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ग्रामोद्योग के माध्यम से पिछड़े गांवों का चहुंमुखी विकास किया जाए


नवादा.नवादा जिले के सेखोदेवरा गांव में लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने 1954 में सर्वोदय आश्रम की स्थापना की थी. उनकी अवधारणा थी कि ग्रामोद्योग के माध्यम से पिछड़े गांवों का चहुंमुखी विकास किया जाए.इसी सिलसिले में जेपी ने ग्राम निर्माण मंडल निर्मित किया था.जेपी के अधूरे सपने को ग्राम निर्माण मंडल के द्वारा साकार किया जा रहा है.वहीं उसमें बिहार वाटर डेवलपमेंट सोसाइटी का भी सहयोग मिल रहा है.

   बता दें कि लोकनायक जय प्रकाश नारायण ने आश्रम को अपनी कर्मभूमि बनाया.जेपी का स्थापित सर्वोदय आश्रम 86 एकड़ भू-भाग में फैला हुआ है. वहां लोक नायक जयप्रकाश नारायण की अविस्मरणीय स्मृतियों को संजोकर रखा गया है. सरकार की उपेक्षापूर्ण नीति के जेपी का यह धरोहर फिलहाल सम्यक विकास नहीं कर सका है.जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सेखोदेवरा गांव है.

         लोग बताते हैं कि सेखो और देवरा नामक दो टोलाओं के संयोजन से सेखोदेवरा गांव का निर्माण हुआ. आश्रम में ग्राम स्वराज्य, स्वदेशी, भ्रष्टाचारमुक्त और लोकतंत्र की कल्पना करने वाले विचारों की खुशबू मिलती है.जेपी द्वारा निर्मित ग्राम निर्माण मंडल संस्था के सचिव अरविंद कुमार बताते हैं कि यह आश्रम लगभग 86 एकड़ में फैला हुआ है. इसमें खादी ग्राम उद्योग, प्रशिक्षण केंद्र, छात्रावास और कृषि विज्ञान केंद्र है. जिसका संचालन ग्राम निर्माण मंडल की ओर से किया जाता है. इसमें प्रशिक्षण देने वाले अध्यापक और कर्मचारियों के रहने के लिये आवास सभी सुविधाएं उपलब्ध थी. जब सरकार की ओर से ग्रांट मिलना बंद हो गया, तो काम करने वाले कर्मचारी यहां से पलायन कर गए.

      बिहार वाटर डेवलपमेंट सोसाइटी के ग्लोबल प्रोग्राम के समन्वयक श्री जौन डीकूज ने कहा कि हमलोगों ने ग्राम निर्माण मंडल, सेखोदेवरा के डा० राजेन्द्र प्रसाद हाॅल मे जिला स्तरीय इन्टर ग्रूप एजेन्सी का गठन पर कार्यशाला आयोजित किया था. 

इस कार्यक्रम मे जिला विकास आयुक्त श्री दीपक कुमार मिश्रा जी ने आनलाइन मिटिंग मे भाग लिए. उन्होंने कहा कि ग्लोबल प्रोग्राम द्वारा किए गए कार्य सराहनीय है.मुझे खुशी है कि बिहार वाटर डेवलपमेंट सोसाइटी के द्वारा कौवाकोल प्रखंड के बीस गांव मे अच्छे कार्य किए जा रहे है. इंटर ग्रुप एजेंसी के गठन की प्रक्रिया के बारे में बताया और आश्वासन दिया कि मैं इस ग्रुप के गठन मे सहयोग दूंगा.

          इस बीच ग्लोबल प्रोग्राम के समन्वयक श्री जौन डीकूज ने पावर पॉइंट के द्वारा बिहार वाटर डेवलपमेंट सोसाइटी के द्वारा प्रभावशाली ढंग से किए गए कार्य के विषय मे जानकारी दी. साथ ही कम अवधि के धान की सीधी बुवाई और उसके उत्पादन के विषय में बतलाया. उन्होंने तड़ित चालक के विषय मे भी जानकारी दी.

