सोमवार, 8 दिसंबर 2025

इच्छुक अभ्यर्थियों का एनसीएस पोर्टल पर निबंधन कराना अनिवार्य है


 


11 दिसंबर को जिला नियोजनालय के प्रांगण में जॉब कैम्प का आयोजन

बेतिया .जिला नियोजनालय के नंबर 06254-295737 पर संपर्क कर विशेष जानकारी प्राप्त कर सकते हैं अभ्यर्थी.श्रम संसाधन विभाग के द्वारा दिनांक 11.12.2025 को जिला नियोजनालय, पश्चिम चम्पारण, बेतिया के प्रांगण में जॉब कैम्प का आयोजन निर्धारित है.इस दिन 11.00 बजे पूर्वाह्न से 04.00 बजे अपराह्न तक इच्छुक अभ्यर्थी जॉब कैंप में नियोजक से जॉब के विषय में जानकारी प्राप्त कर अपना आवेदन/बायोडाटा जमा कर सकते हैं. इच्छुक अभ्यर्थियों का एनसीएस पोर्टल पर निबंधन कराना अनिवार्य है.

     जिला नियोजन पदाधिकारी द्वारा बताया गया कि 11 दिसंबर को जिला नियोजनालय के प्रांगण में आयोजित जॉब कैंप में निजी नियोजक द्वारा विभिन्न पदों यथा-ग्राहक मित्र, सिनियर ग्राहक मित्र पर कार्य करने के लिए कुल 20 अभ्यर्थियों का चयन किया जायेगा. कंपनी द्वारा चयनित अभ्यर्थियों को 11000/26000 रुपये मानदेय प्रदान जायेगी.कार्यक्षेत्र पश्चिम चम्पारण/पूर्वी चंपारण/मुजफ्फरपुर होगा. उन्होंने बताया कि अभ्यर्थी इससे संबंधित विशेष जानकारी के लिए जिला नियोजनालय के नंबर 06254-295737 पर संपर्क कर सकते हैं.


आलोक कुमार

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रविवार, 7 दिसंबर 2025

कलकत्ता महाधर्मप्रांत में है अवर लेडी ऑफ द मोस्ट होली रोजरी कैथेड्रल, मुर्गीहाटा

 

कलकत्ता महाधर्मप्रांत में है अवर लेडी ऑफ द मोस्ट होली रोजरी कैथेड्रल, मुर्गीहाटा

अवर लेडी ऑफ़ द मोस्ट होली रोज़री कैथेड्रल, मुर्गीहाटा

कलकत्ता . कलकत्ता महाधर्मप्रांत केआर्चबिशप एलियास फ्रैंक का कोट ऑफ़ आर्म्स कैथेड्रा पर स्थापित; आर्चडायोसीज़ के नए अध्याय का औपचारिक उद्घोष.मुर्गीहाटा — अवर लेडी ऑफ़ द मोस्ट होली रोज़री कैथेड्रल में आज एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक क्षण का साक्षात्कार हुआ, जब 1 दिसंबर 2025 को कैथेड्रा—बिशप की आधिकारिक सीट—के ऊपर नवनियुक्त  आर्चबिशप एलियास फ्रैंक का कोट ऑफ़ आर्म्स औपचारिक रूप से स्थापित किया गया.इस समारोह ने आर्चडायोसीज़ ऑफ़ कलकत्ता में उनके आध्यात्मिक नेतृत्व के नए दौर की शुरुआत को सार्वजनिक रूप से प्रतीकात्मक स्वीकृति प्रदान की.

