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India : संसद की गरिमा और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी

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  "संसद शब्दों का रणक्षेत्र नहीं, लोकतंत्र का मंदिर है। यहां विचारों की गरिमा जितनी ऊंची होगी, लोकतंत्र उतना ही मजबूत होगा।"संसद में बढ़ती व्यक्तिगत बयानबाजी, ऐतिहासिक नेताओं पर टिप्पणियां और जनहित के मुद्दों से भटकती राजनीति पर आधारित यह संपादकीय लोकतांत्रिक मर्यादा और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी का विश्लेषण करता है। लोकतंत्र में संसद केवल कानून बनाने की संस्था नहीं है, बल्कि यह देश की लोकतांत्रिक चेतना, संवाद और जवाबदेही का सर्वोच्च मंच भी है। यहां होने वाली हर बहस, हर टिप्पणी और हर निर्णय देश के करोड़ों नागरिकों के विश्वास से जुड़ा होता है। इसलिए संसद में प्रयुक्त भाषा, व्यवहार और तर्क केवल राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि वे लोकतांत्रिक संस्कृति की दिशा भी तय करते हैं। संसद शब्दों का रणक्षेत्र नहीं, बल्कि विचारों का ऐसा मंच है जहां मतभेदों के बीच भी मर्यादा और सम्मान बनाए रखना आवश्यक है। हाल के वर्षों में संसद के भीतर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप पहले की तुलना में अधिक तीखे हुए हैं। कई बार ऐसा देखने को मिलता है कि बहस का केंद्र जनहित के मुद्दों से हटकर व्यक्तिगत टिप्प...

India :विदेशी फंड पाने वाले NGOs पर सरकार की कड़ी निगरानी की तैयारी

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विदेशी फंड पर सरकार की सबसे बड़ी सर्जिकल निगरानी! FCRA में प्रस्तावित नए बदलाव क्या NGOs की पारदर्शिता बढ़ाएंगे या उनकी स्वतंत्रता पर नए सवाल खड़े करेंगे? संसद में पेश होने वाला संशोधन विधेयक इसी बहस का केंद्र बनने जा रहा है। नई दिल्ली। केंद्र सरकार विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) में व्यापक संशोधन करने की तैयारी में है। प्रस्तावित विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक सोमवार को लोकसभा में पेश किया जा सकता है। सरकार का दावा है कि इस विधेयक का उद्देश्य विदेशी फंड प्राप्त करने वाले गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाना, जवाबदेही बढ़ाना और विदेशी धन के उपयोग पर प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करना है। वहीं, नागरिक समाज के कई संगठनों का मानना है कि नए प्रावधानों से स्वैच्छिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और सामाजिक कार्यों पर अतिरिक्त प्रशासनिक दबाव बढ़ सकता है। भारत में हजारों गैर-सरकारी संगठन शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, बाल अधिकार, पर्यावरण संरक्षण, आपदा राहत और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में कार्य करते हैं। इनमें से अनेक संस्थाएं विदेशी दान या अनुदान के मा...