शनिवार, 26 मार्च 2022

ईसाई समुदाय के लोग भक्ति भाव से शामिल हुए

पटना.संत मेरी चर्च,फ्रेंड्स कॉलोनी (ए.जी. कॉलोनी) में एस.के.लॉरेंस के नेतृत्व में शुक्रवार को ‘मुसीबत‘ नामक गीत एवं प्रार्थना का भक्तिमय कार्यक्रम संपन्न हुआ.ईसाई समुदाय के द्वारा गुड फ्राइडे की तैयारी के संबंध में प्रार्थना तथा भक्तिमय कार्यक्रम जारी है.यह 2 मार्च से प्रारम्भ हुआ है. इसी क्रम में एस.के. लॉरेंस के नेतृत्व में अन्य ईसाई बहुल इलाका के अलावा आज संत मेरी चर्च, फ्रेंड्स कॉलोनी (ए.जी.कॉलोनी)में पहली बार प्रभु येसु के दुःखभोग से संबंधित उनकी कष्टमय यातना भरी यात्रा तथा उनके सूली पर चढ़ाए जाने का वृतांत ‘मुसीबत‘ नामक गीत तथा प्रार्थना के भक्तिमय कार्यक्रम के जरिये संपन्न हुआ.जिसमें काफी संख्या में वहां के ईसाई समुदाय के लोग भक्ति भाव से शामिल हुए. 

इस ‘मुसीबत‘ नामक गायन में विभिन्न क्षेत्रों से आए गायन मंडली के बहुत सारे भक्तजन शामिल हुए.जिनमें एस.के. लॉरेंस के साथ पुरुष गायकों में क्लारेंस हेनरी, इग्नासियुस पीटर, सिरिल मरान्डी, सुजीत ओस्ता,विजय कुमार पॉल, एम्ब्रोस जॉन,जॉर्ज विन्सेंट माइकल, प्रकाश अब्राहम,प्रदीप केरोबिन,प्रवीण साह,रॉड्रिक


इग्नासियुस तथा महिला गायकों में  रोजी इग्नासियुस, रोजलिन पॉल,करुणा कमल,रीता अगस्टीन,आग्नेस जॉर्ज, किरण लुसी तथा रोजलिन के नाम उल्लेखनीय हैं. 

इस चर्च के पैरिश कौन्सिल के सभी मेम्बर तथा भक्त जनों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कर श्रद्धा पूर्वक इस कार्यक्रम में भाग लिया.पहली बार सुन रहे सभी उपस्थित भक्तजनों को यह ‘मुसीबत‘ गीत बहुत ही अच्छा लगा. इस कार्यक्रम से पहले पल्ली पुरोहित फादर जोसेफ राज ने साढ़े पाँच बजे मिस्सा किया.


आलोक कुमार


यूक्रेन एवं रूस को कुँवारी मरियम के निष्कलंक हृदय को समर्पित किया


संत पेत्रुस वासिलिका में यूक्रेन और रूस में शांति कायम करने के लिए पोप फ्रांसिस ने पवित्र मिस्सा अर्पित किया.यूक्रेन में युद्ध को शुरू हुए लगभग एक महीना बीत चुका है, जो प्रतिदिन अपने पीड़ित लोगों को भारी पीड़ा दे रहा है और विश्व शांति के लिए खतरा है. इस अंधेरे समय में, चर्च को तत्काल शांति के राजकुमार के सामने हस्तक्षेप करने और संघर्ष से सीधे प्रभावित लोगों के साथ अपनी निकटता प्रदर्शित करने के लिए

बुलाया जाता है.मैं उन बहुत से लोगों का आभारी हूं जिन्होंने प्रार्थना, उपवास और दान के लिए मेरी अपील पर बड़ी उदारता से प्रतिक्रिया दी है.

संत पापा फ्राँसिस ने 25 मार्च, संत मरियम को स्वर्गदूत के संदेश के महापर्व के दिन सारी मानव जाति, खासकर, यूक्रेन एवं रूस को कुँवारी मरियम के निष्कलंक हृदय को समर्पित किया तथा कहा कि यह समर्पण यूक्रेन में ‘क्रूर एवं अनर्थक‘ युद्ध के बीच कुँवारी मरियम पर पूर्ण भरोसा की अभिव्यक्ति है.


