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महाधर्माध्यक्ष फेलिक्स टोप्पो का धर्माध्यक्षीय अभिषेक की रजत जयंती

 रांची. रांची महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष फेलिक्स टोप्पो येसु समाजी हैं.उनका जन्म 21 नवम्बर 1947 को गुमला जिला में हुआ था.इस जिले के टोंगो पल्ली के एक ख्रीस्तीय परिवार में हुआ था. उनकी माता का नाम कैथरिन टोप्पो और पिता का नाम लियोस टोप्पो था. अपने माता-पिता के 9 बच्चों में उनका स्थान आठवाँ था. उन्होंने 7 सितम्बर 1968 ई. को येसु समाजी पुरोहित बनने के लिए येसु समाज के धर्म संघ में प्रवेश किया और 14 अप्रैल 1982 को उनका पुरोहिताभिषेक हुआ. उसके बाद 1997 तक विभिन्न रूपों में कलीसिया की सेवा की.

18 जुलाई 1997 को वे जमशेदपुर धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष नियुक्त किये गये.उस समय वे जमशेदपुर के येसु भवन मानगो में नोविस मास्टर के रूप में सेवा दे रहे थे. 27 सितम्बर 1997 को रांची के महाधर्माध्यक्ष तेलेस्फोर पी. टोप्पो ने उनका धर्माध्यक्षीय पावन अभिषेक सम्पन्न किया. तब से 6 अगस्त 2018 तक उन्होंने जमशेदपुर धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष के रूप में कार्य किया.

संत पापा फ्राँसिस ने 22 जून 2018 को उन्हें राँची महाधर्मप्रांत का महाधर्माध्यक्ष नियुक्त किया. 6 अगस्त 2018 को संत मरिया महागिरजाघर में महाधर्माध्यक्ष के रूप में उनका प्रतिस्थापन हुआ.तब से वे राँची महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष के रूप में कार्यरत है.

रांची महाधर्मप्रांत के कार्डिनल तेलेस्फोर प्लासिडस टोप्पो (78) का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है.वहीं रोम में रहने वाले पोप फ्रांसिस ने जमशेदपुर धर्मप्रांत के बिशप     रेव. फेलिक्स टोप्पो (70), एसजे, को रांची के नए आर्कबिशप के रूप में नियुक्त कर दिया है. यह उपशास्त्रीय प्रावधान रविवार को 24 जून, 2018 को दोपहर में 15:30 स्थानीय समय पर भारतीय मानक समय के अनुरूप रोम में सार्वजनिक किया गया था. महामहिम रेव. फेलिक्स टोप्पो, एसजे का जन्म 21 नवंबर,1947 को झारखंड, गुमला के डायसिस में हुआ था.उन्होंने 1 9 68 में सोसाइटी ऑफ जीसस में प्रवेश किया.उनका पुरोहिताभिषेक 14 अप्रैल,1982 में हुआ.उन्होंने     1990 में ग्रेगोरियन यूनिवर्सिटी, रोम से मनोविज्ञान में परास्नातक प्राप्त किए. प्री-नोवाइसेस के निदेशक के रूप में विभिन्न क्षमताओं में जेसुइट मंडली की सेवा करने के बाद, नोविश मास्टर और सुपीरियर रहे. वे 14 जून,1997 को जमशेदपुर के बिशप चुने गए. विधिवत बिशप 27 सितंबर, 1997 को बने. बिशप के रूप में वे क्षेत्रीय बिशप परिषद (झारखंड) और दो क्षेत्रीय आयोगों के अध्यक्ष थे. सेंट अल्बर्ट्स कॉलेज, रांची के कुलगुरू. वे पुरोहित के रूप में 36 साल और एक बिशप के रूप में 20 साल शानदार कार्य किए. बताते चले कि रांची के आर्कबिशप तेलेस्फोर पी टोप्पो ने 75 साल के होने पर नियमानुसार पोप को इस्तीफा भेज दिया था.तब पोप ने आर्क बिशप बने रहने को कहा था.अंतत:3 साल के बाद 78 बसंत देख लेने वाले को आर्क बिशप का आवेदन स्वीकार कर इस्तीफा लिया गया. वे कार्डिनल बने रहेंगे.


आलोक कुमार

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 153 जयंती पर उनकी प्रतिमा पर किया गया माल्यार्पण

                    *राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 153 जयंती पर उनकी प्रतिमा पर किया गया माल्यार्पण

बेतिया. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 153 जयंती के अवसर पर आज हरिवाटिका चौक स्थित उनकी आदमकद प्रतिमा पर जिला प्रशासन द्वारा माल्यार्पण किया गया तथा उन्हें नमन किया गया.

