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India : फादर डोमिनिक इमैनुएल की 48 वर्षों की पुरोहिताई सेवा

दिल्ली महाधर्मप्रांत के प्रतिष्ठित और चर्चित पुरोहितों में शामिल फादर डोमिनिक इमैनुएल का नाम 

दिल्ली महाधर्मप्रांत के प्रतिष्ठित और चर्चित पुरोहितों में शामिल फादर डोमिनिक इमैनुएल का नाम आज पूरे देश के ईसाई समुदाय में सम्मान के साथ लिया जाता है। उन्होंने अपने जीवन के लगभग पाँच दशकों को ईश्वर की सेवा, चर्च की मजबूती, सामाजिक सौहार्द और मानवीय मूल्यों के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित किया है। 23 मई 2026 को वे अपनी पुरोहिताई के 48 वर्ष पूर्ण कर रहे हैं। यह अवसर केवल उनके व्यक्तिगत जीवन का उत्सव नहीं, बल्कि उस समर्पण, संघर्ष और सेवा भावना का भी सम्मान है, जिसने उन्हें दिल्ली महाधर्मप्रांत का एक सशक्त और प्रभावशाली चेहरा बनाया।

फादर डोमिनिक इमैनुएल का पुरोहिताभिषेक 23 मई 1978 को हुआ था। उस दिन से लेकर आज तक उन्होंने लगातार चर्च, समाज और मानवता की सेवा को अपना प्रमुख लक्ष्य बनाए रखा। 48 वर्षों का यह लंबा सफर अनेक चुनौतियों, सामाजिक बदलावों और धार्मिक परिस्थितियों का साक्षी रहा है, लेकिन उन्होंने हर दौर में अपनी स्पष्ट सोच, मजबूत नेतृत्व और संतुलित वक्तव्यों के माध्यम से लोगों का मार्गदर्शन किया।

दिल्ली महाधर्मप्रांत में वे लंबे समय तक प्रवक्ता के रूप में भी कार्यरत रहे। इस जिम्मेदारी के दौरान उन्होंने चर्च की नीतियों, गतिविधियों और सामाजिक सरोकारों को प्रभावशाली तरीके से जनता तक पहुंचाया। जब भी चर्च या ईसाई समुदाय किसी विवाद, कठिनाई या सामाजिक चुनौती से गुजरा, तब फादर डोमिनिक इमैनुएल ने मजबूती से अपनी बात रखी। वे केवल धार्मिक नेता नहीं रहे, बल्कि एक सजग सामाजिक चिंतक के रूप में भी सामने आए। मीडिया मंचों पर उनके वक्तव्य संतुलित, तार्किक और संवाद की भावना से भरपूर माने जाते रहे हैं।

फादर डोमिनिक इमैनुएल की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि उन्होंने हमेशा अंतर-धार्मिक संवाद और सामाजिक सद्भाव को प्राथमिकता दी। भारत जैसे विविधताओं वाले देश में उन्होंने विभिन्न धर्मों और समुदायों के बीच भाईचारे और सम्मान की भावना को मजबूत करने का प्रयास किया। वे मानते रहे हैं कि धर्म का उद्देश्य विभाजन नहीं, बल्कि प्रेम, सेवा और मानवता का संदेश देना है। इसी सोच के कारण वे कई सामाजिक और धार्मिक मंचों पर सम्मानित वक्ता के रूप में आमंत्रित किए जाते रहे हैं।

वे एक प्रखर लेखक भी हैं। सामाजिक मुद्दों, धार्मिक स्वतंत्रता, मानवाधिकार और नैतिक मूल्यों पर उनके लेख और वक्तव्य लोगों को सोचने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने चर्च और समाज के बीच बेहतर संवाद कायम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी भाषा सरल लेकिन प्रभावशाली होती है, जिसके कारण युवा वर्ग भी उनके विचारों से प्रभावित होता रहा है।

आज के डिजिटल युग में भी फादर डोमिनिक इमैनुएल सक्रिय हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से वे चर्च और समाज से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखते हैं। जब भी चर्च या ईसाई समुदाय के सामने कोई चुनौती आती है, तब वे तथ्यों और संयम के साथ अपनी प्रतिक्रिया देते हैं। उनकी पोस्ट और विचारों में संघर्ष के साथ-साथ शांति और न्याय का संदेश भी दिखाई देता है। यही कारण है कि सोशल मीडिया पर भी उन्हें बड़ी संख्या में लोग सुनते और सम्मान देते हैं।

