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"रोड नहीं तो वोट नहीं" आंदोलन को. 8 नवम्बर 2024 से शुरू हुआ

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 "रोड नहीं तो वोट नहीं"—गाँव की चीख़ दरभंगा .आज़ादी के 78 वर्ष पूरे हो गए, लेकिन देश के कई हिस्सों में अब भी विकास केवल भाषण और घोषणाओं तक सीमित है.दरभंगा जिले के कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखंड के सुघराईन पंचायत की स्थिति इसका ज्वलंत उदाहरण है.यहाँ के लोग आज भी बारहमासी सड़क जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित हैं.          हर साल बाढ़ और बारिश के दिनों में कच्ची सड़कें कीचड़ और गड्ढों में तब्दील हो जाती हैं.गांव के रास्ते जलमग्न होकर पूरी तरह से अवरुद्ध हो जाते हैं.परिणामस्वरूप, बच्चों की पढ़ाई, किसानों की खेती-बाड़ी, रोज़मर्रा की ज़रूरतें और सबसे महत्वपूर्ण—मरीजों को अस्पताल तक ले जाना—सब ठप पड़ जाता है. विकास के कारणों और योजनाओं की चमक-दमक इन ग्रामीणों के लिए केवल एक छलावा साबित हुई है.          इसी पीड़ा ने जन्म दिया "रोड नहीं तो वोट नहीं" आंदोलन को. 8 नवम्बर 2024 से शुरू हुआ यह आंदोलन अब गाँव की सामूहिक प्रतिज्ञा बन चुका है.पंचायत वासियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सड़क नहीं बनेगी, तब तक आने वाले विधानसभा चुनाव 2025 में वोट का बहिष्का...