शुक्रवार, 9 जनवरी 2026

संत पेत्रुस महागिरजाघर का पवित्र द्वार बंद

 संत पेत्रुस महागिरजाघर का पवित्र द्वार बंद

जयंती वर्ष का समापन, पर ईश्वर की दया अब भी खुली


रोम से उठी एक ऐतिहासिक गूंज— 
                                                                       6 जनवरी 2026 को, प्रभु प्रकाश महापर्व के पावन अवसर पर, संत पेत्रुस महागिरजाघर का पवित्र द्वार औपचारिक रूप से बंद कर दिया गया. इसके साथ ही 24 दिसंबर 2024 से आरंभ हुए पवित्र जयंती वर्ष का भी विधिवत समापन हो गया.यह विशेष धर्मविधि संत पापा लियो चौदहवें (Pope Leo XIV) के नेतृत्व में सम्पन्न हुई.संत पेत्रुस महागिरजाघर का यह पवित्र द्वार रोम के चार प्रमुख पोप महागिरजाघरों में अंतिम था, जो अब तक खुला हुआ था. लाखों तीर्थयात्रियों के लिए यह द्वार केवल एक प्रवेश मार्ग नहीं, बल्कि आशा, पश्चाताप और नवीकरण का प्रतीक रहा.

पवित्र द्वार बंद, लेकिन दया का द्वार नहीं                                                                                                          इस धर्मविधि की सबसे मार्मिक पंक्ति वही रही, जिसने पूरे जयंती वर्ष की आत्मा को शब्द दिए—“यह पवित्र द्वार बंद हो गया है, लेकिन आपकी दया का द्वार कभी बंद नहीं होता.”पोप लियो XIV ने पवित्र वर्ष के लिए धन्यवाद अर्पित करते हुए प्रार्थना की कि ईश्वर की कृपा के “खजाने” सदा खुले रहें, ताकि विश्वासियों को जीवन-यात्रा में आशा और अंत में प्रभु के घर तक पहुंचने का भरोसा मिले.

परंपरा और प्रतीक का अद्भुत संगम                                                                                                        परंपरा के अनुसार इस बार पवित्र द्वार को सार्वजनिक रूप से दीवार से सील नहीं किया गया. केवल उसके कांस्य पल्लों को बंद किया गया. दीवार से सील करने की प्रक्रिया आने वाले दिनों में निजी रूप से पूरी की जाएगी.धर्मविधि के दौरान “ओ क्लेविस डेविड” भजन का गायन हुआ. इसके बाद पोप पवित्र द्वार के समक्ष घुटनों के बल झुके, कुछ क्षण मौन प्रार्थना की और फिर द्वार बंद किया. यह क्षण केवल समापन का नहीं था, बल्कि यह याद दिलाने वाला था कि ईश्वर की करुणा किसी भौतिक द्वार पर निर्भर नहीं होती.

प्रभु प्रकाश महापर्व और ख्रीस्तयाग                                                                                                                  पवित्र द्वार बंद करने के बाद पोप लियो XIV ने संत पेत्रुस महागिरजाघर में प्रभु प्रकाश महापर्व का समारोही ख्रीस्तयाग अर्पित किया. अपने संदेश में उन्होंने फिर दोहराया कि जयंती वर्ष का सार केवल एक समय-सीमा नहीं, बल्कि एक आत्मिक यात्रा है—जो दया, आशा और विश्वास से आगे बढ़ती है.

पवित्र द्वार अब कैसे सुरक्षित किया जाएगा?                                                                                                        अब संत पेत्रुस फैक्ट्री (समपीयेत्रीनी) के तकनीशियन महागिरजाघर के भीतर पवित्र द्वार को ईंटों की दीवार से सील करेंगे। इस दीवार के भीतर एक धातु कैप्सूल (कैप्सिस) रखा जाएगा, जिसमें पवित्र द्वार बंद करने का आधिकारिक दस्तावेज़,जयंती वर्ष के स्मारक सिक्के और पवित्र द्वार की चाबियाँ सुरक्षित रखी जाएँगी.यह परंपरा इतिहास और वर्तमान को जोड़ने वाला सेतु है.

पोप लियो XIV : इतिहास में एक नया अध्याय                                                                                                पोप लियो XIV, जिनका मूल नाम रॉबर्ट फ्रांसिस प्रेवोस्ट है, का चुनाव 8 मई 2025 को हुआ. वे रोमन कैथोलिक चर्च के 267वें पोप हैं और संयुक्त राज्य अमेरिका से आने वाले प्रमुख पोपों में से एक हैं. उन्होंने अपने पूर्ववर्ती पोप फ्रांसिस का स्थान ग्रहण किया, जिनका निधन 21 अप्रैल 2025 को हुआ था.

अंत में…                                                                                                                                                      संत पेत्रुस महागिरजाघर का पवित्र द्वार भले ही अब बंद हो गया हो, लेकिन जयंती वर्ष का संदेश आज भी उतना ही जीवंत है—ईश्वर की दया, आशा और प्रेम के द्वार कभी बंद नहीं होते.यही इस पवित्र वर्ष की सबसे बड़ी सीख है, जो दीवारों से नहीं, बल्कि हमारे हृदयों से जुड़ी है.


आलोक कुमार

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