भव्य रक्तदान महाकल्याण शिविर
आज देश, प्रदेश और विदेशों में ईसाई समुदाय ने अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और शोक के साथ गुड फ्राइडे मनाया। यह दिन ईसाई धर्मावलंबियों के लिए गहरे आध्यात्मिक महत्व का प्रतीक है, क्योंकि इसी दिन लगभग 2000 वर्ष पूर्व ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था। मानवता के उद्धार के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले प्रभु यीशु का यह त्याग ईसाई आस्था की नींव है, और यही कारण है कि यह दिन शोक के साथ-साथ आत्ममंथन और कृतज्ञता का भी अवसर बन जाता है। यद्यपि यह दिन दुख और पीड़ा की स्मृति से जुड़ा है, फिर भी इसे ‘गुड फ्राइडे’ कहा जाता है। इसके पीछे गहरी धार्मिक और भाषाई मान्यताएं हैं। पवित्र बाइबल के सभोपदेशक (Ecclesiastes 7:1) में उल्लेख है कि किसी व्यक्ति के जन्म के दिन से अधिक उसकी मृत्यु का दिन पवित्र होता है, क्योंकि मृत्यु के साथ उसके जीवन का उद्देश्य पूर्ण होता है। इसी आधार पर प्रभु यीशु के बलिदान के दिन को ‘गुड’ अर्थात पवित्र और कल्याणकारी माना गया। दूसरी ओर, लैटिन भाषा में ‘गुड’ का अर्थ ‘होली’ यानी पवित्र भी होता है। ग्रीक परंपराओं में भी इसे ‘पवित्र शुक्रवार’ के रूप में मान्यता दी गई है। इस दिन को ...