     आगे ग्लोबल प्रोग्राम के समन्वयक श्री जौन डीकूज ने कहा कि बिहार वाटर डेवलपमेंट सोसाइटी के द्वारा 20 गांव मे तड़ित चालक लगाया गया है.ये जमीन से 40 फीट ऊंचा है.ये तड़ित चालक 132 फीट के गोल चक्र मे वज्रपात होने पर उसे अरेस्ट कर जमीन मे डिस्चार्ज कर देगा.इस कार्यक्रम मे बिहार वाटर डेवलपमेंट सोसाइटी के निदेशक फादर दिनेश कुमार, ग्राम निर्माण मंडल के सचिव आदि के साथ ग्रामीण मौजूद थे.


आलोक कुमार

सरकारी कर्मचारियों को लगभग 50 दिनों से अधिक सरकारी छुट्टियां मिल रही

 

पटना.प्रत्येक साल सरकार के द्वारा नए साल के पूर्व सरकारी छुट्टियों का ऐलान कर दिया जाता है.सरकारी कर्मचारियों को लगभग 50 दिनों से अधिक सरकारी छुट्टियां मिल रही हैं.इस बीच नीतीश कुमार सरकार ने एक अहम फैसले के तहत इस साल सितंबर से दिसंबर तक की सरकारी स्कूलों की छुट्टियों को संशोधित किया है.इसका जोरदार ढंग से विरोध किया जा रहा है.

बताया जाता है की छुट्टियों की सूची में गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस, गांधी जयंती, क्रिसमस, बुद्ध पूर्णिमा, दशहरा, दिवाली, गुड फ्राइडे, गुरु नानक जयंती, ईद उल फितर, ईद उल जुहा, महावीर जयंती, मुहर्रम और पैगंबर मुहम्मद का जन्मदिन शामिल है.साप्ताहिक अवकाश (Weekly Off), आकस्मिक अवकाश (CL), अर्जित अवकाश (EL), चिकित्सा अवकाश (Medical leave), मातृत्व अवकाश (Maternity Leave), पितृत्व अवकाश (Paternity leave) वगैरह. हर छुट्टी के लिए अलग-अलग नियम होते हैं और हर छुट्टी को लेने की न्यूनतम और अधिकतम संख्या भी निर्धारित होती है.       

इस बीच बिहार की नीतीश कुमार सरकार ने एक अहम फैसले के तहत इस साल सितंबर से दिसंबर तक की सरकारी स्कूलों की छुट्टियों को संशोधित किया है.शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक के आने के बाद सरकारी विद्यालयों के बच्चों पर सीधा असर डालने वाला यह पहला फैसला है. इसका पहला असर यही है कि रक्षा बंधन पर भी माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों के बच्चों को स्कूल जाना पड़ेगा.          

इसके साथ ही दशहरा, दीपावली और लोक आस्था के महापर्व छठ की छुट्टियां भी काटी गई हैं. अभी से दिसंबर तक की 23 में से 12 छुट्टियों को खत्म किया गया है. विभाग ने विद्यालयों में 220 कार्यदिवसों के पूरा नहीं होने के कारण बच्चों पर पड़ रहे प्रभाव को इस फैसले का कारण बताया है.

       प्रारंभिक से उच्च माध्यमिक विद्यालयों तक में 31 अगस्त को राखी के दिन अवकाश नहीं रहेगा. दुर्गापूजा में छह दिनों की छुट्टी घोषित थी, इसे अब दो दिन कर दिया गया है. रविवार को जोड़कर यह तीन दिन होगा.बिहार के लोक पर्व की तैयारियों के मद्देनजर दीपावली से छठ तक लगातार छुट्टी रहती है. इस बार 13 नवंबर से 21 नवंबर तक कुल नौ दिनों की छुट्टी दिख रही थी, लेकिन अब इनकी संख्या चार हो गई है.दीपावली के दिन 12 नवंबर को छुट्टी रहेगी. फिर 15 नवंबर को चित्रगुप्त पूजा व गोवर्धन पूजा के दिन. इसके बाद 19 और 20 नवंबर को छठ का अवकाश रहेगा.       