आलोक कुमार

गुरुवार, 24 मार्च 2022

माता मरिया के निष्कलंक हृदय को रूस और यूक्रेन का समर्पण

 


आज ही के दिन 24 फरवरी को रूस ने यूक्रेन पर हमलाकर महायुद्ध का आगाज किया था.एक माह के बाद भी युद्धविराम का ओरशोर मालूम नहीं हो रहा है.मानवाधिकार हनन को देखते हुए संत पापा ने प्रभु येसु ख्रीस्त की मां मरियम को मध्यक्षता करने के लिए आग्रहरूपी प्रार्थना करने का आह्वान किया है.विश्व के जानेमाने हस्ति संत पापा फ्राँसिस ने विश्वव्यापी कलीसिया के सभी ख्रीस्तीय विश्वासियों का आह्वान किया है कि वे 25 मार्च को यूक्रेन एवं रूस को माता मरियम के निष्कलंक हृदय को समर्पण की प्रार्थना में भाग लेकर शांति के लिए प्रार्थना करें.इसकी याद दिलाते हुए उन्होंने 24 मार्च को एक ट्वीट प्रेषित कर कहा, ‘आइये हम प्रभु के शरीरधारण के संदेश के महापर्व पर प्रार्थना दिवस को मनाने हेतु अपने आपको तैयार करें, ईश्वर की माता से प्रार्थना करने कि वे युद्ध की क्रूरता से पीड़ित लोगों के हृदयों को ऊपर उठायें.उनके निष्कलंक हृदय को समर्पण की विन्ती दुनिया में शांति लाये‘

आलोक कुमार

अंतर आत्मा की आवाज है धर्म परिवर्तन

 


हरियाणा.बीजेपी शासित राज्य उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक और हरियाणा में जबरन धर्मांतरण कानून लागू है.हरियाणा विधानसभा से बिल पास हो गया है. मंगलवार (22 मार्च 2022) को दो घंटे की चर्चा के बाद सदन ने इस पर मुहर लगाई.कांग्रेस ने इसका विरोध किया. उसके सदस्य सदन से वॉक आउट कर गए.
                                       
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बिल पर बोलते हुए कहा कि इसका उद्देश्य किसी धर्म के साथ भेदभाव करना नहीं है, ये केवल जबरन धर्मांतरण की बात करता है. विधेयक में उन विवाहों को अमान्य घोषित करने का प्रावधान है, जो पूरी तरह से एक धर्म से दूसरे धर्म में धर्मांतरण के उद्देश्य से किए गए थे.                               

 सरकार ने जबरन धर्मांतरण के विरुद्ध विधेयक में कड़े प्रावधान किए हैं.हरियाणा गैर-कानूनी धर्मांतरण रोकथाम विधेयक, 2022 के मुताबिक, अगर लालच, बल या धोखाधड़ी के जरिए धर्म परिर्वतन किया जाता है तो एक से पाँच साल तक की सजा और कम से कम एक लाख रुपए के जुर्माना का प्रावधान है.विधेयक के मुताबिक, जो भी नाबालिग या महिला अथवा अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के व्यक्ति का धर्म परिवर्तन कराता है या इसका प्रयास करता है तो उसे कम से कम चार साल जेल का सजा मिलेगी, जिसे बढ़ाकर 10 साल और कम से कम तीन लाख रुपए का जुर्माना किया जा सकता है.

जबरन धर्मांतरण साबित होने पर अधिकतम दस साल कैद व न्यूनतम पाँच लाख रुपए का जुर्माना होगा.इसके अलावा यदि शादी के लिए धर्म छुपाया जाता है तो 3 से 10 साल तक की जेल और कम से कम 3 लाख रुपए जुर्माना लगेगा.वहीं सामूहिक धर्म परिवर्तन के संबंध में 5 से 10 साल तक की जेल और कम से कम 4 लाख रुपए के जुर्माने का प्रावधान है.इस विधेयक के तहत किया गया प्रत्येक अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती होगा.  
        
