Chhattisgarh: प्यास पर पहरा: जब भेदभाव के बीच मानवता बनी उम्मीद की किरण
प्यास पर पहरा: जब भेदभाव के बीच मानवता बनी उम्मीद की किरण पानी को जीवन कहा जाता है। यह प्रकृति का ऐसा उपहार है, जिस पर हर व्यक्ति का समान अधिकार माना जाता है। लेकिन जब किसी समुदाय या परिवार को पानी जैसी बुनियादी आवश्यकता से भी वंचित कर दिया जाए, तो यह केवल एक सामाजिक समस्या नहीं रह जाती, बल्कि मानव गरिमा और मूल अधिकारों से जुड़ा गंभीर प्रश्न बन जाती है। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले से सामने आई एक घटना ने इसी मुद्दे को चर्चा के केंद्र में ला दिया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जिले के एक क्षेत्र में रहने वाले 14 ईसाई परिवारों के लगभग 70 लोगों को सामाजिक बहिष्कार और भेदभाव का सामना करना पड़ा। स्थिति ऐसी बताई गई कि उन्हें सार्वजनिक जल स्रोतों से पानी लेने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। पानी केवल एक संसाधन नहीं, बल्कि दैनिक जीवन की आधारभूत आवश्यकता है। पीने, भोजन बनाने, स्वच्छता बनाए रखने और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए इसकी जरूरत हर व्यक्ति को होती है। ऐसे में जब किसी परिवार की पानी तक पहुंच बाधित हो जाए, तो उसका असर जीवन के लगभग हर पहलू पर पड़ता है। इस प्रकार की परिस्थितियों का सबसे अधिक ...