यद्यपि यह दिन दुख और पीड़ा की स्मृति से जुड़ा है, फिर भी इसे ‘गुड फ्राइडे’ कहा जाता है। इसके पीछे गहरी धार्मिक और भाषाई मान्यताएं हैं। पवित्र बाइबल के सभोपदेशक (Ecclesiastes 7:1) में उल्लेख है कि किसी व्यक्ति के जन्म के दिन से अधिक उसकी मृत्यु का दिन पवित्र होता है, क्योंकि मृत्यु के साथ उसके जीवन का उद्देश्य पूर्ण होता है। इसी आधार पर प्रभु यीशु के बलिदान के दिन को ‘गुड’ अर्थात पवित्र और कल्याणकारी माना गया। दूसरी ओर, लैटिन भाषा में ‘गुड’ का अर्थ ‘होली’ यानी पवित्र भी होता है। ग्रीक परंपराओं में भी इसे ‘पवित्र शुक्रवार’ के रूप में मान्यता दी गई है। इस दिन को ‘होली फ्राइडे’, ‘ब्लैक फ्राइडे’ और ‘ग्रेट फ्राइडे’ जैसे नामों से भी जाना जाता है।
इस पावन अवसर पर चर्चों में विशेष प्रार्थनाएं आयोजित की गईं। श्रद्धालुओं ने उपवास रखा, मौन साधना की और प्रभु यीशु के दुखभोग को स्मरण किया। पटना के कुर्जी पल्ली में सुबह विक्टर फ्रांसिस द्वारा निर्मित “क्रूस रास्ता” की झांकी प्रस्तुत की गई, जिसने उपस्थित लोगों को प्रभु यीशु के अंतिम क्षणों की पीड़ा और बलिदान का जीवंत अनुभव कराया। इसी प्रकार बेतिया, चुहड़ी, चनपटिया सहित विभिन्न पल्लियों में भी श्रद्धापूर्वक झांकियां निकाली गईं।
गुड फ्राइडे के इस अवसर पर सेवा और मानवता का उत्कृष्ट उदाहरण भी देखने को मिला। बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा एवं प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के संयुक्त प्रयास से कुर्जी होली फैमिली परिसर में एक भव्य रक्तदान महाकल्याण शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर के मुख्य आयोजक बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष राजन क्लेमेंट साह थे। इस अवसर पर अनेक युवाओं और समाजसेवियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और रक्तदान कर मानव सेवा का संदेश दिया।
रक्तदान शिविर में शैलेश, खुशबू, रीना पीटर, अखिलेश मंगेशकर, पंकज, विक्रम, दानिश सहित कई रक्तदाताओं ने अपनी सहभागिता निभाई। विशेष रूप से युवा दंपति शैलेश अंथोनी और उनकी पत्नी खुशबू का योगदान सराहनीय रहा, जिन्होंने एक साथ रक्तदान कर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी का परिचय दिया। यह कार्य प्रभु यीशु के उस संदेश को साकार करता है जिसमें उन्होंने मानवता के लिए अपना रक्त बहाया था। इस अवसर पर दीघा विधानसभा के विधायक डॉ. संजीव चौरसिया भी उपस्थित रहे और उन्होंने सभी रक्तदाताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनका यह योगदान जरूरतमंदों के लिए जीवनदान साबित हो सकता है।
इसके अतिरिक्त, एस.के. लॉरेन्स के नेतृत्व में ‘चालीसा काल’ यानी लेंट पीरियड के दौरान प्रभु यीशु के दुखभोग पर आधारित ‘मुसीबत’ नामक गीत एवं प्रार्थना कार्यक्रम का आयोजन भी किया गया। यह कार्यक्रम दोपहर दो बजे कुर्जी चर्च में आरंभ हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। इस संगीतमय प्रार्थना में एस.के. लॉरेन्स के साथ सिरिल मरांडी, क्लारेंस हेनरी, सुजित ओस्ता, पास्कल पीटर, प्रदीप केरोबिन, रीता अगस्टीन, प्रवीण पीटर साह, सिमरन साह, अलका पौल, रीता हेनरी, हेनरी पीटर, महिमा पीटर, रोजलिन और प्रशांत बेंजामिन जैसे कलाकारों ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति दी।
इसके पश्चात चर्च द्वारा क्रूस रास्ता का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने प्रभु यीशु के अंतिम सफर के प्रत्येक पड़ाव को स्मरण किया। यह अनुष्ठान न केवल धार्मिक आस्था को प्रकट करता है, बल्कि जीवन के संघर्षों और त्याग की प्रेरणा भी देता है। इसके बाद गुड फ्राइडे की विशेष आराधना सभा आयोजित की गई, जिसमें लोगों ने गहन श्रद्धा के साथ भाग लिया।
पुण्य शुक्रवार के इस दिन देश-विदेश में ईसाई समुदाय ने उपवास और परहेज रखकर प्रभु यीशु के बलिदान को याद किया। क्रूस रास्ता के उपरांत पवित्र मिस्सा में श्रद्धालुओं ने परमप्रसाद ग्रहण किया और अपने जीवन में प्रेम, सेवा और त्याग के मूल्यों को अपनाने का संकल्प लिया। संत विंसेंट डी पौल समाज द्वारा निर्मित आवासों में रहने वाले लोगों ने भी श्रद्धालुओं के लिए शीतल पेयजल की व्यवस्था कर सेवा भाव का परिचय दिया।
इस प्रकार गुड फ्राइडे केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि मानवता, त्याग, प्रेम और सेवा का संदेश देने वाला दिन है। यह हमें यह सिखाता है कि जीवन का वास्तविक अर्थ दूसरों के लिए जीने और उनके दुखों को साझा करने में है। प्रभु यीशु का बलिदान आज भी हमें प्रेरित करता है कि हम अपने जीवन में सत्य, करुणा और सेवा के मार्ग पर चलें। यही इस पवित्र दिन की सबसे बड़ी सीख और सार्थकता है।
आलोक कुमार
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