हरियाणा कैबिनेट ने धर्मांतरण रोकथाम विधेयक 2022 को पहले ही इजाजत दे दी थी. 4 मार्च 2022 को गृह मंत्री अनिल विज ने इस संबंध में विधानसभा में बिल पेश किया था.बता दें कि हरियाणा के गृहमंत्री अनिल विज ने इस बिल को लेकर पहले कहा था कि भारत के संविधान की अनुच्छेद 25, 26, 27 और 28 के तहत सभी को धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार है. लोगों को किसी भी धर्म के चयन करने का अधिकार और आजादी है. इसके बावजूद जबरन धर्मांतरण के मामले सामने आए हैं और इसी को देखते हुए हरियाणा सरकार ये कानून लेकर आई है.

विश्व हिंदू परिषद ने राज्य सरकार के इस कदम की सराहना की थी.वीएचपी के संयुक्त महामंत्री सुरेंद्र जैन ने कहा था कि इस बिल से राज्य सरकार ने अपने दृढ़ संकल्प को दिखाया है.उल्लेखनीय है कि इससे पहले उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश में यह कानून बन चुका है.
             
कांग्रेस की वरिष्ठ नेता किरण चौधरी ने इसे हरियाणा के इतिहास का 'काला अध्याय ' बताया. मंत्री ने कहा कि यह विधेयक सांप्रदायिक विभाजन को गहरा करेगा और भविष्य में इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं.कांग्रेस के एक अन्य वरिष्ठ नेता रघुवीर सिंह कादियान ने कहा कि इस विधेयक को लाने की कोई जल्दबाजी नहीं है और यह विभाजनकारी राजनीति की बू आ रही है, जो कि ‘नहीं है, अच्छा‘.  यह अंतर आत्मा की आवाज है धर्म परिवर्तन. लाख कानून बनाने के बावजूद भी ईश्वरीय बुलाहट आने पर बदल ही जाएंगे.  
               
 मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने स्पष्ट किया कि ये विधेयक किसी व्यक्ति को इच्छा पूर्वक धर्म परिवर्तन पर रोक नहीं लगाता है. बशर्ते, इसके लिए उसे जिला मजिस्ट्रेट को आवेदन करना होगा.उन्होंने कहा कि धर्म परिवर्तन का आयोजन करने का आशय रखने वाला कोई भी धार्मिक पुरोहित अथवा अन्य व्यक्ति जिला मजिस्ट्रेट को आयोजन स्थल की जानकारी देते हुए पूर्व में नोटिस देगा.इस नोटिस की एक प्रति जिला मजिस्ट्रेट के कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर चस्पा की जाएगी. यदि किसी व्यक्ति को आपत्ति है तो वह 30 दिनों के भीतर लिखित में अपनी आपत्ति दायर कर सकता है. जिला मजिस्ट्रेट जांच करके यह तय करेगा कि धर्म-परिवर्तन का आशय धारा-3 की उल्लंघना है या नहीं है.सामूहिक धर्म परिवर्तन के संबंध में इस विधेयक की धारा-3 के उपबंधों की उल्लंघना करने पर 5 से 10 साल तक के कारावास और कम से कम 4 लाख रुपए के जुर्माने का दण्ड दिया जाएगा.यदि कोई संस्था अथवा संगठन इस अधिनियम के उपबंधों की उल्लंघना करत है तो उसे भी इस अधिनियम की धारा-12 के अधीन दंडित किया जाएगा और उस संस्था अथवा संगठन का पंजीकरण भी रद्द कर दिया जाएगा. इस अधिनियम की उल्लंघन करने का अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती होगा.

आलोक कुमार

बुधवार, 23 मार्च 2022

एस.के.लौरेंस के नेतृत्व में प्रभु येसु के दुखभोग से सम्बन्धित मुसीबत गायन करते लोग

 

पटना. कुर्जी पल्ली में एक भक्त हैं.उनका नाम है शैल कुमार लौरेंस. मगर शैल कुमार लौरेंस एस.के.लौरेंस के नाम से विख्यात हैं.एस.के.लौरेंस के नेतृत्व में प्रत्येक साल प्रभु येसु ख्रीस्त के दुखभोग के अवसर पर मुसीबत नामक गीत तथा प्रार्थना प्रस्तुत की जाती है.परम्परागत गीत को घर-घर पहुंचाने का श्रेय एस.के.लौरेंस और उनकी टीम को जाता है. आज बुधवार 23 मार्च को पूर्व सूचनानुसार फेयर फील्ड कॉलोनी में फ्रैंक अन्थोनी के निवास स्थान पर प्रभु येसु के दुखभोग  से सम्बन्धित मुसीबत नामक गीत,तथा प्रार्थना का  भक्तिमय कार्यक्रम सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ.जिसमें कॉलोनी के काफी लोग भक्तिभाव से शामिल हुए.