कैथेड्रा: अधिकार, सेवा और शिक्षण का प्रतीक

कैथोलिक परंपरा में कैथेड्रा केवल एक भव्य कुर्सी नहीं, बल्कि बिशप के शिक्षण अधिकार (Magisterium), पादरी नेतृत्व और सेवा की प्रतिबद्धता का केंद्र माना जाता है. इसी कैथेड्रा से बिशप अपने समुदाय को मार्गदर्शन देते हैं, और इसी कारण किसी चर्च को कैथेड्रल की उपाधि प्राप्त होती है.कैथेड्रल के मुख्य वेदी–संग्रह के मध्य स्थित कैथेड्रा पर आर्कबिशप फ्रैंक का कोट ऑफ़ आर्म्स लगना इस बात का संकेत है कि यह सीट अब आधिकारिक रूप से उनके पादरी नेतृत्व के अधीन है.

कोट ऑफ़ आर्म्स और उसका आध्यात्मिक संदेश

आर्चबिशप एलियास फ्रैंक का कोट ऑफ़ आर्म्स गहरे आध्यात्मिक अर्थों और प्रतीकों से निर्मित है। इसके केंद्रीय तत्व ईसाई मूल्यों, पवित्र शास्त्र और पादरी सेवा को दर्शाते हैं। सबसे प्रमुख है इसका ध्येय वाक्य—"Non Ministrari Sed Ministrare" —"मेरी सेवा न की जाए, बल्कि मैं सेवा करूँ"यह वाक्य  आर्चबिशप के पादरी दृष्टिकोण और उनकी आध्यात्मिक प्राथमिकताओं—समर्पण, करुणा और विनम्रता—को स्पष्ट रूप से दर्शाता है.

धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व

कोट ऑफ़ आर्म्स की स्थापना केवल एक सौंदर्यात्मक कार्य नहीं, बल्कि चर्च की परंपरा में गहरे अर्थ रखने वाला संस्कारात्मक क्षण है। यह बिशप और उनके समुदाय के बीच संबंधों का औपचारिक नवीनीकरण करता है और यह घोषणा भी करता है कि नया पादरी नेतृत्व अब पूरी तरह अपने उत्तरदायित्वों को ग्रहण कर चुका है.समारोह के दौरान स्थानीय पादरियों, धार्मिक संघों, कैथेड्रल के विश्वासी समुदाय और विभिन्न चर्च संगठनों के प्रतिनिधियों ने उपस्थिति दर्ज की। सभी ने इस नए अध्याय का हर्षोल्लास के साथ स्वागत किया.

आर्चडायोसीज़ के लिए नए युग की शुरुआत

आर्चबिशप एलियास फ्रैंक का कोट ऑफ़ आर्म्स कैथेड्रा पर स्थापित होना न केवल एक परंपरा का निर्वाह है, बल्कि आने वाले समय में आर्चडायोसीज़ की आध्यात्मिक दिशा, सामुदायिक सहभागिता और पादरी सेवा की दृष्टि के लिए एक सुदृढ़ आधार भी स्थापित करता है.यह समारोह इस विश्वास के साथ संपन्न हुआ कि  आर्चबिशप फ्रैंक के नेतृत्व में आर्चडायोसीज़ नई ऊर्जा, करुणा और समर्पण के साथ आगे बढ़ेगा.

आलोक कुमार

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शनिवार, 6 दिसंबर 2025

संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की 70 वीं पुण्यतिथि


संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की 70 वीं पुण्यतिथि  

महापरिनिर्वाण दिवस के रूप में सदाकत आश्रम में मनाई गई

पटना . आज प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय, सदाकत आश्रम में भारत के संविधान निर्माता एवं सामाजिक न्याय के अग्रदूत डॉ. भीमराव अंबेडकर की 70 वीं पुण्यतिथि महापरिनिर्वाण दिवस के रूप में श्रद्धा व सम्मान के साथ मनाई गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष  राजेश राम ने की.इस अवसर पर राजेश राम के नेतृत्व  में कांग्रेसजनों ने डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें सादर नमन किया.

    इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष  राजेश राम ने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर केवल संविधान के शिल्पकार ही नहीं थे, बल्कि वे सामाजिक समानता, न्याय, शिक्षा और मानव गरिमा के सबसे बड़े हिमायती थे. आज उनकी पुण्यतिथि पर हम उनके सिद्धांतों को आत्मसात करने और देश में सामाजिक न्याय की लड़ाई को मजबूत करने का संकल्प लेते हैं.उन्होंने हमें लोकतंत्र का वह आधार दिया है, जिस पर आज भारत खड़ा है.

    उन्होंने आगे कहा कि डॉ. अंबेडकर का जीवन संघर्ष, समर्पण और राष्ट्र निर्माण का प्रेरक उदाहरण है. बाबा साहेब ने भारत के संविधान में न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों को स्थान दिया, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए उम्मीद की किरण जगाई. उन्होंने सभी कांग्रेसजनों से अपील की कि वे डॉ. अंबेडकर के बताए मार्ग—समानता, बंधुत्व और न्याय—को अपनी राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों में सर्वोपरि रखें.

      इस अवसर पर कोषाध्यक्ष जितेन्द्र गुप्ता,ब्रजेश प्रसाद मुनन, जमाल अहमद भल्लू, पूर्व विधायक अनिल कुमार, सौरभ सिन्हा, वैद्यनाथ शर्मा, अरविन्द लाल रजक, नदीम अख्तर अंसारी, चिन्मय कृति सिंह, अमरजीत कुमार, सुनील कुमार सुमन, विजय कुमार, अमित विक्रम के अलावे अन्य कांग्रेसजन उपस्थित थे.

आलोक कुमार

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शुक्रवार, 5 दिसंबर 2025

ऐतिहासिक महारैली 14 दिसंबर को रामलीला मैदान,नई दिल्ली में

दिल्ली रामलीला मैदान में SIR के मुद्दे पर 14 दिसंबर को बिहार से बड़ी संख्या में पहुंचेंगे कांग्रेसजन: राजेश राम

*रामलीला मैदान में एसआईआर के खिलाफ बिहार से बड़ी संख्या शामिल होंगे कांग्रेसजन: राजेश राम

पटना,(आलोक कुमार). आज प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय, सदाकत आश्रम, पटना में एस.आई.आर. (SIR) से जुड़े गंभीर मुद्दे को लेकर आगामी 14 दिसंबर को रामलीला मैदान,


नई दिल्ली में आयोजित होने वाली ऐतिहासिक महारैली की पूर्ण सफलता के लिए प्रदेश कांग्रेस द्वारा नियुक्त सभी जिला पर्यवेक्षकों की महत्वपूर्ण बैठक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम के अध्यक्षता में आयोजित की गई.

बैठक की अध्यक्षता कर रहे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने संबोधित करते हुए  कहा कि एस.आई.आर. के मुद्दे पर सरकार की चुप्पी और जनता की चिंता को नज़रअंदाज़ करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. आगामी 14 दिसंबर की महारैली देशभर के पीड़ितों और चिंतित नागरिकों की आवाज़ को केंद्र सरकार तक शक्तिशाली रूप में पहुँचाएगी और चुनाव आयोग के द्वारा भेदभाव पूर्ण रूप से की जा रही इस प्रक्रिया के मनमानी को राष्ट्रीय स्तर पर रखा जाएगा.

इस महारैली को लेकर बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने सभी जिला के लिए पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है और आज सभी पर्यवेक्षकों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने प्रभार जिलों से अधिकतम सहभागिता सुनिश्चित करें तथा रैली की तैयारियों में पूरी सक्रियता दिखाएं. उन्होंने कहा कि यह महारैली न केवल एस.आई.आर. से प्रभावित लोगों की पीड़ा को सामने लाने का माध्यम है, बल्कि यह केंद्र सरकार की नीतिगत विफलताओं के विरुद्ध जनता का लोकतांत्रिक प्रतिरोध भी है। बिहार के चुनाव में एसआईआर के कारण युवा, पिछड़े, दलितों का वोट काटने का कुकृत्य किया गया.