48 वर्षों की पुरोहिताई किसी भी पुरोहित के जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाती है। यह केवल वर्षों की संख्या नहीं, बल्कि हजारों लोगों के जीवन को छूने, दुखियों को सांत्वना देने, युवाओं को प्रेरणा देने और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की यात्रा होती है। फादर डोमिनिक इमैनुएल ने अपने जीवन में इन सभी मूल्यों को पूरी निष्ठा के साथ निभाया है।

उनके जीवन से यह सीख मिलती है कि सच्चा धार्मिक नेतृत्व केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होता, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों के साथ खड़े होने, अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने और प्रेम व भाईचारे का संदेश फैलाने में भी निहित होता है। उन्होंने अपने आचरण और कार्यों से यह सिद्ध किया कि एक पुरोहित केवल चर्च का प्रतिनिधि नहीं, बल्कि समाज का मार्गदर्शक भी होता है।                                                 

23 मई 2026 का यह विशेष दिन दिल्ली महाधर्मप्रांत और समस्त ईसाई समुदाय के लिए गर्व और खुशी का अवसर है। इस मौके पर उनके शुभचिंतक, सहयोगी, धर्मगुरु और समाज के विभिन्न वर्गों के लोग उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दे रहे हैं। सभी उनके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और निरंतर समाज सेवा की कामना कर रहे हैं।

फादर डोमिनिक इमैनुएल की 48 वर्षों की पुरोहिताई सेवा वास्तव में समर्पण, त्याग, विश्वास और मानवता की मिसाल है। आने वाली पीढ़ियां उनके कार्यों और विचारों से प्रेरणा लेती रहेंगी। उनका जीवन यह संदेश देता है कि यदि सेवा और सत्यनिष्ठा के साथ कार्य किया जाए, तो व्यक्ति केवल धार्मिक मंच तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बन जाता है।


आलोक कुमार

Bihar : प्राइवेट स्कूल्स एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन

             कार्यक्रम का आयोजन एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सैयद शमायल अहमद की अध्यक्षता में 

प्राइवेट स्कूल्स एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन के 15वें वार्षिकोत्सव के अवसर पर राजधानी पटना के ऐतिहासिक रवीन्द्र भवन में एक भव्य एवं गरिमामयी समारोह का आयोजन किया गया। वर्ष 2011 से 2026 तक की 15 वर्षों की सफल यात्रा पूरी करने के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम में बिहार के 38 जिलों से आए लगभग 3000 निदेशक, प्राचार्य एवं शिक्षाविदों ने भाग लिया। यह आयोजन शिक्षा जगत के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर बन गया, जहां निजी विद्यालयों की उपलब्धियों, चुनौतियों और योगदानों पर विस्तार से चर्चा की गई।

कार्यक्रम का आयोजन एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सैयद शमायल अहमद की अध्यक्षता में हुआ। समारोह का उद्घाटन बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी, सिक्किम एवं मेघालय के पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद, मुख्य सचेतक संजीव चौरसिया, सेंट जेवियर्स हाई स्कूल के प्राचार्य फादर डोमिचन, सेंट जोसफ मेरीवार्ड की प्राचार्या सिस्टर सरिता सी जे, माउंट कार्मल हाई स्कूल की प्राचार्या सिस्टर मृदुला ए सी, राष्ट्रीय संयुक्त सचिव डॉ एस पी वर्मा तथा राष्ट्रीय सचिव मेरविन कॉवेल द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। दीप प्रज्ज्वलन के साथ ही पूरे सभागार में उत्साह और गौरव का वातावरण दिखाई दिया।

इस अवसर पर समारोह का मुख्य आकर्षण सेंट जोसफ मेरीवार्ड की प्राचार्या सिस्टर सरिता सी जे को वर्ष 2025-26 के “सर्वश्रेष्ठ प्राचार्या अवॉर्ड” से सम्मानित किया जाना रहा। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने उन्हें यह सम्मान प्रदान करते हुए उनके उत्कृष्ट नेतृत्व, अनुशासन एवं शिक्षा के क्षेत्र में समर्पण की सराहना की। यह सम्मान केवल उनके व्यक्तिगत योगदान का ही नहीं, बल्कि निजी विद्यालयों की गुणवत्ता और मेहनत का भी प्रतीक माना गया।

