सोमवार, 16 मई 2022

मई माह के अंत तक 10 हजार पुराने वृक्षों की जिओ टैगिंग

 

मोतिहारी.जिलाधिकारी श्री शीर्षत कपिल अशोक की अध्यक्षता में जिलान्तर्गत चलाये जा रहे महत्वपूर्ण अभियान यथा-  guardians  ऑफ ट्री चम्पारण, अमृत सरोवर, ठोस-तरल अपशिष्ट प्रबन्धन, स्माइल, सीआईएसएस सहित अन्य योजनाओं की प्रगति का किया गया.समीक्षा के दौरान दिए गए महत्वपूर्ण आवश्यक दिशा-निर्देश.Guardians tree के तहत मई माह के अंत तक 10 हजार पुराने वृक्षों की जिओ टैगिंग करने एवं एक लाख तक ओनरशिप करने के लिए निर्देशित किया गया.अमृत सरोवर का कार्य सभी पंचायतों में करने एवं वेस्ट प्रोसेसिंग यूनिट के कार्यों को यथा शीघ्र पूर्ण करने के लिए निर्देशित किया गया.उक्त बैठक में विशेष कार्य पदाधिकारी गोपनीय शाखा, डीपीएम मनरेगा, सहित अन्य प्रशासनिक पदाधिकारी मौजूद थे.


आलोक कुमार

शहरी क्षेत्र में पौधारोपण इत्यादि कार्य योजनाओं के संबंध में चर्चा

 


गया.समाहरणालय सभागार में गया शहर क्षेत्र के विकासात्मक योजनाओं के संबंध में समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें मुख्य रुप से गया शहर में गंगा उद्वव योजना, शहरी जलापूर्ति योजना, रबर डैम निर्माण योजना, सड़क मरम्मत एवं निर्माण, रेलवे ओवर ब्रिज, शहरी क्षेत्र में पौधारोपण इत्यादि कार्य योजनाओं के संबंध में चर्चा की गयी.उक्त बैठक में माननीय सांसद गया श्री विजय कुमार एवं माननीय विधायक गया शहर डॉक्टर प्रेम कुमार भी उपस्थित थे.

सर्वप्रथम बैठक में आए माननीय नगर विधायक एवं माननीय सांसद को जिला पदाधिकारी गया डॉक्टर त्यागराजन एसएम द्वारा स्वागत किया गया.गंगा उद्भव योजना के समीक्षा के दौरान बताया गया कि गया जिले में 42 किलोमीटर क्षेत्र में मेन पाइप लाइन तेतर होते हुए अफगिल्ला तक लाया जा रहा है, पाइप बिछाने में लगभग 41 किलोमीटर का कार्य पूर्ण हो गया है, शेष 1 किलोमीटर पाइप लाइन बिछाने का कार्य बचा है, जिसे 15 जून तक शत-प्रतिशत पूर्ण कर लिया जाएगा. बैठक में बताया गया कि तेतर में जलाशय निर्माण के लिए 80 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है तथा 31 मई तक शत-प्रतिशत कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा.इसके साथ ही अफगिल्ला में जल शोधन संचय का कार्य 96 प्रतिशत पूर्ण हो गया है  अति शीघ्र है शत-प्रतिशत पूर्ण कर दिया जाएगा.


 माननीय सांसद तथा माननीय विधायक नगर ने कार्यपालक अभियंता डूडा को हाउसहोल्ड पाइप डिस्ट्रीब्यूशन के कार्य में धीमी प्रगति को देखते हुए उसमे तेजी लाने का निर्देश दिए. बैठक में बताया गया कि गंगा का पानी को बुडको द्वारा निर्मित विभिन्न ओवरहेड टैंक में पानी पहुंचाया जाएगा तथा वहां से गया एवं बोधगया के लोगों को पाइप लाइन के माध्यम से पानी आपूर्ति किया जाएगा.

