30 जनवरी को देश ने महात्मा गांधी की पुण्यतिथि मनाई.लेकिन सवाल यह है कि क्या गांधी केवल स्मृति बनकर रह गए हैं,या उनके विचार आज भी हमारी ज़िंदगी और राजनीति में जगह रखते हैं?महात्मा गांधी ने जिस भारत की कल्पना की थी,उसकी नींव सत्य, अहिंसा और नैतिक साहस पर टिकी थी.
आज जब समाज में असहिष्णुता, अविश्वास और टकराव बढ़ता दिख रहा है,गांधी का रास्ता पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक लगता है.अहिंसा केवल संघर्ष से दूर रहने का नाम नहीं है, यह अन्याय के सामने डटकर खड़े होने की शक्ति है —बिना नफरत के, बिना हिंसा के.
आज की पीढ़ी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वह गांधी को तस्वीरों और भाषणों तक सीमित न रखे, बल्कि उनके मूल्यों को व्यवहार में उतारे.गांधी का संदेश साफ़ था—साधन और साध्य, दोनों पवित्र होने चाहिए.यही विचार आज भी एक बेहतर समाज की राह दिखा सकता है.
आलोक कुमार
