शनिवार, 2 अप्रैल 2022

ईसा मसीह के खिलाफ षड्यंत्र रच कर उन्हें सूली पर लटकाया गया

पटना.इस साल 15 अप्रैल को गुड फ्राइडे है.इन दिनों ईसाई समाज 40 दिनों का उपवास रखते हैं.ईसाई धर्म में आस्था रखने वालों के लिए भी गुड फ्राइडे का दिन बहुत अहम है.बाइबल के अनुसार, इसी दिन ईसाई धर्म के प्रभु ईसा मसीह के खिलाफ षड्यंत्र रच कर उन्हें सूली पर लटकाया गया था. इस वर्ष गुड फ्राइडे 15 अप्रैल को मनाया जाएगा.दरअसल, गुड फ्राइडे के साथ ईसाई धर्म के लोगों के लिए पाम संडे और ईस्टर डे भी महत्वपूर्ण माना जाता है.

इस साल पाम संडे 10 अप्रैल को है.वहीं गुड फ्राइडे 15 अप्रैल को है और ईस्टर संडे 17 अप्रैल को है.बाइबल, यूहन्ना 18 और 19 में इन तीन दिनों में जो घटना घटी थी उसका उल्लेख किया गया है. बाइबल के अनुसार, पाम संडे पर ईसाई धर्म के प्रभु ईसा मसीह यरूशलेम पहुंचे थे जहां लोगों ने उनका स्वागत खजूर की डालियों को बिछाकर किया था, इस घटना के वजह से इस दिन को पाम संडे का नाम दिया गया है. जब वह  यरूशलेम यानी इजरायल की राजधानी  यरूशलेम  पहुंचे थे तब उन्हें सूली पर लटकाया गया था. जिस दिन उनकी मृत्यु हुई थी उस दिन को गुड फ्राइडे के नाम से जाना जाता है. आप यह जानकर हैरान रह जाएंगे की, ठीक 3 दिन बाद यानी रविवार के दिन मेरी मेग्दलीन नाम की एक महिला ने ईसा मसीह को उनके कब्र के पास देखा था. यह चमत्कारी घटना जिस दिन हुई थी उसे ईस्टर संडे कहा गया.

आज भी इजराइल की राजधानी जेरूसलम में वह जगह मौजूद है जहां ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था. यह जगह गोलगोथा के नाम से पूरे विश्व में मशहूर है. जिस जगह गोलगोथा मौजूद है वह हिल ऑफ द केलवेरी के नाम से जाना जाता है. इसी जगह पर चर्च ऑफ फ्लेजिलेशन स्थित है जहां सार्वजनिक रूप से ईसाई धर्म के प्रभु ईसा मसीह की निंदा की गई थी. मान्यताओं के अनुसार, चर्च ऑफ फ्लेजिलेशन के मार्ग को दर्द या पीड़ा का मार्ग कहा जाता है. इस स्थान पर नौ और ऐतिहासिक स्थल स्थित है.

पटना महाधर्मप्रांत के प्रेरितों की रानी कैथेडल में मिस्सा पूजा में शामिल होने वाले भक्तगण प्रभु येसु ख्रीस्त की दुःखभरी यात्रा को एक झांकी के रूप में दर्शाकर प्रार्थना करते हैं.हरेक वर्ष की भाँति इस वर्ष भी गुड फ्राइडे को प्रभु येसु ख्रीस्त की दुःखमयी घटना को एक झांकी के रूप में प्रस्तुत करने का निर्णय लिया था.दिनांक 15 अप्रैल ( गुड़ फ्राइडे) के पुण्य बेला में सुबह सात बजे से लोयला हाई स्कूल, कुर्जी से प्रारम्भ होकर कुर्जी के मुख्य सड़क से होते हुए प्रभु ईसा की दुःखमयी यात्रा को एक झांकी के रूप में दर्शाते हुए, प्रार्थना और भक्ति गीतों के साथ कुर्जी चर्च में जाकर एक विशेष प्रार्थना के साथ संपन्न होगी.

