गुरुवार, 20 फ़रवरी 2014

राज्य में भूमि आयोग का गठनः राष्ट्रीय समन्वयक


पटना। देश के जाने माने सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता और देशभर में सूचना के अधिकार एवं काम के अधिकार आंदोलन के अग्रणी निखिल डे की मौजूदगी में बिहार जन संसद का दूसरा दिन राजधानी के आर.ब्लॉक में समाप्त हो गया।
मौके पर एकता परिषद के राष्ट्रीय समन्वयक प्रदीप प्रियदर्शी ने कहा कि गरीबी उन्मूलन के संदर्भ में जमीन के महत्व का निर्धारण अर्थशास्त्र के शास्त्रीय सिद्धांतों के मुताबिक नहीं जा सकता। एक भूमिहीन व्यक्ति के लिए जमीन का महत्व सिर्फ आजीविका के साधन या वासस्थान के रूप में ही नहीं बल्कि पहचान,सम्मान एवं सुरक्षा के आधार के रूप में कई गुना ज्यादा है।
सर्वविदित है कि बिहार जैसे आर्थिक रूप से पिछड़े राज्य में कृषि ही बहुसंख्यक आबादी के जीवन यापन का आधार है। ग्रामीण आबादी खेती के सहारे ही अपना गुजारा चलाती है,चाहे वह खेत मालिक हो, भूमिहीन  खेतिहर हो या बटाईदार। एन एस एस द्वारा 1999-2000 में संचालित सर्वे के मुताबिक बिहार के कुल खेत मजदूरों का 76ण्6 प्रतिशत पूर्णतः भूमिहीन है। भूमिहीनता के मामले में बिहार अन्य समुदाय की तुलना में दलितों की स्थिति बहुत ज्यादा चिंताजनक है। वहीं भूमि वितरण की विषमताओं को दूर करने में बिहार में सरकारी प्रयास अततक अप्रयाप्त रहे हैं। जिस वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में हिंसा प्रतिहिंसा ज्यादा हुई है।
बिहार में मौजूदा भूमि सुधार के उपायों के संदर्भ में एकता परिषद की मांग है कि बिहार के गांव में कृषि/गैर कृषि आधारित जीवन जीने वाले 6 लाख आवासीय भूमिहीन परिवारों को न्यूनतम दस डिसमिल आवासभूमि आवंटित करना। इसके लिए आवासभूमि अधिकार कानून बनाना। भूमि हदबंदी कानूनों में संशोधन करना तथा हदबंदी सीमाओं को कम करना, जिसमें धार्मिक स्थापनाएं एवं चीनी मीलों को शामिल किया जा सके। हदबंदी से फाजिल भूमि के वितरण करना। बिहार काश्तकारी जोत अधिनियम 1973 के अनुरूप नामांतरण मैनुएल तैयार करना तथा एक समयबद्ध सीमा में सभी भू अधिकार अभिलेखों में नामांतरण करना। खासमहल भूमि के उपयोग की शर्तों के अनुसार इसकी मौजूदा स्थिति पर पुनः विचार करना तथा महादलित विकास कार्यक्रम के तहत भूमिहीन परिवारों में वासस्थान आवंटन हेतु उपलब्ध करवाना। गैर मजरूआ खास भूमि पर बड़े भूधारियों का कब्जा हटाना एवं भूमिहीन परिवारों में कृषि योग्य भूमि का वितरण करना। भूदान यज्ञ समिति द्वारा वितरित की गई भूमि पर सभी पर्चाधारी भूदान किसानों का कब्जा सुनिश्चित करना एवं दाखिल खारिज करना। भूदान में प्राप्त अयोग्य करार दी गई भूमि का पता लगाकर भूमिहीनों में वितरित करना। राज्य में भूमि आयोग का गठन कर वैधानिक अधिकार प्रदान करना जिससे भूमि सुधार कार्यक्रम को तेजी के साथ लागू किया जा सके।
वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता रणजीव , भोजन के अधिकार और लोक परिषद से जुड़े रूपेश, जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वयक की राष्ट्रीय संयोजक कामायनी स्वामी, प्रो0 जावेद अख्तर, प्रो0 विनय कंठ, फादर फिलिप मंथरा,अधिवक्ता नीतिरंजन झा समेत शहर के कई बुद्धिजीवियों ने शामिल होकर विचार व्यक्त किए।

