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बक्सर धर्मप्रांत के बिशप डॉ.जेम्स शेखर भी पूर्ण सभा में शामिल


 गुरु के वफादार शिष्य बनकर मसीह के जीवन की गवाही देना है:कार्डिनल लुइस एंटोनियो टैगले

बेंगलुरु.ईसाईधर्म प्रचार विभाग के प्रो-प्रीफेक्ट, महामहिम लुइस एंटोनियो कार्डिनल टैगले ने एक संदेश जारी किया है, जिसमें भारत में बिशपों से विशेष रूप से भारत के विविध चर्चों के बीच साम्य को बढ़ावा देने, बनाए रखने और मजबूत करने का आग्रह किया गया.कार्डिनल टैगले ने बेंगलुरु में भारतीय कैथोलिक बिशप सम्मेलन (सीसीबीआई) की 35वीं पूर्ण सभा में भाग लेने वाले बिशपों को यह विशेष संदेश दिया.

सच्ची भाईचारा एकता के महत्व पर जोर देते हुए, कार्डिनल टैगले ने कहा, ‘वास्तविक भाईचारा एकता की भावना से कार्य करना आवश्यक है ताकि अच्छी खबर को प्रभावी ढंग से और फलदायी रूप से प्रचारित किया जा सके.असामंजस्य या प्रतिद्वंद्विता के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए, मात्र प्रत्येक चर्च का उद्देश्य गुरु के वफादार शिष्य बनकर मसीह के जीवन की गवाही देना है.‘

यह संदेश सीसीबीआई के उपाध्यक्ष और मद्रास मायलापुर के आर्चबिशप जॉर्ज एंटोनीसामी द्वारा स्पष्ट रूप से व्यक्त किया गया था.

35वीं पूर्ण सभा मंगलवार, 30 जनवरी 2024 को सेंट जॉन्स नेशनल एकेडमी ऑफ हेल्थ साइंसेज, बैंगलोर के नर्सिंग कॉलेज ऑडिटोरियम में एक गंभीर यूचरिस्टिक उत्सव के साथ शुरू हुई.भारत और नेपाल के अपोस्टोलिक नुनसियो, महामहिम आर्चबिशप लियोपोल्डो गिरेली ने उत्सव की अध्यक्षता की.वैश्विक शांति और कठिनाइयों का सामना कर रहे मणिपुर के लोगों के लिए विशेष प्रार्थना की गई.

यूचरिस्टिक उत्सव के बाद उद्घाटन बैठक, पारंपरिक भजन ‘वेनी क्रिएटर स्पिरिटस‘ के जाप के साथ पवित्र आत्मा की प्रार्थना के साथ शुरू हुई.गणमान्य व्यक्तियों ने सभा की शुरुआत का प्रतीक पारंपरिक भारतीय दीपक जलाया.

बैठक की अध्यक्षता सीसीबीआई के अध्यक्ष और गोवा और दमन के आर्चबिशप महामहिम फिलिप नेरी कार्डिनल फेराओ ने की. अपोस्टोलिक नुनसियो, आर्चबिशप लियोपोल्डो गिरेली ने सभा का उद्घाटन किया.

सीसीबीआई के उपाध्यक्ष और मद्रास-मायलापुर के आर्चबिशप जॉर्ज एंटोनीसामी ने सभा का स्वागत किया. सीसीबीआई की वार्षिक रिपोर्ट सीसीबीआई के महासचिव और दिल्ली के आर्चबिशप अनिल कूटो द्वारा प्रस्तुत की गई. सीसीबीआई के उप महासचिव रेव्ह डॉ. स्टीफन अलाथारा ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया.उद्घाटन सत्र हैदराबाद के आर्चबिशप महामहिम एंथोनी कार्डिनल पूला के नेतृत्व में प्रार्थना के साथ संपन्न हुआ.

सभा के दौरान, हाल ही में नियुक्त बिशपों का सदस्यों के रूप में स्वागत किया गया और सम्मेलन के दिवंगत सदस्यों के सम्मान और स्मृति के सामूहिक संकेत के रूप में मौन का एक क्षण मनाया गया.

सीसीबीआई के सम्मानित पूर्व अध्यक्ष कार्डिनल तेलेस्फोर टोप्पो की स्मृति में विशेष रूप से भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई, जो 4 अक्टूबर, 2023 को इस दुनिया से चले गए. कार्डिनल टोप्पो के जीवन और योगदान का सम्मान करने के लिए सभा एकजुट हुई, जो एक महान व्यक्ति थे. उनकी उपस्थिति उन सभी के दिल और दिमाग में गूंजती रहती है, जिन्हें उनके व्यक्तित्व ने छुआ था.

