पहली बार सार्वजनिक रूप से 2022 में व्हीलचेयर का उपयोग शुरू

  ऐतिहासिक दिन है 13 मार्च 2013

* पोप बनने का दस साल पूरा किए पोप फ्रांसिस

रोम.सर्वविदित है कि विश्व के सभी कार्डिनल मिलकर रोम में रहने वाले पोप को 2013 में फ्रांसिस को पोप के रूप में चुने.पोप फ्रांसिस ने पोप चुने के तुरंत बाद ही उन्होंने इस्तीफा पत्र पर हस्ताक्षर कर लिए थे.उन्होंने कहा कि मैं जब महसूस करता कि गंभीर और स्थायी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण मैं अपने कर्तव्यों को पूरा करने में असमर्थ हूं, उस दिन के लिए यह इस्तीफा पत्र अपने पास रखा था.
आज 86 वर्षीय पोप फ्रांसिस लगातार घुटने की बीमारी के कारण बेंत और व्हीलचेयर का उपयोग कर रहे हैं और वेटिकन में एक अधिक गतिहीन जीवन शैली के कारण उनकी कमर काफ़ी बढ़ गई है जो उनके पैर की समस्या से पहले ही शुरू हो गई थी.
बता दें कि 05 मई, 2022 को पहली बार सार्वजनिक रूप से व्हीलचेयर का उपयोग शुरू करने के बाद उन्होंने कथित तौर पर एक सहयोगी से कहा, "आप चर्च को घुटने से नहीं बल्कि सिर से चलाते हैं."
मालूम हो कि एक गंभीर बीमारी से उबरने के बाद, उन्हें 1958 में जेसुइट्स में शामिल होने के लिए प्रेरित किया गया था.उन्हें 1969 में एक कैथोलिक पुरोहित (फादर) नियुक्त किया गया था, और 1973 से 1979 तक अर्जेंटीना में जेसुइट प्रांतीय श्रेष्ठ (प्रोविंशियल) थे. वह 1998 में ब्यूनस आयर्स के आर्चबिशप बने और 2001 में पोप जॉन पॉल II द्वारा कार्डिनल बनाए गए. उन्होंने अर्जेंटीना में दिसंबर 2001 के दंगों के दौरान अर्जेंटीना चर्च का नेतृत्व किया. नेस्टर कर्चनर और क्रिस्टीना फर्नांडीज डी किरचनर के प्रशासन ने उन्हें एक राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी माना. 28 फरवरी 2013 को पोप बेनेडिक्ट XVI के इस्तीफे के बाद , एक पोप सम्मेलन ने 13 मार्च को बर्गोग्लियो को उनके उत्तराधिकारी के रूप में चुना.

प्राप्त परिवादों के निष्पादन को लेकर जिलाधिकारी ने की बैठक

  मुख्यमंत्री के समाधान यात्रा, जनता के दरबार में मुख्यमंत्री एवं अन्य माध्यमों से प्राप्त परिवादों के निष्पादन को लेकर जिलाधिकारी ने की बैठक....


नालंदा.बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समाधान यात्रा, जनता के दरबार में मुख्यमंत्री, विधान सभा/विधान परिषद प्रश्नोत्तरी, जिलाधिकारी के स्तर से विभिन्न पदाधिकारियों को भेजे गए आवेदनों के निष्पादन तथा विभिन्न न्यायालय में लंबित वादों में अपेक्षित कार्रवाई को लेकर जिलाधिकारी श्री शशांक शुभंकर ने आज हरदेव भवन सभागार में समीक्षा बैठक की.

       समाधान यात्रा के क्रम में 282 परिवाद/मांग पत्र आवेदन प्राप्त हुए थे. जिनमें से 155 आवेदनों के संबंध में संबंधित विभाग द्वारा करवाई प्रतिवेदन जमा किया जा चुका है. बैठक में सभी संबंधित पदाधिकारियों से एक-एक कर उनके विभाग से संबंधित आवेदनों के निष्पादन संदर्भ में जानकारी ली गई.अधिकांश मामलों में आवेदनों का निष्पादन किया गया है. सभी पदाधिकारियों को शेष लंबित आवेदनों में भी निष्पादन योग्य मामलों का निष्पादन करते हुए प्रतिवेदन समर्पित करने को कहा गया.

     जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम से संबंधित 106 मामले में से 73 का निष्पादन किया गया है. अद्यतन 33 मामले लंबित पाए गए. जिसको लेकर सभी संबंधित पदाधिकारियों को कार्रवाई करते हुए एक सप्ताह के अंतर्गत कार्रवाई प्रतिवेदन उपलब्ध कराने एवं संबंधित पोर्टल पर अपलोड करने का निर्देश दिया गया.