इस अवसर पर डीआईजी, चम्पारण रेंज, श्री प्रणव कुमार प्रवीण, जिलाधिकारी, श्री कुंदन कुमार, पुलिस अधीक्षक, बेतिया, श्री उपेंद्र नाथ वर्मा, अपर समाहर्त्ता, श्री राजीव कुमार सिंह सहित अन्य अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधिगण द्वारा बापू की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गयी तथा देश की आजादी में उनके अतुलनीय योगदान को याद करते हुए सराहा गया.

माल्यार्पण के उपरांत जिलाधिकारी ने कहा कि देश की आजादी में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की अतुलनीय भूमिका रही है. महात्मा गांधी के विचारों का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मान किया जाता है.इसलिए दुनियाभर में हर साल 2 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस मनाया जाता है.

उन्होंने कहा कि गांधीजी अंग्रेजों से आजादी के साथ-साथ समाज में फैली बुराइयों जैसे छुआछूत, शराब के भी घोर विरोधी थी. हमें गांधीजी के विचारों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लेना चाहिए.बापू के आदर्शों एवं उनके विचारों के अनुश्रवण का संकल्प सभी को लेना चाहिए. बापू के विचारों और उनके सिद्धान्तों को आगे बढ़ाने का कार्य सभी को करना चाहिए.

उन्होंने कहा कि पश्चिमी चंपारण के इतिहास में भी महात्मा गांधी का नाम स्वर्णिम अक्षरों में अंकित है. 15 अप्रैल, 1917 ई0 को चम्पारण की धरती पर महात्मा गांधी का आगमन हुआ तथा उनके नेतृत्व में नील आंदोलन चलाया गया, जिसके परिणामस्वरूप नीलहों के अमानवीय अत्याचार से चम्पारण के किसानों को मुक्ति मिली.इसी के साथ ही राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ चम्पारण सत्याग्रह के माध्यम से भारतीय स्वाधीनता संग्राम की मजबूत आधारशिला रखी

आलोक कुमार

बिहार कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष स्व. प्रजापति मिश्र को नमन करते हुए उन्हें महान विभूति बताया

 पटना. बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के मुख्यालय सदाकत आश्रम में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के 154वीं जयंती, पूर्व प्रधानमंत्री स्व. लालबहादुर शास्त्री के 118वीं जयंती और बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष रहें स्व. पंडित प्रजापति मिश्र के 124 वीं जयंती के मौके पर उनके तैल चित्र पर माल्यार्पण किया गया.जयंती कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष कौकब कादरी ने की.

अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचारों और पूर्व प्रधानमंत्री स्व. लाल बहादुर शास्त्री के बताए आदर्शों पर चलकर ही हमारा देश एकजुट रहेगा .गांधी के विचारों को जिंदा रखने के लिए सभी कांग्रेस जन को आगे आना होगा और देश में गांधीवाद को प्रबलता से अपनाना होगा.

स्व.  शास्त्री को नमन करते हुए उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्व. शास्त्री ने राजनीतिक शुचिता की जो मिसाल पेश की है वो राजनीतिक व्यक्तियों के लिए आदर्श है.उन्होंने बिहार कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष स्व. प्रजापति मिश्र को नमन करते हुए उन्हें महान विभूति बताया.

जयंती कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अनिल कुमार शर्मा, कार्यकारी अध्यक्ष कौकब कादरी, मीडिया विभाग के चेयरमैन राजेश राठौड़, ब्रजेश कुमार मुनन,  कुमार आशीष  पूर्व विधायक लालबाबू लाल, अमिता भूषण,  प्रवक्ता आनन्द माधव, ज्ञान रंजन, संजीव कर्मवीर, रामायण यादव,  कपिलदेव यादव, कमल देव नारायण शुक्ला, मिथिलेश शर्मा मधुकर, शशि कान्त तिवारी, अरबिंद लाल रजक, शशि रंजन, मृणाल अनामय,  मिन्नत रहमानी, सत्येन्द्र कुमार सिंह, अखिलेश्वर सिंह, ब्रज किशोर सिंह कुशवाहा, सुनील कुमार सिंह,  उदय शंकर पटेल, दुर्गा गुप्ता, गुरुदयाल सिंह, निधि पाण्डेय, विमलेश तिवारी, मुद्रिका सिंह यादव, हसीब खान, निरंजन कुमार, नादिम अंसारी, राम शंकर कुमार, सुदय शर्मा, सत्येन्द्र पासवान, अभय कुमार उपाध्याय, हेमंत झा, रश्मि सिंह, सुकुल प्रसाद, पवन कुमार केशरी, राम बाबू शर्मा, संजय कुमार पाण्डेय, समेत बड़ी संख्या में कांग्रेसजन ने महान विभूतियों को नमन किया.


आलोक कुमार

Bihar : Apprenticeship क्यों जरूरी है? प्रशिक्षण के बाद रोजगार में अनुभव की भूमिका

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