Alok Kumar

उत्क्रमित मध्य विघालय में अध्ययनरत है नीतीश कुमार


फतेहपुर। आप चौकिए नहीं। परन्तु यह सच है कि उत्क्रमित मध्य विघालय में नीतीश कुमार अध्ययनरत हैं। अध्ययनकाल में ही खेल मंत्री बन गए हैं। इनके विभाग में वॉलीबॉल,कैरम बोर्ड और रस्सी है। इन तीन खेल सामग्रियों के बुते अपने स्कूल के विघार्थियों को खेल के क्षेत्र में फील गुड कराते हैं। इनको सातवीं घंटी में खेलकूद करवाने का मौका मिलता है। यहां पर बाल संसद और मीना मंच संचालित है।
  उत्क्रमित मध्य विघालय, गोपालकेड़ा में 345 बच्चों का नामांकन हुआ है। प्रथम कक्षा में 144, द्वितीय में 36,तृतीय में 43, चतुर्थ में 34,पांचवीं में 35 छठा में 19,सातवीं में 18 और आठवीं में 16 नामांकित हैं। मजे की बात है कि केवल प्रथम कक्षा ही एक रूम में व्यवस्थित ढंग से संचालित होता है। बाकी एक रूम में 2-3 और 4-5 कक्षा संचालित है। वहीं एक रूम में 6,7 और 8 कक्षा के विघार्थी अध्ययन हैं। आप सोच सकते हैं कि किस तरह से पढ़ाई होती होगी। यहां पर एक प्रभारी प्रधानाध्यापक और 4 प्रखंड शिक्षकों की बहाली की गयी है। यह के एक शिक्षक जयशंकर प्रसाद को आर्थिक जनगणना करने के लिए प्रतिनियुक्त कर दिया है।
प्रभारी प्रधानाध्यापक अजय किशोर बताते हैं कि यह विघालय गोपालकेड़ा गांव में स्थित है। यहां 1972 से स्कूल संचालित है। स्कूल की चहारदीवारी नहीं की जा सकी है। दो शौचालय है। एक लड़की और लड़कों के लिए बनाया गया है। इसी शौचालय का उपयोग शिक्षकगण भी कर लेते हैं। दुर्भाग्य से एक चापाकल है। जिसे पानी पीलाकर ही पानी मिल पाता है। पानी डालकर करीब 30 मिनट तक चलाना पड़ता है। तब जाकर पानी गिरता है। ऐसी स्थिति में शौचालय की परिस्थिति और उपयोग करने वालों की दिक्कत को समझा जा सकता है। यहां के बच्चों ने कहा कि विकास शिविर में बीडीओ धर्मवीर कुमार आए थे सभी तरह की परेशानी बताया गया। चापाकल के बाबत बीडीओ साहब बोले कि चापाकल लगवा देंगे। जो हवा-हवा हो गया। 
  इसी अवस्था में मिड डे मिल का भोजन बनता है। वाटर एड के जल स्वच्छता अभियान चलाया जाता है। पड़ोसी के पास से बाल्टी में पानी लाकर भोजन बनाया जाता है। उसी तरह बच्चों को खाने के पहले हाथ धोया जाता है। चापाकल और चहारदीवारी करवाने की मांग बच्चों ने की है। खासकर बीडीओ अंकल से बच्चे उम्मीद पाल रखे हैं।
गैर सरकारी संस्था प्रगति ग्रामीण विकास समिति के द्वारा सीट एण्ड ड्रॉ प्रतियोगिता टेस्ट कराया गया। समिति के परियोजना समन्वयक वृजेन्द्र कुमार ने कहा कि कई स्कूलों में आयोजन करके सीट एण्ड ड्रॉ प्रतियोगिता करायी जाएगी।
आलोक कुमार


यू.के.सरकार के अन्तरराष्ट्रीय विकास विभाग से संचालित पैक्स कार्यक्रम के बढ़ते कदम


