गांव में भिक्षुक से बातचीत


मोतिहारी. स्माइल SMILE  परियोजना अंतर्गत मिशन गरिमा के अंतर्गत सर्वेक्षित भिक्षुओं का परामर्श करने एवं उनकी दक्षता/ आवश्यकता का पता लगाने के लिए आज SMILE team द्वारा कल्याणपुर प्रखंड के मठ कल्याणपुर गांव में भिक्षुक से बातचीत की गयी. भिक्षुको के द्वारा बताया गया कि जीविकापार्णन के लिए भिक्षाटन करते हैं.उनका यह मानना है कि इस कार्य में गरिमा एवं प्रतिष्ठा नहीं है. यदि उनको रोजगार अथवा व्यवसाय के अन्य साधन उपलब्ध कराये जाये तो रोजगार करना चाहेंगे एवं भिक्षावृत्ति से मुक्त होना चाहेंगे.इस गांव में लगभग 35 परिवार ऐसे हैं जिनकी आजीविका का मुख्य साधन भिक्षावृत्ति ही है.उन्होंने मांग की कि यदि सरकार द्वारा उन्हें कुछ ऋण उपलब्ध करायी जाये, तो वह गरिमापूर्ण जीवन जीने के लिए रोजगार करेंगे. उक्त परामर्श टीम का नेतृत्व ममता झा, सहायक निदेशक बाल संरक्षण कर रही है. इनके साथ श्री शिवेंद्र कुमार, सहायक निदेशक दिव्यांगजन सशक्तिकरण कोषांग, श्री राजीव कुमार बिहार विकास मिशन एवं प्रखंड समन्वयक विकास कुमार मौजूद थे.


आलोक कुमार

जिला में वंडर ऐप की मदद से मातृ एवं शिशु मृत्यु की रोकथाम की जाएगी


गया. जिले के  ’जिला पदाधिकारी, गया डॉ० त्यागराजन एसएम द्वारा वंडर प्रोजेक्ट ट्रेनिंग तथा श्रवण श्रुति प्रोजेक्ट के संबंध में समीक्षा बैठक समाहरणालय सभाकक्ष में की गई.’ जिला में वंडर  ऐप   की मदद से मातृ एवं शिशु मृत्यु की रोकथाम की जाएगी. बोधगया प्रखंड से पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इसकी शुरुआत की गयी है. प्रखंड में गर्भवती के स्वास्थ्य की पूरी सूचना इस  ऐप   के माध्यम से अपडेट किया जाएगा ताकि प्रसव या​ किसी जरूरत के समय उसे पूरा इलाज किया जा सके.  वंडर एप को बड़े पैमाने पर क्रियान्वित किया जाना है और सभी स्वास्थ्यकर्मियों तथा सहयोगी संस्थाओं के सभी कर्मी से सहयोग अपेक्षित है. विशेष रूप से वंडर ऐप की मदद से शत प्रतिशत गर्भवती महिलाओं का कवरेज किया जा सके और जटिलता को रोकने या जटिलता को समय रेफर कर आवश्यक उपचार मुहैया कराने में मदद मिलेगी.

जिलाधिकारी ने कहा कि इस ऐप के तीन कंपोनेंट हैं जिसमें एंटी नेटल पीरियड यानी गर्भवती के पूरे नौ माह के दौरान जो जटिलता उत्पन्न होती है उसका निदान किया जा सके.इसे लेकर स्वास्थ्य अधिकारियों को कहा कि एप पर गर्भवती की सभी प्रकार की जानकारी दिया जा सकता है और सिविल सर्जन तथा जिला स्तर के स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा इसका अनुश्रवण किया जा सकता है.उन्होंने कहा कि एप के लिए पंचायत स्तर पर कैंप  लगा कर गर्भवतियों की सभी प्रकार की जांच करनी है.जांच स्थल पर ही पैथोलॉजिकल टेस्ट पूरा करना है. इसके लिए यूनिक आईडी भी दिया जायेगा.यूनिक आईडी की मदद से महिला की सभी प्रकार की जांच की जानकारी चिकित्सक को मिल सकेगी.

