संदेश

मार्च 16, 2023 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

12056 रूपए मासिक मानदेय से समाज में मान-सम्मान नहीं बढ़ रहा है

चित्र
  पटना.विकास मित्रों का समय और जिंदगी बर्बाद हो गया है.यह सोच विकास मित्रों में विकसित हो गयी है.आखिर हो क्यों नहीं?12056 रूपए मासिक मानदेय से समाज में मान-सम्मान नहीं बढ़ रहा है.उल्टे सामाजिक- आर्थिक  स्थिति दिन प्रति दिन बहुत ही खराब होती जा रही है.      विकास मित्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने साल 2010 में विकास मित्रों का नियोजन किया था.प्रारंभिक दौर में विकास मित्र का मानदेय मात्र: तीन हजार रुपये था.मानदेय में मंथरगति से वृद्धि कर 13 साल के बाद मात्र:12056 रुपये कर दिया है.यह राशि महंगाई डायन खात जात में ऊंट के मुंह में जीरा की तरह है.फिर भी हमलोग कमरतोड़ महंगाई में कम मानदेय में ही अधिकाधिक कार्य निष्पादन कर सरकार के अधिकारियों को खुश कर रहे हैं.     महादलित विकास मिशन की तहत पंचायत के 21 विकास मित्रों को विकास रजिस्टर वर्जन 2.0 को अपडेट करने को लेकर प्रशिक्षण दिया गया. विकास मित्रों को सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न प्रकार की विकास योजनाओं में महादलित अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की भागीदारी की स्थिति वर्तमान में क्या है, इस...

कैंडल लाइट कर विरोध व्यक्त किया

चित्र
  कोच्चि.इन दिनों केरल में मलयालम लेखक फ्रांसिस नोरोन्हा की कहानी पर आधारित एक नाटक, 'कक्कुकली' को लेकर ईसाई समुदाय आक्रोशित हैं.इस संदर्भ में केरल राज्य में कैथोलिक चर्च की सर्वोच्च संस्था केरल कैथोलिक बिशप्स काउंसिल (केसीबीसी) ने राज्य सरकार से एक मलयालम नाटक के मंचन पर प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि इसमें ईसाई धर्म के साथ-साथ इसकी मंडलियों और कॉन्वेंट को गलत तरीके से चित्रित किया गया है.वहीं कैंडल लाइट कर विरोध व्यक्त किया गया.          बताया जाता है कि ईसाई धर्म केरल का तीसरा सबसे व्यापक धर्म है, भारत सरकार की जनगणना के अनुसार जनसंख्या का 18 प्रतिशत है. अल्पसंख्यक समुदाय होने के बावजूद केरल में ईसाई समुदाय संपूर्ण भारत के ईसाई समुदाय की तुलना में आनुपातिक रूप से बहुत बड़ा है.इस बड़ी जनसंख्या वाले ईसाई समुदाय को मलयालम लेखक फ्रांसिस नोरोन्हा की कहानी पर आधारित एक नाटक, 'कक्कुकली' हिलाकर रख दिया है.मलयालम लेखक ने 'कक्कुकली' नाटक में एक युवा नन और उसके संघर्षों और चुनौतियों के इर्द-गिर्द घूमती जिंदगी को दर्शाया है, जिसका सामना ...

ईसाई समुदाय के द्वारा विरोध व्यक्त किया

चित्र
पटना.बिहार जाति आधारित गणना,2022 का प्रथम चरण 7 जनवरी से 21 जनवरी तक मकानों की गणना की गई.अब द्वितीय चरण में 1 से 30 अप्रैल तक जातिवार गणना होगा.इस पर ईसाई समुदाय के द्वारा विरोध व्यक्त किया जा रहा है.प्रशांत कुमार नामक ईसाई का कहना है कि ईसाई धर्मावलंबी को केवल दो कोड में रखा गया है. ईसाई धर्मावलंबी (हरिजन) की जाति कोड 10 है और ईसाई धर्मावलंबी (अन्य पिछड़ी जाति) की जाति कोड 11 है.बिहार में जन्मे और रहने वाले ईसाई धर्मावलंबी आदिवासी का कोड नहीं दिया गया है.इसका मतलब आदिवासी कहकर उरांव,धागंड़ कहते ही (उरांव) की जाति कोड 12 में डाल देंगे.जो ईसाई धर्म नहीं दर्शाता है.उसे हिंदू ही समझा जाएगा.इसमें परिवर्तन करने की जरूरत है.             विदित हो कि बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार जाति आधारित गणना,2022 मुहिम के रूप में शुरू किया था.इसके प्रथम चरण में शनिवार 7 जनवरी से जातिगत जनगणना के तहत मकानों की गणना शुरू किया गया. खुद ही पटना में डीएम डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने मकान की गणना में लगाए गए कर्मियों के साथ इसकी शुरुआत की थी.राज्य सरकार के अनुसार जातिगत ...