बैठक में उपस्थित सभी पर्यवेक्षकों ने रैली को पूर्णतः सफल बनाने का संकल्प दोहराया. बैठक में कोषाध्यक्ष जितेन्द्र गुप्ता, अजय चौधरी, अनिल कुमार, असित नाथ तिवारी, रौशन कुमार सिंह, चन्द्रभूषण राजपूत, कैसर कुमार सिंह, कमल देव नारायण शुक्ला, वैद्यनाथ शर्मा,  रंजीत कुमार, अमर आजाद पासवान उमेश कुमार राम, त्रिलोकी कुमार मांझी, मृणाल अनामय, संजय कुमार भारती, सुधीर शर्मा ,मनोज शर्मा, नदीम अंसारी ,गुरदयाल सिंह, अरविन्द लाल रजक, दौलत इमाम,  मुदस्सीर शम्स, संजय महाराज, हीरा सिंह बग्गा,किशोर कुमार, राजेन्द्र चौधरी, सुनील कुमार सिन्हा, ओम प्रकाश मिश्र, अमन कुमार, पवन कुमार यादव, पवन कुमार केसरी, लालू सदा, सत्येन्द्र नारायण, राहुल सिंह चौहान, लालमणि भारती, अभिषेक कुमार, सहित अन्य नेता मौजूद रहें.

आलोक कुमार


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गुरुवार, 4 दिसंबर 2025

सदाकत आश्रम में मनाई गई राजेंद्र बाबू की जयंती

 


सदाकत आश्रम में मनाई गई राजेंद्र बाबू की जयंती

 पटना .भारत के प्रथम राष्ट्रपति देशरत्न डा0 राजेन्द्र प्रसाद की 141 वीं जयंती  आज सदाकत आश्रम में मनाई गई.बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश राम  के नेतृत्व में सदाकत आश्रम के उद्यान में स्थित डा0 राजेन्द्र प्रसाद की प्रतिमा पर  कांग्रेसजनों ने माल्यार्पण किया.

      इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम  कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद भारतीय स्वतंत्रता संग्राम, भारतीय संविधान निर्माण और राष्ट्र निर्माण के अतुलनीय पुरोधा थे. उनका सादा जीवन, उच्च विचार और देश के प्रति समर्पण आज भी हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है.कांग्रेस पार्टी सामाजिक न्याय, समानता और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य करती रहेगी, जो डॉ. राजेंद्र प्रसाद के आदर्शों की सच्ची विरासत है.

     राजेश राम ने कहा कि डा0 राजेन्द्र प्रसाद में विलक्षण प्रतिभा  के साथ साथ  उनका स्वाभाव भी बहुत ही  मृदुल था.देश के प्रथम राष्ट्रपति का पद ग्रहण करने वाले राजेन्द्र बाबू सामान्य जीवन जीने में विश्वास रखते थे.प्रदेश अध्यक्ष  कहा कि कांग्रेस पार्टी के लिये यह बड़े गर्व की बात है कि डा0 राजेन्द्र प्रसाद 14 वर्षों से अधिक समय तक बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष पद को सुशोभित किये और सदाकत आश्रम में ही अंतिम सांस ली.

         इस अवसर पर कोषाध्यक्ष जितेन्द्र गुप्ता, अनुशासन समिति के अध्यक्ष कपिलदेव प्रसाद यादव, जमाल अहमद भल्लू, ब्रजेश प्रसाद मुनन, असित नाथ तिवारी, सौरभ सिन्हा, अजय चौधरी, रौशन कुमार सिंह, कमलदेव नारायण शुक्ला, मंजीत आनन्द साहू, मनोज शर्मा ,अरविन्द लाल रजक, सुधीर शर्मा, उदय शंकर पटेल, नदीम अंसारी,दुर्गा प्रसाद, राजेन्द्र चौधरी, अरूण पाठक, सत्येन्द्र कुमार सिंह, विशाल यादव, यशवन्त कुमार चमन, किशोर कुमार, पल्लवी कुमारी, मृणाल अनामय,अमन कुमार सहित बड़ी संख्या में कांग्रेसजनों ने भी राजेन्द्र बाबू की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया.


