फादर किनले शेरिंग, भूटान के पहले और अब तक के एकमात्र मूल-निवासी कैथोलिक पादरी
भूटान .भूटान, जहाँ सदियों से बौद्ध धर्म सांस्कृतिक आत्मा की तरह समाज को संचालित करता आया है, वहाँ कैथोलिक समुदाय की उपस्थिति भले ही अल्पसंख्या में हो—लेकिन इसकी आध्यात्मिक गूंज अत्यंत गहरी है.रोम में पोप के आध्यात्मिक नेतृत्व से जुड़ा यह समुदाय दार्जिलिंग (भारत) के धर्मप्रांत के अधिकार क्षेत्र में आता है, और 2015 के अनुमान के अनुसार भूटान में कुल कैथोलिकों की संख्या मात्र 1,200 है. लेकिन इस छोटे से समुदाय की धड़कन एक ऐसे व्यक्ति से जुड़ी है, जिसकी कहानी भूटान के धार्मिक-सामाजिक इतिहास में अपूर्व स्थान रखती है—फादर किनले शेरिंग, भूटान के पहले और अब तक के एकमात्र मूल-निवासी कैथोलिक पादरी. फादर शेरिंग की यात्रा एक साधारण धार्मिक कथा नहीं, बल्कि अंतरात्मा में उठी पुकार, सामाजिक दबावों से जूझते विश्वास, और आध्यात्मिक साहस की एक असाधारण दास्तान है। एक धर्मनिष्ठ बौद्ध परिवार में जन्मे और युवावस्था में उद्यमिता की राह पर बढ़ते हुए उन्होंने गुप्त रूप से ईसा मसीह की शिक्षाओं का अध्ययन शुरू किया—वह अध्ययन जो धीरे-धीरे उनके भीतर एक बेचैनी, एक अज्ञात खिंचाव और अंततः एक गहर...