समारोह में शैक्षणिक उपलब्धियों को भी विशेष महत्व दिया गया। कक्षा दसवीं और बारहवीं के मेधावी छात्रों को मेडल, प्रमाणपत्र एवं नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। इनमें रोहन प्रसाद, अदिति कुमारी, दिव्या प्रकाश तथा शताक्षी सिंह को सर्वश्रेष्ठ छात्र सम्मान प्रदान किया गया। इन विद्यार्थियों की उपलब्धियों ने यह सिद्ध किया कि बिहार के निजी विद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं।

कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने अपने संबोधन में निजी विद्यालयों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि बिहार में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने में निजी विद्यालयों का योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सैयद शमायल अहमद की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने बिहार के निजी विद्यालयों को एक मजबूत मंच प्रदान किया है। मंत्री ने यह भी आश्वासन दिया कि शिक्षा विभाग द्वारा किसी भी नए दिशा-निर्देश को लागू करने से पहले एसोसिएशन के प्रतिनिधियों से विचार-विमर्श किया जाएगा।

उन्होंने “सिंगल विंडो सिस्टम” लागू करने की घोषणा करते हुए कहा कि अब निजी विद्यालयों से जुड़े कार्य एक ही मंच से पूरे किए जाएंगे ताकि अनावश्यक भ्रम और प्रशासनिक परेशानियों से बचा जा सके। साथ ही उन्होंने निजी विद्यालयों की समस्याओं के शीघ्र समाधान का भरोसा भी दिलाया। मंत्री के इन आश्वासनों से उपस्थित शिक्षाविदों में नई उम्मीद जगी।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं सिक्किम तथा मेघालय के पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद ने शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति शिक्षा पर निर्भर करती है। उन्होंने निजी विद्यालयों के संचालकों और शिक्षकों की मेहनत, त्याग एवं समर्पण की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि देश के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में निजी विद्यालयों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सैयद शमायल अहमद ने इस अवसर पर निजी विद्यालयों की विभिन्न समस्याओं को सरकार के समक्ष रखा। उन्होंने मांग की कि निजी विद्यालयों को जल्द से जल्द QR कोड उपलब्ध कराया जाए तथा वर्षों से लंबित आरटीई की बकाया राशि का भुगतान किया जाए। उन्होंने ज्ञानदीप पोर्टल की समस्याओं का उल्लेख करते हुए कहा कि कई छात्रों का नाम पोर्टल पर दर्ज नहीं हो पाया है, इसलिए इसे पुनः खोला जाए ताकि सभी छात्रों की सही तरीके से एंट्री हो सके।

उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा विभाग का संचालन पटना से एक ही विंडो के माध्यम से किया जाए, जिससे जिला एवं प्रखंड स्तर के अधिकारियों द्वारा विद्यालय संचालकों को अनावश्यक रूप से परेशान न किया जा सके। सैयद शमायल अहमद ने भारत सरकार के स्किल डेवलपमेंट विभाग के साथ हुए एमओयू का उल्लेख करते हुए कहा कि प्री-स्कूल शिक्षकों का प्रशिक्षण एसोसिएशन की बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि पिछले 15 वर्षों में एसोसिएशन ने डेढ़ लाख शिक्षकों एवं डेढ़ लाख छात्रों को सम्मानित कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न वक्ताओं ने शिक्षा के बदलते स्वरूप, नई शिक्षा नीति, तकनीकी शिक्षा तथा नैतिक मूल्यों पर आधारित शिक्षण व्यवस्था की आवश्यकता पर अपने विचार रखे। समारोह का संचालन एसोसिएशन की राष्ट्रीय कार्यालय सचिव फौजिया खान ने किया तथा उन्होंने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

समग्र रूप से यह समारोह केवल एक वर्षगांठ कार्यक्रम नहीं था, बल्कि निजी शिक्षा जगत के योगदान, संघर्ष और उपलब्धियों का एक भव्य उत्सव बनकर सामने आया। इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि शिक्षा के क्षेत्र में निजी विद्यालय समाज और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं तथा उनके सहयोग और सम्मान के बिना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का सपना अधूरा रहेगा।

