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India : भारत के लिए विज्ञान के क्षेत्र में एक बेहद गौरवपूर्ण खबर

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बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के बेतिया के होनहार छात्र सांचित पटेल  भारत के लिए विज्ञान के क्षेत्र में एक बेहद गौरवपूर्ण खबर सामने आई है। बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के बेतिया के होनहार छात्र सांचित पटेल ने इंटरनेशनल जूनियर साइंस ओलंपियाड (IJSO) 2026 के लिए भारतीय टीम में जगह बनाकर पूरे बिहार का नाम रोशन कर दिया है। यह उपलब्धि केवल सांचित और उनके परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार और देश के लिए गर्व का विषय बन गई है। इंटरनेशनल जूनियर साइंस ओलंपियाड दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित विज्ञान प्रतियोगिताओं में से एक मानी जाती है। इसमें भौतिकी, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान जैसे विषयों में छात्रों की वैज्ञानिक क्षमता, तार्किक सोच और समस्या समाधान कौशल की कठिन परीक्षा होती है। इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए छात्रों को कई स्तरों की कठिन चयन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। पूरे भारत से लाखों छात्र इस प्रतियोगिता के लिए प्रयास करते हैं, लेकिन अंततः केवल छह सर्वश्रेष्ठ छात्रों का चयन भारतीय टीम के लिए किया जाता है। ऐसे में सांचित पटेल का चयन यह साबित करता है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर या महंगे स...

India : वर्ष 2024 में गोवा सरकार ने TCP अधिनियम में संशोधन कर इस धारा को जोड़ा

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गोवा नगर एवं ग्राम नियोजन अधिनियम यानी Goa Town and Country Planning (TCP) Act की धारा 39A गोवा इस समय सिर्फ एक पर्यटन स्थल या समुद्री तटों के लिए ही चर्चा में नहीं है, बल्कि वहाँ का पर्यावरण, भूमि और विकास नीति एक बड़े जनआंदोलन का कारण बन चुकी है। विवाद का केंद्र है गोवा नगर एवं ग्राम नियोजन अधिनियम यानी Goa Town and Country Planning (TCP) Act की धारा 39A। यह धारा इतनी विवादित हो चुकी है कि सामाजिक कार्यकर्ता, पर्यावरण प्रेमी, किसान, स्थानीय निवासी और चर्च से जुड़े लोग तक इसके विरोध में सड़क पर उतर आए हैं। आंदोलन के दौरान नेतृत्व कर रहे फादर बोलमैक्स का निधन भी हो गया, लेकिन इसके बावजूद आंदोलन थमा नहीं है। लोगों की मांग आज भी स्पष्ट है—धारा 39A को पूरी तरह समाप्त किया जाए। सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि धारा 39A आखिर है क्या। वर्ष 2024 में गोवा सरकार ने TCP अधिनियम में संशोधन कर इस धारा को जोड़ा। इस संशोधन के तहत “मुख्य नगर नियोजक” (Chief Town Planner) को अत्यधिक अधिकार दे दिए गए। अब वे किसी भी जमीन के टुकड़े का “लैंड यूज़” यानी उपयोग बदल सकते हैं। उदाहरण के लिए यदि कोई जमीन कृषि क्षे...

World :दुनिया में मुस्लिम समुदाय द्वारा मनाया जाने वाला पवित्र पर्व

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आज 28 मई को पूरी दुनिया में मुस्लिम समुदाय द्वारा मनाया जाने वाला पवित्र पर्व ईद-उल-अजहा यानी बकरीद आस्था, त्याग, समर्पण और इंसानियत का महान संदेश लेकर आया है। यह इस्लाम धर्म के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक माना जाता है। भारत सहित विश्व के अनेक देशों में मुस्लिम भाई-बहन इस पर्व को पूरे उत्साह, श्रद्धा और धार्मिक परंपराओं के साथ मना रहे हैं। बकरीद केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि यह त्याग, बलिदान, करुणा और मानवता का प्रतीक है। यह त्योहार हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति केवल शब्दों से नहीं, बल्कि त्याग और सेवा से सिद्ध होती है। इस दिन लोग अल्लाह के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं तथा समाज में प्रेम और भाईचारे का संदेश फैलाते हैं। इस पर्व का संबंध हजरत इब्राहिम और उनके पुत्र हजरत इस्माइल की महान कुर्बानी से जुड़ा हुआ है। इस्लामी मान्यता के अनुसार, अल्लाह ने हजरत इब्राहिम की परीक्षा लेने के लिए उनसे उनके सबसे प्रिय पुत्र की कुर्बानी मांगी। हजरत इब्राहिम ने बिना किसी संकोच के अल्लाह की आज्ञा का पालन करने का निश्चय किया। जब वे अपने पुत्र की कुर्बानी देने जा रहे थे, तब अल्लाह ने उनकी...

India : एक कुशल लेखक, कवि, समाज सुधारक और विचारक भी थे “वीर सावरकर”

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  28 मई : इतिहास, विज्ञान, राजनीति और संस्कृति का विशेष दिन 28 मई ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार वर्ष का 148वाँ दिन (लीप वर्ष में 149वाँ दिन) होता है। वर्ष समाप्त होने में अभी 217 दिन शेष रहते हैं। इतिहास के पन्नों में यह दिन अनेक महत्वपूर्ण घटनाओं, महान व्यक्तित्वों के जन्म, वैज्ञानिक उपलब्धियों और सामाजिक परिवर्तनों के कारण विशेष महत्व रखता है। भारत ही नहीं बल्कि विश्व इतिहास में भी 28 मई कई ऐसे प्रसंगों का साक्षी रहा है, जिन्होंने मानव सभ्यता की दिशा को प्रभावित किया। भारत के संदर्भ में 28 मई का महत्व भारत के लिए 28 मई का दिन विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इसी दिन आधुनिक भारत के महान राष्ट्रवादी नेता और हिंदुत्व विचारधारा के प्रमुख चिंतक Vinayak Damodar Savarkar का जन्म हुआ था। उनका जन्म 28 मई 1883 को महाराष्ट्र के नासिक जिले में हुआ था। उन्हें “वीर सावरकर” के नाम से जाना जाता है। सावरकर केवल स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं थे, बल्कि एक कुशल लेखक, कवि, समाज सुधारक और विचारक भी थे। उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ क्रांतिकारी आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। काला पानी की सज...