🔴 ताजा खबर
खबरें लोड हो रही हैं...

EPS-95 के तहत न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग पर जंतर-मंतर में महाधरना

 

EPS-95 के तहत न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग पर जंतर-मंतर में महाधरना, तीन दिन बाद भी सरकार पर असर नहीं

परिचय

देशभर के लाखों पेंशनभोगियों से जुड़ा Employees' Pension Scheme 1995 एक बार फिर चर्चा में है। न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग को लेकर हजारों पेंशनर्स ने 9, 10 और 11 मार्च को दिल्ली के Jantar Mantar पर महाधरना दिया।

यह आंदोलन मुख्य रूप से Employees' Provident Fund Organization से जुड़े पेंशनभोगियों द्वारा किया गया, जिनकी लंबे समय से मांग है कि EPS-95 के तहत मिलने वाली न्यूनतम पेंशन को बढ़ाया जाए।

हालांकि तीन दिन तक चले इस बड़े आंदोलन के बावजूद अभी तक सरकार की ओर से कोई ठोस घोषणा या सकारात्मक संकेत नहीं मिलने की खबर सामने आ रही है। इससे पेंशनर्स में निराशा और असंतोष बढ़ता दिखाई दे रहा है।

क्या है EPS-95 पेंशन योजना?

EPS-95 यानी Employees' Pension Scheme 1995 भारत सरकार की एक पेंशन योजना है, जो संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए बनाई गई थी। इस योजना का उद्देश्य कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद नियमित पेंशन प्रदान करना है।

इस योजना के तहत कर्मचारी और नियोक्ता दोनों योगदान करते हैं, जिससे रिटायरमेंट के बाद पेंशन दी जाती है। लेकिन समय के साथ महंगाई बढ़ने के बावजूद न्यूनतम पेंशन में अपेक्षित वृद्धि नहीं होने से पेंशनभोगियों की परेशानी बढ़ती जा रही है।

वर्तमान में EPS-95 के तहत कई पेंशनर्स को मात्र लगभग 1000 रुपये के आसपास न्यूनतम पेंशन मिलती है, जिसे लेकर लंबे समय से विरोध और मांग उठती रही है।

पेंशनर्स की मुख्य मांग क्या है?

EPS-95 पेंशनर्स लंबे समय से सरकार से कुछ प्रमुख मांगें कर रहे हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण मांग है कि न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर कम से कम 7500 रुपये प्रति माह और महंगाई भत्ता (DA) दिया जाए।

पेंशनर्स का कहना है कि आज के समय में 1000 रुपये की पेंशन से जीवन यापन करना लगभग असंभव है। बढ़ती महंगाई, दवाइयों का खर्च और रोजमर्रा की जरूरतों के कारण उन्हें गंभीर आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

इसके अलावा पेंशनर्स की अन्य मांगों में शामिल हैं:

  • न्यूनतम पेंशन को सम्मानजनक स्तर तक बढ़ाना

  • पेंशन में महंगाई भत्ता लागू करना

  • पेंशनर्स और उनके जीवनसाथी के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं

इन मांगों को लेकर पेंशनर्स कई वर्षों से सरकार के सामने अपनी आवाज उठा रहे हैं।

जंतर-मंतर पर तीन दिन का महाधरना

इन मांगों को लेकर 9, 10 और 11 मार्च को दिल्ली के जंतर-मंतर पर देशभर से आए हजारों पेंशनर्स ने महाधरना दिया। इस आंदोलन में कई राज्यों से पेंशनर्स संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

धरने के दौरान पेंशनर्स ने सरकार से जल्द से जल्द न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग की। कई बुजुर्ग पेंशनर्स ने अपनी आर्थिक परेशानियों के बारे में भी बताया और कहा कि इतनी कम पेंशन में उनका गुजारा करना बेहद कठिन हो गया है।

धरने के दौरान प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए और सरकार से अपील की कि वह उनकी समस्याओं को गंभीरता से समझे।

सरकार की प्रतिक्रिया को लेकर निराशा

हालांकि तीन दिन तक चले इस महाधरने के बावजूद अभी तक सरकार की ओर से कोई बड़ा निर्णय या घोषणा सामने नहीं आई है। इससे आंदोलन में शामिल पेंशनर्स के बीच निराशा का माहौल देखा जा रहा है।