गुड फ्राईडे से सम्बन्धित चालीसा के दिनों में पूर्व की तरह प्रत्येक बुधवार तथा शुक्रवार को एस.के.लौरेंस  के नेतृत्व में भक्त जनों के सहयोग से मुसीबत नामक गीत तथा प्रार्थना का भक्तिमय प्रार्थना प्रारम्भ 02 मार्च 2022 से प्रारम्भ हो गया.यह मुसीबत गायन बारह वर्षों से ईसाई बहुल इलाकों तथा चर्चों में एस.के.लौरेंस  के नेतृत्व में सफलता पूर्वक  कराया जा रहा है.इसी क्रम में 02 मार्च को पहला मुसीबत गायन रिचर्ड अब्राहम के निवास स्थान चश्मा सेंटर गली, कुर्जी में भक्तिभाव से एस.के.लौरेंस के नेतृत्व में सम्पन्न हुआ. इस भक्तिमय गीत को गाने में एस.के.लौरेंस  के अलावा इग्नासियूस पीटर,श्रीमती रोसलिन इ.पीटर,रिचर्ड अब्राहम,सिरील मरान्डी,करुणा कमल,अलका पौल,रंजीत,प्रकाश अब्राहम तथा कई भक्तजनों का साथ रहा.इस दौरान हाल में बांस कोठी के निवासी,जो इस गीत के पुराने तथा अच्छे गायक थे,उनके तथा रूस द्वारा युक्रेन में किये जा रहे आक्रमण में भारतीय छात्र की मृत्यु पर शोक प्रकट करते हुए इनकी आत्मा को शान्ति प्रदान की गई तथा युक्रेन में जल्द युद्ध की समाप्ति एवं विश्वभर के ईसाइयों की सुरक्षा तथा विश्व शान्ति के लिये प्रार्थना की गई.

आलोक कुमार

मंगलवार, 22 मार्च 2022

शांति की रानी हमें शांति प्राप्त करने में मदद करेंगे


रोम. संत पापा फ्राँसिस ने 22 मार्च के ट्वीट संदेश में प्रार्थना के लिए, निमंत्रण देते हुए लिखा, ‘मैं हरेक समुदाय एवं सभी विश्वासियों को निमंत्रण देता हूँ कि आप शुक्रवार 25 मार्च को, प्रभु के शरीरधारण के संदेश के पर्व पर, मेरे साथ मानवता के खासकर रूस और यूक्रेन का, कुँवारी मरियम के निष्कलंक हृदय को समर्पण में एकजुट हों, ताकि शांति की रानी हमें शांति प्राप्त करने में मदद करेंगे.‘

शुक्रवार 25 मार्च 2022 को शाम 5.00 बजे संत पापा फ्राँसिस, संत पेत्रुस महागिरजाघर में मेल-मिलाप, पापस्वीकार एवं पाप क्षमा तथा कुँवारी मरियम के निष्कलंक हृदय को समर्पण की धर्मविधि सम्पन्न करेंगे.  

जो कार्डिनल, धर्माध्यक्ष एवं धर्माधिकारी इस समारोह में भाग लेना चाहते हैं उन्हें सूचित किया गया है कि वे 4.30 बजे तक पापस्वीकार की वेदी पर अपना स्थान ग्रहण कर लें.

आलोक कुमार

पटना महाधर्मप्रांत के बक्सर और पूर्णिया धर्मप्रांत में बिशप का पद रिक्त है

 

   *   अगर रोम में रहने वाले महामहिम पोप के द्वारा किसी योग्य पुरोहित को मोनसिन्योर बनाया जाता  