आलोक कुमार

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Alok Kumar

बुधवार, 3 दिसंबर 2025

अनुशासित और अधिक मसीह-केंद्रित बनाता है

 

पटना .सिरो-मालाबार कलीसिया अपने पांच-वर्षीय पादरी अभियान के चौथे पड़ाव पर पहुंच चुकी है—कलीसियाई अनुशासन का वर्ष. यह संयोग नहीं, बल्कि आवश्यकता की मांग है. वैश्वीकरण के प्रवाह में जब पहचान धुंधली पड़ने लगती है, जब परंपरा केवल स्मृतियों में सिमटने लगती हैं, और जब विश्वास की जड़ें प्रवासी जीवन की भागदौड़ में खोने लगती हैं—तब अनुशासन ही वह आधार बनता है जो कलीसिया को स्थिर रखता है.

लेकिन ‘अनुशासन’ शब्द को समझने की आवश्यकता है. अनुशासन किसी दंड की छाया नहीं, बल्कि प्रशिक्षण है; किसी बंधन की जंजीर नहीं, बल्कि आध्यात्मिक परिपक्वता का मार्ग है. लैटिन शब्द disciplina यही सिखाता है—निर्देशन, शिक्षा और गठन.इसी शिक्षा के द्वार से होकर हम मसीह को गहराई से जानने, उनके साथ एकाकार होने और ईसाई जीवन को सच्चाई से जीने के योग्य बनते हैं.

कैनन विधि: व्यवस्था नहीं, सहभागिता का सेतु

कैथोलिक कलीसिया केवल एक संस्था नहीं—यह सहभागिता का जीवित शरीर है.

ईश्वर त्रिएक के साथ हमारा संबंध तभी संभव है जब हम कलीसिया, उसके शिक्षण, उसकी परंपराओं और उसके अनुशासन के भीतर जीते हैं.

संत पौलुस तिमोथियुस को बताते हैं:

“यह जानने के लिए कि ईश्वर के घर में कैसे आचरण करना चाहिए.”

यह आचरण हमें कलीसिया के कानून—CIC, CCEO, और सिरो-मालाबार के विशेष नियम—सिखाते हैं.

इन विधियों का उद्देश्य नियंत्रण नहीं, बल्कि संरक्षण है—

हमारे विश्वास का संरक्षण

हमारी परंपरा का संरक्षण

कलीसिया की एकता का संरक्षण

और आज यह संरक्षण पहले से कहीं अधिक आवश्यक है.

प्रवासी जीवन में पहचान की चुनौती

ग्रेट ब्रिटेन की सिरो-मालाबार एपरकी, जिसे पोप फ्रांसिस ने स्थापित किया, केवल प्रशासनिक ढांचा नहीं—यह हमारी विरासत का रक्षक है.

यह एपरकी इसलिए बनी कि प्रयास में भी हमारा मर्थोमा नस्रानी चरित्र जीवित रहे—

हमारी लिटुर्जी,

हमारी आध्यात्मिकता,

हमारी भाषा,

हमारा अनुशासन,

और हमारी संस्कृति.

आज की दुनिया एकरूपता की ओर बढ़ रही है—सब समान दिखें, समान बोलें, समान सोचें। ऐसे समय में अपनी परंपरा को सुरक्षित रखना विद्रोह नहीं, बल्कि आत्म-सम्मान है.

यही कारण है कि कलीसिया विशेष रूप से कहती है—

जहाँ भी विश्वासियों के समूह हों, वहाँ उनकी मूल परंपरा जीवित रहनी चाहिए.

