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दूसरी राय के रूप में इस पर भरोसा किया जाता

 

विरोधी टीम के बल्लेबाजों को आउट करना होता 

विरोधी टीम के बल्लेबाजों को आउट करना होता 

पटना.विश्व भर में बहुत लोगों को आकर्षित करता है क्रिकेट. यह खेल ऐसा ही है.यह खेल एक बल्ले और गेंद के साथ खेला जाता है, जिसमें दो टीमें प्रतिस्पर्धा करती हैं.एक वक्त में एक टीम गेंदबाजी और दूसरी टीम बल्लेबाजी करती है.यह सब सिक्का उछालने के बाद टॉस जीतने वाली टीम के कप्तान पर निर्भर होता है.

    क्रिकेट एक खेल है जिसमें दो टीमें होती हैं, प्रत्येक टीम में 11 खिलाड़ी होते हैं जो बल्ले और गेंद के साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं. एक खेल में दो टीम होती हैं, जिसमें एक टीम बल्लेबाजी करती है जबकि दूसरी टीम गेंदबाजी करती है. विरोधी टीम के बल्लेबाजों को आउट करना होता  होता है और विरोधी टीम के बल्लेबाजों को आउट करना होता है.आउट करने का फैसला अंपायर करते हैं.

      अब सोनी के स्वामित्व वाली हॉक-आई प्रणाली को यूनाइटेड किंगडम में पॉल हॉकिन्स द्वारा विकसित किया गया. यह प्रणाली मूल रूप से क्रिकेट में टेलीविजन उद्देश्यों के लिए 2000 में लागू की गई थी.सिस्टम छह (कभी-कभी सात) उच्च-प्रदर्शन वाले कैमरों के माध्यम से काम करता है, जो आम तौर पर स्टेडियम की छत के नीचे स्थित होते हैं, जो विभिन्न कोणों से गेंद को ट्रैक करते हैं.फिर छह कैमरों के वीडियो को त्रिकोणीय बनाया जाता है और गेंद के प्रक्षेपवक्र का त्रि-आयामी प्रतिनिधित्व बनाने के लिए संयोजित किया जाता है.हॉक-आई अचूक नहीं है, लेकिन इसे 3.6 मिलीमीटर के भीतर सटीक होने के लिए विज्ञापित किया जाता है और आम तौर पर खेल में निष्पक्ष दूसरी राय के रूप में इस पर भरोसा किया जाता है.

       उसके बाद अंपायर डिसीजन रिव्यू सिस्टम (यूडीआरएस) आया.हालांकि टेस्ट क्रिकेट में डीआरएस का उपयोग 2008 में किया गया.इस प्रणाली को 2011 में वनडे में शामिल किया गया था.डीआरएस को 2017 में T20 इंटरनेशनल में पेश किया गया था. क्रिकेट का इतिहास हजारों वर्षों से बदला है और यह खेल विभिन्न प्रकारों में खेला जाता है, जैसे कि टेस्ट मैच, वनडे इंटरनेशनल, और टी20. वनडे और टी20 खेल आमतौर पर अधिक रोमांचक होते हैं और उनमें बहुत तेजी से बदलती घटनाएं होती हैं.

    क्रिकेट की प्रतिस्पर्धा आमतौर पर एक उत्सव की भावना के साथ खेली जाती है और इसमें उत्साह, जज्बा, और अद्वितीयता होती है. खेल के शौर्य और कुशलता के साथ, यह खेल खिलाड़ियों के बीच अज्ञात से मित्रता भी पैदा करता है.क्रिकेट जनप्रियता के कारण विभिन्न टूर्नामेंट और लीग आयोजित होते हैं, जैसे कि विश्व कप, आईपीएल, बीबीसी चैम्पियंस ट्रॉफी, और बहुत से अन्य।.इन टूर्नामेंट्स में विभिन्न देशों के खिलाड़ी एक-दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं और अपने देश का गौरव बढ़ाते हैं.

      क्रिकेट का इतिहास, उनके क्रिकेट स्टेडियमों की भरपूर महक, और विभिन्न रूपों के खेलों की रोचकता ने इसे एक महत्वपूर्ण खेल बना दिया है.यह न केवल खेल है, बल्कि एक सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है.क्रिकेट की प्रतिस्पर्धा न केवल खेल दर्शकों को एकजुट करती है, बल्कि यह एक खेल के रूप में आदर्श से उत्साहित करता है.