वंडर प्रोजेक्ट को सफल क्रियान्वयन के लिए विभिन्न विभागों को ट्रेनिंग के समीक्षा के दौरान बताया गया कि विभिन्न विभागों में लगभग 4200 लोगों को ट्रेनिंग दिया गया है, जिनमें 55 चिकित्सक, 638 एएनएम एवं 3056 आशा शामिल हैं.इसके साथ ही बोधगया प्रखण्ड के जीविका के 39 कर्मियों को पूरी तरह ट्रेनिंग दिया जा चुका है. जिला पदाधिकारी ने जीविका के समूह, मगध मेडिकल तथा अन्य स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न कार्यालयों के कर्मियों एवं चिकित्सकों को पर्याप्त ट्रेनिंग करवाने का निर्देश दिए ताकि वंडर प्रोजेक्ट को पूरी तरह सफल क्रियान्वयन कराया जा सके.

उन्होंने कहा कि मगध मेडिकल, जयप्रकाश नारायण अस्पताल तथा प्रभावती अस्पताल के डायग्नोलॉजिस्ट चिकित्सकों को प्राथमिकता देकर भौतिक रूप से वर्कशॉप आयोजित करते हुए ट्रेनिंग करवाएं ताकि भविष्य में किसी भी गंभीर अवस्था वाले मरीजों को प्रॉपर तरीके से कंट्रोल किया जा सके.उन्होंने बताया कि वंडर ऐप रेफरल मामलों में काफी मददगार साबित होगा.उन्होंने कहा कि यदि अगर कोई गर्भवती महिला अस्पताल में है लेकिन उसकी स्थिति काफी दयनीय है, तत्पश्चात उसे किसी बड़े अस्पताल में रेफर करने की आवश्यकता है तो वंडर मोबाइल ऐप में महिला की बीमारी का जिक्र करते हुए रेफर का विकल्प डालें.यह अलर्ट संबंधित बड़े अस्पताल के चिकित्सकों तथा अन्य पदाधिकारियों के मोबाइल पर तुरंत पहुंच जाएगा, जिससे उनके इलाज बिना समय गवाएं और अधिक प्रभावी रूप से किया जा सकेगा.

उन्होंने सभी संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि हर स्तर पर बेहतर तरीके से ट्रेनिंग कर ले ताकि आने वाले दिनों में ऐसे मामलों पर अपना बेहतरीन परफॉर्मेंस दे सके.बैठक में बताया गया कि वंडर ऐप के तहत अब तक कुल 934 महिलाओं को स्क्रीनिंग किया गया है, जिनमें सबसे अधिक बोधगया के 689 महिला, प्रभावती 216, बांके बाजार 14, गुरुआ 14, नीमचक बथानी में 6, मोहनपुर 2, मगध मेडिकल अस्पताल एक तथा खिजरसराय में एक महिला का स्क्रीनिंग किया गया है.

जिला पदाधिकारी ने सिविल सर्जन तथा डीपीएम स्वास्थ्य को निर्देश दिया कि हर सप्ताह सेविका एएनएम आशा को एक जगह बैठा करके लाइन लिस्टिंग तयार करावे साथ ही संबंधित पंचायत के मुखिया को भी उक्त बैठक में सम्मिलित करें ताकि संबंधित पंचायत के लोगों को जागरूक आसानी से किया जा सके.उन्होंने कहा कि बोधगया प्रखंड को मॉडल के रूप में रखते हुए कार्य करे. जिससे और भी अन्य सभी प्रखंड प्रेरित हो सके। वहां की एक एक महिलाओं का अच्छे से सर्वे करते हुए वंडर ऐप में बेसिक डिटेल एंट्री करावे. एक भी महिला ना छूटे या ध्यान रखें. अभियान स्तर पर कैंप लगाएं तथा कैंप में बेसिक व्यवस्थाएं हैं, उसे सुसज्जित तरीके से रखें.