 समीक्षा बैठक में माननीय सांसद ने कार्यपालक अभियंता डूडा को निर्देश दिया कि हाउसहोल्ड पाइप डिस्ट्रीब्यूशन के कार्य मे पाइप को और गहराई में रखे। साथ ही काटे गए सड़कों को अति शीघ्र समतल करावे ताकि आम जनता को आवागमन में किसी प्रकार का कोई कठिनाई ना हो। उन्होंने पाइप लाइन बिछाने के कार्य में और अधिक मैन पावर बढ़ाने का निर्देश दिए ताकि निर्धारित समय अवधि में पाइप लाइन बिछाने का कार्य पूरा किया जा सके.

सिंगरा स्थान में निर्माण किये गए जलमीनार में पानी की रिसाव को बंद कराने के लिए गुणवत्ता पूर्ण वाटर प्रूफिंग संबंधित कार्य अति शीघ्र करने का सख्त हिदायत कार्यपालक अभियंता डूडा को दिया गया. एनएच 82 पहाड़पुर ज्ञान भारती विद्यालय के पास सड़क पर बह रहे पानी के कारण सड़क काफी जर्जर स्थिति में हो गई है उसे अति शीघ्र मरम्मत करवाने के लिए निर्देश दिए. एनएच-83 सड़क के समीक्षा के दौरान बेला प्रखंड में बनाए जा रहे बाईपास को तेजी से पूर्ण कराने का निर्देश दिए ताकि बेला बाजार में जाम की समस्या से निजात पाया जा सके. उन्होंने एन एच 82 एवं एन एच 83 के अभियंता को निर्देश दिया कि अपने-अपने सड़क के बीचों-बीच एवं सड़क के दोनों ओर पर्याप्त संख्या में पौधारोपण करवाने का कार्य करें साथ ही अपने-अपने सड़कों पर लगातार पानी का छिड़काव करते रहे. इसके साथ ही रामशिला अवस्थित कुष्ठ रोग अस्पताल के समीप पानी के बहाव होने के कारण सड़क बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो गए हैं जिसके कारण आए दिन छोटी मोटी दुर्घटनाएं हो रही है उन्होंने कार्यपालक अभियंता डूडा को निर्देश दिया कि संबंधित वाटर लीकेज को बंद करवाना सुनिश्चित करें साथ ही गड्ढों को समतल करवाएं.

 गया शहर में आरओबी निर्माण के संबंध में माननीय सांसद एवं विधायक ने निर्देश दिया कि रेलवे के अधिकारी एवं पुल निर्माण निगम के अभियंता आपस में समन्वय स्थापित कर आरओबी निर्माण कार्य में तेजी लावे. बैठक में उपस्थित रेलवे के अभियंता को निर्देश दिया कि गया रेलवे स्टेशन पर साफ सफाई एवं मेंटेनेंस को अच्छी गुणवत्ता से करवाना सुनिश्चित करे. रेलवे परिसर में फैली गंदगी को साफ सुथरा करवाते रहें साथ ही रेलवे के पार्क में लगे पौधों में लगातार पानी छिड़काव करवाये.रबड़ डैम निर्माण के समीक्षा के दौरान माननीय सांसद एवं माननीय नगर विधायक ने पितृपक्ष मेला के पहले निर्माण कार्य पूर्ण करवाने को कहा साथ ही मनसरवा नाला का पानी फल्गु नदी एवं रबड़ डैम में ना जाए इसके लिए विशेष कार्य योजना तैयार कर, कार्य कराने का निर्देश दिए.

बैठक में माननीय विधायक एवं माननीय सांसद ने नगर आयुक्त गया नगर निगम तथा अनुमंडल पदाधिकारी सदर को निर्देश दिया कि जीबी रोड, के पी रोड सहित अन्य बड़े सड़को जहां आए दिन जाम की समस्या बनी रहती है जाम की समस्या से निजात के लिए कार्य योजना तैयार करें.शिक्षा विभाग की समीक्षा के दौरान माननीय सांसद एवं माननीय विधायक ने जिला शिक्षा पदाधिकारी को निर्देश दिया कि भवनहीन विद्यालय तथा जर्जर भवनों वाले विद्यालयों को चिन्हित कर उसकी सूची तैयार कर भवन निर्माण के लिए प्रस्ताव तैयार करें.

