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India : चीनी का भाव बाजार तय करता है तो सरकार किस काम की?

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  महंगाई जब रसोई तक पहुंचती है तो उसके साथ जनता का सवाल भी पहुंचता है— सरकार आखिर किसलिए है? पेट्रोल-डीजल महंगा हो, सब्जियों के दाम बढ़ें, दाल की कीमतें आसमान छुएं या चीनी की मिठास जेब के लिए कड़वी हो जाए, आम आदमी की नजर सरकार की ओर ही जाती है। ऐसे में अगर जवाब मिले कि कीमतें बाजार तय करता है और सरकार की कोई भूमिका नहीं है, तो सवाल सिर्फ चीनी का नहीं, सरकार की जवाबदेही का बन जाता है। चीनी के बढ़ते दामों को लेकर भाजपा सांसद और प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी का कथित बयान इसी सवाल को जन्म देता है। यदि उनका तर्क यही है कि चीनी की कीमत बाजार तय करता है और सरकार की इसमें कोई भूमिका नहीं है, तो यह जवाब सिर्फ एक वस्तु की कीमत का नहीं, बल्कि शासन की आर्थिक जिम्मेदारी का सवाल भी बन जाता है। विडंबना देखिए। जब नागरिकों को प्रभावित करने वाली संस्थाओं और व्यवस्थाओं की बात आती है तो सत्ता पक्ष अक्सर मजबूत और निर्णायक सरकार की तस्वीर पेश करता है। लेकिन जैसे ही महंगाई का सवाल सामने आता है, जिम्मेदारी बाजार के सिर डाल दी जाती है। तब सवाल उठना स्वाभाविक है— सरकार का नियंत्रण जहां जरूरी है, वहां बाजार स...

Bihar : शहर में ऑटो और टेंपू किराए में वृद्धि कर दी गई

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        पटना में  बैटरी से चलने वाली हवा-हवाई टेंपू का भाड़ा, 'हवा-हवाई' का नया गणित: ईंधन बढ़े या न बढ़े, जेब ढीली होना तय है! "महंगाई का असर जब आम आदमी की जेब पर पड़ता है, तो वह केवल आंकड़ों का विषय नहीं रह जाता। वह रोजमर्रा की जिंदगी की हकीकत बन जाता है। लेकिन सवाल तब उठता है, जब बढ़ती लागत के नाम पर ऐसी वसूली शुरू हो जाए, जिसका वास्तविक खर्च से सीधा संबंध ही न हो।" बिहार की राजधानी पटना इन दिनों कुछ ऐसे ही सवालों से जूझ रही है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद शहर में ऑटो और टेंपू किराए में वृद्धि कर दी गई है। पहली नजर में यह फैसला सामान्य लग सकता है, क्योंकि ईंधन महंगा होने पर परिवहन लागत बढ़ना स्वाभाविक है। लेकिन बहस तब शुरू हुई जब सीएनजी और बैटरी से चलने वाले वाहनों ने भी लगभग उसी अनुपात में किराया बढ़ा दिया। अब यात्रियों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि किसी वाहन का संचालन पेट्रोल या डीजल पर निर्भर ही नहीं है, तो फिर ईंधन मूल्य वृद्धि का बोझ यात्रियों पर क्यों डाला जा रहा है? सुबह की शुरुआत अब किराए की बहस से पटना की सड़कों पर सुबह का दृश्य...