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जदयू विधायक रत्नेश सादा मंत्री के रूप में शपथ ग्रहण करेंगे

 


पटना. इस बार पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने महागठबंधन से अलग होने की घोषणा नहीं की है.इस बार उनके पुत्र व हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष सुमन ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया.इसके साथ ही अब हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा से और महागठबंधन के बीच बंधन नहीं रहा.इसका क्या असर राजनीति पर पड़ेगा वह तो आने वाले वक्त ही पता चल पाएगा.इतना जरूर है कि संतोष सुमन से अति बेहतर व्यक्ति मुख्यमंत्री के पास रत्नेश सादा हैं.उनको मंत्री बनाने की तैयारी कर ली गयी है.उनको मंत्री के रूप में मनोनीत कर लिया गया है. 16 जून को नीतीश मंत्रिमंडल का विस्तार होगा.उसी में जदयू विधायक रत्नेश सादा मंत्री के रूप में शपथ ग्रहण करेंगे.

     सोनवर्षा  विधानसभा के विधायक है रत्नेश सादा . हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष सुमन ने मंत्री पद से भी इस्तीफा दे दिया.उनके इस्तीफे के बाद जदयू विधायक रत्नेश सादा का राह साफ हो गया है.उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भेंट की.भेंट करने का मतलब है कि रत्नेश को मंत्री बनाया जाए.रत्नेश सादा भी उसी समाज से आते हैं जिस समाज से संतोष सुमन आते हैं.इसलिए यह चर्चा तेज है कि उन्हें संतोष की जगह मंत्री बनाया जा सकता है.

  JDU विधायक रत्नेश सादा संतोष सुमन की जगह लेंगे.गुरुवार को शपथ ग्रहण हो सकता है. बिहार में नीतीश कैबिनेट से संतोष सुमन के इस्तीफे के बाद तीन मंत्री पद खाली हो गए हैं. ऐसे में गुरुवार को मंत्रिमंडल विस्तार किया जा सकता है. माना जा रहा है कि जेडीयू विधायक रत्नेश सादा को संतोष सुमन की जगह अनुसूचित जाति-जनजाति विभाग का मंत्री बनाया जा सकता है. वह जीतन राम मांझी की जाति से ही ताल्लुक रखते हैं.

  रत्नेश सादा जदयू के उन विधायकों में से एक है, जिनकी जनता के बीच गहरी पैठ है. इसकी पुष्टि इस बात से होती है कि वह बीते 11 साल से सोनबरसा के विधायक हैं.  JDU विधायक रत्नेश सादा का पैतृक गांव महिषी प्रखंड का कुंदह गांव है. वह पिछले 11 साल से सोनबरसा राज (सुरक्षित) विधानसभा से जदयू के टिकट पर चुनाव लड़ते और जीतते आ रहे है. रत्नेश सादा ने 2010 के विधानसभा चुनावों में सीट जीती थी. वह तब से सोनबरसा से जीतते आ रहे हैं और मौजूदा विधायक हैं. अब वह मंत्री बनने जा रहे हैं.


आलोक कुमार


नीतीश की मुहिम से केसीआर, पटनायक, मायावती पहले ही बना चुके दूरी

● विपक्षी एकता बैठक से पहले मांझी का अलग होना बड़ा अपशकुन

● आर सी पी सिंह, उपेंद्र कुशवाहा के बाद मांझी का किनारा करना बड़ी घटना

●  महागठबंधन सरकार बनने के बाद से एक भी बड़ा दल  नहीं जुड़ा

● नीतीश की मुहिम से केसीआर, पटनायक, मायावती पहले ही बना चुके दूरी

पटना. पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि जीतन राम मांझी का महागठबंधन से अलग होना  विपक्षी एकता की पटना बैठक के लिए बड़ा अपशकुन है.उन्होंने कहा कि पहले बैठक की तारीख टली, फिर रोज कोई न कोई बड़ा नेता इससे दूरी बनाने लगा.

   उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने वरिष्ठ दलित नेता मांझी को नौ माह बाद अपमानित कर मुख्यमंत्री पद से हटाया था और अब उनकी पार्टी के जदयू में विलय के लिए दबाव बनाया जा रहा था.श्री मोदी ने कहा कि कोई भी स्वाभिमानी व्यक्ति नीतीश कुमार के साथ नहीं रह सकता. आर सी पी सिंह और उपेंद्र कुशवाहा के बाद मांझी का किनारा करना साधारण घटना नहीं है.

    उन्होंने कहा कि महागठबंधन सरकार बनने के बाद पिछले नौ महीनों में एक भी बड़ा दल या नेता इससे नहीं जुड़ा.श्री मोदी ने कहा कि नीतीश कुमार की विपक्षी एकता मुहिम से केसीआर, नवीन पटनायक, मायावती, एचडी कुमारस्वामी और  जगनमोहन रेड्डी पहले ही दूरी बना चुके हैं.अब उमर अब्दुल्ला ने भी पटना बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया है.

   उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के निकाय चुनाव में जब टीएमसी के गुंडे कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर हमले कर रहे हैं, तब नीतीश कुमार वहाँ इन दो दलों में क्या एकता करा पायेंगे?

   इंजीनियर दिनेश कुमार ने ट्वीट कर कहा है कि बीजेपी के साथ जितने छोटे छोटे दल जुड़ेंगे महागठबंधन को उतना फायदा होगा. ये सब टोटल मिला के 10 से 12 सीट लेंगे और पैसा लेकर किसी को भी टिकट दे देंगे और सारे सीट पर जीरो पर आउट हो जायेंगे. बहुत जल्दी भूल गए 2015. बीजेपी इनको 80 सीट दी थी और ये 41 सीट जीते थे.

     राजीव रंजन सिंह ने भी ट्वीट कर कहा कि बीजेपी ने शिवसेना ,अकाली दल ,जदयू, तेलगुदेशम, त्रिमूल कांग्रेस , बीजू जनता दल सब तो छोड़ ही दिए. ये सब शुभ संकेत है क्या! पहले आपको मुबारक हो.


आलोक कुमार

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