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पुलिस तकनीकी जांच के माध्यम से संबंधित नंबर और व्यक्ति की पहचान करने में जुटी।

 पुलिस तकनीकी जांच के माध्यम से संबंधित नंबर और व्यक्ति की पहचान करने में जुटी।


पटना . पश्चिम चम्पारण जिला प्रशासन ने एक गंभीर मामले पर कार्रवाई करते हुए लौरिया थाने में सनहा दर्ज कराया है। मामला जिलाधिकारी के नाम और फोटो का दुरुपयोग कर फर्जी आदेश जारी करने से संबंधित है. लौरिया अंचल अधिकारी ने थानाध्यक्ष को आवेदन देकर बताया कि 21 सितंबर 2025 को एक अज्ञात व्हाट्सएप नंबर (मो. 6203657540) से उनके मोबाइल पर आदेश पत्र भेजा गया। इस आदेश में दाखिल-खारिज वाद को रिजेक्ट करने की बात कही गई थी.

        अंचल अधिकारी ने आवेदन में उल्लेख किया कि संबंधित व्हाट्सएप प्रोफाइल पर पश्चिम चम्पारण जिलाधिकारी का फोटो और नाम अंकित था। इससे यह प्रतीत होता है कि किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा जिलाधिकारी महोदय की पहचान का दुरुपयोग कर फर्जीवाड़ा किया जा रहा है.जिला पदाधिकारी ने इस मामले को अत्यंत ही गंभीर मानते हुए थाने में सनहा दर्ज करने का निर्देश दिया.उक्त निर्देश के आलोक में अंचलाधिकारी द्वारा लौरिया थाने में सनहा दर्ज करा दी गयी है. पुलिस तकनीकी जांच के माध्यम से संबंधित नंबर और व्यक्ति की पहचान करने में जुटी है.

        जिलाधिकारी, पश्चिम चम्पारण, श्री धर्मेन्द्र कुमार ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अज्ञात नंबर या सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म से प्राप्त फर्जी संदेश, आदेश पत्र या संदिग्ध लिंक पर भरोसा न करें.उन्होंने कहा कि प्रशासन से जुड़ा कोई भी आधिकारिक आदेश केवल अधिकृत माध्यम से ही जारी होता है.उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि यदि किसी को इस तरह का संदेश प्राप्त होता है तो तुरंत नज़दीकी थाना या जिला प्रशासन को सूचित करें. जिलाधिकारी ने कहा कि फर्जीवाड़ा और धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.


आलोक कुमार


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कैथोलिक समुदाय के लिए नई उम्मीद और धार्मिक गतिविधियों में मजबूती का संकेत है

 

दुमका.झारखंड का दुमका धर्मप्रांत संथाल परगना के सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक परिदृश्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है. इस धर्मप्रांत का नेतृत्व बिशप जूलियस मरांडी कर रहे हैं और हाल ही में फादर सोनातन किस्कू को सहायक बिशप के रूप में नियुक्त किया गया है.यह नियुक्ति संथाल समाज और कैथोलिक समुदाय के लिए नई उम्मीद और धार्मिक गतिविधियों में मजबूती का संकेत है.

     दुमका धर्मप्रांत की विशेषता यह है कि इसके अंतर्गत आने वाले चार विधानसभा क्षेत्र—दुमका, जामा, जामताड़ा और सारठ—राजनीतिक रूप से सक्रिय तो हैं, लेकिन इनमें से किसी भी क्षेत्र से अब तक कोई कैथोलिक प्रतिनिधि निर्वाचित नहीं हुआ. वर्तमान समय में आलोक कुमार सोरेन, बसंत सोरेन, श्रीमती लोइस मरांडी और देवेंद्र कुंवर यहां की राजनीति में जनप्रतिनिधि के रूप में सक्रिय हैं. यह तथ्य ध्यान खींचता है कि 4,542,658 की कुल जनसंख्या (2023) में 207,336 कैथोलिक होने के बावजूद उनकी राजनीतिक भागीदारी नगण्य है.संथाल, बंगाली, पहाड़िया, उरांव, मुस्लिम और हिंदू जातीय समूहों से मिलकर बने इस क्षेत्र में भाषाई विविधता भी स्पष्ट है. हिंदी, बंगाली, पहाड़िया और उरांव जैसी भाषाएँ यहां की सामाजिक पहचान को और गहरा बनाती हैं. फिर भी कैथोलिक समुदाय की आवाज़ राजनीतिक मंचों पर लगभग गुम ही है.

     लोकसभा की 14 सीटों वाले झारखंड में दुमका एक अहम संसदीय क्षेत्र है, परंतु यहां से किसी भी कैथोलिक उम्मीदवार ने चुनावी दावेदारी तक नहीं की.वर्तमान सांसद नलिन सोरेन हैं, जिनका राजनीतिक प्रभाव स्पष्ट है.झारखंड की राजनीति मूलतः क्षेत्रीय दलों और आदिवासी नेतृत्व के इर्द-गिर्द घूमती रही है.झारखंड मुक्ति मोर्चा, वनांचल कांग्रेस और मार्क्सवादी समन्वय समिति जैसे दल यहां का आधार तय करते हैं. इस समय मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा राज्य की बागडोर संभाले हुए हैं.

     संवैधानिक ढांचे के तहत राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा होती है, लेकिन वास्तविक सत्ता मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल के हाथों में रहती है.इन तमाम परिस्थितियों के बीच सवाल यह है कि क्या झारखंड के कैथोलिक समुदाय को राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलेगा? सामाजिक, शैक्षणिक और धार्मिक क्षेत्र में सक्रिय यह समुदाय राजनीतिक रूप से अब तक उपेक्षित रहा है. भविष्य की राजनीति में अगर इनकी भागीदारी बढ़े, तो यह न केवल समुदाय की पहचान को सशक्त करेगा, बल्कि राज्य की बहुलतावादी लोकतांत्रिक संरचना को भी मजबूती देगा.दुमका धर्मप्रांत की स्थिति हमें यह सोचने पर विवश करती है कि धर्म और संस्कृति से जुड़े समुदायों की सहभागिता केवल प्रार्थना और आस्था तक सीमित न रहे, बल्कि लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व में भी अपना स्थान सुनिश्चित करे.

आलोक कुमार

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