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सहरसा के ज्वलंत मुद्दे को लेकर बंद का

 पूर्व सांसद आनंद मोहन की मानें, तो


सहरसा के ज्वलंत मुद्दे जैसे AIIMS, ओवरब्रीज, एयरपोर्ट, इंजीनियरिंग कॉलेज, सहरसा नाम से लोकसभा क्षेत्र न होना आदि मांगों को लेकर बंद का आह्वान किया गया था, जिसका सभी दलों के नेताओं ने समर्थन दिया.उन्होंने कहा कि ये पुरखों की देन थी किआजादी के बाद सहरसा लोकसभा था। लेकिन आज लोकसभा भी नहीं रहा, जो लोगों को सालता रहा और टीस देता रहा। उसी आक्रोश में बंद किया गया....

 सहरसा.यह‎ पहला मौका है जब सहरसा की‎ उपेक्षा पर लोग एकजुट होकर‎ सहरसा बंद में शामिल हुए.विकास के नाम पर सहरसा की निरंतर‎ उपेक्षा को लेकर बीते महीने पहली बार ‎एम्स निर्माण संघर्ष समिति की बैठक‎ में पहुंचे पूर्व सांसद आनंद मोहन ने‎ इस सवाल को लेकर 31 जुलाई को‎ सहरसा बंद की घोषणा की थी.

      पूर्व सांसद और बाहुबली आनंद मोहन 14 साल की सजा काटने के बाद को 27 अप्रैल 2023 को तड़के 4.30 बजे जेल से रिहा कर दिया गया.बता दें कि रिहाई के बाद से पूर्व सांसद आनंद मोहन पूरी तरह से एक्टिव हैं.आज सोमवार को आनंद मोहन सहरसा की सड़क पर रहे, सहरसा बंद बुलाया है. सहरसा में एम्स, एयरपोर्ट, पारवर ग्रिड बनवाने की मांग को लेकर बंद बुलाया गया है.

     पूर्व सांसद आनंद मोहन की मानें, तो सहरसा के ज्वलंत मुद्दे जैसे AIIMS, ओवरब्रीज, एयरपोर्ट, इंजीनियरिंग कॉलेज, सहरसा नाम से लोकसभा क्षेत्र न होना आदि मांगों को लेकर बंद का आह्वान किया गया था, जिसका सभी दलों के नेताओं ने समर्थन दिया.सोमवार को बंद का आह्वान किया गया, जिसका व्यापक असर देखने को मिला.बाजार सहित वाहनों का परिचालन बंद रहा.इस बंद को विभिन्न पार्टियों और संगठनों ने अपना समर्थन दिया.इस दौरान आंदोलन में पूर्व सांसद लवली आनंद, स्थानीय भाजपा विधायक आलोक रंजन, पूर्व विधायक किशोर कुमार मुन्ना,भाजपा जिलाध्यक्ष दिवाकर सिंह सहित आरजेडी, जेडीयू, बीजेपी,लोजपा एवं लेफ्ट पार्टियों के कार्यकर्ता अपनी पार्टी झंडे के साथ सड़क पर एम्स के लिए नजर आए.

    बड़ी बात ये है कि इस आंदोलन को सभी पार्टियों का साथ मिला है. सड़क पर आनंद मोहन के साथ आरजेडी, जेडीयू, बीजेपी, लेफ्ट पार्टियों के कार्यकर्ता अपनी पार्टी झंडे के साथ नजर आ रहे हैं.इस दौरान आनंद मोहन ने कहा कि ये दलगत राजनीति से ऊपर का आंदोलन है.ये बंद नहीं है, बल्कि अगली जीत का जश्न है.उन्होंने कहा कि तकरीबन एक महीने से इस आंदोलन को लेकर सभी जगह जाकर लोगों का समर्थन मांगा. पहले AIIMS निर्माण समिति के बैनर तले इस आंदोलन को लड़ा जा रहा था.

       इस दौरान उन्होने ये भी कहा कि जो भी पार्टी इस आंदोलन में समर्थन नही देगी, उसे सहरसा की जनता बैकफुट पर ले आयेगी.सहरसा बंद में शामिल बीजेपी विधायक आलोक रंजन ने बिहार सरकार पर सहरसा का अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए सहरसा की जगह दरभंगा में AIIMS खोलने का आरोप लगाया.पूर्व विधायक किशोर कुमार मुन्ना ने सहरसा में AIIMS न होने के लिए राज्य सरकार को दोषी ठहराया.

      सहरसा बंद को लेकर सुरक्षा ‎के पुख्ता इंतजाम प्रशासनिक स्तर पर ‎किए गए हैं. रेलवे ने भी रेल चक्का ‎जाम करने की सुगबुगाहट को देखते‎ हुए अपनी सतर्कता बढ़ा दी है.सुबह खुलने वाली बसें भी स्टैंड पर ही रुकी रहीं.हर संगठन का साथ बंद को मिला.कई दर्जन बैठकें और जगह-जगह‎ सभाएं की. यह कारवां बढ़ता गया ‎और अब सहरसा में एम्स स्थापना ‎समेत अन्य मुद्दे आम लोगों की जुबां ‎पर आ गए हैं.

