मलयट्टूर. ईसाई मिशनरियों के द्वारा ऐसा कहा जाता है कि “भारत मे ईसाइयत का आगमन ईसा मसीह के बारह प्रेरितों (शिष्यों) में से एक थोमस के द्वारा अरब की खाड़ी पार कर भारत में आने के साथ ही शुरु हो गया था. सन् 52 ईं. मे केरल के क्रान्गानोर नामक जगह पर पहुँचे, जहाँ से उन्होंने भारत के तटीय इलाकों में सुसमाचार प्रचार किया. सर्वप्रथम मालावार तट के ब्राह्मणों के बीच उसने प्रचार किया और उनके प्रभाव से कई ब्राह्मणों ने ईसाइयत को ग्रहण किये.
संत थॉमस चर्च, मलयट्टूर के विकर जनरल का कहना है कि मलयट्टूर में स्थित पहाड़ पर संत थोमस चढ़े थे.वहां पर संत थोमस का पैरों का निशान है.जो पवित्र स्थान और दर्शनीय स्थल बन गया है.केरल एवं अन्य राज्यों के भक्तगण दर्शन करने आते हैं.जमीन से लेकर पहाड़ की चोटी तक प्रकाश की व्यवस्था कर दी गयी है.रात में आसानी से दर्शन किया जा सकता है.यहां संत थोमस चर्च भी है.
बताते चले कि प्रत्येक दिन भक्तगण पहाड़ की चोटी तक जाते हैं. इस समय यानी प्रभु येसु ख्रीस्त के दुखभोग अवधि में भक्तों की संख्या अधिक हो जाती है. पहाड़ पर चढ़ते समय भक्तगण कूस का रास्ता तय करते चलते जाते हैं. नीचे से चोटी तक चढ़ने में दिक्कत होती है. जगह-जगह ठहर तक प्रार्थना करते आगे बढ़ते हैं.पहाड़ की चोटी पर चढ़कर संत थोमस के पैर के निशान देखकर सभी तरह की दिक्कत भूल जाते हैं.
इस बीच संत थोमस चर्च, मलयट्टूर के द्वारा विशेष व्यवस्था की गयी है.मलयट्टूर कुरीसुमुदी तीर्थयात्रा का समय जारी कर दिया गया है.यह बताया गया कि आज 18.03.2022, शुक्रवार से, जब तक हम आगे की घोषणा नहीं करते, तीर्थयात्री दिन के 24 घंटे कुरीसुमुदी शिखर पर जा सकते हैं.रात्रि तीर्थयात्रा के लिए सभी आवश्यक प्रकाश व्यवस्था की गई है. तीर्थयात्रियों का हार्दिक स्वागत है.केरल को 'ईश्वर का अपना घर' कहा जाता है. भगवान आप सबको आशीर्वाद दें. संत थॉमस हम सभी के लिए हस्तक्षेप करें और स्वर्ग से आशीर्वाद बरसाएं.
इस ऐतिहासिक स्थल का दीदार आलोक कुमार भी हुए हैं.
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