रोमन कैथोलिक में अगर किसी बिशप के रिटायरमेंट होने के पहले वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जाती है तो ऐसी हालात पर पोप के द्वारा वहां पर रिटायर होने वाले बिशप को ही प्रेरितिक प्रशासक नियुक्त कर दिया जाता है.इन दिनों पटना महाधर्मप्रांत के बक्सर और पूर्णिया धर्मप्रांत में बिशप का पद रिक्त है.दोनों धर्मप्रांतों में रोम के द्वारा वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गयी.जानकार लोगों का कहना है कि पटना महाधर्मप्रांत के गठन के बाद बिशप के रिटायर होने के पूर्व रोम के द्वारा वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गयी है. बेतिया धर्मप्रांत में वयोवृद्ध फादर लौरेंस पास्कल को प्रेरितिक प्रशासक बनाकर रखा गया.इसके बाद भागलपुर से पीटर सेबास्टियन गोबियए को बिशप पद पर बैठाया गया.इसके पहले मुजफ्फरपुर धर्मप्रांत में फादर विलियम डिसूजा को प्रेरितिक प्रशासक बनाया गया.उसके बाद फ्रांसिस काजीटेन को बिशप बनाया गया.आजतक पटना महाधर्मप्रांत में रोम के द्वारा वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में किसी योग्य पुरोहित को मोनसिन्योर नहीं बनाया गया.इस समय सेवानिवृत महाधर्माध्यक्ष विलियम डिसूजा को बक्सर धर्मप्रांत का प्रेरितिक प्रशासक बनाकर रोम के द्वारा काम निकाला जा रहा है.इस तरह बिशप पद पाने वाले पुरोहितों की उम्मीदों पर वज्रपात हो रहा है.


आलोक कुमार

सोमवार, 21 मार्च 2022

बीजेपी में दूरदूर जाकर कार्य व पदभार संभालेंगे


 आज राजन क्लेमेंट साह का हैप्पी बर्थडे है. जन्मदिन की शुभकामनाएं और बधाई देने वालों में मंत्री रेणु देवी, विधायक डाॅ.संजीव चौधरी,बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रांतीय अध्यक्ष तुफैल कादरी आदि ने दी है

पटना.आज राजन क्लेमेंट साह का हैप्पी बर्थडे है. जन्मदिन की शुभकामनाएं और बधाई देने वालों में बिहार की उपमुख्यमंत्री मंत्री रेणु देवी, विधायक डाॅ.संजीव चौधरी,,बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रांतीय अध्यक्ष तुफैल कादरी आदि ने दी है. 

आप बिहारी ईसाई होने के बावजूद भी भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण किये हैं.आपके शानदार करतब के कारण ही भारतीय जनता पार्टी के अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष पद काबिज हैं.ईसाइयों के बीच पैठ होने के कारण चुनाव के समय अतिरिक्त दायित्व देकर झारखंड और गोवा भेजे गये.वहां आपने बेहतर दायित्व निभाया.

माननीय प्रधानमंत्री के जन्मोत्सव पर आयोजित कार्यक्रम को सफलता से मनाने के लिए पश्चिम चम्पारण के प्रभारी बनाये गये.वहां पर बीजेपी के झंडा मजबूती से लहराया.

आज जन्मदिन के दिन राजन क्लेमेंट साह   सोशल मीडिया में छा गये हैं.शुभचिंतक व आम से खास लोग राजन क्लेमेंट साह को ईसाइयों का नेता घोषित कर चुके हैं.आशा करते हैं कि बीजेपी में दूरदूर जाकर कार्य व पदभार संभालेंगे.

आलोक कुमार

रविवार, 20 मार्च 2022

दुनिया के सभी धर्माध्यक्ष रूस और यूक्रेन को माता मरियम के निष्कलंक हृदय को समर्पित करेंगे

पटना.संत पापा फ्राँसिस रूस और यूक्रेन के बीच 25 दिनों से जारी यु़द्ध को लेकर परेशान हैं.संत पापा फ्राँसिस ने 13 मार्च को देवदूत प्रार्थना के उपरांत पूरी कलीसिया को शांति के लिए प्रार्थना करने के लिए आमंत्रित किया था.‘ मैं सभी धर्मप्रांतों और धार्मिक समुदायों से शांति के लिए प्रार्थना के अपने समय को बढ़ाने के लिए आमंत्रित करता हूँ.‘ और बुधवार, 23 फरवरी को आम दर्शन समारोह में उन्होंने यूक्रेन में शांति के लिए राख बुधवार 2 मार्च को प्रार्थना और उपवास के दिन का आह्वान करते हुए कहा था, ‘शांति की रानी दुनिया को युद्ध के पागलपन से बचाए. 


