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हर दिन मिलने वाले लोगों का हर्षपूर्वक अभिवादन करना

 

पटना. ईसाई समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले समय-समय चालीसा काल (लेंट) में लचीलापन घोषित करते रहते हैं. अब नया फरमान जारी किया गया है कि आप मांस के उपवास के बजाय 15 सरल दया के कार्य करें.यह संत पिता फ्रांसिस ने यह सुझाव दिया है.देखिए, यह कितनी सुंदर बात है.

1. हमेशा और हर जगह ‘नमस्ते‘ या ‘हैलो‘कहना।

2. 'धन्यवाद ;कहना, भले ही इसकी कोई आवश्यकता न हो।

3. दूसरों को याद दिलाना कि आप उनसे प्रेम करते हैं।

4. हर दिन मिलने वाले लोगों का हर्षपूर्वक अभिवादन करना।

5. बिना किसी पूर्वाग्रह के प्रेमपूर्वक दूसरों की कहानी सुनना।

6. रुक कर किसी की सहायता करना और जरूरतमंदों के प्रति सचेत रहना।

7. किसी के मनोबल को ऊँचा उठाना।

8. दूसरों की योग्यताओं या सफलता का उत्सव मनाना।

9. जो चीजें आप उपयोग नहीं करते, उन्हें जरूरतमंदों को देना।

10. जब जरूरत हो, तब किसी की मदद करना ताकि वे आराम कर सकें।

11. प्रेमपूर्वक सुधार करना, डर के कारण चुप न रहना।

12. अपने करीबियों के लिए अच्छे कार्य करना।

13. घर में जो चीजें उपयोग करते हैं, उन्हें साफ करना।

14. दूसरों को उनकी कठिनाइयां दूर करने में सहायता करना।

15. यदि माता-पिता जीवित हैं, तो उन्हें कॉल करना।

इन चीजों का उपवास करें और अपने जीवन को भरेंगे

 कठोर शब्दों से उपवास करें और दयालु शब्द बोलें।

 असंतोष से उपवास करें और कृतज्ञता से भरें।

 क्रोध से उपवास करें और धैर्य व विनम्रता को अपनाएँ।

 निराशा से उपवास करें और आशा व सकारात्मकता को अपनाएँ।

 चिंताओं से उपवास करें और परमेश्वर पर भरोसा करें।

 शिकायतों से उपवास करें और जीवन की सरल चीजों में संतोष पाएं।

 दबाव से उपवास करें और प्रार्थना से जुड़ें।

 दुख और कड़वाहट से उपवास करें और अपने हृदय को आनंद से भरें।

 स्वार्थ से उपवास करें और दूसरों के प्रति करुणा रखें।

 अक्षम्य भाव से उपवास करें और मेल-मिलाप की भावना से भरें।

 अत्यधिक बातों से उपवास करें और मौन में दूसरों की सुनें।


 यदि हम सभी इस उपवास को अपनाएं, तो हमारा दैनिक जीवन आशीषों से भर जाएगा.


 शांति से

 विश्वास से

 आनंद से

  और जीवन से!


आलोक कुमार

माता कलीसिया ने उपवास और परहेज का दिन ठहराया है


पटना.ईसाई समुदाय का दुखभोग राख बुधवार 5 मार्च से शुरू हो गया.उस दिन ईसाई समुदाय निकटवर्ती चर्च गए. चर्च के पुरोहित ने ईसाई धर्मावलंबियों की ललाट पर पवित्र राख से क्रूस का चिन्ह बनाकर कहा कि हे! मानव तुम मिट्टी हो और मिट्टी में मिल जाओंगे.राख बुधवार के दिन ने माता कलीसिया ने उपवास और परहेज का दिन ठहराया है.इसके आलोक में सयाने उपवास और बच्चे परहेज करते हैं.राख बुधवार को सुबह में मिस्सा और पवित्र राख ललाट में लगाने के बाद एक बार फिर शाम को क्रूस रास्ता में भाग लेने चर्च गए. वहां पर ईसा मसीह के दुखों से संबंधित 14 झांकियों से सामने प्रार्थना किए.इसे क्रूस का रास्ता कहा जाता है। इसमें भाग लेकर घर लौटने पर सयानों ने उपवास और बच्चों ने परहेज तोड़ा गया.

 बताते चले कि पश्चिम चंपारण के लोग राख बुधवार के पहले ईसाई समुदाय ने 4 मार्च को गोश्त और भूंजा का पर्व मनाया. बिहार के पश्चिमी चम्पारण के ईसाई समुदाय ने गोश्त और भूंजा का पर्व का लुफ्त उठाया.अब पश्चिमी चम्पारण से निकलकर गोश्त और भूंजा का पर्व का प्रसार देश-प्रदेश-विदेश में हो गया है.इसके साथ ही ईसाई समुदाय 4 मार्च (रम) को छोड़ दिए और ईसा मसीह के दुखभोग के गम में समा गए हैं.दुखभोग की अवधि में प्रत्येक बुधवार और शुक्रवार को दोपहर में क्रूस का रास्ता होता है.

 समाजसेवी एस.के.लॉरेंस ने ईसा मसीह के दुखभोग पर आधारित मुसीबत गाना शुरू कर दिया है.इनके साथ एक टीम है जो प्रत्येक साल कुर्जी पल्ली में मुसीबत गान और प्रार्थना करने का कार्यक्रम करते हैं.


आलोक कुमार

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