सेविकाओं को 25000 और सहायिकाओं को 18,000 प्रतिमाह मानदेय राशि दी जाए

 




चयन मुक्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बहाल करने की मांग


अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि 10 हजार रुपए सुनिश्चित की मांग


पटना.बिहार राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी यूनियन का आह्वान पर आंगनबाड़ी सेविकाएं 29 सितंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चली गयी थी.इनकी मांग है कि सरकारी कर्मचारी के दर्जा और मानदेय में बढ़ोत्तरी किया जाए. बिहार में महागठबंधन ने घोषणा-पत्र में सरकार बनने पर आंगनबाड़ी सेविका और सहायिका के मानदेय को दुगना करने का वादा किया था. तेजस्वी यादव ने लगभग अधिकांश चुनावी सभाओं में आश्वासन दिया था.

               बिहार राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी यूनियन (ऐक्टू-गोप गुट) की संयोजक रंजना यादव ने कहा कि हमलोग सत्ता नहीं मांग रहे थे.हम तो आंगनबाड़ी सेविका और सहायिका को बिहार सरकार की ओर से अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि 10 हजार रुपए सुनिश्चित की मांग कर रहे थे.बिहार सरकार भी सुप्रीम कोर्ट का आदेश के आलोक में बिहार में भी ग्रेच्युटी भुगतान करना सुनिश्चित करें.केंद्र सरकार की तरह ही सरकारी कर्मचारी का दर्जा देते हुए ग्रेड सी और ग्रेड डी में समायोजित किया जाए.जब तक सरकारी कर्मचारी का दर्जा प्राप्त नहीं हो जाता है, तब तक सेविकाओं को 25000 और सहायिकाओं को 18,000 प्रतिमाह मानदेय राशि दी जाए.

योग्य सहायिका और सेविका की बहाली के लिए अतिरिक्त 10 बोनस अंक देने के प्रावधान को लागू किया जाए. सेविका से पर्यवेक्षिका और सेविका सहायिका के रिक्त सभी पदों पर अविलंब बहाली सुनिश्चित की जाए. 16 मई 2017 और 20 जुलाई 2022 के समझौते के आलोक में लंबित मांगों को लागू किया जाए.

             बिहार राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी यूनियन (ऐक्टू-गोप गुट) की संयोजक रंजना यादव ने कहा कि हमलोग लंबित मांगों को लागू पूरा करने की मांग कर रहे थे,तो सरकार के द्वारा चयनमुक्त कर दी गयी.13 दिसंबर,2023 से सेविका 10204 और सहायिका 8016 को चयन मुक्त  कर दी गयी.कुल 18,220 आंगनबाड़ी सेविका सहायिका के चयन मुक्त हैं.

                    जल्द ही राज्य में 18,220 आंगनबाड़ी सेविका सहायिका के चयन मुक्त का आदेश वापस होगा.यह आश्वासन बृहस्पतिवार को प्रतिनिधिमंडल के नेताओं को समाज कल्याण मंत्री मदन सहनी ने दिया. वार्ता के दौरान प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों को मंत्री ने कहा कि आप लोगों के अनुरोध को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सकारात्मक रूप से लिया है. सरकार आप लोगों के प्रस्ताव पर विचार कर रही है और जल्द ही खुशखबरी मिलेगी. चयन मुक्त के आदेश की वापसी को लेकर भाकपा (माले) विधायक दल के उप नेता सत्यदेव राम के नेतृत्व में एक शिष्टमंडल मंत्री मदन सहनी से मिला था.

                  शिष्टमंडल में स्कीम वर्कर्स फेडरेशन की राष्ट्रीय महासचिव शशि यादव, बिहार राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी यूनियन (ऐक्टू-गोप गुट) की संयोजक रंजना यादव, पूनम देवी आदि मौजूद थीं. इस अवसर पर एक स्मार पत्र समाज कल्याण मंत्री को दिया गया, जिसमें चयन मुक्ति आदेश वापस लेने और मानदेय बढ़ाने की मांग की गई. अगर जल्द ही चयनमुक्त के आदेश को वापस नहीं किया गया तो सात जनवरी को पटना समेत पूरे राज्य में चयन मुक्ति वापसी सत्याग्रह आंदोलन का आयोजन किया जाएगा.

आलोक कुमार

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