यह बताया गया कि यह कलीसिया का काम है जो लोकधर्मियो द्वारा आयोजित किया जा रहा है. निवेदक विक्टर फ्रांसिस का नम्र निवेदन है कि इस धार्मिक कार्य में आप अपने स्तर से सहयोग करें ताकि इसे हम एक साथ मिलकर और भी भक्तिमय और दूसरों के लिए प्रेरणादायक बना सकें.आज दिनांक 2 अप्रैल को और कल दिनांक 3 अप्रैल को संध्या 4 बजे से इसके रिहर्सल में उपस्थित होकर अपना योगदान देने की कृपा करें.आशा करता हूं कि आप अपनी भागदौड़ की जिंदगी में से कुछ समय इस पुण्य कार्य के लिए अवश्य निकलने की कोशिश करेंगे.

आलोक कुमार

बक्सर धर्मप्रांत में 29 जून 2018 से बिशप नहीं

पटना.कैथोलिक धर्मप्रांत में इलाहाबाद धर्मप्रांत विश्व का सबसे बड़ा धर्मप्रांत था.इसमें कोलकाता, पटना, जबलपुर, इंदौर, लखनऊ, झांसी और गोरखपुर आते थे. 1887 में कोलकाता धर्मप्रांत, पटना धर्मप्रांत 1919 में, 1932 में जबलपुर धर्मप्रांत, 1935 में इंदौर धर्मप्रांत, 1940 में लखनऊ धर्मप्रांत व 1946 में गोरखपुर इलाहाबाद धर्मप्रांत से अलग हुए.

1845 मे हुगली दो विकारिएट में विभाजित हुआ. एक भाग चटगांव विकारिएट और दूसरा कोलकाता विकारिएट जो पूर्वी बंगाल और पश्चिम बंगाल के नाम से जाने जाते थे. पश्चिम बंगाल को 1864 में बेल्जियम जेसुइट पुरोहितों के हाथों सौंपा गया.वह महाधर्मप्रांत के अस्तित्व में आया. मिशनरियों ने 1865 में मिदनापुर, बालासेार, 1868 में 24 परगना, 1869 में चाईबासा और 1870 में छोटानागपुर क्षेत्र में विकास का काम किया.

रोम 1812 में एक विकारिएट में तिब्बत-हिंदुस्तान के प्रान्त बनवाया. 1827 एक स्वतंत्र पटना विकारिएट बनाया गया था.जिसमें बेतिया , चुहड़ी , पटना सिटी , दानापुर , भागलपुर , दार्जिलिंग , सिक्किम , नेपाल तथा निकटवर्ती प्रदेशों. संत अनास्तासियस हार्टमैन को इसका पहला विकार अपोस्टोलिक नियुक्त किया गया था. पोप लियो एक्सटीटीआई के एक डिक्री के साथ पटना विकारिएट 1886 में इलाहाबाद धर्मप्रांत का हिस्सा बन गया.बेतिया, चुहड़ी , चखनी और लातौना के अपने चार स्टेशनों के साथ उत्तर बिहार मिशन को 1886 में टायरोलिस कैपुचिन्स को सौंपा गया था. मई 1892 में उत्तर बिहार मिशन बेतिया - नेपाल प्रीफेक्चर बनाया गया था, जिसका पहला प्रीफेक्ट अबतेई के फादर हिलारियन, ऑफम कैप था. 1919 में इस प्रान्त को भंग कर दिया गया और पटना के वर्तमान धर्मप्रांत के रूप में दक्षिण बिहार में शामिल हो गया.

पोप बेनेडिक्ट 15 वें ने 10 सितंबर 1919 को एक डिक्री द्वारा इलाहाबाद के धर्मप्रांत को दो में विभाजित किया. इस प्रकार पटना का धर्मप्रांत बनाया गया था. बेतिया-नेपाल के प्रीफेक्चर को नए धर्मप्रांत के साथ जोड़ा गया था. परमधर्मपीठ ने पटना धर्मप्रांत को सोसाइटी ऑफ जीसस के अमेरिकी मिसौरी प्रांत को सौंपा. बाद में, 13 नवंबर 1930 को, मिसौरी प्रांत के विभाजन के बाद, पटना धर्मप्रांत को सोसाइटी ऑफ जीसस के शिकागो प्रांत को सौंपा गया था. बेल्जियम के जेसुइट लुइस वैन होएक को 20 जुलाई 1920-15 फरवरी 1928 पटना का पहला बिशप नियुक्त किया गया था. 6 मार्च 1921 में विधिवत फादर लुइस वानहुक को पटना धर्मप्रांत के प्रथम  धर्माध्यक्ष के रूप में अभिषिक्त किया गया.