   

आलोक कुमार

पटना महानगर जिला कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष शशि रंजन के नेतृत्व में प्रदर्शन 7 मार्च को

 चुनावी बॉण्ड के डीटेल्स का खुलासा करने के लिए 30 जून तक समय बढ़ाने का सोमवार को उच्चतम न्यायालय से अनुरोध 

पटना.सुप्रीम कोर्ट ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) को बुधवार 6 मार्च तक निर्वाचन आयोग को डीटेल्स पेश करने का निर्देश दिया था. इस बीच स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी डीटेल्स को जमा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से 30 जून तक का समय मांगा है. एसबीआई ने कहा है कि कोर्ट ने जो 3 हफ्ते का समय दिया था वह पर्याप्त नहीं है. एसबीआई ने राजनीतिक दलों द्वारा भुनाए गए प्रत्येक चुनावी बॉण्ड के डीटेल्स का खुलासा करने के लिए 30 जून तक समय बढ़ाने का सोमवार को उच्चतम न्यायालय से अनुरोध किया. पिछले महीने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने एसबीआई को आदेश दिया था.            

     यू.पी.ए.दो को हराने के बाद एन.डी.ए.की सरकार 2014 में सत्तासीन हो गई.कांग्रेस मुक्त राज्य सरकार बनाने में जुटी भारत सरकार ने इलेक्टोरल बॉन्ड योजना की घोषणा 2017 में की थी. इस योजना को सरकार ने 29 जनवरी 2018 को कानून लागू कर दिया था.प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार द्वारा शुरू की गई चुनावी बांड प्रणाली के तहत, इन बांडों को भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) से खरीदा जाना चाहिए, लेकिन गुमनाम रूप से पार्टियों को दान किया जा सकता है.इसका भरपूर लाभ एन.डी.ए.सरकार को मिली. हालांकि इलेक्टोरल बॉन्ड का काफी विरोध हुआ.            

     बता दें कि इस योजना के तहत भारतीय स्टेट बैंक राजनीतिक दलों को धन देने के लिए बांड जारी कर सकता है.इन्हें ऐसा कोई भी दाता खरीद सकता है, जिसके पास एक ऐसा बैंक खाता है, जिसकी केवाईसी की जानकारियां उपलब्ध हैं. इलेक्टोरल बॉन्ड में भुगतानकर्ता का नाम नहीं होता है.योजना के तहत भारतीय स्टेट बैंक की निर्दिष्ट शाखाओं से 1,000 रुपये, 10,000 रुपये, एक लाख रुपये, दस लाख रुपये और एक करोड़ रुपये में से किसी भी मूल्य के इलेक्टोरल बॉन्ड ख़रीदे जा सकते हैं.चुनावी बॉन्ड्स की अवधि केवल 15 दिनों की होती है, जिसके दौरान इसका इस्तेमाल सिर्फ जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत पंजीकृत राजनीतिक दलों को दान देने के लिए किया जा सकता है.

      केवल उन्हीं राजनीतिक दलों को इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिये चंदा दिया जा सकता है, जिन्होंने लोकसभा या विधान सभा के लिए पिछले आम चुनाव में डाले गए वोटों का कम से कम एक प्रतिशत वोट हासिल किया हो.योजना के तहत चुनावी बॉन्ड जनवरी, अप्रैल, जुलाई और अक्टूबर के महीनों में 10 दिनों की अवधि के लिए खरीद के लिए उपलब्ध कराए जाते हैं.इन्हें लोकसभा चुनाव के वर्ष में केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित 30 दिनों की अतिरिक्त अवधि के दौरान भी जारी किया जा सकता है.हालांकि, इस प्रणाली के साथ कुछ विवाद भी जुड़े हैं.कुछ लोग यह मानते हैं कि इससे लोगों को निश्चित राजनीतिक दलों के साथ बंधन में डालने का खतरा हो सकता है और यह लोकतंत्र के सिद्धांत के खिलाफ है.

     इस प्रणाली की तुलना में, यह भी महत्वपूर्ण है कि कैसे उसे सुधारा जा सकता है ताकि यह सबके समर्थन और प्रतिनिधित्व की दिशा में और बेहतर काम कर सके.इसमें नागरिकों को अधिक सकारात्मक और सशक्त बनाने के लिए उपाय शामिल करना भी महत्वपूर्ण है.सुप्रीम कोर्ट ने माना कि मतदाताओं के सूचना के अधिकार का उल्लंघन है.आयकर अधिनियम के तहत, किसी के चुनावी बांड दान को धारा 80 जीजी और धारा 80 जीजीबी के तहत कर-मुक्त माना जाता है. हालाँकि, दान प्राप्त करने वाला राजनीतिक दल भी आयकर अधिनियम की धारा 13 ए के अनुसार दान प्राप्त कर सकता है.

     इस बीच सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद भाजपा को चंदा देने वालों का नाम एस.बी.आई. द्वारा सार्वजनिक नहीं किये जाने के विरोध में पटना महानगर जिला कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष शशि रंजन के नेतृत्व में गुरुवार 0 7 मार्च,2024 को गांधी मैदान स्थित एस.बी.आई. शाखा के पास प्रदर्शन किया जाएगा.प्रदर्शन अपराह्न 12ः30 बजे गांधी मैदान स्थित एस.बी.आई. शाखा के पास होगा.     

आलोक कुमार

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