 यह देखा जा रहा है कि राज्य सरकार के ताजा आदेश के तहत चेहल्लुम पर 6 सितंबर, मोहम्मद साहब से जन्मदिन और अनंत चतुर्दशी पर 28 सितंबर, महात्मा गांधी की जयंती 2 अक्टूबर और क्रिसमस डे पर 25 दिसंबर को मिलने वाली छुट्टी अप्रभावित रहती है.

       विभाग का कहना है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत प्राथमिक विद्यालयों में कम-से-कम 200 दिन, माध्यमिक विद्यालयों में 220 दिन का कार्यदिवस जरूरी है. चुनाव, परीक्षा, त्योहार, भीषण गर्मी, भीषण ठंड, बाढ़ आदि के कारण विद्यालयों की पढ़ाई प्रभावित होती है.इसके साथ ही त्योहारों के मौके पर विद्यालयों के बंद होने की प्रक्रिया में भी एकरूपता नहीं है.इसलिए वर्ष 2023 के शेष अवकाशों में यह बदलाव किया गया है.

           इस संदर्भ में पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि सरकारी स्कूलों में रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, ज्यूतिया जैसे प्रमुख हिंदू पर्व-त्योहारों पर छुट्टी रद्द करना और नवरात्रि, दीपावली से छठ तक की छुट्टी में कटौती करना राज्य सरकार की हिंदू-विरोधी मानसिकता का परिणाम है.

       श्री मोदी ने कहा कि शिक्षा विभाग के अवर मुख्य सचिव ने एक और मनमाने फैसले से बिहार की छवि और संस्कृति पर आघात किया है.

              उन्होंने कहा कि जब चेहल्लुम और मोहम्मद साहब के जन्मदिन की छुट्टी बरकरार रखी गई और यह होना भी चाहिए, तब भगवान कृष्ण की जयंती (जन्माष्टमी), गुरु नानक जयंती (कार्तिक पूर्णिमा) और बिहार केसरी श्री बाबू की जयंती पर छुट्टी समाप्त क्यों गई?

            श्री मोदी ने कहा कि सरकार को स्कूली बच्चों के मन पर विपरीत प्रभाव डालने वाले और सांस्कृतिक सद्भाव बिगाड़ने वाले फैसले को तत्काल वापस लेना चाहिए.

            उन्होंने कहा कि बिहार की पहचान जिस लोकपर्व छठ से होती है, उसकी छुट्टी भी काट दी गई.दीपावली से छठ पूजा के बीच 9 दिन की छुट्टी को घटाकर 4 दिन कर दिया गया. यह बहुत ही आपत्तिजनक है.यह स्वीकार्य नहीं है.

          श्री मोदी ने कहा कि जिस शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE ACT) के तहत 220 दिन की पढ़ाई सुनिश्चित करने का तर्क देकर केवल हिंदू-सिख त्योहारों पर चोट की गई , उसी कानून की धारा-27 ई शिक्षकों को शिक्षणेत्तर कार्यों में लगाने से रोकती है, ताकि पढ़ाई बाधित नहीं हो.

       उन्होंने कहा कि सरकार ने इस कानून का उल्लंघन कर शिक्षकों को जातीय सर्वे, मिड डे मील, मतदाता सूची पुनरीक्षण आदि में लगाकर पढाई के कई महीने बर्बाद किये.इसका जिम्मेदार कौन है?

           श्री मोदी ने कहा कि टीचर से नॉन-टीचिंग काम करने से पढ़ाई बाधित हो रही है न कि पर्व-त्योहार की छुट्टियों के कारण और अगर ऐसे अवसरों पर स्कूल खुलेंगे भी तो कौन बच्चा स्कूल जाएगा?

