वर्तमान में प्रतिनिधि सभा में 76 सीटें हैं - सत्ता बनाए रखने के लिए न्यूनतम आवश्यक

 ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने 21 मई को देश में संघीय चुनाव कराए जाने की घोषणा की है। मॉरिसन के सत्तारूढ़ गठबंधन के पास वर्तमान में प्रतिनिधि सभा में 76 सीटें हैं - सत्ता बनाए रखने के लिए न्यूनतम आवश्यक...

ऑस्ट्रेलिया.ऑस्ट्रेलिया में 21 मई को संघीय चुनाव है. ऑस्ट्रेलिया में प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने 21 मई को संघीय चुनाव कराने का सुझाव दिया है.मतदान सर्वेक्षणों में सत्‍ता परिवर्तन की संभावना व्यक्त की गई है. एंथनी अल्बनीज के नेतृत्व में विपक्षी लेबर पार्टी की सरकार बनने का अनुमान व्यक्त किया गया है. परंतु पिछले चुनाव में अधिकांश मतदान सर्वेक्षणों के नतीजों के विपरीत स्कॉट मॉरिसन ने बहुमत हासिल किया था.मॉरिसन   के सत्तारूढ़ गठबंधन के पास अभी 76 सीटें हैं.

बताया गया कि ऑस्ट्रेलिया में जॉन हॉवर्ड के बाद मॉरिसन ऐसे पहले नेता हैं जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया है. हॉवर्ड चार चुनाव जीतने के बाद 2007 में लेबर पार्टी के केविन रूड से चुनाव हार गए थे.

चुनाव की घोषणा करते समय मॉरिसन ने कहा कि आर्थिक अनिश्चितताओं से बचने और सुरक्षा को प्राथमिकता देने के लिए आप हमारी पार्टी को वोट करें. उन्होंने कहा कि 21 मई को होने वाले इस चुनाव में उदारवादियों को वोट देकर ही आप मजबूत भविष्य के लिए एक मजबूत अर्थव्यवस्था सुनिश्चित कर सकते हैं.मॉरिसन ने कहा कि विपक्षी लेबर पार्टी का कहना है कि वह ऑस्ट्रेलियाई लोगों के लिए बेहतर आर्थिक विकल्प पेश करेगी. लेकिन ये उनके झूठे वादे हैं.उनके झांसे में जनता न आएं.

 मॉरिसन ने कहा कि ऑस्ट्रेलियाई लोगों ने पिछले चुनाव के बाद से कई चुनौतियों का सामना किया है - जिसमें आग, बाढ़ और COVID-19 महामारी शामिल है. इस दौरान  हमारी सरकार ने दूसरे देशों की तुलना में बहुत बेहतर प्रदर्शन किया है. बता दें कि स्कॉट मॉरिसन ऑस्ट्रेलिया के 30वें और वर्तमान प्रधान मंत्री के रूप में कार्यरत हैं.उन्होंने अगस्त 2018 में ऑस्ट्रेलिया की लिबरल पार्टी के नेता के रूप में  पदभार ग्रहण किया था. वहीं उनके विपक्ष में लेबर पार्टी है जो कि उन्हें टक्कर देती दिख रही है.लेबर पार्टी के मुख्य नेता एंथनी अल्बनीस हैं.हालांकि चुनाव के बाद ही नतीजे साफ हो पाएंगे.

इस बीच 21 मई को ऑस्ट्रेलिया के संघीय चुनाव से पहले प्रचार अभियान के रूप में, देश के कैथोलिक धर्माध्यक्षों ने मतदाताओं से अपने ख्रीस्तीय धर्म के आलोक में दांव पर लगे मुद्दों पर विचार करने का आग्रह किया.

पर्यावरणीय चिंता, बेहतर उपशामक और वृद्ध देखभाल, बढ़ती गरीबी, शरण चाहने वालों और आदिवासी लोगों के अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता और कैथोलिक शिक्षा के लिए स्कूल इत्यादि धर्माध्यक्षों द्वारा रेखांकित मुद्दे हैं.