   जिलाधिकारी के स्तर से भी विभिन्न विभाग के पदाधिकारियों को 177 मामले कार्रवाई भेजे गए हैं. इन सभी मामलों के संदर्भ में कार्रवाई प्रतिवेदन समर्पित करने का निर्देश दिया गया.

   न्यायालय में लंबित सीडब्ल्यूजेसी एवं एमजेसी के मामलों में अपेक्षित कार्रवाई करते हुए ससमय तथ्य विवरण दायर करने का निर्देश सभी संबंधित विभाग के पदाधिकारियों को दिया गया.

    विधानसभा एवं विधान परिषद से संबंधित प्रश्नों का उत्तर निर्धारित समय पर एवं निर्धारित माध्यम से भेजने का निर्देश सभी पदाधिकारियों को दिया गया.बैठक में नगर आयुक्त,उप विकास आयुक्त, अपर समाहर्ता, अनुमंडल पदाधिकारी बिहार शरीफ सहित अन्य विभागों के जिला स्तरीय पदाधिकारी उपस्थित थे.


आलोक कुमार

लोक प्राधिकार के पदाधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिया

  बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम के तहत  द्वितीय अपीलीय प्राधिकार के रूप में जिलाधिकारी ने आज 15 मामलों की की सुनवाई. कई मामलों में शिकायतों का हुआ निवारण...


नालंदा. लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम के तहत द्वितीय अपीलीय प्राधिकार के रूप में जिलाधिकारी द्वारा आज 15 मामले की सुनवाई की गई.इनमें से कुछ मामलों का निवारण सुनवाई से पूर्व ही संबंधित लोक प्राधिकार द्वारा किया गया तथा कुछ मामलों में निवारण के लिए संबंधित लोक प्राधिकार के पदाधिकारियों को आदेश दिया गया.

       परिवादी रंजीत सिन्हा द्वारा 15वें वित्त आयोग की योजना में कराए जा रहे कार्य में अनियमितता बरते जाने को लेकर दायर परिवाद के संदर्भ में जिला पंचायत राज पदाधिकारी द्वारा जांच की गई. उनके द्वारा बताया गया कि कार्य करने में प्रक्रियात्मक त्रुटि पाई गई है. इसको लेकर संबंधित प्रखंड विकास पदाधिकारी, प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी एवं पंचायत तकनीकी सहायक से स्पष्टीकरण पूछने का निर्देश दिया गया.साथ ही कार्य का कुछ अंश शेष है, जिसे पंचायत समिति के माध्यम से पूरा करने का निर्देश प्रखंड विकास पदाधिकारी को दिया गया.

       नूरसराय के बैकुंठ व्यास द्वारा निजी जमीन पर जिला परिषद के माध्यम से निर्मित सामुदायिक भवन के रास्ते को अतिक्रमण मुक्त कराने से संबंधित दायर परिवाद के संदर्भ में मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी जिला परिषद को मामले की जांच कर जांच प्रतिवेदन समर्पित करने को कहा गया.

        बिहार शरीफ अनुमंडल क्षेत्र की बॉबी कुमारी द्वारा गलत तरीके से निजी व्यक्ति द्वारा ऋण देने का व्यवसाय कर  प्रताड़ित किए जाने से संबंधित परिवाद के संदर्भ में अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी बिहार शरीफ द्वारा जांच की गई. उनके द्वारा बताया गया कि आरोपी व्यक्ति के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर अनुसंधान की कार्रवाई की जा रही है.

        चंडी के केदारनाथ गुप्ता द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के लाभ से वंचित रखने से संबंधित परिवाद के संदर्भ में प्रखंड विकास पदाधिकारी चंडी द्वारा बताया गया कि आवेदक पात्र श्रेणी के हैं. वर्त्तमान में आवाससॉफ्ट पर नए लाभुकों का नाम जोड़ने का कार्य बंद है.आवास सॉफ्ट में नए लाभुकों का नाम जोड़े जाने की प्रक्रिया शुरू होते ही आवेदक का नाम सूची में जोड़कर उन्हें लाभ दिलाया जाएगा.

         हिलसा की बच्ची देवी द्वारा नल जल योजना से कराए गए कार्य की पूर्ण राशि का भुगतान नहीं किए जाने से संबंधित परिवाद की जांच प्रखंड विकास पदाधिकारी हिलसा द्वारा की गई. उनके द्वारा बताया गया कि लंबित राशि के भुगतान के लिए प्रक्रिया पूरी की जा रही है. आगामी 15 दिनों के अंदर आवेदक को बकाया राशि का भुगतान करा दिया जाएगा.

