राँची .आज हुलहुण्डू पल्ली के जमगाई गाँव में राँची में ईश सेवक फादर कॉन्सटंट लीवंस के भारत आगमन की 137 वीं वर्षगांठ और वार्षिक तीर्थयात्रा आयोजित की गयी.सभी पल्लीवासियों को विशेष रूप से पल्ली पुरोहित और युवा साथियों को आज के सफल संचालन के लिए बहुत - बहुत बधाई दी गयी.
ईश सेवक फादर कॉन्सटंट लीवंस ने 19 मार्च 1885 ई. को जमगाई गाँव में पाँव रखा था और वहीं से छोटानागपुर के लोगों की सेवा करना आरम्भ किया था.उन्होंने अपना सारा जीवन छोटानागपुर के गरीब और कमजोर लोगों की मदद करने में बिताया. उनकी स्मृति में हर साल जमगाई में ‘लीवन्स डे‘ मनाया जाता है.
राँची महाधर्मप्रांत महाधर्माध्यक्ष फेलिक्स टोप्पो एवं सह अनुष्ठाता सहायक धर्माध्यक्ष थेओदोर मसकरेन्स ने ईश सेवक फादर कॉन्सटंट लीवन्स को श्रद्धांजलि देते हुए माल्यार्पण किया एवं मशाल प्रज्वलित किया. तत्पश्चात् फादर कॉन्सटंट लीवंस की संक्षिप्त जीवनी प्रस्तुत की गई। परमप्रसाद के बाद ईश सेवक फादर कॉन्सटंट लीवंस की धन्य घोषणा के लिए विशेष प्रार्थना की गई.महाधर्माध्यक्ष फेलिक्स टोप्पो एस.जे. ने अपने संदेश में कहा कि फादर लीवन्स कोन्सटण्ट ने जो विश्वास का बीज 137 साल पहले बोया था उसे हमें आगे बढ़ाना है और उसे जीने का प्रयत्न करना है. उन्होंने हमारे पूर्वजों को जमीनदारों के चंगुल से छुड़ाया और सी.एन.टी एवं एस.पी.टी एक्ट को लागू करवाने में भी उनकी अहम भूमिका रही है.
राँची के सहायक धर्माध्यक्ष थेओदोर मसकरेन्स ने ईश सेवक फादर कॉन्सटंट लीवंन्स एवं ईश सेविका माता मेरी बेर्नादेत्त की संत घोषणा की प्रक्रिया की जानकारी दी और कहा कि उनकी संत घोषणा के लिए हर घर, समाज और पल्ली में प्रार्थना करना है.
फादर कॉन्सटंट लीवन्स ईश्वर के प्रेम की आग से प्रज्वलित थे. उनमें ईश्वर की शक्ति को स्पष्ट देखा जा सकता है. उनका जन्म 10 अप्रैल 1856 को बेल्जियम के मूरसेलेदे में हुआ था.मानव सेवा से प्रेरित होकर उन्होंने 1878 में येसु समाज में प्रवेश किया और 1880 में मिशनरी बनकर भारत आये. 1883 में पुरोहित अभिषेक के बाद उन्होंने कुछ समय के लिए पढ़ाई में व्यतीत किया उसके बाद 1885 में छोटानागपुर आये.छोटानागपुर जो आज झारखंड कहलाता है उन दिनों वहाँ के लोग जमीनदारों के चंगुल में थे एवं गरीबी, अशिक्षा, अन्याय, अत्याचार आदि कई विकट समस्याओं का सामना कर रहे थे.फादर लीबंस ने छोटनागपुर में साल सालों की अपनी प्रेरिताई में दिन-रात मेहनत कर बहुत सारे लोगों को जमीनदारों के चंगुल से छुड़ाया और उनके बीच ख्रीस्त की ज्योति जलायी.
कठोर परिश्रम और त्याग करने के कारण वे अधिक दिन छोटानागपुर में नहीं रह पाये और 7 नवम्बर 1893 को 37 साल की उम्र में बेल्जियम में उनका निधन हो गया। उनके पवित्र अवशेष को 7 नवम्बर 1993 को राँची लाया गया तथा संत मरिया महागिरजाघर में स्थापित किया गया है.
फादर कॉन्सटंट लीवंस का छोटानागपुर पदार्पण और हमारे पूर्वजों का मनफिराव एक ऐतिहासिक घटना है। बेल्जियम मिशनरी येसु संघी फादर कोन्सटंट लीवंस छोटानागपुर में बहुत कम समय के लिए अपनी मिशनरी सेवाएं दी। उनकी समर्पित मिशनरी सेवा और सुसमाचार प्रचार का प्रभाव था कि सात साल में 80 हजार लोगों ने मनफिराव कर ख्रीस्त को अंगीकार किया, इसलिए उन्हें छोटानागपुर के प्रेरित भी कहा जाता है.
हुलहुण्डू पल्ली के जमगाई गाँव में इस मौके पर संत अन्ना की पुत्रियाँ, उर्सुलाईन की धर्मबहनें, हुलहुण्डू के पल्ली पुरोहित फादर हुबेर्तुस बेक, काथलिक सभा के सभापति राजन तिरू, प्रचारक साइमन तिरू, अनिमा, सि. एमरेंसिया और भारी संख्या में विभिन्न धर्मसमाजों के पुरोहित, धर्मबंधु, धर्मबहनें और हजारों की संख्या में विश्वासी उपस्थित थे. कार्यक्रम का समापन प्रीति भोज से किया गया.
आलोक कुमार
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