शनिवार, 31 दिसंबर 2022

संत पापा बेनेडिक्ट 16वें पिता के घर लौट गये

 


वाटिकन.धर्मनिरपेक्ष यूरोप में ईसाई धर्म के पुनर्जागरण की कोशिश करने वाले पोप एमेरिटस बेनेडिक्ट 16वें का जन्म मारक्टल अम इन्न स्थित पासौ (जर्मनी) धर्मप्रांत में 16 अप्रैल 1927 (पुण्य शनिवार) को हुआ था और बपतिस्मा भी उसी दिन हुआ.उनका बचपन का नाम जोसेफ रतजिंगर था.31 दिसंबर 2022 शनिवार को सुबह 9:34 बजे अंतिम सांस ली.वे 95 वर्ष के थे.उनके निधन होते ही ईसाई समुदाय में मातम छा गया है.

       वेटिकन प्रवक्ता मैत्तियो ब्रुनी ने शनिवार सुबह जारी एक बयान में कहा , ‘‘बड़े दुख के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि पोप एमेरिटस बेनेडिक्ट 16वें का वेटिकन में आज निधन हो गया. वहीं वाटिकन प्रेस कार्यालय ने शोक समाचार की घोषणा करते हुए जानकारी दी कि संत पापा बेनेडिक्ट 16वें पिता के घर लौट गये. उनका निधन शनिवार सुबह 9:34 बजे वाटिकन के मातेर एक्लेसिए मठ में हुआ, जिसमें उन्होंने 2013 में परमाध्यक्षीय पद से इस्तीफा देने के बाद रहने का निश्चय किया था. कार्डिनल जोसेफ रतजिंगर, पोप बेनेडिक्ट 16वें का जन्म मारक्टल अम इन्न स्थित पासौ (जर्मनी) धर्मप्रांत में 16 अप्रैल 1927 (पुण्य शनिवार) को हुआ था और बपतिस्मा भी उसी दिन हुआ.उनके पिता एक पुलिस कमीशनर थे जो बावारिया के एक किसान परिवार से आते थे जिनकी आर्थिक स्थिति मध्यमवर्गीय थी. उनकी माता केइम झील पर रिमस्टिंग से एक कारीगर की बेटी थी तथा शादी करने के पूर्व कई हॉटलों में रसोईया के रूप में काम कर चुकी था.

     बेनेडिक्ट 16वें को 2005 में उन्हें वेटिकन सिटी का पोप चुना गया था. तब उनकी उम्र 78 वर्ष की थी और वह सबसे उम्रदराज पोप में से एक थे. वह करीब आठ साल तक रोमन कैथोलिक चर्च के पोप रहे. बीमारी के चलते उन्होंने फरवरी 2013 में पद छोड़ दिया था.


जर्मनी से ताल्लुक रखने वाले बेनेडिक्ट एक ऐसे धर्मगुरु के रूप में याद रखे जाएंगे, जो पोप के पद से इस्तीफा देने वाले 600 वर्षों में प्रथम ईसाई धर्मगुरु थे.बेनेडिक्ट ने 11 फरवरी 2013 को विश्व को उस वक्त स्तब्ध कर दिया था, जब उन्होंने यह घोषणा की कि वह 1.2 अरब अनुयायियों वाले कैथोलिक चर्च का अब नेतृत्व करने में सक्षम नहीं हैं. वह आठ वर्षों तक इस पद रहे और इस दौरान कई विवादों का सामना करना पड़ा. उनके इस्तीफे ने इस शीर्ष पद के लिए पोप फ्रांसिस के चुने जाने का मार्ग प्रशस्त किया.

      पद से इस्तीफा देने के बाद से वह वेटिकन परिसर में स्थित मठ में रह रहे थे. उनकी तबीयत लंबे समय से खराब चल रही थी. वेटिकन ने 28 दिसंबर को पोप के स्वास्थ्य की जानकारी दी और कहा कि उनकी हालत और खराब हो रही है.

     

प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया;


“पोप एमेरिटस बेनेडिक्ट सोलहवें के निधन से दुखी हूं, जिन्होंने अपना पूरा जीवन चर्च और प्रभु मसीह की शिक्षाओं के लिए समर्पित कर दिया. उन्हें समाज के लिए उनकी बहुमूल्य सेवा के लिए याद किया जाएगा. मेरी संवेदनाएं दुनिया भर के उन लाखों लोगों के साथ हैं, जो उनके निधन से दुखी हैं.”


आलोक कुमार


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