जहानाबाद। यू.के.सरकार के अन्तरराष्ट्रीय विकास विभाग से संचालित पैक्स कार्यक्रम है। इसके तहत भारत में नागर समाज के संगठनों के माध्यम से सामाजिक बहिष्करण भेदभाव के मुद्दों को सामाने लाना और उसे दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
पूअरेस्ट एरियाज सिविल सोसाइटी (पैक्स) के निदेशक राजन खोसला ने कहा कि पैक्स कार्यक्रम के अन्तर्गत आजीविका के अधिकार   मूलभूत सेवाओं के अधिकार पर क्रेन्दित होकर देश के सात राज्यों के 90 निर्धनतम जिलों में कुल 225 स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ मिलकर काम किया जा रहा है। आजीविका के अधिकार में मनरेगा सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में से एक है। मनरेगा सिर्फ 100 दिन के रोजगार की गारंटी नहीं देता बल्कि उपयोगी परिसंपतियों के सृजन के माध्यम से स्थाई विकास की राह बनाता है जिससे वंचित समुदायों को लाभ मिल सके।
बिहार झारखंड में 2012 में पैक्स मनरेगा अभियान की शुरूआत हुई जिसके तहतकाम मांगोअभियान और सामाजिक अंकेक्षण पर एक साक्षा पहल की गई। अभियान में राज्य जिलों के स्तर पर प्रशासन का भी सहयोग प्राप्त हुआ। एक निश्चित अवधि में 70,000 से अधिक काम के आवेदन और 170 ग्राम पंचायतों में सामाजिक अंकक्षेण किए गए। अभियान के प्रभाव के रूप में कुछ जिलों में पैक्स कार्यक्रम और जिला प्रशासन के द्वारा संयुक्त रूप से नई पहल की गई। मनरेगा मेट तैयार करना भी उन्हीं पहलकदमियों का हिस्सा है।
पैक्स कार्यक्रम जहानाबाद जिला प्रशासन के मध्य एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किया है और संयुक्त प्रयास से जहानाबाद में मनरेगा अन्तर्गत 1,000 महिला मेट तैयार की जा रही हैं। जिला स्तर पर पैक्स की सहयोगी संस्था प्रगति ग्रामीण विकास समिति के द्वारा परियोजना का संचालन किया जा रहा है। मनरेगा में महिलाओं की भागीदारी काफी अहम है। मेट के रूप में महिला होना,महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चत करने में सहायक होगा।
महिला मजदूर और काम का अधिकार को लेकर महिला मेट प्रशिक्षकों के लिए प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किया गया है। इसमें महिला मेटों के प्रशिक्षण के उद्ेश्य से प्रस्तुत दो दिवसीय मॉड्यूल तैयार किया गया है।काम के अधिकारके व्यापक संदर्भ तथा मनरेगा की अहमियत पर चर्चा,मेट की भूमिका की अहमियत,खासकर जेंडर के मुद्दों से निपटने में, मनरेगा की मुख्य प्रक्रियाएं तथा मेट की भूमिका, अलग अलग प्रकार के कार्यों की नापी तथा विवरणों की प्रविविष्ट, मेट द्वारा विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर मजदूरों का शिक्षण और शिकायतों के निपटारे तथा जनतांत्रिक जांच पड़ताल की व्यवस्थाएं को प्रथम दिन विस्तार से बताया जाएगा। द्वितीय दिन जॉब कार्ड आवेदन के लिए संयुक्त पारिवारिक फोटों का, मनरेगा कार्यक्रम में उपयोग होने वाले मस्टर रोल का, मनरेगा कार्यक्रम में उपयोग होने वाली दैनिक गणना प्रपत्र, मनरेगा कार्यक्रम में उपयोग होने वाली उपस्थिति का और मनरेगा कार्यक्रम में उपयोग होने वाले सामग्री पंजी का प्रारूप पर चर्चा होगी। इसके अलावे प्रशिक्षण को रूचिकर बनाने के लिए खेल भी प्रस्तुत की जाएगी। विशेष तौर पर खुदाई के लिए निर्धारित मिट्टी की मात्रा,परिवार नियोजन एवं स्वास्थ्य मातृत्व से संबंधित,मनरेगा कार्यस्थलों पर आवश्यक सुविधाएं सामग्रियां आदि पर चर्चा की जाएगी।
आलोक कुमार

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