मंगलवार, 9 अप्रैल 2024

दब गया शोर ईपीएस 95 का जोर

दब गया शोर ईपीएस 95 का जोर

नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दो बार मिले.केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री भूपेंद्र यादव से मिले.तो दोनों ऐसे मिले कि लगा न्यूनतम पेंशन में बढ़ोतरी करके मानेंगे.केंद्रीय समिति के अध्यक्ष अशोक रावत और तब की सांसद और अब की प्रत्याशी धोखे में रह गए.राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के मार्ग पर चलकर क्रमिक अनशन किए.वार्ता और संघर्ष साथ चले.मगर सकारात्मक परिणाम नदारद ही रहा.   2014 में विपक्ष में रहते हुए,भारतीय जनता पार्टी ने सत्तारूढ़ यूपीए सरकार से प्रस्तावित ₹1,000 प्रति माह पेंशन को  ₹3,000 पेंशन करने की मांग की थी.भारतीय जनता पार्टी 2014 में और फिर 2019 में सत्ता में आयी.सत्ता के मदहोश में भारतीय जनता पार्टी ने यूपीए सरकार के द्वारा प्रस्तावित ₹1,000 प्रति माह पेंशन को 01सितंबर 2014 से शुरू कर दी.       

     2014 में मध्य प्रदेश से राज्य सभा में प्रकाश जावड़ेकर फग्गन सिंह कुलस्ते की सीट पर निर्वाचित हुए थे.कांग्रेस के  कामगार विरोधी होने का खुब नारा बुलंद किये.विपक्षी भूमिका अदा करने वाले प्रकाश जावड़ेकर को सत्तासीन 2014 में होने पर भारतीय जनता पार्टी ने जावड़ेकर को केंद्रीय मंत्री बना दिया.केंद्रीय मंत्री ने ₹1,000 प्रति माह के ₹3,000 तक बढ़ाने का प्रयास नहीं किया.    बता दें कि 2014 से वर्तमान तक ईपीएस-95 के तहत न्यूनतम मासिक पेंशन 1,000 रुपये है और ईपीएफओ ने 1 सितंबर 2014 से पात्रता का भुगतान करना शुरू कर दिया है.ईपीएस-95 कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) द्वारा चलाया जाता है और इसके डैशबोर्ड से पता चलता है कि देश में 78 लाख पेंशनधारी है.       

     राष्ट्रीय समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमांडर अशोक रावत और राष्ट्रीय महासचिव वीरेंद्र सिंह राजावत के नेतृत्व में हुए वार्ता व प्रदर्शन दिल्ली में होते रहे है.यह पिछले छह वर्षों से जारी है.  पेंशनभोगियों ने पूरे भारत में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के 110 कार्यालयों पर प्रदर्शन भी कर चुके हैं.वहां पर न्यूनतम मासिक पेंशन 7,500 रुपये और महंगाई भत्ता देने का आग्रह किया.लेकिन इस घटनाक्रम ने उन लोगों को खुश नहीं किया है जो लंबे समय से न्यूनतम पेंशन ₹1,000 की बढ़ोतरी की मांग कर रहे थे.


आलोक कुमार

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