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बायो मेडिकल वेस्ट का सही तरीके से उठाव एवं निस्तारण

 बायो मेडिकल वेस्ट का प्रॉपर तरीके से करायें उठाव एवं निस्तारण: जिलाधिकारी

उल्लंघन करने वाले अस्पतालों एवं जांच घरों के विरुद्ध नियमानुकूल करें कार्रवाई


बेतिया. पश्चिम चंपारण जिले के जिलाधिकारी, श्री कुंदन कुमार की अध्यक्षता में जिला परामर्श समिति की बैठक सम्पन्न हुयी. इस बैठक में बायो मेडिकल वेस्ट का सही तरीके से उठाव एवं निस्तारण आदि बिंदुओं पर विचार-विमर्श किया गया.इस अवसर पर उप विकास आयुक्त, अपर समाहर्ता, सिविल सर्जन सहित बिहार पोलुशन कंट्रोल बोर्ड के अधिकारी आदि उपस्थित रहे.

इस अवसर पर जिलाधिकारी ने कहा कि बायो मेडिकल वेस्ट का प्रॉपर तरीके से उठाव एवं निस्तारण करना अति आवश्यक है.बायो मेडिकल वेस्ट लोगों के लिए हानिकारक है तथा इससे कई प्रकार की बीमारियां होने की संभावना बनी रहती है. अधीक्षक, जीएमसीएच एवं सिविल सर्जन बायो मेडिकल वेस्ट का समुचित तरीके से निस्तारण करना सुनिश्चित करेंगे. साथ ही बायो मेडिकल वेस्ट स्टोरेज के लिए भी समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे. उन्होंने कहा कि जिले के सभी सरकारी एवं प्राइवेट अस्पतालों, जांच घरों द्वारा उक्त कानून का अनुपालन करना अनिवार्य है. उक्त कानून का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों, जांच घरों के विरूद्ध नियमानुकूल कार्रवाई सुनिश्चित की जाय.

समीक्षा के क्रम में बताया गया कि खुले में बायो मेडिकल वेस्ट से पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचता है. इसके लिए पोलुशन कंट्रोल बोर्ड से लाइसेंस लेना अनिवार्य हैं अस्पतालों को. इसके साथ ही डोमेस्टिक बायो मेडिकल वेस्ट का भी सही तरीके से उठाव करना तथा निस्तारण करना भी जरूरी है.

अधीक्षक, पीएमसीएच द्वारा बताया गया कि प्रतिदिन संबंधित एजेंसी द्वारा बायो मेडिकल वेस्ट का उठाव कर प्रॉपर तरीके से निस्तारण की कार्रवाई की जा रही है.सिविल सर्जन द्वारा बताया गया कि जिले के सभी सरकारी अस्पतालों द्वारा इसके लिए उचित कार्रवाई की जा रही है. अस्पतालों से निकलने वाले बायो मेडिकल वेस्ट का समुचित तरीके से निस्तारण की कार्रवाई की जा रही है.

जिलाधिकारी ने नगर निगम आयुक्त, बेतिया, सभी नगर निकायों के कार्यपालक पदाधिकारी सहित सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि बायो मेडिकल वेस्ट का दिशा-निर्देशों के अनुरूप उठाव, निस्तारण करना सुनिश्चित करेंगे.


आलोक कुमार

जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समीक्षात्मक बैठक सम्पन्न

 अंतर्जातीय विवाह एवं निःशक्तजन विवाह प्रोत्साहन योजना का व्यापक स्तर पर करायें प्रचार-प्रसार: जिलाधिकारी

मुख्यमंत्री अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन अनुदान योजना के तहत 61 तथा मुख्यमंत्री निःशक्तजन विवाह प्रोत्साहन अनुदान योजना के तहत 15 लाभुकों को किया गया लाभान्वित

जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समीक्षात्मक बैठक सम्पन्न


बेतिया. पश्चिम चंपारण जिले के जिलाधिकारी, श्री कुंदन कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री अन्तर्जातीय विवाह प्रोत्साहन अनुदान योजना एवं मुख्यमंत्री निःशक्तजन विवाह प्रोत्साहन अनुदान योजना का व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार कराना सुनिश्चित किया जाए ताकि लाभुक इससे लाभान्वित हो सके. उन्होंने कहा कि उक्त दोनों योजनाएं राज्य सरकार की महत्वपूर्ण योजनाएं है, इसके क्रियान्वयन में पारदर्शिता बरती जाय तथा विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित किया जाए. जिलाधिकारी समाहरणालय सभाकक्ष में आयोजित समीक्षात्मक बैठक में अधिकारियों को निर्देशित कर रहे थे.

