कुछ निवाले ही खाता और बाकी को फेंक देता
अपने बाकी परिवार और दोस्तों को भी ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित किया
पटना.एक गांव में गणेश नाम का एक जवान लड़का रहता था.मगर गणेश लापरवाह था और अक्सर अपना खाना बर्बाद करता था.इस महंगी में भी वह अक्सर अपने खाने में से कुछ निवाले ही खाता और बाकी को फेंक देता था.
एक दिन गणेश का परिवार एक गरीब गांव की यात्रा पर गया था.जब वे पहुंचे, तो उन्होंने बहुत से बच्चों को देखा जो भूखे थे और उनके पास खाने के लिए कुछ नहीं था. गणेश भूखे बच्चों को देखकर दुखी हो गया और महसूस करने लगा कि वह कितना भाग्यशाली है कि उसे कम से कम खाने के लिए भोजन तो मिल जा रहा है.
अगले दिन गांव में , गणेश का परिवार एक संस्था में जाता है जहाँ स्वयंसेवक गाँव में भूखे लोगों को भोजन परोसते दिखे गणेश यह देखकर चैंक गया कि कितने सारे लोग एक समय के भोजन के लिए घंटों लाइन में खड़े रहते हैं. उसने महसूस किया कि भोजन को बर्बाद करना न केवल अपमानजनक है बल्कि दूसरों के लिए भी हानिकारक है.
जब गणेश घर वापस गया, तो उसने खुद से वादा किया कि वह फिर कभी खाना बर्बाद नहीं करेगा.अब वह उस भोजन की सराहना करने लगा जो उसे खाने के लिए दिया जाता था और अब वो बिना बर्बादी के अपना सारा खाना खाने लगा.उसने अपने बाकी परिवार और दोस्तों को भी ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित किया.
गणेश ने महसूस किया कि भोजन एक अनमोल संसाधन है जिसे कभी भी बर्बाद नहीं करना चाहिए.उसने जाना कि संसार में करोड़ों लोग भूखे हैं, और भोजन को बर्बाद करके वह उनके दुख को और बढ़ा देता है.
आलोक कुमार
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