कई पेंशनर्स संगठनों का कहना है कि उन्होंने पहले भी कई बार सरकार के सामने अपनी मांगें रखी हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।

कुछ संगठनों ने यह भी कहा कि अगर उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया तो भविष्य में आंदोलन को और तेज किया जा सकता है।

पेंशनर्स की बढ़ती परेशानियां

EPS-95 पेंशनर्स में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जो निजी कंपनियों में काम करने के बाद रिटायर हुए हैं। इन लोगों के लिए पेंशन ही आय का मुख्य स्रोत है।

लेकिन जब पेंशन बहुत कम होती है तो उन्हें अपने रोजमर्रा के खर्च पूरे करने में काफी कठिनाई होती है। कई पेंशनर्स ने यह भी बताया कि दवाइयों और इलाज पर ही उनकी अधिकांश पेंशन खर्च हो जाती है।

महंगाई के इस दौर में इतनी कम पेंशन को लेकर पेंशनर्स का कहना है कि सरकार को उनकी स्थिति को समझना चाहिए और उचित कदम उठाने चाहिए।

क्या पहले भी उठ चुकी है यह मांग?

EPS-95 पेंशनर्स की न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग नई नहीं है। पिछले कई वर्षों से विभिन्न संगठनों द्वारा इस मुद्दे को उठाया जाता रहा है।

कई बार पेंशनर्स ने देश के अलग-अलग शहरों में प्रदर्शन और धरने भी किए हैं। संसद में भी समय-समय पर इस मुद्दे को उठाया गया है।

इसके बावजूद अभी तक कोई ऐसा फैसला नहीं लिया गया जिससे पेंशनर्स की सभी प्रमुख मांगें पूरी हो सकें।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि पेंशन व्यवस्था को समय के साथ अपडेट करना जरूरी है। यदि पेंशन राशि बहुत कम रहती है तो बुजुर्गों के लिए जीवनयापन मुश्किल हो सकता है।

विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि सरकार को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को मजबूत करना चाहिए ताकि रिटायरमेंट के बाद लोगों को आर्थिक सुरक्षा मिल सके।

हालांकि यह भी सच है कि पेंशन बढ़ाने से सरकार पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है, इसलिए इस विषय पर संतुलित निर्णय लेना जरूरी होता है।

आगे क्या हो सकता है?

फिलहाल पेंशनर्स संगठनों की नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है। यदि सरकार इस मुद्दे पर कोई सकारात्मक कदम उठाती है तो इससे लाखों पेंशनर्स को राहत मिल सकती है।

लेकिन अगर लंबे समय तक इस मुद्दे पर कोई निर्णय नहीं होता है तो आंदोलन और तेज होने की संभावना भी जताई जा रही है।

कई पेंशनर्स संगठनों ने संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर वे भविष्य में बड़े स्तर पर आंदोलन कर सकते हैं।

निष्कर्ष

EPS-95 के तहत न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग देशभर के लाखों पेंशनर्स से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुका है। जंतर-मंतर पर 9, 10 और 11 मार्च को हुआ महाधरना इस बात का संकेत है कि पेंशनर्स अपनी मांगों को लेकर गंभीर हैं और सरकार से समाधान की उम्मीद कर रहे हैं।

हालांकि अभी तक इस आंदोलन का सरकार पर कोई बड़ा असर देखने को नहीं मिला है, लेकिन यह मुद्दा आने वाले समय में और चर्चा का विषय बन सकता है।

सरकार और पेंशनर्स संगठनों के बीच संवाद और संतुलित समाधान ही इस समस्या का स्थायी हल निकाल सकता है। यदि पेंशन राशि में उचित वृद्धि की जाती है तो इससे लाखों बुजुर्ग पेंशनभोगियों को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा मिल सकती है।

आलोक कुमार

भारत में डिजिटल पेमेंट तेजी से क्यों बढ़ रहा है?