   सहायक निदेशक, जिला सामाजिक सुरक्षा कोषांग द्वारा बताया गया कि मुख्यमंत्री अन्तर्जातीय विवाह प्रोत्साहन अनुदान योजना अंतर्गत जिले के 61 लाभुकों को स्वीकृत आवेदन के आलोक में लाभान्वित किया गया है.इसी तरह मुख्यमंत्री निःशक्तजन विवाह प्रोत्साहन योजना अंतर्गत जिले के 15 लाभुकों को स्वीकृत आवेदन के आलोक में लाभान्वित किया गया है.

   उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री अन्तर्जातीय विवाह प्रोत्साहन को और अधिक व्यापक बनाने तथा अंतर्जातीय विवाह करने वाली महिला को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से प्रोत्साहन राशि एक लाख रूपये राष्ट्रीयकृत बैंक का सावधि जमा प्रमाण पत्र के माध्यम से अनुदान देने का प्रावधान है, जिसे तीन साल के लिए फिक्स्ड किया जाता है.

मुख्यमंत्री निःशक्तजन विवाह प्रोत्साहन अनुदान योजना के अंतर्गत निःशक्त वर या वधू को 01 लाख रुपये अनुदान राशि, वर/वधु दोनों निःशक्त होने की स्थिति में 02 लाख रूपये की अनुदान राशि का प्रावधान है. निःशक्त एवं अंतर्जातीय विवाह की स्थिति में दोनों योजनाओं का लाभ देय है. राशि तीन साल की अवधि के लिए फिक्स्ड की जाती है.

इस अवसर पर उप विकास आयुक्त, श्री अनिल कुमार, सहायक निदेशक, जिला सामाजिक सुरक्षा कोषांग, श्री ब्रजभूषण कुमार आदि उपस्थित रहे.

दिव्यांग अवधेश राम ने कहा कि बगहा प्रखंड एक का 2012-13 का कन्या विवाह योजना का पैसा अभी तक वितरण नहीं किया गया है.9 साल के बाद भी हम लोगों को राशि नहीं मिली है. आवेदक आवेदन डालकर इंतजार कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि डीएम साहब अभी आ सकता हूं.

आलोक कुमार


पदाधिकारियों के साथ बैठक



गया. जिला  पदाधिकारी गया डॉ० त्यागराजन एसएम ने समाहरणालय सभाकक्ष में शिक्षा विभाग के तमाम पदाधिकारियों के साथ बैठक किया.

    बैठक में जिला पदाधिकारी ने तमाम प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी तथा जिला स्तरीय शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि सुदूरवर्ती विद्यालयों तथा नक्सल प्रभावित क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों पर विशेष नजर रखें. वहां हर हाल में शिक्षक उपस्थित रहे, किसी भी हाल में एक दिन भी मध्यान भोजन (एमडीएम) बंद ना रहे, प्रधानाध्यापक उपस्थित रहे, पठन-पाठन नियमित रूप से चले.इन सभी चीजों को आवश्यक रूप से देखते रहे.

    सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी अपने क्षेत्र के विद्यालयों का नियमित रूप से जांच करें. उन्होंने कहा कि हाई स्कूल में एडमिशन के नाम पर अवैध राशि वसूल की जाती है. इन सभी चीजों पर निगरानी रखते हुए संबंधित शिक्षक अथवा प्रधानाध्यापक पर कठोर कार्रवाई करें.

    उन्होंने सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को निर्देश दिया कि बिना किसी ठोस कारण के किसी भी शिक्षक को किसी अन्य विभाग अथवा प्रखंड में प्रतिनियुक्ति नहीं करें.यदि ऐसा पाए जाने पर संबंधित प्रधानाध्यापक के साथ-साथ प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी पर भी कठोर कार्रवाई की जाएगी.

    किसी भी विद्यालय में एमडीएम 1 दिन भी एमडीएम बंद ना हो यह सुनिश्चित कराएं.यदि कहीं से सूचना मिलती है कि किसी विद्यालय में एमडीएम बंद है तो संबंधित प्रधानाध्यापक पर कठोर कार्रवाई की जाएगी.