क्योंकि बिना परंपरा के, पहचान खो जाती है;

और बिना पहचान के, विश्वास खोखला हो जाता है.

अनुशासन का वर्ष: आत्म-परिवर्तन का निमंत्रण

बिशप यावसेप स्रम्पिक्कल का यह आह्वान अत्यंत समयोचित है—

“यह वर्ष सीखने, समझने और जीने का वर्ष बने.”

अनुशासन केवल पुरोहितों या धर्मबहनों का दायित्व नहीं—

यह हर नस्रानी विश्वासी के जीवन का हिस्सा है.

क्योंकि अनुशासन हमारी आस्था को व्यवस्थित करता है,

हमारी लिटुर्जी को गरिमा देता है,

और हमारे समुदाय को एकत्व में बांधता है.

जब पल्लियोगम जीवित होता है—तो कलीसिया जनभागीदारी से मजबूत होती है.

जब पेरिश प्रशासन पारदर्शी होता है—तो विश्वास बढ़ता है.

जब विवाह के नियम, संस्कारों की समझ, और CCEO की शिक्षा लोगों तक पहुँचती है—तो कलीसिया का जीवन संतुलित होता है.

अनुशासन बाहरी परिवर्तन नहीं, भीतर से होने वाला पुनर्जागरण है.

लक्ष्य और कार्य—एक दिशा, एक संकल्प

इस वर्ष के पाँच लक्ष्य और नौ कार्य योजनाएँ केवल औपचारिक सूची नहीं;

ये हमारी कलीसिया के भविष्य का रोडमैप हैं—

शिक्षा

जागरूकता

परंपरा संरक्षण

प्रशासनिक सुधार

सहभागिता और सहयोग


इनके पूरा होने पर हमारी कलीसिया न केवल संगठित होगी, बल्कि “साक्ष्य देने वाली कलीसिया” बनेगी—

एक ऐसी कलीसिया जो अपने अनुशासन से, अपने जीवन से, और अपने आचरण से सुसमाचार का उजाला फैलाती है.

अंतिम संदेश: अनुशासन—अनन्त जीवन की तैयारी

कलीसियाई अनुशासन का अंतिम उद्देश्य यही है—

हमें अनन्त जीवन के लिए तैयार करना.

हमारा दैनिक जीवन, हमारा आचरण, हमारी आस्था—सब उसी दिशा की यात्रा हैं.

यदि यह वर्ष हमें अधिक समर्पित, अधिक अनुशासित और अधिक मसीह-केंद्रित बनाता है—

तो यह केवल योजना का एक चरण नहीं, बल्कि आध्यात्मिक पुनर्जन्म होगा.

और यही कलीसिया की सच्ची आशा है.

मरन ईसा मसीह की कृपा, आल्हा का प्रेम, और रुहा द’कुद्शा की सहभागिता हम सबके साथ रहे—आज, कल और सदैव.


आलोक कुमार

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Alok Kumar

सोमवार, 1 दिसंबर 2025

कैथोलिक रहस्यवाद में डूबे इन इलाकों की एक विशिष्ट पहचान

 कोट्टायम ,केरल के कोट्टायम जिले की धार्मिक-सांस्कृतिक बनावट जितनी प्राचीन है, उतनी ही बहुरंगी भी। 2011 की जनगणना के अनुसार केरल में 64 लाख से अधिक ईसाई बसते हैं, जिनमें से लगभग 70 प्रतिशत सेंट थॉमस परंपरा से आने वाले हैं—एक ऐसी परंपरा, जो भारतीय ईसाईयत की सबसे पुरानी धारा मानी जाती है.इनके अतिरिक्त लैटिन कैथोलिक, पेंटेकोस्टल, सीएसआई और अन्य प्रोटेस्टेंट समुदाय राज्य की धार्मिक संरचना को और विविधता देते हैं.