 

भारत में डिजिटल पेमेंट तेजी से क्यों बढ़ रहा है? जानिए इसके बड़े कारण

परिचय

पिछले कुछ वर्षों में भारत में डिजिटल भुगतान का उपयोग तेजी से बढ़ा है। आज लोग छोटी से छोटी खरीदारी से लेकर बड़े लेनदेन तक मोबाइल ऐप और ऑनलाइन माध्यम से भुगतान कर रहे हैं। पहले जहां लोग अधिकतर नकद पैसे का उपयोग करते थे, वहीं अब डिजिटल पेमेंट धीरे-धीरे लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है।

डिजिटल तकनीक के विकास और इंटरनेट की बढ़ती पहुंच ने इस बदलाव को और तेज कर दिया है। आज गांवों से लेकर शहरों तक लोग मोबाइल के माध्यम से आसानी से पैसे भेज और प्राप्त कर सकते हैं। डिजिटल पेमेंट ने आर्थिक लेनदेन को न केवल तेज बनाया है बल्कि इसे अधिक सुरक्षित और पारदर्शी भी बनाया है।

भारत में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने में National Payments Corporation of India की बड़ी भूमिका रही है, जिसने Unified Payments Interface जैसी तकनीक विकसित की। इसके अलावा Digital India अभियान ने भी लोगों को डिजिटल लेनदेन के लिए प्रोत्साहित किया।

डिजिटल पेमेंट क्या होता है?

डिजिटल पेमेंट का मतलब है कि नकद पैसे के बजाय इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भुगतान करना। इसमें मोबाइल ऐप, इंटरनेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाता है।

डिजिटल भुगतान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके जरिए कुछ ही सेकंड में एक बैंक खाते से दूसरे बैंक खाते में पैसे भेजे जा सकते हैं। इससे समय की बचत होती है और लेनदेन का रिकॉर्ड भी सुरक्षित रहता है।

आज कई लोकप्रिय ऐप जैसे Google Pay, PhonePe और Paytm लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हो चुके हैं।

भारत में डिजिटल पेमेंट बढ़ने के प्रमुख कारण

1. स्मार्टफोन और इंटरनेट की बढ़ती पहुंच

भारत में स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है। सस्ते स्मार्टफोन और सस्ते इंटरनेट डेटा ने डिजिटल सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचा दिया है।

आज ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोग इंटरनेट का उपयोग कर रहे हैं। इससे डिजिटल भुगतान करना आसान हो गया है और लोग धीरे-धीरे नकद लेनदेन से दूर हो रहे हैं।

2. UPI की लोकप्रियता

डिजिटल पेमेंट के बढ़ने का सबसे बड़ा कारण UPI है। UPI ने पैसे भेजने की प्रक्रिया को बेहद आसान बना दिया है।

UPI की मदद से लोग सिर्फ मोबाइल नंबर या QR कोड स्कैन करके तुरंत भुगतान कर सकते हैं। इसके लिए बैंक जाने की जरूरत नहीं होती।

आज छोटे दुकानदार से लेकर बड़े व्यापारियों तक सभी UPI के माध्यम से भुगतान स्वीकार कर रहे हैं।

3. सरकार की डिजिटल पहल

सरकार ने भी डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए कई अभियान चलाए गए हैं।

डिजिटल इंडिया अभियान के तहत लोगों को ऑनलाइन सेवाओं और डिजिटल भुगतान के बारे में जागरूक किया गया। इसके अलावा कई सरकारी योजनाओं का पैसा भी सीधे बैंक खातों में भेजा जाने लगा है, जिससे डिजिटल बैंकिंग का उपयोग बढ़ा है।

4. सुरक्षित और सुविधाजनक भुगतान

डिजिटल भुगतान का एक बड़ा फायदा यह है कि यह काफी सुरक्षित माना जाता है। इसमें OTP, PIN और अन्य सुरक्षा प्रणालियों का उपयोग किया जाता है।

अगर कोई लेनदेन संदिग्ध लगता है तो उसे तुरंत रोका भी जा सकता है। इसके अलावा डिजिटल पेमेंट में हर ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड रहता है, जिससे जरूरत पड़ने पर उसे आसानी से ट्रैक किया जा सकता है।

