Bihar : एक चम्मच चीनी की बचत से आगे भी कुछ सवाल हैं: पत्रकारिता को मिठास नहीं, सच की जरूरत
एक चम्मच चीनी की बचत से आगे भी कुछ सवाल हैं: पत्रकारिता को मिठास नहीं, सच की जरूरत पटना। आज पत्रकारिता के सामने सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि चाय में एक चम्मच चीनी कम की जाए या ज्यादा। बचत जरूरी है, मितव्ययिता भी जरूरी है और संसाधनों का विवेकपूर्ण इस्तेमाल भी अपनी जगह महत्वपूर्ण है। लेकिन जब देश और समाज के सामने महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की बढ़ती लागत, युवाओं के भविष्य, शिक्षा, स्वास्थ्य और आम आदमी की घटती क्रय शक्ति जैसे गंभीर सवाल खड़े हों, तब पत्रकारिता का दायरा केवल व्यक्तिगत बचत की सलाह तक सीमित नहीं रह सकता। पत्रकार रूबिका लियाकत की ओर से एक चम्मच चीनी बचाने की बात कही गई है। इस सलाह को बचत के सामान्य संदेश के रूप में देखा जा सकता है। लेकिन पत्रकारिता के संदर्भ में इससे कहीं बड़ा प्रश्न खड़ा होता है— क्या मीडिया जनता की छोटी-छोटी बचत पर बात करने के साथ-साथ उन बड़ी नीतियों और व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठा रहा है, जिनका सीधा असर करोड़ों परिवारों की आय और खर्च पर पड़ता है? यही वह बिंदु है जहां पत्रकारिता की असली भूमिका सामने आती है। पत्रकारिता का मूल काम सवाल पूछना है पत्रकारिता ...