आलोक कुमार

World : अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस

 अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस (International Day for Biological Diversity) 2026 की थीम "वैश्विक प्रभाव के लिए स्थानीय स्तर पर कार्य करना" (Acting locally for global impact) है।

22 मई वर्ष का एक ऐसा दिन है, जिसने इतिहास, विज्ञान, राजनीति, खेल, साहित्य और मानव सभ्यता के अनेक महत्वपूर्ण अध्यायों को अपने भीतर समेट रखा है। यह दिन केवल कैलेंडर की एक तारीख भर नहीं, बल्कि कई प्रेरणादायक घटनाओं, महान व्यक्तित्वों के जन्म तथा विश्व इतिहास में हुए परिवर्तनकारी निर्णयों का साक्षी रहा है। भारत सहित पूरी दुनिया में 22 मई को अनेक कारणों से याद किया जाता है।

अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस

22 मई का सबसे बड़ा वैश्विक महत्व “अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस” के रूप में है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा इस दिवस को मनाने का उद्देश्य पृथ्वी पर मौजूद जैव विविधता यानी पेड़-पौधों, जीव-जंतुओं, प्राकृतिक संसाधनों और पारिस्थितिक तंत्र के संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना है। लगातार बढ़ते प्रदूषण, जंगलों की कटाई और जलवायु परिवर्तन के कारण पृथ्वी की जैव विविधता खतरे में पड़ती जा रही है।

इस दिवस के माध्यम से लोगों को यह समझाने का प्रयास किया जाता है कि यदि प्रकृति सुरक्षित रहेगी तभी मानव जीवन भी सुरक्षित रह पाएगा। विद्यालयों, महाविद्यालयों और सामाजिक संस्थाओं द्वारा वृक्षारोपण, पर्यावरण जागरूकता अभियान और संगोष्ठियों का आयोजन किया जाता है। 


इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाएं

22 मई के दिन इतिहास में कई महत्वपूर्ण घटनाएं घटीं, जिन्होंने दुनिया की दिशा बदलने का काम किया।वर्ष 1772 में राजा राममोहन राय का जन्म हुआ था। उन्हें भारतीय पुनर्जागरण का जनक कहा जाता है। उन्होंने सती प्रथा के खिलाफ आवाज उठाई और समाज सुधार की दिशा में ऐतिहासिक कार्य किए।

राजा राममोहन राय


वर्ष 1843 में पहली बार बड़ी संख्या में लोगों ने वैगन ट्रेन के जरिए अमेरिका के पश्चिमी भाग की ओर यात्रा शुरू की थी, जिसे अमेरिकी इतिहास में महत्वपूर्ण माना जाता है।

वर्ष 1906 में प्रसिद्ध राइट बंधुओं ने अपने उड़ान यंत्र का पेटेंट प्राप्त किया। इससे आधुनिक विमानन युग की शुरुआत को नई गति मिली।

राइट बंधु

वर्ष 1960 में चिली में अब तक का सबसे शक्तिशाली भूकंप आया था। इसकी तीव्रता लगभग 9.5 मापी गई थी। इस विनाशकारी भूकंप ने हजारों लोगों की जान ले ली और दुनिया को प्राकृतिक आपदाओं के प्रति गंभीर सोचने पर मजबूर किया।

वर्ष 1990 में उत्तर और दक्षिण यमन का एकीकरण हुआ और आधुनिक यमन राष्ट्र अस्तित्व में आया।

यमन

भारत के संदर्भ में 22 मई

भारत के लिए भी यह दिन कई मायनों में विशेष रहा है। देश के सामाजिक और राजनीतिक इतिहास में इस तारीख का उल्लेख महत्वपूर्ण घटनाओं के साथ किया जाता है।

राजा राममोहन राय का जन्म 22 मई को होने के कारण यह दिन भारतीय समाज सुधार आंदोलन की याद भी दिलाता है। उन्होंने महिलाओं के अधिकार, शिक्षा और सामाजिक समानता के लिए उल्लेखनीय संघर्ष किया। अंग्रेजी शिक्षा के समर्थन तथा आधुनिक सोच को बढ़ावा देने में उनका योगदान अमूल्य माना जाता है।

