Bihar : निजी स्कूलों की फीस और मध्यमवर्गीय परिवारों का दबाव: शिक्षा या हर महीने की आर्थिक परीक्षा?
निजी स्कूलों की फीस और मध्यमवर्गीय परिवारों का दबाव: शिक्षा या हर महीने की आर्थिक परीक्षा? पटना। बच्चे के हाथ में स्कूल बैग है, लेकिन उस बैग का वजन सिर्फ किताबों का नहीं है। उसके साथ स्कूल फीस, एडमिशन चार्ज, यूनिफॉर्म, जूते, किताबें, कॉपियां, परिवहन और कई दूसरे खर्चों का बोझ भी जुड़ा है। सवाल यह है कि मध्यमवर्गीय परिवार अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देने की कोशिश में आखिर कितनी आर्थिक कीमत चुकाए? हर माता-पिता का सपना होता है कि उनका बच्चा अच्छे स्कूल में पढ़े, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हासिल करे और भविष्य में अपने पैरों पर खड़ा हो। लेकिन बदलते समय में निजी स्कूलों की फीस और उससे जुड़े खर्च मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। एक तरफ सरकारी स्कूलों की सुविधाओं और शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठते हैं, तो दूसरी ओर निजी स्कूलों की फीस अभिभावकों के सामने अलग तरह का आर्थिक संकट खड़ा करती है। मध्यमवर्गीय परिवार न तो हमेशा महंगी निजी शिक्षा को आसानी से वहन कर पाते हैं और न ही बच्चों की शिक्षा से समझौता करना चाहते हैं। यही दोहरी मजबूरी परिवार के मासिक बजट पर लगातार दबाव बढ़ाती...