   इस 35 वीं पूर्ण सभा में पटना महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष सेबेस्टियन कल्लूपुरा,बेतिया धर्मप्रांत के  धर्माध्यक्ष   पीटर सेबेस्टियन गोबियस,मुजफ्फरपुर धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष काजिटेन फ्रांसिस ओस्ता,भागलुपर धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष कुरियन वलियाकंडाथिल और बक्सर धर्मप्रांत के बिशप डॉ.जेम्स शेखर भी पूर्ण सभा में शामिल थे.

आलोक कुमार

पटना महाधर्मप्रांत के प्रथम आर्चबिशप बेनेडिक्ट जौन ओस्टा की दसवीं पुण्यतिथि

पटना के आर्चबिशप  एमेरिटस बेनेडिक्ट जॉन ओस्टा का 30 जनवरी 2014 को

पटना. पटना धर्मप्रांत के प्रथम बिशप और पटना महाधर्मप्रांत के प्रथम आर्चबिशप बेनेडिक्ट जौन ओस्टा,येसु समाज का निधन 30 जनवरी को गया था.आज उनकी दसवीं पुण्यतिथि है.

प्रथम आर्चबिशप बेनेडिक्ट जॉन ओस्टा का जन्म 15 अगस्त 1931 को हुआ था.उन्हें 9 जून 1963 को पुरोहित नियुक्त किया गया था, और 21 जून 1980 को बिशप नियुक्त किया गया था.पोप जॉन पॉल द्वितीय ने 1999 में पटना धर्मप्रांत को एक महाधर्मप्रांत के रूप में पदोन्नत किया, जो रांची के महाधर्मप्रांत का एक सहायक धर्मप्रांत था, और बिशप बेनेडिक्ट जॉन ओस्टा को इसके पहले आर्चबिशप के रूप में नियुक्त किया गया था.

आर्चबिशप ओस्टा तब तक पद पर बने रहे जब तक कि उनका इस्तीफा संत पिता द्वारा स्वीकार नहीं कर लिया गया और नए आर्चबिशप विलियम डिसूजा को 9 दिसंबर, 2006 को पटना महाधर्मप्रांत के आर्चबिशप के रूप में नियुक्त किया गया. आर्चबिशप बेनेडिक्ट ओस्टा ने 25 वर्षों से अधिक समय तक अपने एपिस्कोपल मंत्रालय को समर्पण और उत्साह के साथ सफलतापूर्वक चलाया.

पटना के आर्चबिशप  एमेरिटस बेनेडिक्ट जॉन ओस्टा का 30 जनवरी 2014 को निधन हो गया.वह 82 वर्ष के थे.कुर्जी होली फैमिली हाॅस्पिटल में दम तोड़े.एक्सटीटीआई में दफन किया गया.

आलोक कुमार


 

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 77 वीं पुण्यतिथि

 राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की मूर्ति पर माल्यार्पण 

पटना. बिहार कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 77 वीं पुण्यतिथि कार्यक्रम का आयोजन किया गया.इस अवसर पर सभी कांग्रेसजनों ने उनके मूर्ति पर माल्यार्पण किया.

वक्ताओं ने  कहा कि गांधी एक विचार हैं और विचार कभी मरते नहीं है। गांधीवाद से अहिंसा और सत्याग्रह का सबक लेकर भारत ने विकास की राह पकड़ी लेकिन आज देश की सत्ता में गांधी के हत्यारे उनके विचारों को मारने के प्रयास में हैं जो कांग्रेस कभी सम्भव नहीं होने देगी.

महात्मा गांधी ने देश को एकजुट किया और सभी धर्म सम्प्रदाय को एकजुट किया.गांधीवादी विचार देश की पहचान है.गांधी के विचार आज भी प्रासंगिक है और आने वाले दशकों तक रहेंगे.

महात्मा गांधी के पुण्यतिथि पर  माल्यार्पण करने  वाले में हरखू झा, लालबाबू लाल, ब्रजेश प्रसाद मुनन,डॉ विनोद शर्मा,सुमन कुमार मल्लिक, एस.झा आदि  कांग्रेस जन मौजूद रहें.


आलोक कुमार

Jharkhand : खूंटी में आखिर चल क्या रहा है?

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