ऑस्ट्रेलियाई कैथोलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष ब्रिस्बेन के महाधर्माध्यक्ष मार्क कॉलरिज ने चुनाव के ठीक एक महीने पहले मंगलवार को जारी एक बयान में उन चिंताओं को व्यक्त किया.

धर्माध्यक्षों ने संत पापा फ्राँसिस की अपील को याद करते हुए कहा कि "एक बेहतर प्रकार की राजनीति, जो वास्तव में आम अच्छे की सेवा में हो."

"हमारा ख्रीस्तीय विश्वास हमें एक मिशनरी के रूप में जीने के लिए बुलाता है जो मानवता को येसु मसीह के प्रेम की गवाही देते हैं.हमारी मान्यताएं एक निजी आध्यात्मिकता नहीं हैं, बल्कि कार्यों में व्यक्त प्रेम के माध्यम से महसूस की जाती हैं."

धर्माध्यक्षों का कहना है कि लोकतांत्रिक समाज में ख्रीस्तीय होने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि "सभी की भलाई के लिए अपने वोट का उपयोग करके वे अपने समुदाय के लिए जो अच्छा कर सकते हैं, उस पर चिंतन करें."

ऑस्ट्रेलिया, 2019 में पिछले चुनाव के बाद के वर्षों में, चरम मौसम, कोविड -19 के प्रभावों और यूक्रेन में युद्ध के प्रभाव को देखा है, जो शांति, न्याय और सहयोगात्मक भागीदारी के राजनीतिक मूल्यों की रक्षा करने की आवश्यकता को उजागर करता है.

जैसा कि देश महामारी के मद्देनजर आर्थिक सुधार चाहता है, धर्माध्यक्ष "एक नए सामाजिक अनुबंध" का आह्वान करते हैं जो किसी भी व्यक्ति या सामाजिक समूह को पीछे छोड़े बिना आम भलाई को बढ़ावा देता है.

वे स्वास्थ्य देखभाल, विशेष रूप से वृद्ध देखभाल और उपशामक देखभाल के मानकों में सुधार की आवश्यकता की ओर इशारा करते हैं, क्योंकि मानव गरिमा के लिए समाज को "सभी लोगों के जीवन को महत्व देना चाहिए, जिसमें उनके जीवन के अंत के करीब का समय भी शामिल हैं."

धर्माध्यक्षों का कहना है कि उपशामक देखभाल तक पहुंच आवश्यक है, ताकि मरने वाले पर सहायता प्राप्त आत्महत्या का विकल्प चुनने के लिए दबाव न डाला जाए.

ऑस्ट्रेलियाई धर्माध्यक्षों ने ऐसी नीतियों का आह्वान किया जो बेरोजगारी और गरीबी में पीड़ित लोगों की सहायता करती हैं.

उन्होंने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता की भी रक्षा की जानी चाहिए."भेदभाव से सुरक्षा और धार्मिक संगठनों को उनके विश्वास से प्रेरित मिशन के आधार पर चलाने की स्वतंत्रता मौलिक मानवाधिकार हैं जिनकी रक्षा की जानी चाहिए."

कलीसिया द्वारा संचालित संस्था द्वारा एक वर्ष में 777,000 से अधिक ऑस्ट्रेलियाई लोगों को शिक्षित करने के साथ, कैथोलिक धर्माध्यक्ष मतदाताओं से राजनेताओं को चुनने का आग्रह करते हैं जो यह सुनिश्चित करेंगे कि "स्कूल का विकल्प सभी परिवारों के लिए एक सुलभ विकल्प बना रहे," विशेष रूप से वंचित समुदायों में.