बैठक में जिला पदाधिकारी गया डॉक्टर त्यागराजन एसएम, नगर आयुक्त गया नगर निगम श्रीमती अभिलाषा शर्मा, सिविल सर्जन गया, अपर समाहर्ता श्री मनोज कुमार सहित संबंधित विभागों के पदाधिकारी एवं अभियंता उपस्थित थें.

आलोक कुमार

नल-जल की समीक्षा करते हुए आवश्यक जगहों पर चापाकल गड़वाने के आदेश


नालंदा.आज सोमवार को हरदेव भवन सभागार में जिला पदाधिकारी नालंदा श्री शशांक शुभंकर द्वारा संभावित/सुखाड़ से  बचाव के लिए संबंधित विभागों के पदाधिकारियों के साथ बैठक की गई.रहुई प्रखंड के डिहरा, लोहानचक, मथुरापुर, अब्दुलहिचक, कमरपुर तथा बासत सैदी में पंचाने नदी पर तटबंध मरम्मती के कार्यों की जानकारी कार्यपालक अभियंता बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण से ली गई.


बताया गया कि हवनपुरा तथा लोर्हांचक में कार्य चल रहा है. डिहरा में मैटेरियल गिरा हुआ है,कार्य शीघ्र शुरू हो जाएगा. मथुरापुर,कमारपुर,दुलचनपुर,अब्दुलहीचक तथा बासत सैदी के प्रस्ताव विभागीय स्वीकृति के लिए भेजा गया है.जिला पदाधिकारी ने संबंधित अंचलाधिकारी को आदेश दिया कि कार्य की प्रगति की जांच करते हुए अद्यतन प्रतिवेदन प्रस्तुत करें.बिंद प्रखंड के गोविंदपुर,जमसारी तथा बरहोग गांव में तटबंध के रिसाव के कारण बाढ़ की स्थिति आ जाती है. तटबंध मरम्मती की जानकारी कार्यपालक अभियंता बाढ़ नियंत्रण से ली गई. अद्यतन जानकारी नहीं रखने के कारण जिला पदाधिकारी ने उनसे स्पष्टीकरण पूछा.

अस्थावां प्रखंड के जाना गांव में एसएच 82 ए के बाएं जिरायन नदी के तटबंध मरम्मती की जानकारी ली गई. अंचलाधिकारी द्वारा बताया गया कि सिर्फ मिट्टी गिराया गया है.सरमेरा के काजीचक तथा मलामा पंचायत के बड़ी घरियारी से मालचक में जमींदारी बांध के मरम्मती कार्य अगले 10 दिनों में कार्य पूर्ण हो जाने की जानकारी दी गई.हिलसा के केसोपुर, कतरी सराय के कटौना से दरवेशपुरा तक,राजगीर के गिरियक से दरियापुर वियर तक,करायपरसुराय के वेरमा,बिंद के सैदपुर,नौरंगा में तटबंध मरम्मती के प्रस्ताव विभागीय स्वीकृति जिला पदाधिकारी के स्तर से भेजने का निर्देश दिया गया. स्वीकृति प्राप्त होते ही कार्य शुरू करने का निर्देश दिया गया.जिला पदाधिकारी ने संभावित सुखाड़ से राहत के लिए भी संबंधित पदाधिकारियों से समीक्षा किया.

लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण तथा पंचायती राज विभाग के तहत नल-जल की समीक्षा करते हुए आवश्यक जगहों पर चापाकल गड़वाने के आदेश दिए गए.अनुमंडल पदाधिकारियों द्वारा आवश्यक नए चापाकलों की जरूरतों वाले स्थलों को सूचीबद्ध कर तुरंत गड़वाने के आदेश दिए गए.जिला पदाधिकारी ने आदेश दिया कि अगले 3 दिनों में कार्य पूर्ण कराएं.

उक्त बैठक में उप विकास आयुक्त नालंदा श्री वैभव श्रीवास्तव,नगर आयुक्त,बिहारशरीफ श्री तरंजोत सिंह,अपर समाहर्ता, नालंदा,श्री नौशाद अहमद सहित सभी अनुमंडल पदाधिकारी,संबंधित प्रखंडों के बी डी ओ,सी ओ तथा कार्यपालक अभियंता उपस्थित थे.

आलोक कुमार

रविवार, 15 मई 2022

संत देवसहायम पिल्लाई

10 नये संतों के नाम इस प्रकार हैं- संत देवसहायम पिल्लाई, संत चेसर दी बुस, संत लुइजी मरिया पालाजोलो, संत चार्ल्स दी फौकल्ड,  संत जुस्तिनो मरिया रूसोलिलो, संत तितुस ब्रैंडस्मा, संत अन्ना मरिया रूबातो, संत मरिया दोमेनिका मंतोवानी, संत मरिया रिवियर और संत करोलिना संतोकनाले.


रोम.आज संत पिता फ्रांसिस ने 10 नये संतों के नामों की घोषणा कर दी. उनका नाम इस प्रकार हैं- संत देवसहायम पिल्लाई, संत चेसर दी बुस, संत लुइजी मरिया पालाजोलो, संत चार्ल्स दी फौकल्ड,  संत जुस्तिनो मरिया रूसोलिलो, संत तितुस ब्रैंडस्मा, संत अन्ना मरिया रूबातो, संत मरिया दोमेनिका मंतोवानी, संत मरिया रिवियर और संत करोलिना संतोकनाले.संत पापा ने कहा, ‘ख्रीस्त जो हमारे भाई-बहनों में दुःख सहते हैं उनका स्पर्श करें और उन्हें देखें। यह बहुत महत्वपूर्ण है.जीवन देना यही है.यह स्वार्थ से ऊपर उठना है, दूसरों की आवश्यकता को देख पाना जो हमारे बगल में चल रहे हैं, उन लोगों के साथ समय बिताना जिन्हें हमारी आवश्यकता है, शायद थोड़ा सुनने, समय देने, एक फोन कोल करने के द्वारा। संतता थोड़े साहसिक भावों से नहीं बनते बल्कि दैनिक जीवन के बहुत सारे प्यार से।‘संत पापा ने समर्पित महिलाओं और पुरूषों को सम्बोधित कर कहा, ‘अपना दान खुशी से देकर पवित्र बनें.‘


 विवाहित लोगों से संत पापा ने कहा, ‘अपने पति अथवा पत्नी को प्यार करें एवं उसकी देखभाल कर पवित्र बनें, जैसा कि ख्रीस्त ने कलीसिया से प्रेम किया.‘नौकरी करने वालों से उन्होंने कहा क्या आप काम करनेवाले हैं? अपने कामों को भाई-बहनों की सेवा के मनोभाव से ईमानदारी और दक्षता से पूरा करने के द्वारा पवित्र बनें, अपने साथियों के न्याय के लिए संघर्ष करें ताकि वे बेरोजगार न रहें, ताकि हमें हमेशा उचित वेतन मिल सके. क्या आप माता-पिता अथवा दादा-दादी हैं? बच्चों को धीरज से येसु का अनुसरण करने की शिक्षा देकर पवित्र बनें.क्या आप एक अधिकारी हैं? सार्वजनिक भलाई के लिए संघर्ष करने एवं व्यक्तिगत स्वार्थ का त्याग करने के द्वारा आप पवित्र बनें. यही संत बनने का रास्ता है, अत्यन्त सरल, दूसरों में हमेशा येसु को देखना है.


