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Bihar : फादर सेराफिम जॉन लाल के परिवार पर दुखों का पहाड़

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  बेतिया धर्मप्रांत के बेतिया पल्ली क्षेत्र में इन दिनों शोक और संवेदना का वातावरण व्याप्त बेतिया धर्मप्रांत के बेतिया पल्ली क्षेत्र में इन दिनों शोक और संवेदना का वातावरण व्याप्त है। चर्च रोड स्थित सेंट मैरी स्कूल के निकट, डॉ. ओसवाल्ड आनंद के घर के सामने स्थित फादर सेराफिम जॉन लाल के पैतृक निवास पर लगातार लोगों का आना-जाना लगा हुआ है। परिवार के सदस्य, रिश्तेदार, मित्र और परिचित इस कठिन समय में परिवार को सांत्वना देने पहुंच रहे हैं। घर के वातावरण में गहरी उदासी और भावुकता स्पष्ट रूप से महसूस की जा सकती है। फादर सेराफिम जॉन लाल लंबे समय से धार्मिक, सामाजिक और आध्यात्मिक जीवन से जुड़े रहे हैं। उनके परिवार की पहचान न केवल बेतिया बल्कि व्यापक ईसाई समाज में भी सम्मान के साथ की जाती रही है। ऐसे प्रतिष्ठित परिवार पर जब दुखों का पहाड़ टूटता है तो स्वाभाविक रूप से पूरा समाज उसके साथ खड़ा दिखाई देता है। परिवार के सदस्य आयुष गौरव रोड्रिगेज ने भावुक स्वर में अपने संबंधों को याद करते हुए बताया कि फादर सेराफिम जॉन लाल उनके मामा हैं। उन्होंने परिवार की वंशावली का उल्लेख करते हुए बताया कि फादर के ...

India : विश्व टेस्ट चैंपियनशिप की डगर आसान नहीं

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 विश्व टेस्ट चैंपियनशिप की डगर आसान नहीं, नौ में से सात टेस्ट जीतना लगभग अनिवार्य भारतीय क्रिकेट टीम के सामने विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) के वर्तमान चक्र में एक बड़ी चुनौती खड़ी दिखाई दे रही है। यदि टीम को फाइनल की दौड़ में मजबूती से बने रहना है तो आने वाले नौ टेस्ट मैचों में कम-से-कम सात जीत दर्ज करनी होगी। कागज पर यह लक्ष्य जितना सरल दिखाई देता है, मैदान पर उतना ही कठिन है। क्रिकेट सिर्फ खिलाड़ियों के प्रदर्शन का खेल नहीं है, बल्कि इसमें परिस्थितियां, मौसम, फिटनेस, रणनीति और किस्मत भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। भारत को अपने आगामी कार्यक्रम में इंग्लैंड के खिलाफ पांच, श्रीलंका के खिलाफ दो और न्यूजीलैंड के खिलाफ दो टेस्ट मैच खेलने हैं। इन तीनों टीमों की अपनी अलग ताकत और शैली है। इसलिए भारतीय टीम के लिए प्रत्येक श्रृंखला एक अलग परीक्षा साबित होने वाली है। सबसे बड़ी चुनौती इंग्लैंड के खिलाफ पांच टेस्ट मैचों की श्रृंखला होगी। इंग्लैंड की धरती पर खेलना किसी भी एशियाई टीम के लिए आसान नहीं माना जाता। वहां की पिचों पर गेंद अधिक स्विंग और सीम करती है। बादलों से घिरे मौसम में बल्लेबाजों...