’श्रवण श्रुति प्रोजेक्ट’ के संबंध में बताया गया कि जिला स्तरीय विभिन्न पदाधिकारियों के साथ कोआर्डिनेशन बैठक का काफी अच्छा परिणाम सामने आया है.खास करके विभिन्न स्टेकहोल्डर, स्वास्थ्य, शिक्षा, आईसीडीएस तथा सामाजिक सुरक्षा कार्यालय द्वारा काफी सहयोग किया जा रहा हैं.उन्होंने बताया कि छोटे बच्चों को स्क्रीनिंग के लिए विभिन्न स्तरों पर उन्हें मोबिलाइज किया जा रहा है। हर स्तर पर माइक्रो प्लान तैयार करते हुए उन्हें लगातार मॉनिटरिंग भी किया जा रहा है.श्रवण श्रुति प्रोजेक्ट के तहत स्क्रीनिंग किए हुए बच्चों को बेहतर इलाज के लिए बेरा टेस्ट BERA TEST की व्यवस्था कराया जा रहा है.

बैठक में बताया गया कि 2 मार्च से अब तक 326 आंगनबाड़ी सेंटरों में 9066 बच्चों को स्क्रीनिंग किया जा चुका है, जिनमें 40 बच्चों को बेरा टेस्ट BERA TEST के लिए रेफर किया गया है तथा उनमें 29 बच्चों का बेरा टेस्ट BERA TEST पूर्ण करते हुए 2 बच्चे बेरा टेस्ट BERA TEST पॉजिटिव पाए गए हैं.

जिला पदाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारियों को बताया कि नवजात बच्चों को भी श्रवण श्रुति प्रोजेक्ट के तहत शत प्रतिशत स्क्रीनिंग कराने के लिए कार्य योजना तैयार करें.उन्होंने कहा कि नवजात बच्चों को कौन से उपकरण से जांच किया जाएगा इसके लिए भी विस्तार से गाइडलाइन को पढ़ते हुए उसी अनुरूप तैयारी करें.उन्होंने कहा कि वर्तमान में बच्चों को किए जा रहे स्क्रीनिंग के उपरांत उन बच्चों को और बेहतर इलाज के लिए संबंधित चिकित्सक सप्ताह में एक दिन द्वारा उन बच्चों को जांच कर वेरीफाई करते हुए उन्हें बेरा टेस्ट BERA TEST कराएं. बच्चों को और बेहतर इलाज के लिए पटना एम्स से समन्वय स्थापित करते हुए उन्हें एंबुलेंस के माध्यम से रेफर करें तथा उनके परिजनों को लगातार फीडबैक दिया करें. इसके उपरांत उन्होंने श्रवण श्रुति प्रोजेक्ट को और अच्छी तरह धरातल पर लाने के लिए विभिन्न बिंदुओं पर विचार विमर्श किया.

बैठक में सिविल सर्जन द्वारा बताया गया कि श्रवण श्रुति के तहत काफी अच्छे परिणाम मिल रहे हैं. बच्चों के स्क्रीनिंग के दौरान उन्हें इलाज किया गया.इलाज के दौरान लगभग 20 से 30 बच्चे हियरिंग लॉस की समस्या से निजात मिला है. जो काफी अच्छे संकेत हैं. जिला पदाधिकारी ने सिविल सर्जन तथा तमाम पदाधिकारी जो श्रवण श्रुति में लगे हुए हैं उन सभी को पूरे लगन और जोश के साथ बच्चों का स्क्रीनिंग एवं उनका समुचित इलाज करवाने का निर्देश दिए.