    सभी सरकारी विद्यालयों में लगाए गए स्मार्ट क्लास को अच्छे से संचालन करावे.सरकारी विद्यालय के विकास के लिए स्थानीय विधायक की अध्यक्षता में नियमित बैठक करावे.

        जर्जर स्थिति वाले विद्यालय भवन में किसी भी स्थिति में पठन-पाठन नहीं करावे। अगर कोई घटना होती है तो संबंधित प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी स्वयं जिम्मेदार माने जाएंगे.

  जिला पदाधिकारी ने सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को कहा कि वैसे सरकारी विद्यालय जो किसी हाईवे के किनारे, जीटी रोड के किनारे अथवा अति व्यस्ततम सड़क के किनारे जो स्कूल है.वहां पढ़ने वाले बच्चों के लिए विशेष व्यवस्था रखें. विद्यालय आने के दौरान अथवा विद्यालय से छुट्टी के उपरांत घर जाने के दौरान सड़क पार कराने के लिए स्वयं शिक्षक/ प्रधानाध्यापक उपस्थित रहकर बच्चों को  रोड क्रॉस कराएंगे.

        उन्होंने जिले के सभी शिक्षकों को स्पष्ट निर्देश दिया कि अपने-अपने विद्यालयों में विद्यार्थियों को नियमित रूप से पढ़ाई करावे. उन्होंने सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी तथा जिला स्तरीय शिक्षा विभाग के पदाधिकारी को निर्देश दिया कि हर बुधवार तथा बृहस्पतिवार को तमाम पदाधिकारी फील्ड विजिट में रहेंगे तथा अपने अधीनस्थ सभी सरकारी विद्यालयों का पूरी गुणवत्तापूर्ण निरीक्षण करेंगे. साथ ही उन्होंने जिला शिक्षा पदाधिकारी को निर्देश दिया कि प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी द्वारा विभिन्न विद्यालयों का किए गए जांच से संबंधित प्रतिवेदन लेते हुए संबंधित विद्यालय पर कठोर कार्रवाई करेंगे.

        अंत में जिला पदाधिकारी ने कहा कि अपने प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी द्वारा दिए गए निर्देशों का अवश्य निर्वहन करें. प्रखंड विकास पदाधिकारी की अध्यक्षता में जो भी बैठक आयोजित की जाती है, उसमें अनिवार्य रूप से उपस्थित रहे.आपदा संबंधित कार्यों को प्राथमिकता पर निर्वहन करें.


आलोक कुमार


डेंगू अपना पांव तेजी से पसारता जा रहा

  


पटना.पूरे बिहार में डेंगू का कहर जारी है. डेंगू अपना पांव तेजी से पसारता जा रहा है. इस वक्त की बड़ी खबर राजधानी पटना से आ रही है जहां डेंगू के डंक का शिकार आज फिर एक मासूम हो गया. सोमवार को गांधी मैदान स्थित रूबन मेमोरियल के गायनी एवं चाइल्ड हास्पिटल में एक 9 वर्षीय आरव राज की मौत हो गई. दलदली रोड निवासी लोजपा (रामविलास) के पूर्व प्रवक्ता कृष्ण कुमार कल्लू के आरव राज बड़े बेटे थे.आरव राज को गत कई दिन से बुखार था और गंभीर अवस्था में दो दिन पूर्व उसे रूबन में भर्ती कराया गया था.

      इसके पूर्व पूर्व रविवार को नालंदा मेडिकल कालेज सह अस्पताल में डेंगू पीड़ित चार माह की बच्ची की मौत हो गई.इससे पहले 10 अक्टूबर को मसौढ़ी के 10 वर्षीय बच्चे तथा शनिवार को नालंदा के पांच वर्षीय बच्चे की मौत हुई थी. डेंगू से चार बच्चों की मौत के बाद डॉक्टर बच्चों को मच्छरों से बचाने की सलाह दे रहे हैं. वहीं स्वास्थ्य विभाग को इन मौतों की जानकारी नहीं है.इस तरह की घटनाओं सेपरिजनों के बीच कोहराम मचा हुआ है. परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है.इससे पहले भी तीन दिनों के भीतर तीन बच्चों की मौत डेंगू से हो चुकी है.