       उन्होंने कहा कि जब तक शिक्षा विभाग से वर्तमान अवर मुख्य सचिव हटाये नहीं जायेगे, तब तक इसी प्रकार बिहार की किरकिरी होती रहेगी.

 आलोक कुमार 

देश का प्रधानमंत्री पिछले 10 सालों में कभी प्रेस वार्ता नहीं की

 देश की मीडिया पक्षाघात का शिकारः डा0 अखिलेश

मोदी सरकार ने मीडिया को बनाया गुलामः डा0 अखिलेश प्रसाद सिंह

देश देख रहा मोदी के अधीन मीडिया का गोदी रूपः डॉ. अखिलेश प्रसाद सिंह



पटना। एक प्रजातांत्रिक देश में मीडिया का क्या महत्व होता है यह किसी से छुपा हुआ नहीं है। मीडिया प्रजातंत्र का चौथा स्तम्भ है, लेकिन यह चौथा स्तंभ पक्षाघात का शिकार हो गया है। देश की मीडिया गोदी मीडिया बन गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दमनकारी प्रवृत्ति के कारण भारतीय मीडिया बधियाकरण का शिकार हो गया है।

                       ये बातें बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष डॉ. अखिलेश प्रसाद सिंह ने मुजफ्फरपुर स्थित एल.एस. कॉलेज में आयोजित ‘फर्स्टलुक बिहार डिजिटल मीडिया’ के उद्घाटन के दौरान कही।

             उन्होंने कहा कि प्रेस की आजादी को भारतीय संविधान में इसलिए सुनिश्चित की गयी ताकि देश के नागरिक को यह पता चल सके कि जिन नुमाइंदों को उन्होंने चुन कर भेजा है वे कर क्या रहे हैं। सरकार का कामकाज कैसा चल रहा है, उसकी नीति क्या है, और उसकी नीयत क्या है। सही अर्थ में प्रेस का काम है सरकार की कमियों को उजागर करना, उनकी नीतियों की कमियों को जनता तक पहुंचाना और सरकार से सवालों का जवाब तलब करना। देश का प्रधानमंत्री पिछले 10 सालों में कभी प्रेस वार्ता नहीं की। जब सब कुछ इतना अच्छा हो रहा है, मंगलकारी हो रहा है, देश चांद पर पहुंच चुका है तो सवालों से इतना डर क्यों लगता है। इसका मतलब है इस चमक के पीछे का सच घिनौना है।

                  डॉ. सिंह ने कहा हकीकत यह है कि देश गर्त में जा रहा है। महंगाई से पूरा देश कराह रहा है।  Poverty Index में भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल से भी पीछे है उसी तरह बेरोजगारी दर में भी भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के बदतर है। लेकिन कोई सवाल नहीं पूछ सकता। एक दिन मैं देश के एक विख्यात चैनल के जाने-माने एंकर को सुनकर हैरान रह गया क्योंकि वो टी0वी0 पर देश को महंगाई के फायदे गिनवा रहा था। यही है मोदी के अधीन मीडिया का गोदी रूप। लेकिन हमने उम्मीद नहीं छोड़ी है। मैं जानता हूं कि जो सच्चे पत्रकार हैं उन्हें इस जन्नत की हकीकत मालूम है। उनके दिल में भी बेचैनी है, वे भी छटपटा रहे हैं, लेकिन कुछ कर नहीं पा रहे हैं।

              इस अवसर पर एक संगोष्ठी का भी आयोजन किया गया जिसमे डॉ. सिंह के अलावा संघ विचारक और भाजपा के राज्यसभा सांसद राकेश सिन्हा, पूर्व सांसद अरुण कुमार, जानेमाने पत्रकार सोम प्रकाश, कांग्रेस विधायक बिजेंद्र चौधरी, पूर्व सांसद पप्पू यादव तथा पूर्व पार्षद अजय कुमार अलमस्त व पूर्व कांग्रेस विधायक बंटी चौधरी भी शामिल हुए।


आलोक कुमार

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