आपको मालूम है कि इलाहाबाद धर्मप्रांत से अलग होकर बना है पटना धर्मप्रांत. जी हां, संत पिता बेनेडिक्ट 15 वें के कार्यकाल में 10 सितम्बर 1919 को इलाहाबाद धर्मप्रांत से अलग करके पटना धर्मप्रांत की स्थापना की गयी थी.इसके 2 साल के बाद पटना धर्मप्रांत को प्रथम धर्माध्यक्ष मिला.प्रथम धर्माध्यक्ष बनने का श्रेय फादर लुइस वानहुक को प्राप्त हुआ. 6 मार्च 1921 में विधिवत फादर लुइस वानहुक को पटना धर्मप्रांत के प्रथम  धर्माध्यक्ष के रूप में अभिषिक्त किया गया.

बिशप लुई वैन होएक , एसजे (6 मार्च 1921 - 15 फरवरी 1928),बिशप बर्नार्ड जेम्स सुलिवन , एसजे (15 जनवरी 1929 - 6 जून 1946),बिशप ऑगस्टीन फ्रांसिस वाइल्डरमुथ , एसजे (12 जून 1947 - 6 मार्च 1980),बिशप बेनेडिक्ट जॉन ओस्टा, एसजे (76) (बाद में आर्चबिशप ) (6 मार्च 1980 - 16 मार्च 1999),बिशप विलियम डिसूजा( बाद में आर्चबिशप ) (12 दिसंबर 2005 -ं9 दिसंबर 2020) और अब सेबस्टियन कल्लूपुरा ( बाद में आर्चबिशप) April 3, 2009....)                                

पटना धर्मप्रांत को विभक्त कर मुजफ्फरपुर धर्मप्रांत बनाया. मुजफ्फरपुर धर्मप्रांत को विभक्त कर बेतिया धर्मप्रांत बनाया. पटना महाधर्मप्रांत को विभक्त कर बक्सर धर्मप्रांत बनाया.  जून 29, 2018 से बिशप नहीं हैं. अभी सेवानिवृत आर्चबिशप विलियम डिसूजा को प्रेरितिक प्रशासक बनाकर काम निकाला जा रहा है.

                                                                                                                                                                      आलोक कुमार

शुक्रवार, 1 अप्रैल 2022

इसमें 26 फस्ट और 10 सेकेड डिवीजन में सफलता हासिल

 


बेतिया. पश्चिमी चम्पारण जिले में है बेतिया.यहां पर संत जेवियर बालिका शिक्षण संस्थान संचालित है.यहां कई वर्षों से मैट्रिक परीक्षा में शतप्रतिशत परिणाम बच्चे लाते हैं.इस साल भी मैट्रिक परीक्षा- 2022 में 36 छात्राएं शामिल हुई थी. इसमें 26 फस्ट और 10 सेकेड डिवीजन में सफलता हासिल की हैं.इनलोगों को ढेर सारी शुभकामनाएं और बधाइयां. इसके साथ संस्थान परिवार की ओर से सभी शिक्षक वृंद और विद्यार्थियों को उज्जवल भविष्य की कामना.

आलोक कुमार

बिहार बोर्ड दसवीं की परीक्षा में बाढ़ अनुमंडल में सबसे पहले स्थान पर स्नेहा रानी

 


पटना. पटना जिले में है बाढ़ प्रखंड. पटना महाधर्मप्रांतीय पुरोहितों के द्वारा बाढ़ पल्ली संचालित है.यहां पर बाढ़ संत जोसेफ कान्वेंट  गर्ल्स हाई स्कूल प्लस टू के 294 छात्राओं ने मैट्रिक परीक्षा में उपस्थिति दर्ज कराई थी. जिसमें से 251 छात्राएं प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुई वहीं 43 छात्राएं द्वितीय श्रेणी से उत्तीर्ण हुई. इसी विद्यालय की छात्रा स्नेहा रानी  ने 500 अंक में 464 अंक लाकर अपने बाढ़ अनुमंडल एवं स्कूल का नाम गौरवान्वित किया है.

