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India : सच की कलम का सम्मान—लिज़ मैथ्यू को भारतीय कैथोलिक प्रेस पुरस्कार

 सच की कलम का सम्मान—लिज़ मैथ्यू को भारतीय कैथोलिक प्रेस पुरस्कार


पत्रकारिता केवल खबरें लिखने का पेशा नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा को जीवित रखने का दायित्व भी है। ऐसे समय में जब मीडिया की निष्पक्षता, विश्वसनीयता और साहस पर लगातार सवाल उठ रहे हैं, वरिष्ठ पत्रकार Liz Mathew को प्रतिष्ठित Indian Catholic Press Award 2026 से सम्मानित किया जाना न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि उन सभी पत्रकारों के लिए प्रेरणा है जो सत्य और जनहित को सर्वोपरि मानते हैं।

बेंगलुरु में 2 अगस्त 2026 को आयोजित समारोह में उन्हें पत्रकारिता में उत्कृष्टता (Excellence in Journalism) के लिए सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके लगभग तीन दशक लंबे पत्रकारिता जीवन में राजनीतिक रिपोर्टिंग, संसद, चुनाव, सरकारी नीतियों और सार्वजनिक मामलों पर किए गए निष्पक्ष एवं प्रभावशाली कार्यों की स्वीकृति है।

यह पुरस्कार भारतीय कैथोलिक प्रेस एसोसिएशन (ICPA) और मुंबई प्रांत के सेल्सियन ऑफ डॉन बॉस्को द्वारा संयुक्त रूप से प्रदान किया जाता है। यह सम्मान उन पत्रकारों और संस्थानों को दिया जाता है जिन्होंने साहस, ईमानदारी और सत्य के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का परिचय दिया हो। यह पुरस्कार सेल्सियन मिशनरी, लेखक और संचारक Fr. Louis Careno की स्मृति को भी समर्पित है।

लिज़ मैथ्यू की पत्रकारिता यात्रा वर्ष 1997 के आसपास मलयालम के प्रतिष्ठित समाचार पत्र दीपिका से शुरू हुई। इसके बाद उन्होंने अंग्रेज़ी पत्रकारिता में कदम रखा और नई दिल्ली में राजनीतिक रिपोर्टिंग के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने 1996 से 2024 के बीच आठ लोकसभा चुनावों की रिपोर्टिंग की तथा देश के लगभग सभी राज्यों के विधानसभा चुनावों को भी नज़दीक से कवर किया। उनकी रिपोर्टिंग केवल घटनाओं का विवरण नहीं रही, बल्कि सत्ता और जनता के बीच एक भरोसेमंद सेतु का काम करती रही।

उन्होंने India Abroad, Indo Asian News Service (IANS), Asian News International (ANI) और Mint जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाईं। उनके लेखन की विशेषता रही है—तथ्यों की गहराई, राजनीतिक समझ और निष्पक्ष दृष्टिकोण।

आज जब पत्रकारिता का एक बड़ा हिस्सा टीआरपी, सनसनी और सोशल मीडिया की होड़ में उलझा दिखाई देता है, तब लिज़ मैथ्यू जैसी पत्रकार यह याद दिलाती हैं कि पत्रकार का सबसे बड़ा दायित्व सत्ता से सवाल पूछना, लोकतंत्र को मजबूत करना और समाज के प्रति जवाबदेह रहना है।

यह सम्मान केवल एक पत्रकार का नहीं, बल्कि उस पत्रकारिता का सम्मान है जो सत्य को सुविधा से ऊपर रखती है। युवा पत्रकारों के लिए लिज़ मैथ्यू का जीवन यह संदेश देता है कि ईमानदार, धैर्यपूर्ण और जनपक्षधर पत्रकारिता का मूल्य आज भी कायम है और समाज उसे सम्मान देना जानता है।

सच की राह कठिन हो सकती है, लेकिन अंततः सम्मान उसी कलम को मिलता है जो सत्ता नहीं, सत्य की पक्षधर होती है।

आलोक कुमार

India : राजस्थान में स्किल इंडिया और RSLDC: चुनौतियों के बीच नए अवसरों की तलाश


राजस्थान में स्किल इंडिया और RSLDC: क्या कौशल विकास से मिलेगा स्थायी रोजगार या अभी बाकी हैं कई चुनौतियां?

