रविवार, 30 अक्टूबर 2022

देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी लोग ढोरी माता के दर्शन के लिए आते

  बेरमो.हजारीबाग धर्मप्रांत में है ऐतिहासिक जिला बोकारो. बोकारो का महत्व ढोरी माता को लेकर है.यहां पर प्रत्येक साल वार्षिक महोत्सव धोरी माता को सम्मान में नतमस्तक होकर राज्य ही नहीं देश-विदेश के श्रद्धालु आकर पूजा-अर्चना करते हैं.कोरोन काल के बाद आयोजित वार्षिक महोत्सव में भक्तगण उत्साह से शामिल होकर धार्मिक आयोजन में चार चाँद लगा दिये.हां वार्षिक महोत्सव धूमधाम से मनाया गया.

   

खूंटी धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष विनय कन्डुलना डीडी ने समारोही मिस्सा किया.इस अवसर पर खूंटी धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष विनय कन्डुलना डीडी ने मुख्य पंडाल में कहा कि ढोरी माता चमत्कारी और करुणामयी हैं. इनके प्रति लोगों की आस्था देखते ही बनती है. देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी लोग ढोरी माता के दर्शन के लिए आते हैं. ढोरी माता हर मन्नत मांगने वाले की मनोकामनाएं पूरी करती हैं.

उन्होंने कहा कि ढोरी माता की कृपा हम सबों पर है. मनुष्य कमजोर है. मेरी माता से मनुष्यों को शक्ति मिलती है. बुरी प्रवृत्ति और अपनी कमजोरी के लिए परमेश्वर से क्षमा मांगनी चाहिए. ढोरी माता ने हम सबों का ईश्वर से संबंध स्थापित किया है. रविवार को प्रातः 10 बजे से शुरू समारोही मिस्सा पूजा में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए. समारोह में प्रवेश गान, दया याचना, चढ़ावा निवेदन, स्तुति गान से पूरा समारोह भक्तिमय हो गया. गीतों के साथ कई विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने नृत्य प्रस्तुत कर समा बांध दिया.                          

 


मालूम हो कि 21 अक्टूबर से नोविना शुरू किया गया.इस अवसर पर चार बजे झंडोत्तोलन किया गया.इसके बाद नोविना प्रार्थना की गयी.पुरोहित ने मिस्सा किये.बताया कि रोजाना चार बजे से मिस्सा पूजा आयोजित की गयी.ढोरी माता का दर्शन करने के बाद नोविना प्रार्थना की जाती थी.

   बोकारो जिला के बेरमो प्रखंड अंतर्गत जारंगडीह स्थित ढोरी माता के वार्षिक महोत्सव के दौरान 29 अक्टूबर शनिवार को तीन बजे से धूमधाम से ढोरी माता की शोभायात्रा ढोरी माता तीर्थालय से निकाली गई.शोभायात्रा का नेतृत्व खूंटी धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष विनय कन्डुलना डीडी कर रहे थे. इसके अलावा सेवा दल के साथी भी मौजूद थे.

 यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु आकर शोभायात्रा में शामिल हुए.शोभायात्रा ढोरी माता तीर्थालय से निकल कर जारंगडीह परियोजना के उत्खनन विभाग के मुख्य द्वार तक गई. फिर वहां से पुनरू यात्रा तीर्थालय पहुँची. जहां लोगों ने ढोरी माता का दर्शन कर मन्नत मांगी.यहां श्रद्धालुओं ने तीर्थालय में आकर पूजा-अर्चना की. साथ ही पल्ली पुरोहित ने मिस्सा पूजा व प्रार्थना करवाई.

    30 अक्टूबर रविवार को मुख्य मंडप में प्रातः 5 बजे हिंदी में और 7 बजे संथाली में मिस्सा पूजा संपन्न करायी गयी. 7 बजे ही तीर्थालय में भी हिंदी मिस्सा पूजा की गयी. इस दौरान ढोरी माता की प्रतिमा के दर्शन के लिए कार्यक्रम में हजारों अनुयायियों एवं श्रद्धालुओं की भीड़ मौजूद थी.

  ढोरी माता वार्षिक महोत्सव में प्रत्येक वर्ष राज्य ही नहीं देश-विदेश के श्रद्धालु आकर पूजा-अर्चना करते हैं. यह समारोह अक्टूबर माह के अंतिम शनिवार व रविवार को मनाया जाता है. यहां दो दिनों तक मेला लगता है. मेले में तरह-तरह के स्टॉल लगाए जाते हैं. लोग मेले का जमकर लुत्फ उठाते हैं.

   समारोह में पूरे देश से 30 हजार से ज्यादा श्रद्धालु जुटे. ढोरी माता तीर्थालय और चर्च मैदान श्रद्धालुओं से पट गया. हजारों लोगों ने कतारबद्ध होकर ढोरी माता के दर्शन किये. पूरी व्यवस्था में ढोरी माता तीर्थालय कमेटी का अहम योगदान रहा.

आलोक कुमार



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