वहीं द्वितीय श्रेणी में रश्मि सिंह 456 अंक, कृतिका कुमारी 454 अंक, संस्कृति सिन्हा 453 राजनंदनी वर्मा 451 तमन्ना कुमारी 450 नोसबा प्रवीण 449 अंजली कुमारी 448 वर्षा रानी 448 संजना कुमारी 448 विद्यालय टॉप टेन में अपना नाम दर्ज कराई. छात्राओं से वार्तालाप करने के बाद वह अपने मंतव्य को व्यक्त करते हुए बता रही है कि कोविड-काल में पढ़ाई एक चुनौती बन चुकी थी. घर में स्मार्टफोन नहीं होने कारण ऑनलाइन क्लास करना एक मध्यम परिवार के बच्चे के लिए काफी मुश्किल था उस स्थिति में उनके अभिभावक ने अपने बच्चों के लिए स्मार्टफोन की व्यवस्था की और पढ़ाई में होने में बाधा को दूर किया. इसलिए बच्चे सबसे पहले परीक्षा में उत्तीर्ण हुए. तो इनका श्रेय अपने माता-पिता और अपने विद्यालय और वहां के शिक्षकों को दिया है.क्योंकि विद्यालय के शिक्षकों की कड़ी मेहनत से ही आज छात्राएं इस उपलब्धि को पा चुकी हैं. विद्यालय के सचिव फादर एंड्रयू थम्बी, प्राचार्य सिस्टर दीपिका एवं पूरा विद्यालय परिवार इन बच्चों की उज्जवल भविष्य की मंगल कामना करता है. ताकि छात्राएं अपने उज्जवल भविष्य की ओर निरंतर बढ़ते रहें एवं आसमान की बुलंदियों को छू सके.

संत जोसेफ कॉन्वेंट गर्ल्स हाई स्कूल प्लस टू के सचिव फादर एंड्रयू थम्मी

शिक्षा मनुष्य के जीवन में सर्वांगीण विकास का आधार होता है. किसी भी स्थान की जनता के सम्पूर्ण विकास में शिक्षा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.इसी शिक्षा को बिहार की धरा बाढ़ में फैलाने के लिए फादर संटाग के नेतृत्व में बाढ़ पैरिश सोसाईटी द्वारा 1943 ई0 में संत जोसेफ विद्यालय की स्थापना की गई. फादर ने बाढ़ मिशन के लिए भूमि खरीदी तथा विद्यालय बनवाने का कार्य शुरू किया. विद्यालय के प्रारंभिक विकास के क्रम में गरीब एवं परित्यक्त जनता के उत्थान के लिए पवित्र हृदय-धर्म-संघ की धर्म बहनें बाढ़ भेजी गयी. पठन-पाठन के समुचित प्रबंधन के लिए कान्वेंट का निर्माण किया गया.हमारी सिस्टरों द्वारा संचालित विद्यालय की पढ़ाई सुचारू रूप से चलाती हैं और अवकाश के समय में वे बालिकाओं को सिलाई एवं बागवानी का ज्ञान भी दिया जाता है.विद्यालय की स्थापना के प्रारंभिक दिनों में यहाँ मध्य विद्यालय स्तर तक की पढ़ाई होती है.अब माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक स्तर तक की पढ़ाई होती है.बिहार सरकार के द्वारा विद्यालय को माध्यमिक एवं उच्च स्तर (2) तक की मान्यता प्राप्त है.