  अब तक डेंगू से 5 लोगों की जान जा चुकी है. डेंगू से स्थिति और भयावह होती जा रही है.पटना में 213 नए मामले सामने आए हैं. डेंगू मरीजों की संख्या बढ़कर 3155 हो गयी है. डेंगू के बढ़ते केसेज को देखते हुए जिला प्रशासन ने सिविल सर्जन कार्यालय में एक कंट्रोल रूम बनाया है. जहां स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर चिकित्सीय परामर्श ले सकते हैं.कंट्रोल रूम नंबर 0612-2951964 पर फोन कर सकते हैं. 

     बता दें कि पटना नगर निगम में छह अंचल है. नूतन राजधानी अंचल,पाटलिपुत्र अंचल ,कंकड़बाग अंचल,बांकीपुर अंचल, अजीमाबाद अंचल,पटना सिटी अंचल है.उन अंचलों में कार्यरत कार्यालयों के बाबुओं की खिदमत करने वाले अर्दलियों को क्षेत्र में स्प्रे करने के लिए भेज दिया है.    

       इस समय पाटलिपुत्र अंचल के वार्ड नम्बर-22 A  में फेकू राम स्प्रे कर रहे हैं.उनके बगल में वार्ड इंस्पेक्टर है.जो राजधानी में कहर बरपाने वाले डेंगू के शिकार हो गये थे.प्लेटलेट्स कम होने के बाद चिकित्सक के क्लिनिक में सलाइन चढ़ाये.पांच दिन के बाद कर्तव्य निभाने आए हैं.इस समय प्रेशर में है पल पल की जानकारी मोबाइल से ऊपर के अधिकारियों को दी जा रही है.    हालात यह है नारियल का कच्चा फल डाभ जिसका पानी पीया जाता है,उसका दाम तेज है.डाभ बेचने वाले शख्स के परिजन डेंगू के शिकार कर सलाइन चढ़वा रहा है.डेंगू के बुखार में नारियल का पानी रामबाण का काम करता है.नारियल के पानी में कई मिनरल्स और पोषक तत्व होते है जो शरीर को फिट रखते हैं.    

       मखदुमपुर बगीचा में रहने  वाले लोगों ने जलजमाव वाले एरिया में ब्लींचिग पावडर छिड़काव करने की मांग की है.यदुवंशी नगर में रहने वाले एक व्यक्ति ने कहा कि उनके घर में चार लोग डेंगू से बेहाल हैं.पॉश एरिया फेयर फील्ड कॉलोनी में बहुत लोग डेंगू से परेशान हैं.

    बताया गया कि खानपान और दिनचर्या में बदलाव सेहतमंद व्यक्ति को भी बीमार कर सकता है. इसे देखते हुए ज्यादातर लोग आजकल बीमारियों के प्रति जागरूक रहने लगे हैं. पहले खतरनाक मानी जाने वाली बीमारी डेंगू के आम होने के बाद लोगों में प्लेटलेट्स को लेकर जागरूकता आई है और इसी का फायदा निजी अस्पताल उठा रहे हैं. सामान्य बीमारियों में भी डॉक्टर सीबीसी टेस्ट करवाते हैं और उसमें प्लेटलेट्स कम होना बताकर इन्हें चढ़ाने के नाम पर कमाई करते हैं.

      जबकि विशेषज्ञों के मुताबिक सीधे प्लेटलेट चढ़ाने के बजाय यह जांचना जरूरी है कि किस वजह से ये कम हुए हैं. हर मरीज को इन्हें चढ़ाने की जरूरत नहीं होती. उसकी मॉनीटरिंग अच्छे से की जाए तो दवाइयों के जरिए ये बढ़ाए जा सकते हैं. यहां तक कि मरीज को बार-बार प्लेटलेट चढ़ाने पर नुकसान भी हो सकता है. इसका असर प्लेटलेट्स चढ़ाने के बावजूद इसमें वृद्धि नहीं होने के रूप में सामने आता है. पिछले दिनों जिस डेंगू और चिकनगुनिया की दहशत फैली थी, उन बीमारियों में भी अधिकतम 5 फीसदी मरीज को प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत होती है.