भारत आज दुनिया की सबसे युवा आबादी वाले देशों में शामिल है। यह जनसांख्यिकीय शक्ति देश के लिए एक बड़ा अवसर भी है और चुनौती भी। यदि युवाओं को उनकी क्षमता के अनुरूप कौशल, प्रशिक्षण और रोजगार उपलब्ध कराया जाए तो वे देश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं। लेकिन यदि यह विशाल युवा वर्ग बेरोजगार या अल्परोजगार की स्थिति में रहता है तो यह सामाजिक और आर्थिक दोनों दृष्टियों से चिंता का विषय बन सकता है। इसी सोच के साथ केंद्र सरकार ने स्किल इंडिया मिशन की शुरुआत की, जबकि राजस्थान सरकार ने राजस्थान कौशल एवं आजीविका विकास निगम (RSLDC) के माध्यम से राज्य के लाखों युवाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण देने का अभियान चलाया।

पिछले कुछ वर्षों में राजस्थान के विभिन्न जिलों में हजारों प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से युवाओं को इलेक्ट्रिकल, प्लंबिंग, कंप्यूटर, हेल्थकेयर, हॉस्पिटैलिटी, रिटेल, ब्यूटी एंड वेलनेस, ऑटोमोबाइल सहित अनेक क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया गया। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल प्रमाणपत्र देना नहीं, बल्कि युवाओं को रोजगार योग्य बनाना था। हालांकि, इस प्रयास के बावजूद यह सवाल लगातार उठता रहा है कि क्या प्रशिक्षण वास्तव में स्थायी रोजगार और बेहतर आय में बदल पा रहा है?

सबसे बड़ी चुनौती प्रशिक्षण के बाद रोजगार यानी प्लेसमेंट की रही है। सरकारी रिपोर्टों में बड़ी संख्या में युवाओं को प्रशिक्षित और नियोजित दिखाया जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति हमेशा इतनी संतोषजनक नहीं दिखती। अनेक युवाओं को प्रशिक्षण के बाद निजी कंपनियों में कम वेतन वाली नौकरियां मिलती हैं, जहां कार्य परिस्थितियां भी अपेक्षाकृत कठिन होती हैं। कई बार शुरुआती वेतन इतना कम होता है कि रहने, आने-जाने और अन्य खर्चों के बाद बचत लगभग नहीं के बराबर रह जाती है। परिणामस्वरूप अनेक युवा कुछ महीनों के भीतर नौकरी छोड़ देते हैं और फिर बेरोजगारी की स्थिति में लौट आते हैं। इससे प्रशिक्षण पर खर्च किए गए सरकारी संसाधनों का अपेक्षित लाभ भी नहीं मिल पाता।

दूसरी गंभीर चुनौती प्रशिक्षण केंद्रों में पारदर्शिता और गुणवत्ता की रही है। समय-समय पर ऐसे आरोप सामने आए हैं कि कुछ संस्थानों ने केवल कागजों पर प्रशिक्षण दिखाकर सरकारी अनुदान प्राप्त किया। कहीं डमी छात्रों के नाम पर फर्जी उपस्थिति दर्ज की गई तो कहीं प्रशिक्षण की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई। यदि इस प्रकार की अनियमितताओं पर समय रहते कठोर कार्रवाई नहीं होती, तो पूरी कौशल विकास प्रणाली की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। इसलिए केवल नए केंद्र खोलना पर्याप्त नहीं, बल्कि उनकी नियमित निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है।

एक अन्य महत्वपूर्ण समस्या उद्योगों की बदलती आवश्यकताओं और प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों के बीच बढ़ती दूरी है। आज वैश्विक अर्थव्यवस्था तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग, साइबर सुरक्षा, क्लाउड कंप्यूटिंग, डेटा एनालिटिक्स, रोबोटिक्स, ऑटोमेशन और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसी आधुनिक तकनीकों की ओर बढ़ रही है। इसके विपरीत कई प्रशिक्षण केंद्रों में अब भी पुराने पाठ्यक्रमों पर अधिक जोर दिया जाता है। परिणामस्वरूप प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं के कौशल और उद्योगों की वास्तविक मांग के बीच अंतर बना रहता है। यह अंतर रोजगार की संभावनाओं को सीधे प्रभावित करता है।

इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए राजस्थान सरकार ने हाल के वर्षों में कई सुधारात्मक कदम उठाए हैं। नई राजस्थान स्किल डेवलपमेंट पॉलिसी के तहत आधुनिक तकनीकों को प्राथमिकता देने का प्रयास किया गया है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, साइबर सिक्योरिटी, डिजिटल टेक्नोलॉजी, डेटा साइंस और उभरते तकनीकी क्षेत्रों में प्रशिक्षण को विशेष महत्व दिया गया है। यदि इन पाठ्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है और उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप नियमित रूप से अपडेट किया जाता है, तो यह राज्य के युवाओं को भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए बेहतर तरीके से तैयार कर सकता है।