5. समय और मेहनत की बचत

डिजिटल पेमेंट से लोगों का काफी समय बचता है। पहले पैसे भेजने के लिए बैंक जाना पड़ता था या नकद लेनदेन करना पड़ता था।

लेकिन अब लोग अपने मोबाइल फोन से ही कुछ सेकंड में भुगतान कर सकते हैं। इससे व्यापार और रोजमर्रा के लेनदेन दोनों आसान हो गए हैं।

डिजिटल पेमेंट के प्रमुख फायदे

डिजिटल भुगतान के कई फायदे हैं, जिनके कारण लोग इसे तेजी से अपना रहे हैं।

1. नकद पैसे रखने की जरूरत कम हो जाती है।
2. भुगतान कुछ ही सेकंड में हो जाता है।
3. हर लेनदेन का रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है।
4. धोखाधड़ी के मामलों को ट्रैक करना आसान होता है।
5. ऑनलाइन खरीदारी और बिल भुगतान आसान हो जाता है।

इसके अलावा डिजिटल भुगतान से देश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होती है क्योंकि इससे पारदर्शिता बढ़ती है।

डिजिटल पेमेंट के सामने चुनौतियां

हालांकि डिजिटल भुगतान के कई फायदे हैं, लेकिन इसके सामने कुछ चुनौतियां भी हैं।

कई लोग अभी भी डिजिटल तकनीक से पूरी तरह परिचित नहीं हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी भी कभी-कभी समस्या बन जाती है। इसके अलावा साइबर अपराध का खतरा भी बना रहता है।

इसलिए डिजिटल भुगतान करते समय सावधानी बरतना जरूरी है और केवल भरोसेमंद ऐप का ही उपयोग करना चाहिए।

भविष्य में डिजिटल पेमेंट

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में भारत में डिजिटल भुगतान और तेजी से बढ़ेगा। नई तकनीकों, बेहतर इंटरनेट सुविधा और बढ़ती डिजिटल जागरूकता के कारण लोग अधिक से अधिक ऑनलाइन भुगतान का उपयोग करेंगे।

सरकार और बैंकिंग संस्थाएं भी डिजिटल पेमेंट को और सुरक्षित और आसान बनाने के लिए लगातार काम कर रही हैं।

निष्कर्ष

डिजिटल पेमेंट ने भारत में आर्थिक लेनदेन की प्रक्रिया को पूरी तरह बदल दिया है। आज यह केवल एक सुविधा नहीं बल्कि लोगों की जरूरत बन चुका है। स्मार्टफोन, इंटरनेट और UPI जैसी तकनीकों ने इसे आम लोगों तक पहुंचा दिया है।

आने वाले समय में डिजिटल भुगतान का उपयोग और भी तेजी से बढ़ने की संभावना है। अगर लोग सुरक्षित तरीके से डिजिटल पेमेंट का उपयोग करें, तो यह देश की अर्थव्यवस्था और डिजिटल विकास दोनों के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है।

आलोक कुमार

मोबाइल हैक हो गया है या नहीं?

 


मोबाइल हैक हो गया है या नहीं? इन 5 संकेतों से तुरंत पता करें

आज के समय में लगभग हर व्यक्ति स्मार्टफोन का उपयोग करता है। स्मार्टफोन हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। हम अपने मोबाइल में बैंकिंग ऐप, सोशल मीडिया, फोटो, वीडियो और कई जरूरी दस्तावेज सुरक्षित रखते हैं। लेकिन डिजिटल दुनिया के बढ़ने के साथ-साथ साइबर अपराध भी तेजी से बढ़ रहे हैं। कई बार लोगों को यह तक पता नहीं चलता कि उनका मोबाइल फोन हैक हो चुका है।

मोबाइल हैकिंग का मतलब है कि कोई अनजान व्यक्ति आपके फोन की जानकारी तक पहुंच बना लेता है और उसका गलत इस्तेमाल कर सकता है। इससे आपकी निजी जानकारी, बैंकिंग डिटेल और सोशल मीडिया अकाउंट तक खतरे में पड़ सकते हैं। इसलिए यह जानना बेहद जरूरी है कि मोबाइल हैक होने के संकेत क्या होते हैं।