आलोक कुमार

गुरुवार, 31 मार्च 2022

ईसाई समुदाय के दुखभोग अंतिम चरण में

                                                    * दुखभोग का पांचवां रविवार 3 अप्रैल को

पटना. ईसाई समुदाय के दुखभोग अंतिम चरण में पहुंचने लगा है.दुखभोग का पांचवां रविवार 3 अप्रैल को है.जानकारी के अनुसार संत पापा फ्रांसिस के धर्मविधिक अनुष्ठानों के संचालक मोनसिन्योर डियेगो रावेल्ली ने 31 मार्च को एक सूचना जारी करते हुए कहा है कि पुण्य सप्ताह में संत पापा फ्राँसिस के धर्मविधिक अनुष्ठानों का कार्यक्रम प्रकाशित कर दिया गया है.जो इस प्रकार से कार्यक्रम है-

10 अप्रैल 2022- खजूर रविवार एवं प्रभु का दुःखभोग

संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में पूर्वाहन 10.00 बजे संत पापा फ्राँसिस खजूर रविवार का समारोही जूलूस एवं ख्रीस्तयाग अर्पित करेंगे.

14 अप्रैल 2022 - पुण्य बृहस्पतिवार

प्रातः 9.30 बजे संत पेत्रुस महागिरजाघर में क्रिज्मा मिस्सा होगा, जिसमें संत पापा कार्डिनलों, महाधर्माध्यक्षो और पुरोहितों (रोम के धर्मप्रांतीय एवं धर्मसमाजी) के साथ ख्रीस्तयाग अर्पित करेंगे.

15 अप्रैल 2022 - पुण्य शुक्रवार

संत पेत्रुस महागिरजाघर में शाम 5.00 बजे पवित्र क्रूस उपासना की धर्मविधि का नेतृत्व करेंगे. शाम 9.15 में रोम के ऐतिहासिक स्थल कोलोसेयो में में क्रूस रास्ता का संचालन करेंगे.

16-17 अप्रैल 2022 - पास्का जागरण एवं पास्का रविवार

16 अप्रैल को शाम 7.30 बजे संत पेत्रुस महागिरजाघर में पास्का जागरण मिस्सा सम्पन्न किया जाएगा.  

17 अप्रैल को सुबह 10 बजे संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में पास्का महापर्व का समारोही मिस्सा का अनुष्ठान करेंगे.


आलोक कुमार


बुधवार, 30 मार्च 2022

‘मुसीबत‘ नामक गीत तथा प्रार्थना का भक्तिमय कार्यक्रम

 पटना. आज (30 मार्च 2022) एस. के. लॉरेंस के नेतृत्व में भक्त जनों के साथ, रोमा जॉर्ज के आग्रह पर विन्सेंट लुइस के निवास स्थान बालुपर  शाम 06.30 बजे प्रभु येसु के दुरूखभोग (प्राणदंड की आज्ञा से लेकर सूली पर चढ़ाए जाने तक की कष्टमय यात्रा) से सम्बन्धित ‘मुसीबत‘ नामक गीत तथा प्रार्थना का भक्तिमय कार्यक्रम है.


आलोक कुमार

मंगलवार, 29 मार्च 2022

संत पापा फ्राँसिस द्वारा दान की गई एक एम्बुलेंस

 रोम.संत पापा फ्रांसिस ने कार्डिनल कोनराड क्रेजेवस्की को एक बार फिर भेजा है जीवन रक्षक सहायता के साथ.वे लोगों की सहायता करने के लिए यूक्रेन गये, इस बार संत पापा फ्राँसिस द्वारा दान की गई एक एम्बुलेंस साथ लेकर यूक्रेन के लवीव शहर पहुँचे. प्रस्थान करने से पहले शनिवार की सुबह संत पापा फ्राँसिस ने एम्बुलेंस को आशीष दिया. कार्डिनल क्रेजेवस्की शनिवार सुबह फातिमा मरिया तीर्थालय से रोम लौटे, जहां शुक्रवार शाम को उन्होंने माता मरियम के निष्कलंक हृदय को सारी मानवता को, विशेष रूप से रूस और यूक्रेन के लोगों को समर्पित करने की धर्मविधि की अध्यक्षता की. शनिवार को पत्रकारों को बताया कि कार्डिनल, जो संत पापा की ओर से परमधर्मपीठीय कोष के दानदाता हैं, यूक्रेन के लवीव शहर की यात्रा कर रहे हैं.संत पापा फ्राँसिस द्वारा आशीष किये गये एम्बुलेंस को शहर के अधिकारियों को दिया जाएगा, जो इसे सबसे ज्यादा जरूरत वाले क्षेत्रों की सेवा में लगाएंगे. दान की गई एम्बुलेंस आबादी के लिए मदद का एक ठोस संकेत है, जिसकी संख्या कई आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों के आने के कारण बहुत बढ़ गई है.