राजस्थान सरकार ने विश्वस्तरीय स्किल हब और इंटरनेशनल स्किलिंग सेंटर विकसित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की है। इन केंद्रों का उद्देश्य केवल राज्य या देश के भीतर रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि युवाओं को अंतरराष्ट्रीय रोजगार बाजार के लिए भी तैयार करना है। खाड़ी देशों, यूरोप, जापान और अन्य विकसित देशों में कुशल श्रमिकों की बढ़ती मांग को देखते हुए यह पहल रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकती है। यदि प्रशिक्षण के साथ भाषा कौशल, अंतरराष्ट्रीय मानकों और कार्य संस्कृति की जानकारी भी दी जाए, तो राजस्थान के युवाओं की वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भागीदारी और मजबूत हो सकती है।

स्थानीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए भी कई विशेष कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। उदाहरण के लिए 'सोलर दीदी' जैसी पहल के माध्यम से महिलाओं को सौर ऊर्जा उपकरणों की स्थापना और रखरखाव का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे न केवल महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ रही है, बल्कि हरित ऊर्जा क्षेत्र में भी नए अवसर विकसित हो रहे हैं। इसी प्रकार पर्यटन की दृष्टि से समृद्ध राजस्थान में प्रशिक्षित टूरिस्ट गाइड, होटल प्रबंधन, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक सेवाओं से जुड़े कौशलों को बढ़ावा दिया जा रहा है। यदि इन कार्यक्रमों का विस्तार जिला स्तर तक किया जाए, तो स्थानीय रोजगार सृजन को नई गति मिल सकती है।

हालांकि, केवल नई योजनाओं की घोषणा कर देना पर्याप्त नहीं होगा। सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता इनके प्रभावी, पारदर्शी और परिणाम आधारित क्रियान्वयन की है। प्रशिक्षण केंद्रों में बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली, थर्ड पार्टी ऑडिट, डिजिटल मॉनिटरिंग, प्रशिक्षकों के नियमित मूल्यांकन और प्लेसमेंट के बाद युवाओं की वास्तविक स्थिति की समीक्षा जैसी व्यवस्थाएं अनिवार्य की जानी चाहिए। इससे फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी और सरकारी धन का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित होगा।

इसके साथ ही उद्योगों और प्रशिक्षण संस्थानों के बीच मजबूत साझेदारी विकसित करना समय की मांग है। यदि उद्योग स्वयं पाठ्यक्रम निर्माण, प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण, अप्रेंटिसशिप और इंटर्नशिप कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी करें, तो युवाओं को वास्तविक कार्य अनुभव मिलेगा और रोजगार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। प्रत्येक जिले की स्थानीय अर्थव्यवस्था के अनुसार कौशल विकास कार्यक्रम तैयार किए जाने चाहिए। जहां पर्यटन प्रमुख है वहां पर्यटन आधारित प्रशिक्षण, जहां खनन उद्योग विकसित है वहां तकनीकी और सुरक्षा प्रशिक्षण तथा कृषि प्रधान क्षेत्रों में कृषि प्रसंस्करण, डेयरी, खाद्य उद्योग और एग्री-टेक आधारित कौशल को प्राथमिकता दी जा सकती है।

आज के समय में केवल नौकरी ही सफलता का एकमात्र विकल्प नहीं है। कौशल विकास कार्यक्रमों को स्वरोजगार और उद्यमिता से भी जोड़ना आवश्यक है। यदि प्रशिक्षण के साथ आसान ऋण, स्टार्टअप सहायता, डिजिटल मार्केटिंग, ई-कॉमर्स, वित्तीय प्रबंधन और व्यवसाय संचालन का प्रशिक्षण भी दिया जाए, तो अनेक युवा स्वयं उद्यमी बनकर दूसरों के लिए रोजगार के अवसर पैदा कर सकते हैं। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

अंततः यह कहा जा सकता है कि राजस्थान में स्किल इंडिया मिशन और RSLDC ने कौशल विकास की दिशा में एक मजबूत आधार तैयार किया है। अब आवश्यकता इस आधार को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण, उद्योगों की सक्रिय भागीदारी, पारदर्शिता, आधुनिक तकनीक और परिणाम आधारित निगरानी के माध्यम से और मजबूत बनाने की है। जब प्रशिक्षण सीधे सम्मानजनक रोजगार, बेहतर आय और स्थायी आजीविका में परिवर्तित होगा, तभी इन योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य पूरा होगा। यदि राजस्थान इस दिशा में निरंतर सुधार करता है, तो वह न केवल अपने युवाओं के भविष्य को मजबूत करेगा, बल्कि देश के लिए कौशल विकास का एक प्रभावी और प्रेरणादायक मॉडल भी बन सकता है।

आलोक कुमार

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