बच्चियों के साथ बैठकर भोजन किया

 पटना. पटना जिले के जिलाधिकारी है डॉक्टर चंद्रशेखर सिंह.आज बालिका मध्य विद्यालय अमला टोला में मध्याह्न भोजन का निरीक्षण कर बच्चियों के साथ बैठकर भोजन किया गया, गुणवत्ता को और बेहतर करने का निर्देश दिया.बता दें कि बिहार शिक्षा विभाग के निर्देश के बाद प्रदेशभर के आलाधिकारी लगातार स्कूलों का दौरा कर वहां की स्थिति का जायजा ले रहे हैं. इसी क्रम में राजधानी पटना के कलेक्टर डॉक्टर चंद्रशेखर सिंह अचानक से एक कन्या मध्य विद्यालय में पहुंच गए. डीएम साहब के आने से स्‍कूल में खलबली सी मच गई. शिक्षक से लेकर स्‍टाफ तक इस सोच में पड़ गए कि आखिर कलेक्‍टर अचानक से स्‍कूल क्‍यों पहुंच गए? इस दौरान मिड डे मील का भी समय हो गया था. कलेक्‍टर साहब ने झट से छात्राओं संग खुद भी जमीन पर आसन लगाकर मिड डे मील खाने बैठ गए. डीएम डॉ. चंद्रशेखर सिंह के इस व्यवहार से हर कोई भौचक्का था. पटना डीएम के साथ जिला शिक्षा अधिकारी भी मध्याह्न भोजन करने बैठ गए. इस दौरान चंद्रशेखर सिंह को छात्राओं से गुफ्तगू करते भी देखा गया.


राजधानी पटना में भी शिक्षा विभाग के आदेश का असर देखने को मिला है. जिलाधिकारी डॉक्टर चन्द्रशेखर सिंह खुद स्कूल का औचक निरीक्षण करने पहुंच गए. उन्होंने अमला टोला कन्या मध्य विद्यालय में बच्चों के साथ जमीन पर बैठकर भोजन किया. डीएम चन्द्रशेखर सिंह के साथ डीईओ अमित कुमार भी अचानक अमला टोला स्कूल पहुंचे. आलाधिकारियों ने यहां सबसे पहले स्कूल के किचन का जायजा लिया और मेन्यू चेक किया. जिलाधिकारी और जिला शिक्षा पदाधिकारी बच्चों के साथ पंक्ति में फर्श पर बैठ गए और तकरीबन आधे घंटे तक भोजन किया. जिले के आलाधिकारियों द्वारा इस तरह से जमीन पर बैठकर आम छात्रों की तरह भोजन करना हर किसी को आश्चर्यचकित कर रहा था.


कन्या मध्य विद्यालय में गुरुवार को मिश्रित दाल, चावल और सलाद का मेन्यू था. स्‍कूल में इसके मुताबिक भोजन की व्यवस्था की गई थी. भोजन करने के बाद जिलाधिकारी ने भोजन की क्वालिटी की जमकर तारीफ की और स्कूल को इस मामले में 100 में 100 नम्बर दिया. उन्होंने कहा कि वह बिना बताए यहां पहुंचे थे और बिल्कुल घर जैसा खाना लगा. वहीं, डीईओ ने भी कहा कि अब ऐसे ही औचक निरीक्षण किया जाएगा, ताकि खाने की क्वालिटी और बेहतर हो सके. उन्‍होंने कहा कि इससे बच्चों की उपस्थिति भी बढ़ेगी.


जिलाधिकारी डॉक्टर चंद्रशेखर को साथ में खाना खाते देख स्कूल की छात्राएं भी गौरवान्वित महसूस कर रही थीं. छात्राओं ने बताया कि उन्हें यकीन नहीं हो रहा कि वे कलेक्टर साहब के साथ खाना खा रही हैं. डीएम ने स्कूल की रसोईया से भी मुलाकात की और खाने की तारीफ की. रसोईया गीता और रेणु देवी ने संकल्प भी लिया कि वे रोज ऐसा ही खाना खिलाएंगी और क्वालिटी से समझौता नहीं करेंगी. मिड डे मील को लेकर मिल रही शिकायतों के बाद शिक्षा विभाग ने नई पहल शुरू की है. सभी जिलों को आदेश दिया है कि स्कूल के एचएम से लेकर शिक्षा समिति के सदस्य और जिलाधिकारी तक स्कूलों में बच्चों के साथ पंक्ति में बैठकर खाना खाएंगे, ताकि मिड डे मील की गुणवत्ता बढ़ सके.


