फेक न्यूज़ का जाल और लोकतंत्र पर हमला
फेक न्यूज़ का जाल और लोकतंत्र पर हमला: सवाल सिर्फ सूचना का नहीं, भरोसे का है डिजिटल युग में सूचना जितनी तेज़ी से फैलती है, उतनी ही तेजी से भ्रम भी फैलता है. आज भारत ही नहीं, पूरी दुनिया जिस सबसे खतरनाक चुनौती से जूझ रही है, वह है फेक न्यूज़. यह सिर्फ झूठी खबरों का मामला नहीं रहा, बल्कि यह लोकतंत्र, सामाजिक सौहार्द और आम नागरिक के विवेक पर सीधा हमला बन चुका है. एक समय था जब खबरें अख़बारों और टीवी चैनलों से छनकर आती थीं. संपादक की ज़िम्मेदारी, संस्थान की साख और पत्रकारिता के नियम खबरों की विश्वसनीयता तय करते थे. लेकिन सोशल मीडिया के दौर में हर हाथ में कैमरा है, हर अकाउंट एक “न्यूज़ चैनल” बन गया है और हर अफवाह “ब्रेकिंग न्यूज़”. फेक न्यूज़: अफवाह से हथियार तक फेक न्यूज़ अब सिर्फ गलत जानकारी नहीं, बल्कि एक रणनीतिक हथियार बन चुकी है। चुनाव प्रभावित करने से लेकर धार्मिक तनाव भड़काने तक, भीड़ को उकसाने से लेकर किसी व्यक्ति की छवि तबाह करने तक—झूठी खबरें हर जगह इस्तेमाल हो रही हैं. व्हाट्सऐप फॉरवर्ड, फेसबुक पोस्ट, एक्स (ट्विटर) ट्रेंड और यूट्यूब वीडियो—इन सबके जरिए झूठ को इस तरह पेश किया...