1. फोन अचानक धीमा हो जाना

अगर आपका मोबाइल पहले सामान्य रूप से काम कर रहा था लेकिन अचानक बहुत धीमा हो गया है, तो यह एक संकेत हो सकता है कि फोन में कोई संदिग्ध गतिविधि चल रही है। कई बार हैकिंग के दौरान फोन में ऐसे ऐप इंस्टॉल हो जाते हैं जो बैकग्राउंड में लगातार चलते रहते हैं। इससे फोन की प्रोसेसिंग क्षमता कम हो जाती है और मोबाइल हैंग करने लगता है।

2. बैटरी जल्दी खत्म होना

अगर आपके फोन की बैटरी अचानक बहुत तेजी से खत्म होने लगी है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कई बार स्पाइवेयर या वायरस फोन में छिपकर काम करते रहते हैं। ये ऐप लगातार इंटरनेट का उपयोग करते हैं और फोन की बैटरी को तेजी से खत्म कर देते हैं।

अगर आपको लगता है कि फोन की बैटरी पहले से ज्यादा तेजी से खत्म हो रही है, तो अपने फोन में इंस्टॉल ऐप्स को जांचना जरूरी है।

3. अजीब मैसेज या कॉल

अगर आपके फोन से बिना आपकी जानकारी के किसी को मैसेज भेजे जा रहे हैं या कॉल किए जा रहे हैं, तो यह एक बड़ा संकेत हो सकता है कि आपका फोन हैक हो गया है। कई साइबर अपराधी ऐसे मैलवेयर का इस्तेमाल करते हैं जो फोन को रिमोट से कंट्रोल कर सकते हैं।

इस स्थिति में तुरंत अपने फोन की जांच करें और संदिग्ध ऐप को हटाएं।

4. अनजान ऐप दिखाई देना

अगर आपके मोबाइल में ऐसे ऐप दिखाई देते हैं जिन्हें आपने डाउनलोड नहीं किया है, तो यह खतरे की घंटी हो सकती है। कई बार हैकर फोन में छुपे हुए ऐप इंस्टॉल कर देते हैं जो आपकी जानकारी चुरा सकते हैं।

ऐसे में फोन की ऐप लिस्ट को ध्यान से देखें और अनजान ऐप को तुरंत डिलीट करें।

5. इंटरनेट डेटा तेजी से खत्म होना

अगर आपके फोन का इंटरनेट डेटा सामान्य से ज्यादा तेजी से खत्म हो रहा है, तो यह भी एक संकेत हो सकता है। कई बार हैकिंग के दौरान ऐप बैकग्राउंड में आपकी जानकारी इंटरनेट के जरिए किसी दूसरे सर्वर पर भेजते रहते हैं।

इससे आपका डेटा तेजी से खत्म होने लगता है और फोन की परफॉर्मेंस भी खराब हो जाती है।

मोबाइल को हैकिंग से सुरक्षित कैसे रखें

मोबाइल को सुरक्षित रखने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां अपनानी चाहिए।

  • केवल भरोसेमंद ऐप ही डाउनलोड करें।

  • फोन को हमेशा अपडेट रखें।

  • किसी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें।

  • पब्लिक वाई-फाई का इस्तेमाल करते समय सावधानी रखें।

  • फोन में मजबूत पासवर्ड और स्क्रीन लॉक का उपयोग करें।

इन सावधानियों को अपनाकर आप अपने मोबाइल को हैकिंग से सुरक्षित रख सकते हैं।

निष्कर्ष

आज के डिजिटल युग में मोबाइल फोन हमारी जिंदगी का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। इसलिए इसकी सुरक्षा बेहद जरूरी है। अगर आपको ऊपर बताए गए संकेत दिखाई दें, तो तुरंत सतर्क हो जाएं और अपने फोन की जांच करें। थोड़ी सी सावधानी आपको बड़ी परेशानी से बचा सकती है।

आलोक कुमार

Jharkhand : खूंटी में आखिर चल क्या रहा है?

खूंटी में आखिर चल क्या रहा है? अमन-चैन पर मंडराता खतरा खूंटी में एक के बाद एक सामने आ रही हिंसक घटनाएं और उनके विरोध में हो रहे प्रदर्शन कई ...