मलेरिया हो या डेंगू किसी भी वायरल इन्फेक्शन से शरीर में प्लेटलेट्स कम हो ही जाते हैं. सामान्य तौर पर एक स्वस्थ व्यक्ति में 1.5 लाख से 4 लाख प्लेटलेट होना चाहिए, लेकिन यदि ये एक लाख, 90 हजार या उससे कम भी हैं, तब भी इंसान को कोई खतरा नहीं होता. उधर, पैथोलॉजी लैब और डॉक्टर लोगों में ऐसा डर पैदा कर देते हैं कि मरीज को प्लेटलेट चढ़वाना जरूरी लगने लगता है.

    खासकर डेंगू जैसी बीमारी में तो प्लेटलेट कम होने को जान पर खतरा मान लिया जाता है.डॉक्टरों के मुताबिक प्लेटलेट 20 हजार भी पहुंच जाएं तो घबराने की बात नहीं है.बिना चढ़ाए भी इन्हें बढ़ाया जा सकता है, केवल कुछ बीमारियां या स्थितियों में ही प्लेटलेट चढ़ाना जरूरी हो जाता है.

      ग्रेपफ्रूट पोषक तत्वों से भरपूर एक बेहतरीन फल है. इसमें विटामिन सी की अच्छी मात्रा होती है. यह फल बुखार निवारक के रूप में भी काम करता है और शरीर में संक्रमण से लड़ने वाली व्हाइट ब्लड सेल्स के प्रोडक्शन को बढ़ावा देता है. 

 लेकिन शाम के वक्त फलों का सेवन नहीं करना चाहिए। डेंगू में हल्के फुल्के आहार लेना ही जरूरी होता है. जिससे शरीर में एनर्जी बनी रहती है. इसमें आप खिचड़ी या अन्य हल्के-फुल्के आहार के साथ दही का सेवन कर सकते हैं.

स्ट्रॉबेरी, ब्लूबेरी, रसभरी, गोजी बेरी और ब्लैकबेरी जैसे जामुन एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं. एंटीऑक्सीडेंट मुक्त कणों को बेअसर करते हैं और इस प्रकार प्लेटलेट काउंट में कमी से निपटने में मदद करते हैं. जामुन को आहार में शामिल करने से प्लेटलेट काउंट बढ़ाने में मदद मिल सकती है.

पपीते का रस प्लेटलेट्स को बढ़ाने में मदद करता है. इसके अलावा पपीते की पत्तियां बुखार दूर करती हैं.इसलिए सुबह और रात में पपीते का पत्तों का रस पी सकते हैं। डेंगू के मरीज के लिए पपीता बहुत असरकारक होता है.

डेंगू बुखार के समय टमाटर, कद्दू, गाजर, खीरा, चुकंदर आदि का अधिक सेवन करना चाहिए। विटामिन और मिनरल्स से भरपूर ये सब्जियां मरीज के इम्यून सिस्टम को मजबूत करती हैं.इसके अलावा सब्जियों को हल्का पकाकर या उबालकर ही खाना चाहिए.

 डेंगू के मरीज को प्रोटीन की जरूरत होती है. इसलिए उसे अंडे, दूध और डेयरी के पदार्थों का सेवन करना चाहिए. अगर मरीज को नॉनवेज खा सके तो मछली, चिकन और मीट अपने खाने में शामिल करें.

संतरा, पपीता, अमरूद, कीवी, आलूबुखारा, तरबूज जैसे फलों को डेंगू के बुखार आने पर खाना चाहिए. इससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. इन फलों को खाने से मरीज को खूब पेशाब होगी.जिसके चलते वायरस पेशाब के जरिए बाहर निकल जाएगा.

 नींबू का रस डेंगू के मरीज की यूरिन के जरिए शरीर में मौजूद वायरस और विषैले तत्वों को बाहर निकालता है.इसके अलावा नींबू का रस शरीर के भारीपन को भी दूर करता है.डेंगू बुखार आने पर शरीर का एनर्जी लेवल बहुत कम हो जाता है.इसलिए मरीज को दलिया देनी चाहिए और यह आसानी पच भी जाती है.

डेंगू बुखार के आने पर अदरक और इलायची से बनी हर्बल टी को मरीज को पीना चाहिए.

अधिक से अधिक पानी पीना डेंगू के मरीज के लिए बहुत फायदेमंद होता है. डेंगू के मरीज को सूप देना चाहिए. इससे उसकी हड्डियों का दर्द भी कम होगा और मुंह का स्वाद भी ठीक रहेगा.

आलोक कुमार

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