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जून 2, 2026 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

World : हर वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है

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  विश्व पर्यावरण दिवस : धरती को बचाने का संकल्प हर वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। यह केवल एक औपचारिक दिवस नहीं, बल्कि मानव समाज को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का स्मरण कराने का अवसर है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा 1972 में स्टॉकहोम सम्मेलन के बाद इसकी शुरुआत की गई थी और 1973 से यह दिवस विश्व स्तर पर मनाया जाने लगा। इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक बनाना है। आज जब हम विकास और आधुनिकता की दौड़ में आगे बढ़ रहे हैं, तब पर्यावरणीय चुनौतियाँ भी तेजी से बढ़ रही हैं। बढ़ती जनसंख्या, औद्योगिकीकरण, शहरीकरण और प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन ने पृथ्वी के संतुलन को प्रभावित किया है। परिणामस्वरूप जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग, जल संकट, वायु प्रदूषण और जैव विविधता के ह्रास जैसी समस्याएँ सामने आ रही हैं। ऐसे समय में विश्व पर्यावरण दिवस का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। पर्यावरण केवल पेड़-पौधों तक सीमित नहीं है। इसमें हवा, पानी, मिट्टी, पर्वत, नदियाँ, जीव-जंतु और मनुष्य सहित सभी जैवि...

Kolkata: दिलीप एंथनी रोजारियो के निधन से उत्पन्न शून्य को भरना आसान नहीं

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  दिलीप एंथनी रोजारियो : एक समर्पित संगीतकार और चर्च सेवक को श्रद्धांजलि कोलकाता महाधर्मप्रांत (आर्चडायोसिस ऑफ कलकत्ता) के लिए 2 जून 2026 का दिन अत्यंत दुखद रहा। चर्च, संगीत और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले दिलीप एंथनी रोजारियो के निधन का समाचार मिलते ही शोक की लहर दौड़ गई। वे केवल एक प्रतिभाशाली संगीतकार ही नहीं थे, बल्कि एक समर्पित ले-विश्वासी (Lay Faithful) और चर्च के सक्रिय कार्यकर्ता भी थे। उनके निधन से चर्च समुदाय ने एक ऐसे व्यक्ति को खो दिया है जिसने अपना जीवन सेवा, संगीत और सुसमाचार के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित कर दिया था। दिलीप एंथनी रोजारियो का जन्म 17 जून 1962 को हुआ था। बचपन से ही उन्हें संगीत के प्रति विशेष लगाव था। उन्होंने अपनी प्रतिभा और मेहनत के बल पर चर्च संगीत के क्षेत्र में एक विशिष्ट पहचान बनाई। उनके नेतृत्व और योगदान से अनेक धार्मिक कार्यक्रमों तथा प्रार्थना सभाओं को नई ऊँचाइयाँ मिलीं। वे कोलकाता क्रिश्चियन कॉयर से भी जुड़े रहे और अपनी मधुर प्रस्तुति तथा संगीत निर्देशन के लिए व्यापक रूप से सम्मानित किए जाते थे। चर्च के प्रति उनकी न...

Bihar : बेतिया: उत्तर भारत में कैथोलिक मिशन का ऐतिहासिक केंद्र

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  बेतिया: उत्तर भारत में कैथोलिक मिशन का ऐतिहासिक केंद्र बिहार के पश्चिम चंपारण जिले में स्थित बेतिया केवल एक ऐतिहासिक नगर ही नहीं, बल्कि उत्तर भारत में कैथोलिक मिशनरी गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण केंद्र भी रहा है। बेतिया का धार्मिक, शैक्षणिक और सामाजिक इतिहास लगभग तीन शताब्दियों पुराना है। यहां स्थापित कैथोलिक मिशन ने शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। इस गौरवशाली इतिहास के केंद्र में एक महान मिशनरी पादरी फादर जोसेफ मेरी बिरिनी का नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित है। फादर जोसेफ मेरी बिरिनी (1709-1761) उत्तर भारत के पहले कैपुचिन मिशन, बेतिया मिशन, के संस्थापक थे। वे इटली से भारत आए और अपने ज्ञान, सेवा तथा समर्पण के कारण शीघ्र ही स्थानीय लोगों के बीच लोकप्रिय हो गए। वर्ष 1740 में उन्होंने बेतिया राज की महारानी की एक लंबी और गंभीर बीमारी को चमत्कारिक रूप से ठीक किया। इस घटना ने मिशन के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ाया और बेतिया राज परिवार के साथ कैथोलिक मिशन के संबंध और मजबूत हुए। फादर बिरिनी केवल धर्मप्रचारक ही नहीं, बल्कि एक विद्वान भाषाविद भी थे। उन्...

India : जब एंकर भी नेताओं की भाषा बोलने लगे

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  अंजना ओम कश्यप की भाषाई चूक और टीवी पत्रकारिता का बदलता स्वर भारतीय राजनीति में भाषाई चूक, अतिशयोक्ति और तंज लंबे समय से चर्चा का विषय रहे हैं। चुनावी मंचों पर नेता कई बार जल्दबाजी, भावनात्मक आवेश या राजनीतिक आक्रामकता में ऐसे शब्द बोल जाते हैं जो बाद में सोशल मीडिया पर मजाक और बहस का कारण बनते हैं। लेकिन अब ऐसा लगता है कि यह प्रवृत्ति केवल नेताओं तक सीमित नहीं रह गई है। टीवी चैनलों के एंकर और पत्रकार भी उसी शैली को अपनाते दिखाई दे रहे हैं। इसी संदर्भ में वरिष्ठ टीवी एंकर Anjana Om Kashyap का एक चर्चित भाषाई प्रसंग अक्सर चर्चा में आता है, जब उन्होंने लाइव बहस के दौरान मानक मुहावरे की जगह उसका अशुद्ध रूप बोल दिया। एक टीवी डिबेट के दौरान विपक्षी नेता पर टिप्पणी करते हुए अंजना ओम कश्यप ने “कौड़ी न जानना” की जगह “जानना न कौढ़ी” कह दिया। यह सुनते ही सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। लोगों ने इस कथन के वीडियो क्लिप साझा किए और भाषा प्रेमियों ने इसे हिंदी मुहावरों की अशुद्ध प्रस्तुति का उदाहरण बताया। कुछ लोगों ने इसे सामान्य मानवीय भूल कहा, जबकि कुछ ने इसे टीवी पत्रकारिता की ग...