इसी सांस्कृतिक-धार्मिक विरासत के हृदय में स्थित है कोट्टायम जिले का मनमट्टम, जो कंजिरापल्ली तालुका का शांत, लेकिन आध्यात्मिक रूप से समृद्ध इलाका है. यहां का सेंट जॉर्ज चर्च (सिरो-मालाबार) केवल एक पूजा का स्थान नहीं, बल्कि स्थानीय समुदाय की पहचान का स्तंभ है. यह चर्च पलाई डायोसिस के अंतर्गत आता है, जो रोमन विजयपुरम डायोसीस के क्षेत्राधिकार में स्थित एक महत्त्वपूर्ण कैथोलिक केंद्र है.

कैथोलिक रहस्यवाद में डूबे इन इलाकों की एक विशिष्ट पहचान है—सिरो-मालाबार और सिरो-मलंकरा कैथोलिक चर्चों की दोहरी परंपरा.दोनों चर्च वेटिकन से संबद्ध हैं और अपने-अपने मेजर आर्कबिशप के नेतृत्व में चलते हैं. 1930 में गीवर्गीस इवानियोज द्वारा स्थापित सिरो-मलंकरा चर्च और 1932 में पोप पायस XI द्वारा स्वीकृत इसकी हायरार्की इस बात का प्रमाण है कि केरल में ईसाई परंपराएं कितनी गहराई और अनुशासन से विकसित हुए हैं

लेकिन धर्म और परंपरा के इस समृद्ध कैनवास के बीच जीवन अपनी कठिन वास्तविकताओं के साथ खड़ा रहता है.

मनमट्टम के इस प्रतिष्ठित चर्च से जुड़े स्वर्गीय माइकल एन.एम. का परिवार हाल के दिनों में इसी जीवन-द्वंद्व का साक्षी बना.27 नवंबर 2025 को उनके पुत्र जोसेफ नजारक्कटिल की पुत्री का विवाह हुआ—एक ऐसा अवसर, जो किसी भी परिवार में उल्लास और एकजुटता का क्षण होता है.

लेकिन इसी खुशी पर कुछ ही दिनों बाद, 1 दिसंबर 2025 को, एक गहरा साया पड़ गया—माइकल एन.एम. के बड़े पुत्र जेवियर एन.एम. की पुत्रवधू शर्मी जोमोन का निधन हो गया.45 वर्ष की इस महिला ने कैंसर जैसे कठिन रोग से लंबी लड़ाई लड़ी थी.अपने पीछे वह एक पुत्र, एक पुत्री और एक विरल रिक्तता छोड़ गई, जिसे शब्दों में बांधना मुश्किल है.

कहते हैं—“विधि का विधान किसी के साथ पक्षपात नहीं करता.”

इस परिवार पर कुछ ही दिनों में खुशी और शोक दोनों आ खड़े हुए—एक ओर विवाह की मधुर ध्वनियां, दूसरी ओर असमय मृत्यु का क्रूर मौन.

जहां एक क्षण में घर आशीर्वादों से भर उठा, वहीं अगले ही क्षण दुख का पहाड़ टूट पड़ा.यह स्थिति उस अनिवार्य जीवनचक्र की याद दिलाती है, जिससे कोई भी परिवार, कोई भी समुदाय अछूता नहीं.

फिर भी ऐसी क्षणभंगुर परिस्थितियां अक्सर समाज और परिवार की संवेदनशीलता, एकजुटता और आध्यात्मिक मजबूती की परीक्षा लेती हैं—और कोट्टायम का यह पारिवारिक संस्मरण यह बताता है कि चाहे व्यक्तिगत जीवन हो या सामुदायिक, विश्वास और मानवीय सहानुभूति ही वह आधार हैं, जिन पर कठिन दिनों की छाया भी अंततः टिक नहीं पाती.


आलोक कुमार


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Alok Kumar

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