इधर बिहार की राजधानी पटना में सामाजिक कार्यकर्ता पप्पू राय ने एक एम्बुलेंस को उपहार में कैथोलिक चर्च कुर्जी को दिया है.जो यहां के लोगों के लिए जरूरी था.

आलोक कुमार





सोमवार, 28 मार्च 2022

आज स्टेला साह की दूसरी पुण्यतिथि

   


 पटना.आज स्टेला साह की दूसरी पुण्यतिथि है.इस अवसर पर पुत्र राजन क्लेमेंट साह ने कब्रिस्तान में जाकर मोमबत्ती और अगरबत्ती जलाएं.वहींं सर्वेश्रर से प्रार्थना की मेरी मां के साथ सभी मृत आत्मा को शांति प्रदान करें.

कौन हैं स्टेला साह?

कुर्जी होली फैमिली हॉस्पिटल में सर्विस करने वाले इग्नासियुस फिदेलिश उर्फ अनिल साह की धर्मपत्नी थीं.इसी हॉस्पिटल में कार्यरत थे सिसिल साह की मां थीं.राजन क्लेमेंट साह नेताजी की मां थीं.वे हार्टमन बालिका उच्च विघालय की टीचर थीं.पटना धर्मप्रांतीय महिला संघ की प्रथम अध्यक्ष थी.जदयू की कार्यकर्ता भी थी.पश्चिमी मैनपुरा ग्राम पंचायत की मुखिया प्रत्याशी थीं.कुर्जी पल्ली में संचालित बाबा ग्रेगरी सिलाई-कटाई केंद्र की संस्थापिका संचालिका थीं.बिशप से लेकर आम व्यक्तियों के बीच पहचान रखने वाली संम्रांत महिला थीं.

माँ आज भी है, 

मेरे संस्कार में, मेरे आधार में.

माँ का शरीर विलय हुआ है पंचतत्व में, 

पर माँ आज भी मौजूद है मेरे हर महत्व में.

माँ की दूसरी पुण्यतिथि पर मेरा सादर प्रणाम..!

आलोक कुमार

मधु और विनोद के वैवाहिक जीवन के 33 साल

 

बेतिया. पश्चिम चम्पारण जिले के बेतिया क्रिश्चियन काॅलोनी में विनोद रफायल और मधु देवी रहते हैं.दोनों के वैवाहिक बंधन में बंधे 33 साल हो गया है.बेतिया नगर परिषद के वार्ड नम्बर- वार्ड नंबर 21 की वार्ड पार्षद मधु देवी हैं. वहीं वार्ड नम्बर-21 की वार्ड पार्षद मधु देवी वार्ड पार्षद पति विनोद रफायल हैं.दोनों के वैवाहिक जीवन शानदार रहा.सामाजिक दायित्व बेहतर ढंग से निभाने के कारण वार्ड नम्बर-21 से मधु देवी लगातार दो बार विजयी घोषित हुई हैं. इस बार तीसरी बार मैदान में उतरने वाली है. मालूम हो कि बेतिया नगर परिषद को बेतिया नगर निगम बना दिया गया है. बेतियावासी खासकर वार्ड के लोग वार्ड पार्षद मधु देवी को शादी के 33 सालगिरह का उपहार बेतिया नगर परिषद के वार्ड पार्षद बनाकर देंगे.33 साल का उत्साव मनाने वाले मधु देवी और विनोद रफायल ने सारे अनुपमाओं के लिए ईश्वर को धन्यवाद दिये हैं. 