India : स्वतंत्रता सेनानी की बदलती परिभाषा और समाज का दायित्व

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  स्वतंत्रता सेनानी की बदलती परिभाषा और समाज का दायित्व भारत की स्वतंत्रता का इतिहास त्याग, बलिदान और संघर्ष की अमर गाथाओं से भरा हुआ है। देश की आजादी के लिए असंख्य लोगों ने अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। किसी ने जेल की यातनाएं सहीं, किसी ने अपनी संपत्ति गंवाई और अनेक वीरों ने अपने प्राणों का बलिदान तक दे दिया। ऐसे लोगों को स्वतंत्रता सेनानी के रूप में सम्मानित किया गया। आजादी के बाद भी समाज में स्वतंत्रता सेनानियों का विशेष स्थान बना रहा और उन्हें राष्ट्रनिर्माता के रूप में देखा गया। समय बीतने के साथ स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े अधिकांश वास्तविक सेनानी इस दुनिया से विदा हो गए। नई पीढ़ी के सामने यह प्रश्न खड़ा होने लगा कि आखिर स्वतंत्रता सेनानी की पहचान क्या है और किस आधार पर किसी व्यक्ति को यह सम्मान दिया जाना चाहिए। इसी प्रश्न ने कई बार सामाजिक और राजनीतिक बहसों को जन्म दिया है। कुछ वर्ष पूर्व राजधानी पटना से प्रकाशित होने वाली एक मासिक पत्रिका के लिए स्वतंत्रता सेनानियों पर लेख तैयार करने का अवसर मिला। विषय सरल नहीं था क्योंकि नौबतपुर सहित बिहार के अनेक क्षेत्रों में स्वतंत्रता आं...

Bihar : मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष

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बिहार सरकार ने इस योजना के तहत वार्षिक आय सीमा को ₹2.50 लाख से बढ़ाकर ₹4 लाख कर दिया है मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष बिहार सरकार की एक महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजना है, जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यम आय वर्ग के उन मरीजों को सहायता प्रदान करना है जो गंभीर एवं खर्चीली बीमारियों से पीड़ित हैं। हाल ही में बिहार सरकार ने इस योजना के तहत वार्षिक आय सीमा को ₹2.50 लाख से बढ़ाकर ₹4 लाख कर दिया है। इस निर्णय से राज्य के हजारों परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी, क्योंकि अब अधिक संख्या में लोग इस योजना का लाभ उठा सकेंगे। आज के समय में गंभीर बीमारियों का इलाज अत्यंत महंगा हो गया है। कई बार परिवार अपनी पूरी जमा-पूंजी खर्च करने के बाद भी मरीज का इलाज पूरा नहीं करा पाते हैं। ऐसी परिस्थितियों में मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष जरूरतमंद लोगों के लिए आशा की किरण बनकर सामने आता है। यह योजना मरीजों को आर्थिक सहायता देकर उनके इलाज का रास्ता आसान बनाती है।                                        ...

Bihar : पटना जेसुइट प्रोविंस के वरिष्ठ और सम्मानित जेसुइट पुरोहित फादर सेराफिम जॉन लाल का निधन

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  फादर सेराफिम जॉन लाल एस.जे. का निधन : पटना जेसुइट समाज में शोक की लहर पटना जेसुइट प्रोविंस के वरिष्ठ और सम्मानित जेसुइट पुरोहित फादर सेराफिम जॉन लाल एस.जे. का 4 जून 2026 को निधन हो गया। उनके निधन का समाचार मिलते ही जेसुइट समाज, कलीसिया तथा उनके परिचितों के बीच गहरा शोक व्याप्त हो गया। उन्होंने अपने जीवन के लगभग पाँच दशकों को ईश्वर, कलीसिया और समाज की सेवा के लिए समर्पित किया। उनका जीवन समर्पण, सादगी, अनुशासन और आध्यात्मिक निष्ठा का उत्कृष्ट उदाहरण था। फादर सेराफिम जॉन लाल का जन्म 29 मई 1957 को ऐतिहासिक नगरी बेतिया में हुआ था। बचपन से ही उनमें धार्मिक जीवन के प्रति विशेष आकर्षण था। इसी प्रेरणा के साथ उन्होंने 2 जुलाई 1978 को जेसुइट धर्मसंघ में प्रवेश किया। वर्षों की आध्यात्मिक और शैक्षणिक तैयारी के बाद उनका पुरोहिताभिषेक 27 दिसंबर 1992 को संपन्न हुआ। इसके पश्चात उन्होंने 22 अप्रैल 1996 को अंतिम जेसुइट मन्नत लेकर अपने जीवन को पूर्ण रूप से प्रभु और समाज की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। अपने 48 वर्षों के जेसुइट जीवन और 34 वर्षों के पुरोहितीय सेवाकाल में उन्होंने अनेक महत्वपूर्ण दायित्...