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भारत का लोकतंत्र अपनी विविधता और बहुलता पर गर्व

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  *धर्मांतरण-विरोधी कानून और लोकतंत्र की चुनौती * धर्म की स्वतंत्रता पर पहरा, लोकतंत्र की आत्मा पर हमला है मैंगलोर,( आलोक कुमार ).भारत का लोकतंत्र अपनी विविधता और बहुलता पर गर्व करता है. परंतु विडंबना यह है कि जिन मूल्यों पर यह लोकतंत्र खड़ा है, उन्हीं को आज धर्मांतरण-विरोधी कानूनों के नाम पर चोट पहुंचाई जा रही है.वर्तमान में 12 राज्यों में लागू ये कानून सिर्फ़ कानूनी प्रावधान नहीं हैं, बल्कि भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त आस्था, विवेक और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला हैं. धर्म की स्वतंत्रता पर पहरा, लोकतंत्र की आत्मा पर हमला है ऑल इंडिया काथलिक यूनियन (एआईसीयू) की आम सभा ने इन कानूनों को "भारतीय लोकतंत्र पर घाव" करार दिया है. यह संगठन 106 वर्षों की विरासत के साथ देशभर के काथलिकों की सबसे बड़ी आवाज़ है. मैंगलोर में आयोजित बैठक में स्पष्ट कहा गया कि ये कानून न केवल स्वतंत्रता को सीमित करते हैं बल्कि धार्मिक अल्पसंख्यकों — विशेषकर ईसाई, मुस्लिम, दलित और आदिवासी समुदायों — को अपराधी ठहराने का औजार बन गए हैं. आस्था का चुनाव अदालत का नहीं, अंतरात्मा का विषय है ध्यान देने यो...