2017 से ही सहरसा में ‎उठ रहा एम्स का मुद्दा‎

सहरसा में एम्स की स्थापना को‎ लेकर साल 2017 से आंदोलन चल‎ रहा है.सहरसा में दूसरे एम्स निर्माण‎ की मांग को लेकर पटना हाईकोर्ट में ‎लोकहित याचिका भी दायर है.20 ‎मार्च 2023 को इस मामले में सुनवाई हुई थी.इसमें बताया गया था कि डीएम ने साल 2017 में ही ‎एम्स निर्माण के लिए 217.74 एकड़ ‎जमीन सतरकटैया अंचल के ‎गोबरगढ़ा में उपलब्ध होने की ‎जानकारी राज्य सरकार को दी थी.सहरसा आनंद मोहन की कर्मभूमि और जन्मभूमि है.पंचगछिया में उनका जन्म हुआ था. राजनीति में आनंद मोहन की एंट्री 1990 में हुई. तब पहली बार सहरसा से वो MLA बने थे.डीएम हत्या मामले में सजा होने के बाद अधिकतर वक्त उन्होंने सहरसा जेल में ही काटा था.


आलोक कुमार

पटना में अपराधी में खुलेआम पुलिस को चुनौती दे रहे हैं

 पटना में शूटर्स ने पार्षद पति पर बरसाईं गोलियां, यू टर्न पर घात लगाकर बैठे थे बदमाश; देखते ही ताबड़तोड़ 5 फायर किए, हालत गंभीर....

पटना.बिहार सरकार एक तरफ जहां कानून व्यवस्था को लेकर अपनी पीठ थपथपा रही हैं. वहीं, राज्य की राजधानी पटना में अपराधी में खुलेआम पुलिस को चुनौती दे रहे हैं. इसी कड़ी में पटना में दीघा इलाके में पश्चिमी मैनपुरा ग्राम पंचायत के पूर्व मुखिया नीलेश यादव को गोली मारकर घायल कर दिया.पहले उनको कुर्जी होली फैमिली हॉस्पिटल में लाया गया परंतु यहां के चिकित्सकों ने रूबन हॉस्पिटल में रेफर कर दिया.

    सोमवार सुबह शूटर्स ने पटना नगर निगम के वार्ड 22-बी की पार्षद सुचित्रा सिंह के पति नीलेश यादव उर्फ नीलेश मुखिया पर गोलियां बरसाईं.वो अपनी कार में ही बैठे थे और उन पर अपराधियों ने बैक टू बैक 5 गोलियां चला दीं. जो उनकी कनपटी, गर्दन और सीने में लगी है.

उनकी हालत बेहद गंभीर है. पहले इलाज के लिए उन्हें कुर्जी के होली फैमिली हॉस्पिटल में ले जाया गया. थोड़ी देर बाद उन्हें पाटिलपुत्रा इलाके के एक बड़े प्राइवेट हॉस्पिटल रूबन में बेहतर इलाज के लिए रेफर कर दिया गया. जहां उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है.परंतु खतरे से बाहर बताया जाता है.

  हमले का सीसीटीवी फुटेज सामने आया है, जिसमें नीलेश मुखिया की कार के पीछे-पीछे दो बाइक पर अपराधी आते दिख रहे हैं. कार जैसे ही यू टर्न पर मुड़ने के लिए स्लो होती है, अपराधी ताबड़तोड़ फायरिंग कर देते हैं.

    डीएसपी नुरुल हक ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि पूर्व मुखिया नीलेश यादव को चार से अधिक गोली मारी गई है. जो गर्दन, छाती, पेट, कंधे और पैर में लगी है.एफएसएल, डायल 100 और सेल की टीम काम कर रही है।.कुछ संदिग्धों की पहचान की गई है.

माना और बताया जाता है कि कुर्जी इलाके में नीलेश मुखिया का काफी दबदबा है. हाल में वसूली को लेकर आपसी रंजिश में उनका निशाना बनाया गया है. दरअसल मरीन ड्राइव पर हजारों की संख्या में इस वक्त दुकानें लगाई जा रही हैं. जिस पर पुलिस का कोई नियंत्रण नहीं है. मरीन ड्राइव या गंगा पथ का अतिक्रमण कर यहां दुकानें ताकत के दम पर लगवाई जा रही. जिसका नतीजा है कि अब वसूली को लेकर आपराधिक घटनाएं घटती नजर आ रही.

  उन पर मारपीट का मुकदमा भी दर्ज है. इस मामले में दीघा पुलिस ने नीलेश मुखिया पर एफआईआर भी दर्ज की है. इससे पहले निलेश मुखिया पर शराब के अवैध धंधे का भी आरोप लगा है. शराब के अवैध धंधे का आरोप नवंबर 2021 में लगा था.उस वक्त पुलिस की ओर से पॉलसन रोड के गोदाम में छापेमारी की गई थी जहां शराब पार्टी चल रही थी.