अब संत पापा फ्राँसिस ने पूरी दुनिया के धर्माध्यक्षों को अपने पुरोहितों के साथ रूस और यूक्रेन को माता मरियम के निष्कलंक हृदय को समर्पण धर्मविधि और शांति के लिए प्रार्थना में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है.25 मार्च शनिवार की शाम 5 बजे से संत पेत्रुस महागिरजाघर में पश्चात की धर्मविधि समारोह में शामिल होने को कहा है.दुनिया के सभी धर्माध्यक्ष रूस और यूक्रेन को माता मरियम के निष्कलंक हृदय को समर्पित करेंगे.

बताया जा रहा है कि शुक्रवार, 25 मार्च की शाम 5 बजे संत पेत्रुस महागिरजाघर में संत पापा फ्राँसिस पश्चताप की धर्मविधि समारोह के दौरान रूस और यूक्रेन को माता मरियम के निष्कलंक हदय को समर्पित करेंगे. उसी दिन उसी समय संत पापा के दानदाता कार्डिनल कोनराड क्रेजेवस्की, फातिमा में रूस और यूक्रेन को माता मरियम के निष्कलंक हृदय को समर्पित करेंगे. उसी दिन दुनिया के सभी धर्माध्यक्ष रूस और यूक्रेन को माता मरियम के निष्कलंक हृदय को समर्पित करेंगे.

फातिमा में 13 जुलाई 1917 को माता मरिया ने दर्शन देकर अपने निष्कलंक हृदय में रूस का समर्पण और पहले शनिवार को पश्चताप की धर्मविधि का अनुष्ठान करने के लिए कहा था.अगर यह नहीं किया गया तो रूस ‘दुनिया भर में अपनी गलतियों और युद्धों को फैलाएगा, कलीसिया में उत्पीड़न को बढ़ाएगा.अच्छे लोग शहीद हो जायेंगे, संत पापा को बहुत कुछ भुगतना होगा, विभिन्न राष्ट्रों को नष्ट कर दिया जाएगा.‘

फातिमा में माता मरिया के दर्शन देने के बाद माता मरियम के बेदाग दिल को समर्पण के विभिन्न धर्मविधि सम्पन्न किये गये. संत पापा पियुस बारहवें ने 31 अक्टूबर 1942 को पूरी दुनिया को समर्पित किया और साम्यवादी शासन में रहने के लिए मजबूर ईसाइयों की कठिन स्थिति को देखते हुए 7 जुलाई 1952 को प्रेरितिक पत्र ‘साक्रो वेर्जेंटे आन्नो’ में उन्होंने रूस के लोगों को माता मरियम के निष्कलंक हृदय को समर्पित किया.

21 नवंबर 1964 को संत पापा पॉल षष्टम ने द्वितीय वाटिकन परिषद के धर्माध्यक्षों की उपस्थिति में माता मरिया के निष्कलंक हृदय को रूस के समर्पण को नवीनीकृत किया.संत पापा जॉन पॉल द्वितीय  ने 7 जून 1981 को संत मरिया मेजर महागिरजाघर में पेंतेकोस्त के मिस्सा समारोह पर मनाए जाने वाले,’समर्पण धर्मविधि’ के लिए एक प्रार्थना की रचना की.जून 2000 में, परमधर्मपीठ ने फातिमा के रहस्य के तीसरे भाग का खुलासा किया.

उस समय, विश्वास एवं धर्म सिद्धांत के लिए बने परमधर्मपीठीय सम्मेलन के सचिव, तत्कालीन महाधर्माध्यक्ष तर्सिसियो बर्तोने ने बताया कि सिस्टर लूसिया ने 1989 के एक पत्र में व्यक्तिगत रूप से पुष्टि की थी कि समर्पण का यह गंभीर और सार्वभौमिक धर्मविधि माता मरिया की इच्छा के अनुरूप है. दर्शन देखने वाली सिस्टर लूसिया ने लिखा, ‘जैसा कि माता मरियम ने 25 मार्च 1984 को जो कहा था, सबकुछ उसी के अनुरुप किया गया.‘और अब इस वर्ष, 25 मार्च को, संत पापा फ्राँसिस दुनिया भर के धर्माध्यक्षों के साथ रूस और यूक्रेन को माता मरयम के बेदाग हृदय को समर्पित करेंगे.

