिल जमीन देने की बात कही

  


पटना.आज बिहार विधानसभा के बजट सत्र में विधानसभा विधायक दल उप नेता सत्यदेव राम ने राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग पर सदन में अपनी बात रखी.

        उन्होंने सदन में बिहार सरकार से  भूमि सुधार आयोग के अध्यक्ष डी बंधोपाधाय की रिपोर्ट को लागू करने की मांग की है. पूरे बिहार में दलित गरीबों भूमिहीनों को दस डिसमिल जमीन देने की बात कही.

    बताते चले कि 60 के दशक में कांग्रेस सरकार ने बिहार में भूमि सुधार का प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन ज़मींदारों के विरोध के कारण यह ठंडे बस्ते में चली गई. 90 के दशक में लालू प्रसाद यादव ने भी भूमि सुधार को चुनावी मुद्दा बनाया, लेकिन चुनाव जीतने के बाद उन्होंने भी इस दिशा में कोई क़दम नहीं उठाया.

डेढ़ दशक बाद वर्ष 2005 में नीतीश कुमार जब पहली बार सीएम की कुर्सी पर काबिज़ हुए, तो उन्होंने भूमि सुधार के लिए डी. बंद्योपाध्याय की अध्यक्षता में भूमि सुधार आयोग का गठन किया था.बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 16 जून 2006 को गठित किया था.आयोग ने अगस्त 2006 से काम करना शुरू किया था.

    यहां यह भी सनद रहे कि सन 1977 में पश्चिम बंगाल में जब वाममोर्चा की सरकार बनी थी, तो वहां के वर्गादार (बटाईदार) किसानों को समुचित अधिकार देने के लिए ‘ऑपरेशन वर्गा’ चलाकर भूमि सुधार किया था, जिसे अब तक का सबसे सफलतम भूमि सुधार माना जाता है.इस ऑपरेशन का नेतृत्व डी. बंद्योपाध्याय ने ही किया था.

        दो वर्षों तक माथापच्ची करने के बाद डी. बंद्योपाध्याय ने अप्रैल 2008 में नीतीश सरकार को रिपोर्ट सौंपी थी. इस रिपोर्ट में बटाईदारों को अधिकार देने की बात कही गई थी और इसके लिए एक क़ानून बनाने का प्रस्ताव दिया गया था. रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि हर बटाईदार को उस ज़मीन का पर्चा देना चाहिए, जिस ज़मीन पर वह खेती कर रहा है.

इस पर्चे में भू-स्वामी का नाम व खेत का नंबर रहेगा. पर्चे की एक प्रमाणित प्रति ज़मीन मालिक को भी देने की भी बात कही गई थी.इन सबके अलावा भी कई तरह की सिफारिशें थीं. लेकिन, ज़मींदार वोट बैंक को बचाने की राजनीतिक मजबूरियों के चलते नीतीश कुमार ने भी पूर्ववर्ती मुख्यमंत्रियों की लीक पर ही चलने का फैसला लिया और सिफ़ारिशों को धूल फांकने के लिए छोड़ दिया.

     बताते चले कि अपने लिए निर्धारित एक साल की समय सीमा को एक बार बढ़वाने के बाद आयोग ने 2008 में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी.लेकिन 15 साल बाद भी नीतीश कुमार ने आयोग के सुझावों पर अमल की कोई पहल करते नहीं दिख रहे है.आयोग ने अपनी रिपोर्ट में 1990 के दशक के दौरान भूमिहीनता का आंकड़ा रखा. इन आंकड़ों के अनुसार इस दौरान राज्य में भूमिहीनता की दर चिंताजनक हद तक बढ़ी है.

     जगजाहिर है कि जन संगठन एकता परिषद के संस्थापक पी व्ही राजगोपाल ने राष्ट्रीय स्तर पर और प्रदेश स्तर पर एकता परिषद के प्रांतीय संयोजक प्रदीप प्रियदर्शी ने मिलकर डी. बंद्योपाध्याय की अध्यक्षता वाली भूमि सुधार आयोग की रिपोर्ट को लागू करने के लिए अहिंसात्मक आंदोलन चलाया.

       उत्तर बिहार एकता परिषद के नेता विजय गोरैया ने महागठबंधन सरकार के  राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री आलोक मेहता को बाजीगर करार दिया है.उन्होंने कहा कि मंत्री जी ने सभी आवासीय भूमिहीन परिवारों की गिनती कराने के वादा से पीछे हटने के बाद, बिहार के भूमि सुधार मंत्री जी अब गरीबों की आँखों में धूल झोंक रहे हैं.  गिनती कराई नहीं, कोई नया आँकड़ा डाला नहीं और 'डाटा अपडेट' करायेंगे ?   अंचल कार्यालय के कंप्यूटर में वर्षों से पड़े सौ-दो सौ आवासीय भूमिहीन परिवार के आँकड़ों को जिला स्तर पर जोड़वाकर प्रकाशित करा देंगे. किसी जिला में पाँच सौ तो किसी में हजार-बारह सौ की संख्या  ...हो गया अपडेट.  जबकि, आवासीय भूमिहीन परिवारों की एक प्रखंड की संख्या औसतन पाँच से पच्चीस हजार तक संभावित है./   कायदे से, जबतक गाँव के हर दरवाजे तक पहुँचकर सर्वेक्षण टीम द्वारा पुछताछ करने के बाद ही आवासीय भूमिहीनों की सही जानकारी प्राप्त होगी. अगर सरकार की नियत ठीक हो तो पूरे बिहार में, यह काम एक सप्ताह में पूरा किया जा सकता है. लेकिन अखबार की इस घोषणा से लगता है मानो, मंत्री जी बिहार के आवासीय भूमिहीनों को उकसा ही नहीं चिढ़ा भी रहे हों कि 'दम है तो हमारे खिलाफ बड़ी लड़ाई शुरु करो ; अगर नहीं, तो जो टुकड़ा हम फेंकते हैं उसे हमारी कृपा समझ कर स्वीकार करो'.

आलोक कुमार


Jharkhand : खूंटी में आखिर चल क्या रहा है?

खूंटी में आखिर चल क्या रहा है? अमन-चैन पर मंडराता खतरा खूंटी में एक के बाद एक सामने आ रही हिंसक घटनाएं और उनके विरोध में हो रहे प्रदर्शन कई ...