सोमवार, 6 अप्रैल 2026

रामकृपाल यादव: जमीनी राजनीति से विधानसभा तक का लंबा सफर

                                  जमीनी राजनीति से विधानसभा तक का लंबा सफर

बिहार की राजनीति में कुछ नेता ऐसे होते हैं, जिनकी पहचान किसी एक पद या चुनावी जीत तक सीमित नहीं रहती, बल्कि उनका पूरा जीवन संघर्ष, अनुभव और निरंतर सक्रियता का उदाहरण बन जाता है। रामकृपाल यादव ऐसे ही नेताओं में गिने जाते हैं, जिन्होंने नगर निगम से लेकर संसद और अब विधानसभा तक अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है।

हाल ही में 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में दानापुर सीट से उनकी जीत ने उनके राजनीतिक कद को और अधिक मजबूत कर दिया है।

दानापुर में “यादव बनाम यादव” की दिलचस्प लड़ाई


दानापुर विधानसभा सीट का चुनाव 2025 में काफी चर्चित रहा। यहां मुकाबला “यादव बनाम यादव” का था, जिसमें रामकृपाल यादव ने आरजेडी के बाहुबली नेता रीतलाल यादव को हराया।

रामकृपाल यादव: 1,19,877 वोट

रीतलाल यादव: 90,744 वोट

जीत का अंतर: 29,133 वोट

यह जीत इसलिए भी खास मानी गई क्योंकि दानापुर क्षेत्र में रीतलाल यादव की मजबूत पकड़ मानी जाती थी।

शुरुआती जीवन और राजनीतिक शुरुआत

रामकृपाल यादव का जन्म 12 अक्टूबर 1957 को हुआ था। उन्होंने राजनीति की शुरुआत जमीनी स्तर से की।

पटना नगर निगम से पार्षद बने

बाद में उप-महापौर (डिप्टी मेयर) बने

दीघा क्षेत्र के हमीदपुर में उनकी सक्रियता से उन्हें स्थानीय पहचान मिली

यहीं से उन्होंने जनसंपर्क और संगठन की मजबूत नींव रखी।

विधान परिषद से राष्ट्रीय राजनीति तक

उनकी पहली बड़ी सफलता 1992 में मिली, जब वे बिहार विधान परिषद के सदस्य बने। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति की ओर कदम बढ़ाया और लोकसभा में लंबा सफर तय किया।

लोकसभा में उनका सफर

10वीं लोकसभा (1993-1998) – पटना (उपचुनाव)

11वीं लोकसभा (1998-1999) – पटना

14वीं लोकसभा (2004-2009) – पाटलिपुत्र

16वीं लोकसभा (2014-2019) – पाटलिपुत्र

17वीं लोकसभा (2019-2024) – पाटलिपुत्र

कुल मिलाकर वे 5 बार सांसद रहे, जो उनके मजबूत जनाधार को दर्शाता है।

राज्यसभा और लालू यादव के करीबी

साल 2010 में वे राज्यसभा पहुंचे और 2014 तक सांसद रहे। उस समय वे लालू प्रसाद यादव के करीबी माने जाते थे और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से जुड़े थे।

2014: राजनीति का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट

उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ 2014 में आया, जब उन्होंने RJD छोड़कर BJP जॉइन कर ली।

कारण:                                                                                            

पाटलिपुत्र सीट से टिकट नहीं मिला

वहां से मीसा भारती को उम्मीदवार बनाया गया

इसके बाद उन्होंने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और मीसा भारती को हराकर बड़ी जीत हासिल की।

केंद्र सरकार में मंत्री पद

2014 से 2019 तक उन्होंने केंद्र सरकार में मंत्री के रूप में काम किया:

पेयजल और स्वच्छता राज्य मंत्री (2014-2016)

ग्रामीण विकास राज्य मंत्री (2016-2019)

इस दौरान उन्होंने स्वच्छता अभियान और ग्रामीण विकास योजनाओं को जमीन पर लागू करने में अहम भूमिका निभाई।

2025: पहली बार बने विधायक

2025 का विधानसभा चुनाव उनके लिए नया अनुभव था, क्योंकि उन्होंने पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा।

सीट: दानापुर

पार्टी: BJP

परिणाम: शानदार जीत

इस जीत के बाद उन्हें नीतीश कुमार सरकार में कृषि मंत्री बनाया गया

कृषि मंत्री के रूप में भूमिका

कृषि मंत्री के तौर पर वे इन मुद्दों पर फोकस कर रहे हैं:

सिंचाई सुविधाओं का विस्तार

फसल बीमा योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन

आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा

बिहार जैसे कृषि प्रधान राज्य में यह भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।

चार सदनों का अनोखा अनुभव

रामकृपाल यादव उन गिने-चुने नेताओं में हैं जिन्होंने:

बिहार विधान परिषद

राज्यसभा

लोकसभा

बिहार विधानसभा

चारों सदनों में सदस्य रहने का अनुभव प्राप्त किया है।

निष्कर्ष

रामकृपाल यादव का राजनीतिक जीवन इस बात का उदाहरण है कि मजबूत जमीनी पकड़, सही समय पर लिए गए फैसले और जनता से जुड़ाव किसी भी नेता को लंबे समय तक प्रासंगिक बनाए रखते हैं।

दानापुर से उनकी जीत ने यह साबित कर दिया कि अनुभव और रणनीति के सामने परंपरागत दबदबा भी कमजोर पड़ सकता है। आने वाले समय में वे बिहार की राजनीति और कृषि क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।

आलोक कुमार

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