आलोक कुमार


स्थानीय चर्चों को पुनर्जीवित करने के लिए धर्मसभा का उपयोग किया है


पटना.प्रेरितों की रानी ईश मंदिर को पटना प्रोविंश के द्वारा जेसुइट पुरोहितों के द्वारा संचालित किया जाता है.यहां पर हाल के दिनों में पुरोहित बने फादर राजीव रंजन पदस्थापित हैं.पटना प्रोविंश के फादर प्रोविंशियल डोनाल्ड जे मिरांडा ने फादर राजीव रंजन को अतिरिक्त कार्यभार दिये हैं.वे युवा अपोस्तोलेट के सदस्य हैं.युवा अपोस्तोलेट का सभापति फादर प्रकाश एंथोनी हैं. फादर प्रकाश एंथोनी और फादर राजीव रंजन ने मिलकर धर्म महासभा पर शानदार ढंग से संगोष्ठी आयोजित की.इसमें कुर्जी पल्ली के 30 युवाओं ने हिस्सा लिये. 

धर्म महासभा को तीन सत्र में बांटा गया था. प्रथम सत्र में फादर अनील ने धर्म महासभा पर विचार व्यक्त किये.द्वितीय चरण में फादर एंथोनी और फादर राजीव रंजन ने मिलकर टीम वर्क पर विचार व्यक्त किये.तृतीय चरण में सामूहिक चर्चा की गयी और कार्ययोजना बनायी गयी. कार्ययोजना पर ज्यादा चर्चा नहीं हुई.अपने जीवन को कैसे सवारना है.करियर गाइडेंस और पल्ली के उनकी जिम्मेवारी के बारे में बताया गया.

बताते चले कि धर्म महासभा आधिकारिक नाम हैः ‘एक धर्मसभा के लिए चर्च‘ कम्युनियन, भागीदारी और मिशन‘ संत पापा फ्राँसिस द्वारा पूरे चर्च को इस ‘धर्मसभा प्रक्रिया‘ के लिए बुलाए जाने से पहले ही, दुनिया भर के कई बिशपों ने अपने स्थानीय चर्चों को पुनर्जीवित करने के लिए धर्मसभा का उपयोग किया है.इसके आलोक में युवाओं को दिशानिर्देश देने के संगोष्ठी का आयोजन किया गया है.

फादर राजेश जेकब भाजू ने पवित्र मिस्स अर्पित किये. मिस्सा के बाद भोजन किया गया.इसके बाद संगोष्ठी में शामिल युवाओं को तरूमित्र और संत जेवियर काॅलेज का भ्रमण करवाया गया.

आलोक कुमार





 

ईश सेवक फादर कॉन्सटंट लीवंस के भारत आगमन की 137 वीं वर्षगांठ और वार्षिक तीर्थयात्रा आयोजित

 राँची .आज  हुलहुण्डू पल्ली के जमगाई गाँव में  राँची में ईश सेवक फादर कॉन्सटंट लीवंस  के भारत आगमन की 137 वीं वर्षगांठ और वार्षिक तीर्थयात्रा आयोजित की गयी.सभी पल्लीवासियों को  विशेष रूप से पल्ली पुरोहित और युवा साथियों को आज के सफल संचालन के लिए बहुत - बहुत  बधाई दी गयी.


ईश सेवक फादर कॉन्सटंट लीवंस  ने 19 मार्च 1885 ई. को जमगाई गाँव में पाँव रखा था और वहीं से छोटानागपुर के लोगों की सेवा करना आरम्भ किया था.उन्होंने अपना सारा जीवन छोटानागपुर के गरीब और कमजोर लोगों की मदद करने में बिताया. उनकी स्मृति में हर साल जमगाई में ‘लीवन्स डे‘ मनाया जाता है.

