भारतीय जनसंघ से भाजपा तक: राष्ट्रीय अध्यक्षों की परंपरा और नितिन नबीन का उभार
इतिहास की तस्वीरें तब बदलती हैं, जब संगठन ज़मीन से उठे नेतृत्व पर भरोसा जताता है. भारतीय जनसंघ से लेकर भारतीय जनता पार्टी तक की यात्रा केवल सत्ता परिवर्तन की कहानी नहीं, बल्कि एक सुदीर्घ संगठनात्मक परंपरा का विस्तार है. इस परंपरा में राष्ट्रीय अध्यक्षों की भूमिका केंद्रीय रही है—वे विचार, संगठन और अनुशासन के धुरी रहे हैं.
भारतीय जनसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष
भारतीय जनसंघ की स्थापना के साथ जिन नेताओं ने संगठन की वैचारिक नींव रखी, वे आज भी राजनीतिक इतिहास में स्मरणीय हैं—
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी (1951–1952) मौलि चन्द्र शर्मा (1954) प्रेम नाथ डोगरा (1955) आचार्य देवप्रसाद घोष (1956–1959) पीताम्बर दास (1960) अवसरला राम राव (1961) आचार्य देवप्रसाद घोष (1962, 1964) टेव वीट (1963) वाछराज व्यास (1965) बलराज मधोक (1966) पंडित दीनदयाल उपाध्याय (1967–1968)
इन नामों ने संगठन को वैचारिक दृढ़ता और अनुशासित ढांचा दिया, जिसने आगे चलकर भाजपा का स्वरूप गढ़ा.
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष (1980 से अब तक)
1980 में भारतीय जनता पार्टी के गठन के बाद नेतृत्व की यह परंपरा और मजबूत हुई—
अटल बिहारी वाजपेयी (1980–1986)
लालकृष्ण आडवाणी (1986–1991, 1993–1998, 2004–2005)
मुरली मनोहर जोशी (1991–1993)
कुशाभाऊ ठाकरे (1998–2000)
बंगारू लक्ष्मण (2000–2001)
के. जनाकृष्णमूर्ति (2001–2002)
वेंकैया नायडू (2002–2004)
राजनाथ सिंह (2005–2009, 2013–2014)
नितिन गडकरी (2009–2013)
अमित शाह (2014–2020)
जगत प्रकाश नड्डा (2020–2025/26)
यह क्रम बताता है कि भाजपा में अध्यक्ष पद केवल औपचारिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि संगठन संचालन की सबसे अहम कड़ी है.
नितिन नबीन: परंपरा और परिवर्तन का संगम
अब इसी परंपरा में बिहार के नितिन नबीन का नाम जुड़ता दिखाई दे रहा है.भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी देकर साफ संकेत दे दिया है कि नेतृत्व चयन में संगठनात्मक क्षमता, कार्यकर्ता-जुड़ाव और अनुशासन सर्वोपरि है.
नितिन नबीन बिहार सरकार में सड़क निर्माण मंत्री हैं और भाजपा के वरिष्ठ नेता नवीन किशोर सिन्हा के पुत्र हैं. वे पांच बार के विधायक रह चुके हैं और मात्र 45 वर्ष की आयु में यह बड़ी जिम्मेदारी संभालने वाले नेताओं में शामिल हो गए हैं. तुलना करें तो अमित शाह जब राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे, तब उनकी उम्र 50 वर्ष थी—इस दृष्टि से यह फैसला भाजपा की युवा नेतृत्व पर बढ़ती भरोसेमंद रणनीति को दर्शाता है.
बिहार से राष्ट्रीय क्षितिज तक
बिहार की पूर्व उपमुख्यमंत्री और राज्य की पहली महिला उपमुख्यमंत्री रेणु देवी ने नितिन नबीन को बधाई देते हुए कहा कि बिहार के बेटे को यह जिम्मेदारी मिलना पूरे राज्य के लिए गर्व की बात है.यह बयान केवल औपचारिक शुभकामना नहीं, बल्कि उस राजनीतिक संदेश का संकेत है कि क्षेत्रीय नेतृत्व अब राष्ट्रीय भूमिका में निर्णायक बन रहा है.
निष्कर्ष
नितिन नबीन का उभार केवल एक व्यक्ति का राजनीतिक विस्तार नहीं है, बल्कि उस संगठनात्मक संस्कृति की जीत है, जो कार्यकर्ता से नेतृत्व तक की यात्रा को संभव बनाती है। भारतीय जनसंघ से भाजपा तक की परंपरा में यह नया अध्याय बताता है कि भाजपा में नेतृत्व बदलाव अचानक नहीं, बल्कि लंबे संगठनात्मक अभ्यास का परिणाम होता है.
यह नाम परंपरा और परिवर्तन—दोनों का संतुलित प्रतीक बनकर उभरता है.
आलोक कुमार
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