       हिलसा की एक अन्य परिवादी सुषमा देवी द्वारा सात निश्चय अंतर्गत किए गए कार्य से संबंधित राशि का भुगतान नहीं किए जाने के संदर्भ में परिवाद दिया गया था. प्रखंड विकास पदाधिकारी हिलसा को नियमानुसार भुगतान सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया.कुछ अन्य मामलों से संबंधित लोक प्राधिकार के पदाधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिया गया.



आलोक कुमार

बच्चों के परिवारों को पुनर्वास के लिए मुआवजे के रूप में 25 लाख रुपये प्रदान करें


* बेगूसराय में मुस्लिम समाज की बच्चियों के फरार बलात्कारियों की तत्काल गिरफ्तारी हो:  ऐपवा

* बिना देर किए न्याय सुनिश्चित करने के लिए मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया जाए

* बजरंग दल से जुड़े अपराधियों ने घटना को दिया अंजाम, उच्चस्तरीय जांच हो

* ऐपवा की उच्चस्तरीय जांच टीम ने बेगूसराय का किया दौरा

पटना. ऐपवा की बिहार राज्य सचिव शशि यादव, दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर राधिका मेनन, समस्तीपुर की ऐपवा नेता वंदना व किरण आदि के नेतृत्व में ऐपवा की एक उच्चस्तरीय टीम ने 12 मार्च 2023 को सदर अस्पताल, बेगूसराय का दौरा कर उन दो बच्चियों से मुलाकात की, जिनके साथ विगत 8 मार्च को सामूहिक बलात्कार की क्रूरतम घटना को अंजाम दिया गया था.

      बेगूसराय से लौटने के बाद जांच टीम ने आज पटना में संवाददाता सम्मेलन में पूरे मामले पर अपनी रिपोर्ट पेश की. संवाददाता सम्मेलन में शशि यादव व राधिका मेनन के साथ ऐपवा की बिहार राज्य अध्यक्ष सरोज चौबे भी उपस्थित थीं.


फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट

ऐपवा की टीम ने पीड़िता के माता-पिता और स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ चर्चा की. टीम ने पाया कि घटना के उपरांत इलाके में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के भी प्रयास किए गए, जिसे सामाजिक कार्यकर्ताओं की त्वरित कार्रवाई के जरिए नाकाम बना दिया गया.

    8 मार्च को जब पूरी दुनिया में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जा रहा था और दोपहर बाद जब होली समारोह समाप्त हो रहा था, बेगूसराय के साहेबपुर कमाल ब्लॉक में दो बहुत छोटी बच्चियों के साथ चौंकाने वाली क्रूरता को अंजाम दिया गया. खुशबू (बदला हुआ नाम), 6 साल और समीरा (बदला हुआ नाम), 9 साल, हर दिन की तरह, राजकीय मध्य विद्यालय के खेल के मैदान में झूला झूल रही थीं. एक व्यक्ति जिसकी पहचान छोटू के रूप में समीरा ने की, बबलू कुमार और दो अन्य लोगों के साथ उन्हें खेल के मैदान में फंसा लिया और उनके साथ मारपीट शुरू कर दी. उनके चेहरे दीवार से टकरा गए थे. समीरा ने हमलावरों से लड़ना शुरू कर दिया. 


उसके सिर पर हमला किया गया और उसकी गाल को तब तक चीरा गया जब तक कि उसके दांत बाहर नहीं निकल आए. वह चीखते हुए किसी तरह भाग निकली. खुशबू जो हकलाती है और अपनी उम्र के हिसाब से बहुत कमजोर और छोटी है, इन घटनाओं को देखकर हैरान थी. वह विरोध करने में असमर्थ थी. उसे स्कूल के शौचालय में घसीट कर ले जाया गया और उसके साथ क्रूरता की गई.

    जब ऐपवा की टीम ने सदर अस्पताल में उनसे मुलाकात की, तो समीरा के चेहरे और सिर पर भारी पट्टी बंधी हुई थी. उनके साथ उनकी मां, एक बीड़ी बनाने वाली मजदूर और बेरोजगार दादा भी थे. उसके 8 अन्य भाई-बहन हैं. उसके पिता ड्राइवर हैं. दूसरे बिस्तर पर खुशबू लेटी हुई थी. उसके चेहरे, हाथों और पैरों पर दिखाई दे रही चोटें धीरे-धीरे ठीक हो रही थीं. उसकी दोनों आँखें खून से सनी हुई थीं और उसका माथा उस जगह पर उभरा हुआ था जहाँ उसे मारा गया था. 8 मार्च की दोपहर 3 बजे हुई घटना के बाद से उसने बोलना बंद कर दिया है. उसके 6 अन्य भाई-बहन हैं, जिनमें से चार विकलांग हैं. उसकी मां, जिसे उसके पति ने छोड़ दिया है, उसके साथ थी. वह अपने गरीब परिवार को पड़ोसियों सें प्राप्त भोजन से काम चलाती है.