आलोक कुमार

रविवार, 27 मार्च 2022

शातिर युद्ध के सामने असहाय मानव

 


संत पापा फ्रांसिस ने खेद प्रकट किया कि यूक्रेन में शातिर युद्ध ने बहुतों को मारा और भारी पीड़ा उत्पन्न की है.उन्होंने कहा, ‘इन दिनों, मौत की खबरें एवं दृश्य हमारे घरों में मिलना जारी हैं, यहाँ तक कि यूक्रेन के हमारे बहुत सारे असहाय भाइयों एवं बहनों के घर बमों द्वारा ध्वस्त किये जा रहे हैं.‘संत पापा ने कहा, ‘युद्ध हमारी लाचारी और हमारी अपर्याप्तता की याद दिलाती है, साथ ही साथ, ईश्वर के निकट आने की आवश्यकता एवं उनकी क्षमाशीलता की निश्चितता को दर्शाता है‘सिर्फ ईश्वर बुराई को दूर, नाराजगी को वश में एवं हमारे हृदयों में शांति बहाल कर सकते हैं.

संत पापा ने याद किया कि ईश्वर ने कुँवारी मरियम को चुना ताकि मुक्ति और शांति की नई कहानी से इतिहास बदले. ‘यदि हम दुनिया बदलना चाहते हैं तो सबसे पहले अपना हृदय बदलना होगा.‘ संत पापा ने स्वर्गदूत के कुँवारी मरियम के संदेश पर चिंतन की, जिसमें ईश्वर उन्हें ईश्वर के पुत्र की माता होने का निमंत्रण देते हैं.‘प्रभु आपके साथ हैं‘कहकर गाब्रिएल दूत ने कुँवारी मरियम को आनन्द का सच्चा समाचार दिया.

संत पापा ने कहा कि मेल-मिलाप संस्कार में ख्रीस्तीय भी यही अनुभव करते हैं चूँकि ईश्वर हमारे निकट आते जब हम दीनता पूर्वक अपने पश्चातापी हृदय उनके सामने रखते हैं.पापस्वीकार एक आनन्द का संस्कार है, प्रभु हमारे घरों में प्रवेश करते हैं जैसा कि उन्होंने नाजरेथ की मरियम के घर में प्रवेश किया था तथा हमारे लिए अनापेक्षित आश्चर्य एवं आनन्द लाते हैं.

संत पापा ने पुरोहितों से भी अपील की कि वे पापस्वीकार संस्कार में ईश्वर की क्षमाशीलता व्यक्त करें और अपनी कठोरता एवं निष्ठुरता कभी न दिखायें.

उन्होंने कहा, ‘यदि एक पुरोहित अपने मन में उचित विचारों के साथ ऐसा मनोभाव नहीं रखता, तो उसके लिए अच्छा होगा कि वह पापमोचक के रूप में कार्य न करे‘.

स्वर्गदूत गाब्रिएल ने मरियम से यह भी कहा, ‘डरिये नहीं.‘ संत पापा ने कहा, ष्ईश्वर हमारी कमजोरियों एवं गलतियों को पहले से जानते हैं, फिर भी, जब हम मेल-मिलाप संस्कार ग्रहण करते हैं, तब वे हमें अपने पाँव याजक के सामने रखने के लिए आमंत्रित करते हैं। इस तरह हमारी कमजोरियाँ पुनरूत्थान के अवसर बनते हैं.कुँवारी मरियम हमें हमारे जीवन के स्रोत प्रभु की ओर लौटने के लिए निमंत्रण देती हैं जो भय एवं जीवन के खालीपन के खिलाफ आखिरी दवाई हैं

संत पापा ने अपने उपदेश के अंत में गौर किया कि ईश्वर को मरियम का प्रत्युत्तर, ईश्वर के प्रति आज्ञापालन की जीवंत चाह है.उन्होंने माता मरियम की मध्यस्थता द्वारा प्रार्थना की कि ‘ वे हमारी यात्रा को अपने हाथों में लें तथा तीखे और कठिन रास्ते को, संवाद एवं भाईचारा के रास्ते में बदल कर शांति के रास्ते पर हमारा मार्गदर्शन करें.‘


आलोक कुमार

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