इसके अलावा यह दिन भारतीय युवाओं को यह प्रेरणा देता है कि समाज में बदलाव शिक्षा, जागरूकता और साहस के माध्यम से संभव है।

विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में महत्व

22 मई विज्ञान जगत के लिए भी महत्वपूर्ण रहा है। राइट बंधुओं को विमान का पेटेंट मिलने के बाद दुनिया में हवाई यात्रा का नया युग प्रारंभ हुआ। आज पूरी दुनिया जिस आधुनिक एविएशन सिस्टम पर निर्भर है, उसकी बुनियाद इसी प्रकार के आविष्कारों से मजबूत हुई।

विज्ञान ने मानव जीवन को सरल और तेज बनाया, लेकिन इसके साथ पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी भी बढ़ी है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस का महत्व और अधिक बढ़ जाता है।

साहित्य और संस्कृति

22 मई को कई साहित्यकारों और कलाकारों की स्मृतियां भी जुड़ी हुई हैं। साहित्य समाज का दर्पण होता है और ऐसे दिवस हमें महान रचनाकारों के योगदान को याद करने का अवसर प्रदान करते हैं। भारत की सांस्कृतिक विरासत विविधताओं से भरी हुई है और यह दिन उस समृद्ध परंपरा को भी स्मरण कराने का अवसर देता है।

खेल जगत में महत्व

खेल इतिहास में भी 22 मई को कई उल्लेखनीय उपलब्धियां दर्ज हुई हैं। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं, रिकॉर्डोंऔर खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने इस दिन को खेल प्रेमियों के लिए खास बनाया है। खेल केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि अनुशासन, संघर्ष और टीम भावना का प्रतीक भी हैं।

पर्यावरण संरक्षण का संदेश

आज दुनिया ग्लोबल वार्मिंग, जल संकट और प्रदूषण जैसी समस्याओं से जूझ रही है। ऐसे समय में 22 मई कसंदेश और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। जैव विविधता केवल जंगलों या वन्य जीवों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन, कृषि, जलवायु और स्वास्थ्य से भी सीधे जुड़ी हुई है।

यदि पृथ्वी पर मौजूद जीव-जंतुओं और प्राकृतिक संसाधनों का संतुलन बिगड़ता है तो इसका असर पूरी मानवसभ्यता पर पड़ेगा। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी बनती है कि वह पर्यावरण संरक्षण में अपना योगदान दे।

युवाओं के लिए प्रेरणा

22 मई युवाओं को इतिहास से सीखने, विज्ञान को अपनाने और प्रकृति की रक्षा करने की प्रेरणा देता है। यह दिन बताता है कि समाज सुधार, वैज्ञानिक सोच और पर्यावरण संरक्षण मिलकर ही बेहतर भविष्य का निर्माण कर सकते हैं।

राजा राममोहन राय जैसे महान व्यक्तित्व यह सिखाते हैं कि एक व्यक्ति भी पूरे समाज में परिवर्तन ला सकता है। वहीं अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस हमें प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने का संदेश देता है।

निष्कर्ष

22 मई केवल एक तारीख नहीं, बल्कि इतिहास, पर्यावरण, विज्ञान और समाज सुधार का प्रतीक है। यह दिन हमें अतीत की महत्वपूर्ण घटनाओं को याद करने, महान व्यक्तित्वों से प्रेरणा लेने और प्रकृति के संरक्षण का संकल्प लेने का अवसर प्रदान करता है।

आज आवश्यकता इस बात की है कि हम विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखें। यदि मानवता को सुरक्षित भविष्य चाहिए, तो जैव विविधता की रक्षा और सामाजिक जागरूकता दोनों को समान महत्व देना होगा। 22 मई हमें यही अमूल्य संदेश देता है।

आलोक कुमार

Jharkhand : खूंटी में आखिर चल क्या रहा है?

खूंटी में आखिर चल क्या रहा है? अमन-चैन पर मंडराता खतरा खूंटी में एक के बाद एक सामने आ रही हिंसक घटनाएं और उनके विरोध में हो रहे प्रदर्शन कई ...