आलोक कुमार


गायब मिले शिक्षक से 24 घंटे के अंदर स्पष्टीकरण का जवाब मांगा

 

■ ’10़2 सुप्पी हाई स्कूल के प्रधानाध्यापक सहित शिक्षक मिले गायब 24 घंटे के अंदर स्पष्टीकरण का जवाब मांगा गया’


सीतामढ़ी.प्रभारी जिला पदाधिकारी-सह-उप विकास आयुक्त विनय कुमार द्वारा सुप्पी प्रखंड अंतर्गत रामनगरा पंचायत के ग्राम रामनगरा में ग्रामीण विकास विभाग मनरेगा के तहत किसान रणधीर कुमार के निजी जमीन पर पोखर निर्माण कार्य का निरीक्षण किया गया. वहाँ कार्यस्थल पर निबंधित जॉब कार्ड धारक द्वारा कार्य कराया जा रहा जहां निरीक्षण किया गया. इस योजना के पूर्ण होने से जल संचयन और कृषि कार्य, मछली पालन, पर्यावरण शुद्धिकरण, जल संरक्षण, सिंचाई की सुविधा आदि कार्यों में सहयोग होगा, साथ ही पोखर के चारो तरफ वृक्षारोपण कराया जाएगा. जिससे वातावरण शुद्ध होगा.

इसके उपरांत 10़2 सुप्पी हाई स्कूल के प्रांगण में मनरेगा के तहत चबूतरा निर्माण कार्य कराया गया है. जिसका निरीक्षण किया गया जो कि भौतिक रूप से पूर्ण पाया गया, साथ ही प्रभारी जिला पदाधिकारी द्वारा विद्यालय का भी निरीक्षण किया गया. निरीक्षण के दौरान 9 शिक्षकों में से एक शिक्षक की उपस्थिति देख भड़के प्रभारी डीएम. जिला शिक्षा पदाधिकारी को 24 घंटे के अंदर प्रधानाध्यापक से स्पष्टीकरण प्राप्त करने का निर्देश दिया गया. साथ ही प्रभारी जिला पदाधिकारी ने राजकीय कन्या मध्य विद्यालय ससौला पहुंचकर शिक्षकों की उपस्थिति पंजी की जांच की शिक्षकों से बच्चे के पढ़ाई का फीडबैक लिया. शौचालय, क्लास रूम, का भी अवलोकन किया.

विद्यालय मैनेजमेंट कमिटी की बैठक से संबंधित पंजी की भी जांच की एवं विद्यालय में आज मध्याह्न भोजन नहीं कराए जाने पर खेद प्रकट किया एवं इस संबंध में जिला शिक्षा पदाधिकारी को प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी एवं प्रधानाध्यापक से स्पष्टीकरण पूछने का निर्देश दिया. प्रभारी जिला पदाधिकारी-सह- उप विकास आयुक्त विनय कुमार ने ससौला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का औचक निरीक्षण किया. निरीक्षण के क्रम में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी गायब मिले जिस पर प्रभारी जिला पदाधिकारी ने उनसे स्पष्टीकरण पूछने का निर्देश सिविल सर्जन को दिया साथ ही उन्होंने जे0ई0/एईस वार्ड में मूलभूत सुविधाओं का निरीक्षण किया एवं उपस्थित अधिकारी को आवश्यक दिशा निर्देश दिए. उक्त निरीक्षण में जिला जन संपर्क पदाधिकारी विजय कुमार पांडेय, प्रखंड विकास पदाधिकारी सुप्पी सौरभ सुमन, कार्यक्रम पदाधिकारी मनरेगा,जेई मनरेगा, पंचायत रोजगार सेवक उपस्थित थे.


Bihar : पवित्र मिस्सा और आठ बच्चों के प्रथम परमप्रसाद के साथ मनाया गया पल्ली दिवस

  बेतिया पल्ली में मरियम के जन्मोत्सव पर आस्था का उत्सव प्रार्थना, पवित्र मिस्सा और आठ बच्चों के प्रथम परमप्रसाद के साथ मनाया गया पल्ली दिवस...