राँची महाधर्मप्रांत महाधर्माध्यक्ष फेलिक्स टोप्पो एवं सह अनुष्ठाता सहायक धर्माध्यक्ष थेओदोर मसकरेन्स ने ईश सेवक फादर कॉन्सटंट लीवन्स को श्रद्धांजलि देते हुए माल्यार्पण किया एवं मशाल प्रज्वलित किया. तत्पश्चात् फादर कॉन्सटंट लीवंस  की संक्षिप्त जीवनी प्रस्तुत की गई। परमप्रसाद के बाद ईश सेवक फादर कॉन्सटंट लीवंस  की धन्य घोषणा के लिए विशेष प्रार्थना की गई.महाधर्माध्यक्ष फेलिक्स टोप्पो एस.जे. ने अपने संदेश में कहा कि फादर लीवन्स कोन्सटण्ट ने जो विश्वास का बीज 137 साल पहले बोया था उसे हमें आगे बढ़ाना है और उसे जीने का प्रयत्न करना है. उन्होंने हमारे पूर्वजों को जमीनदारों के चंगुल से छुड़ाया और सी.एन.टी एवं एस.पी.टी एक्ट को लागू करवाने में भी उनकी अहम भूमिका रही है.

राँची के सहायक धर्माध्यक्ष थेओदोर मसकरेन्स ने ईश सेवक फादर कॉन्सटंट लीवंन्स एवं ईश सेविका माता मेरी बेर्नादेत्त की संत घोषणा की प्रक्रिया की जानकारी दी और कहा कि उनकी संत घोषणा के लिए हर घर, समाज और पल्ली में प्रार्थना करना है.

फादर कॉन्सटंट लीवन्स ईश्वर के प्रेम की आग से प्रज्वलित थे. उनमें ईश्वर की शक्ति को स्पष्ट देखा जा सकता है. उनका जन्म 10 अप्रैल 1856 को बेल्जियम के मूरसेलेदे में हुआ था.मानव सेवा से प्रेरित होकर उन्होंने 1878 में येसु समाज में प्रवेश किया और 1880 में मिशनरी बनकर भारत आये. 1883 में पुरोहित अभिषेक के बाद उन्होंने कुछ समय के लिए पढ़ाई में व्यतीत किया उसके बाद 1885 में छोटानागपुर आये.छोटानागपुर जो आज झारखंड कहलाता है उन दिनों वहाँ के लोग जमीनदारों के चंगुल में थे एवं गरीबी, अशिक्षा, अन्याय, अत्याचार आदि कई विकट समस्याओं का सामना कर रहे थे.फादर लीबंस ने छोटनागपुर में साल सालों की अपनी प्रेरिताई में दिन-रात मेहनत कर बहुत सारे लोगों को जमीनदारों के चंगुल से छुड़ाया और उनके बीच ख्रीस्त की ज्योति जलायी.


कठोर परिश्रम और त्याग करने के कारण वे अधिक दिन छोटानागपुर में नहीं रह पाये और 7 नवम्बर 1893 को 37 साल की उम्र में बेल्जियम में उनका निधन हो गया। उनके पवित्र अवशेष को 7 नवम्बर 1993 को राँची लाया गया तथा संत मरिया महागिरजाघर में स्थापित किया गया है.

फादर कॉन्सटंट लीवंस का छोटानागपुर पदार्पण और हमारे पूर्वजों का मनफिराव एक ऐतिहासिक घटना है। बेल्जियम मिशनरी येसु संघी फादर कोन्सटंट लीवंस छोटानागपुर में बहुत कम समय के लिए अपनी मिशनरी सेवाएं दी। उनकी समर्पित मिशनरी सेवा और सुसमाचार प्रचार का प्रभाव था कि सात साल में 80 हजार लोगों ने मनफिराव कर ख्रीस्त को अंगीकार किया, इसलिए उन्हें छोटानागपुर के प्रेरित भी कहा जाता है.   

हुलहुण्डू पल्ली के जमगाई गाँव में इस मौके पर संत अन्ना की पुत्रियाँ, उर्सुलाईन की धर्मबहनें, हुलहुण्डू के पल्ली पुरोहित फादर हुबेर्तुस बेक, काथलिक सभा के सभापति राजन तिरू, प्रचारक साइमन तिरू, अनिमा, सि. एमरेंसिया और भारी संख्या में विभिन्न धर्मसमाजों के पुरोहित, धर्मबंधु, धर्मबहनें और हजारों की संख्या में विश्वासी उपस्थित थे. कार्यक्रम का समापन प्रीति भोज से किया गया.

आलोक कुमार  


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