मुख्यमंत्री जी को आर्चबिशप तथा एस.के.लॉरेन्स के द्वारा धन्यवाद दिया
सब्जी बाग कब्रिस्तान को सेमेट्री कमेटी के हवाले कर दिए
पटना.बिहार में पटना महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष सेबेस्टियन कल्लूपुरा के नेतृत्व में और इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स काउंसिल,माइनॉरिटी डिपार्टमेंट, बिहार,पटना के महासचिव एस.के.लॉरेन्स के नेतृत्व में सीएम नीतीश कुमार को क्रिसमस की बधाई दी गयी.मौके पर वर्षों से बन्द पड़े सब्जी बाग कब्रिस्तान में ईसाई मृत शवों के दफनाने की इजाजत देने के लिये मुख्यमंत्री जी को आर्चबिशप तथा एस.के.लॉरेन्स के द्वारा धन्यवाद दिया गया।
इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स काउंसिल,माइनॉरिटी डिपार्टमेंट, बिहार,पटना के महासचिव एस.के.लॉरेन्स के द्वारा उक्त कब्रिस्तान में शवों को दफन करने की इजाजत देने के लिये मुख्यमंत्री को पत्र दिया गया था तथा इसके संदर्भ में डी एम,पटना, डॉ० चंद्रशेखर सिंह, भा०प्र०से० से कई बार वार्ता की गयी थी। तत्पश्चात डी एम के द्वारा जांच पड़ताल कराने के बाद सब्जी बाग स्थित कब्रिस्तान में मृत ईसाईयों के शवों को दफनाने की इजाजत देने से संबंधित एस के लॉरेन्स को पत्र दिया गया था। एस के लॉरेन्स ने बताया कि आज सब्जी बाग स्थित कब्रिस्तान में शवों को दफनाने के लिये दो स्थानों पर कब्र की खुदाई करायी गयी. शुरुआत में कुछ लोगों के द्वारा खुदाई न हो इसके लिये आपत्ति की गयी. लेकिन ईश्वर की कृपा से सफलतापूर्वक खुदाई की गयी.
बता दें कि एक सेमेट्री कमेटी है.पटना महाधर्मप्रांत के विकर जनरल फादर जेम्स जौर्ज सेमेट्री कमेटी के सेक्रेटरी है.सेमेट्री कमेटी के द्वारा शव को दफनाने के लिए दाे कब्र की खुदाई की गयी है.
इस अंग्रेजों के समय की कब्रिस्तान को हिंदुस्तानियों के हाथ में लाने का मैराथन प्रयास इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स काउंसिल,माइनॉरिटी डिपार्टमेंट, बिहार,पटना के महासचिव एस.के.लॉरेन्स ने किया है.जब कभी भी सी एम नीतीश कुमार से मिलने गये या ज्ञापन पेश किए.उसमें सब्जी बाग स्थित कब्रिस्तान का जिक्र करते थे.
सीएम नीतीश कुमार के निर्देश पर पटना के डीएम डॉ० चंद्रशेखर सिंह, भा०प्र०से० ने साहसिक व कागजी कदम उठाकर कब्रिस्तान को सेमेट्री कमेटी के हवाले कर दिए है.
बता दें कि शहर के मध्य में सब्जी बाग के पास अशोक राजपथ पर स्थित कब्रिस्तानों में से एक को 1830 में कोलकाता के एक बिशप द्वारा खोला गया था. पटना के पूर्व कमिश्नर सेसिल फॉल्डर समेत कई प्रतिष्ठित ब्रिटिश सरकारी अधिकारियों को यहां दफनाया गया था. तत्कालीन बंगाल सरकार ने 1875 में कब्रिस्तान को बंद घोषित कर दिया था, लेकिन 1930 तक यहाँ दफ़न किया जाता था क्योंकि इस मैदान में कई कब्रों पर बहुत बाद की तारीखें दर्ज हैं.अब यहां पर दफन हो सकेगा
आलोक कुमार

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