बताया जा रहा कि इस छापेमारी के दौरान नीलेश और उसके साथी फरार हो गए थे. पुलिस को गोदाम से शराब स्टॉक करने और सप्लाई करने के सबूत मिले थे. जिसके आधार पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की थी.बाद में कोर्ट में जाकर आत्मसमर्पण किए थे.

  इस बीच पटना सिटी की रहने वाली पटना नगर निगम की महापौर सीता साहू ने पार्षद प्रतिनिधियों को सुरक्षा प्रदान करने की मांग सरकार से की है.


आलोक कुमार

संत इग्नासियुस लोयोला का 467 वां पर्व मनाया

 बेतिया.आज संत इग्नासियुस लोयोला का पर्व मनाया.यहां के विख्यात के.आर.हायर सेक्रेडरी स्कूल में संत इग्नासियुस लोयोला का 467 वां पर्व मनाया गया.इस स्कूल को जेसुइट द्वारा संचालित है.

        बता दें कि 31 जुलाई को, सार्वभौमिक कलीसिया लोयोला के संत इग्नासियुस के पर्व मनाती है. इस स्पैनिश संत को येसु समाज की स्थापना के साथ ‘‘आध्यात्मिक अभ्यास‘‘ बनाने के लिए भी जाना जाता है जिसका उपयोग आज अक्सर ध्यान साधना और व्यक्तिगत विवेचन के लिए किया जाता है.

        संत इग्नासियुस का जन्म 1491 में स्पेन के गुइपुजकोआ में एक कुलीन परिवार में हुआ था.वे बारह बच्चों में सबसे छोटे थे. उन्होंने फर्डिनेंड और इसाबेला की स्पेनिश अदालत में एक दरबारी लड़के के रूप में भी कार्य किया. इग्नासियुस ने एक सैन्य शिक्षा प्राप्त की थी और एक सैनिक के रूप में उन्होंने 1517 में सेना में प्रवेश किया और कई अभियानों में सेवा की.             20 मई 1521 को पैम्पेलुना की घेराबंदी में एक तोप के गोले से उनके पैर में घाव हो गया था, एक चोट जिसने उन्हें आजीवन आंशिक रूप से अपंग बना दिया था.अपने स्वस्थ होने के दौरान उनके पास केवल द गोल्डन लेजेंड, संतों की जीवनी का संग्रह, और लुडोल्फ द कार्थुसियन की लाइफ ऑफ क्राइस्ट की किताबें थीं. इन किताबों और चिंतन में बिताए समय ने उन्हें बदल दिया. अपने ठीक होने पर उन्होंने पवित्रता की शपथ ली, अपनी तलवार को मोंटसेराट की कुँवारी की वेदी के सामने लटका दिया, और एक तीर्थयात्री के वस्त्र धारण कर लिए. इग्नासियुस 1522 से 1523 तक एक ख्रीस्तीय जीवन जीने के तरीके पर विचार करते हुए एक गुफा में रहे. वे 1523 में एक तीर्थयात्री के रूप में रोम और पवित्र भूमि पर गए, जहां उन्होंने मुसलमानों को विश्वास में ले आने के लिए काम किया.

       1528 में इग्नासियुस ने स्पेन और पेरिस में बार्सिलोना और अल्काला में धर्मशास्त्र का अध्ययन शुरू किया और 14 मार्च 1534 को अपनी डिग्री प्राप्त की.उनके ध्यान साधना, प्रार्थना, परिकल्पना और अंतर्दृष्टि ने 15 अगस्त 1534 को सोसाइटी ऑफ जीसस (येसुसमाज) के संविधान का निर्माण किया; इसे 1541 में संत पिता की मंजूरी मिली.इग्नासियुस याकूब लाइनेज, अलोंसो साल्मेरोन, निकोलस बोबाडिला, साइमन रोड्रिग्ज, धन्य पेत्रुस फैबर और संत फ्रांसिस जेवियर के मित्र थे, जिस समूह ने नई सोसायटी का मूल गठन किया था.             

उन्होंने कभी भी जेसुइट शब्द का प्रयोग नहीं किया, जिन्हें उनके विरोधियों द्वारा अपमान के रूप में गढ़ा गया था. येसु समाज आज इस शब्द का प्रयोग गर्व के साथ करता है. उन्होंने यूरोप और पवित्र भूमि की यात्रा की, फिर येसु समाज को निर्देशित करने के लिए रोम में बस गए.बाद के वर्षों में उनका स्वास्थ्य खराब हुआ, और वे मृत्यु के समय लगभग अंधे थे. 

       येसु समाज के सदस्य शिक्षा, समाज-सेवा तथा अन्य मानव कल्याण के कार्य में सराहनीय कार्य करते आ रहे हैं. इग्नासियुस की मृत्यु 31 जुलाई 1556 को रोम, इटली में बुखार से हुई और 12 मार्च 1622 को संत पिता ग्रेगरी पंद्रहवें द्वारा संत घोषित किए गए.


आलोक कुमार


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