आलोक कुमार

मरीज रीता कुमारी ने बताया गया कि उन्हें दूध नहीं दिया गया

 


गया. इस जिले के ’जिला पदाधिकारी, गया डॉ० त्यागराजन एसएम द्वारा  जयप्रकाश नारायण अस्पताल का औचक निरीक्षण किया गया. सर्वप्रथम उन्होंने इमरजेंसी वार्ड का निरीक्षण किया. जहां इलाज के लिए आए हुए कई मरीजों से अस्पताल में दी जाने वाली व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी लिया. जिला पदाधिकारी ने अतरी प्रखंड के पथरी ग्राम के मरीज रीता कुमारी से जानकारी लेने के दौरान बताया गया कि आज उन्हें दूध नहीं दिया गया है.उन्होंने उपस्थित मरीजों से खानपान, दवा, साफ सफाई, समय पर चिकित्सक मरीजों को देखने आते हैं या नहीं इत्यादि के बारे में जानकारी लिया.जिला पदाधिकारी ने दूध ना देने की शिकायत पर सिविल सर्जन को संबंधित संवेदक से स्पष्टीकरण पूछते हुए 1 दिन की राशि कटौती करने का निर्देश दिए. इसके अलावा विभिन्न मरीजों से अस्पताल के बारे में फीडबैक लेने पर संतोषजनक जवाब दिया गया.

इसके उपरांत लेबर रूम का निरीक्षण किया. लेबर रूम को और सुसज्जित व्यवस्था में रखने का निर्देश दिए. निरीक्षण के दौरान उन्होंने मरीजों के किये जाने वाले एक्सरे के बारे में जानकारी लेने पर सिविल सर्जन द्वारा बताया गया कि इस अस्पताल में डिजिटल एक्स-रे की व्यवस्था है. हर दिन काफी मरीजों को डिजिटल एक्स-रे के माध्यम से इलाज किया जा रहा है. इसके उपरांत उन्होंने सीटी स्कैन किये जाने वाले कक्ष का निरीक्षण किया. उन्होंने उपस्थित कर्मी से रजिस्टर के माध्यम से जानकारी लिया कि आज की तिथि में कितने मरीजों का सिटी स्कैन किया गया है.उपस्थित कर्मी द्वारा बताया गया कि आज कुल 4 मरीजों का सीटी स्कैन हुआ है. जिला पदाधिकारी ने उपस्थित चिकित्सक से सीटी स्कैन किए जाने के संबंध में विस्तार से जानकारी भी लिया कि किस स्थिति में और किस स्तर से सिटी स्कैन मरीजों का किया जाता है. 

अल्ट्रासाउंड के समीक्षा के दौरान सिविल सर्जन द्वारा बताया गया कि इस अस्पताल में एक अल्ट्रासाउंड की मशीन है तथा एक डायग्नोसिस डॉक्टर हैं.आईसीयू के निरीक्षण के दौरान जिला पदाधिकारी ने आईसीयू कक्ष को पूरी तरह फंक्शन रखने का निर्देश दिया.जेई वैक्सीनेशन के समीक्षा के दौरान सिविल सर्जन द्वारा बताया गया कि गया जिले में लगभग 99 प्रतिशत जेई का वैक्सीनेशन पूर्ण कर लिया गया है. इसके उपरांत जयप्रकाश नारायण अस्पताल के पूरे परिसर का घूम घूम कर निरीक्षण किया तथा पर्याप्त साफ सफाई व्यवस्था रखने का निर्देश दिया.

आलोक कुमार

Bihar : पवित्र मिस्सा और आठ बच्चों के प्रथम परमप्रसाद के साथ मनाया गया पल्ली दिवस

  बेतिया पल्ली में मरियम के जन्मोत्सव पर आस्था का उत्सव प्रार्थना, पवित्र मिस्सा और आठ बच्चों के प्रथम परमप्रसाद के साथ मनाया गया पल्ली दिवस...