     नामजद उपरोक्त दोनों अपराधी स्कूल के पास ही चाय और पान की दुकान चलाते हैं. बच्चों के परिजन और गांव वाले उन्हें लुम्पेन के रूप में जानते रहे हैं जो गुंडों के साथ घूमते थे और नशीले पदार्थ बेचते थे. ऐसी भी खबरें थीं कि बबलू के पिता ने दावा किया कि उनका बेटा बजरंग दल का कार्यकर्ता और मीडिया का आदमी था. दो अन्य व्यक्ति जिनका नाम समीरा नहीं  जानती थी, लेकिन पहचान सकती थी, वे अब तक फरार हैं.

     क्षेत्र में सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा बताए गए घटनाओं के क्रम से संकेत मिलता है कि खुशबू हमलावरों के चंगुल से छूटने के बाद दौड़ते हुए भागी और और गिरने से पहले ग्रामीणों को सूचित किया. जब ग्रामीणों ने खुशबू को देखा तो उसके सिर और कूल्हों के आसपास खून बह रहा था. उसे संभवतः हमलावरों द्वारा मृत मान लिया गया था. 

     आक्रोशित भीड़ ने गुंडों के अड्डे को तहस-नहस कर दिया.  हालाँकि, सामाजिक कार्यकर्ताओं के हस्तक्षेप से सांप्रदायिक उन्माद भड़काने की कोशिश टल गई. शांति समितियों का गठन किया और पीड़ितों के लिए न्याय पर ध्यान केंद्रित किया गया. स्थानीय विरोध के कारण प्रशासन को कार्रवाई करनी पड़ी. इसके बाद से अस्पताल में परिवार को पुलिस सुरक्षा दी गई है. विरोध करने पर जिला अस्पताल प्रशासन ने भी कार्रवाई करते हुए बच्चियों का इलाज कराया.

स्थानीय कार्यकर्ताओं ने यह भी उल्लेख किया कि इस तरह की दो और 

घटनाएं पहले भी गांव में हो चुकी हैं. हालांकि अभी और भी बहुत कुछ किए जाने की जरूरत है.


ऐपवा की मांग है कि 


1. दोनों फरार बलात्कारियों की तत्काल तलाश कर गिरफ्तारी की जाए.


2. बिना देर किए न्याय सुनिश्चित करने के लिए मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया जाए.

3. बच्चियों की सुरक्षा, शिक्षा सुनिश्चित की जाए.

4. स्कूल के स्थानों को सुरक्षित बनाएं और आसपास की गतिविधियों को ऐसी गतिविधियों से मुक्त करें जिनसे बच्चों को खतरा हो. 

6. स्कूल के पास नशीले पदार्थों का ठिकाना चलाने के लिए अपराधियों को दिए जा रहे राजनीतिक संरक्षण और नौकरशाही संरक्षण की जांच की जाए.

7. साम्प्रदायिक घृणा फैलाने के लिए बजरंग दल पर आपराधिक कार्रवाई की जानी चाहिए जिससे संभवतः बच्चों तक के खिलाफ घृणा का माहौल बनाने की कोशिश की.

8. बच्चों के परिवारों को पुनर्वास के लिए मुआवजे के रूप में 25 लाख रुपये प्रदान करें.

9. बच्चियों के ठीक होने और जीवन में आगे बढ़ने के लिए सर्वाेत्तम स्वास्थ्य देखभाल और पोस्ट ट्रॉमा परामर्श की सुविधा.

ऐपवा का मानना है कि समाज की सुरक्षा समाज के सबसे गरीब और सबसे कमजोर बच्चियों की सुरक्षा से ही निर्धारित होती है. भविष्य की त्रासदियों को टालने के लिए प्रशासन को उपरोक्त मांगों को पूरा करना चाहिए.


आलोक कुमार

Bihar : पवित्र मिस्सा और आठ बच्चों के प्रथम परमप्रसाद के साथ मनाया गया पल्ली दिवस

  बेतिया पल्ली में मरियम के जन्मोत्सव पर आस्था का उत्सव प्रार्थना, पवित्र मिस्सा और आठ बच्चों के प्रथम परमप्रसाद के साथ मनाया गया पल्ली दिवस...