सुसमाचार एवं भाई-बहनों की सेवा करना, बिना कुछ पाये ही अपना जीवन दूसरों के लिए अर्पित करने का अर्थ है, दूसरों से पाने की आशा किये बिना देना, दुनियावी महिमा की खोज नहीं करना, यही राज है, जिसके लिए हम सभी बुलाये गये हैं. हमारे सहयात्री जो आज संत घोषित हुए, उन्होंने इसी तरह जीया, उत्साह पूर्वक अपनी बुलाहट को अपनाया, कुछ पुरोहित के रूप में, कुछ समर्पित लोगों के रूप में और कुछ लोकधर्मी के रूप में, अपना जीवन सुसमाचार के लिए अर्पित किया, उन्होंने एक ऐसे आनन्द की खोज की जिसकी तुलना नहीं की जा सकती है वे इतिहास में प्रभु के प्रकाशमान प्रतिबिम्ब बन गये. हम भी उस रास्ते पर चलने का प्रयास करें जो बंद नहीं है, एक वैश्विक रास्ता है, हम सभी के लिए एक बुलावा है. यह बपतिस्मा से शुरू होता है. आइये, हम इसपर चलने का प्रयास करें क्योंकि हम सभी संत बनने के लिए बुलाये गये हैं, अद्वितीय और अपरिवर्तनीय पवित्रता के लिए बुलाये गये हैं.पवित्रता हमेशा वास्तविक है, धन्य कार्लो अकुतिस ने कहा है रू फोटोकॉपी पवित्रता नहीं है, यह मेरा है, आपका है और हम सबका है.प्रभु के पास हम सबके प्रेम की योजना है, उनके पास हमारे जीवन का सपना है। हम इसे ग्रहण करें और आनन्द के साथ अपनायें.


आलोक कुमार

जब एक ट्रक ने उसे पीछे से ठोकर मार दिया

जहां पर पढ़ा और वहां पर हेडमास्टर बन गया

* पटना जेसुइट सोसाइटी में प्रवेश करने के अवसर पर समारोह

बेतिया. फादर गैब्रियल  माइकल ने गोल्डन जुबली बनाया.पश्चिमी चंपारण के बेस्ट स्कूलों में शुमार के.आर.हाई स्कूल के हेडमास्टर थे.वे एक बार हेडमास्टर बने.यह कौन कहता है कि  बिहारियों में प्रतिभा और कौशलता में कमी है?इसे दरकिनार कर पटना जेसुइट सोसाइटी के प्रोविंशियल ने बेतिया निवासी फादर गैब्रियल पर विश्वास कर पहली बार 1998 से लेकर 2003 तक लगातार हेडमास्टर की जिम्मेवारी दिये.जिसे बखूबी हेडमास्टर साहब ने निभाया.बेदाग छवि के रहने के कारण फादर गैब्रियल को 2015 से 2020 तक कैंडिडेट हाउस के इंचार्ज के आर का बनाये गए.

 गोल्डन जुबली समारोह के अवसर पर आयोजित मिस्सा के मुख्य अनुष्ठानकर्ता स्वयं फादर गैब्रियल  माइकल थे.उनके साथ फादर क्रिस्टोफर, फादर माइकल रफायल रिचर्ड, फादर फिन्टन साह के अलावे 10 और पुरोहित थे.बता दें कि फादर गैब्रियल माइकल के आर हाई स्कूल से ही पढ़ाई किए थे.इस प्रकार कुल 21 वर्षों तक के आर हाई स्कूल में रहे.फादर गैब्रियल माइकल का जन्म 2 सितंबर 1954 को बेतिया में हुआ था. जेसुइट में 01 जुलाई 1971 को प्रवेश किए थे. आपका पुरोहिताभिषेक 20 मई 1985 में हुआ था.                   

बता दें कि मिस्सा के बाद करीब 100 लोगों काे प्रीतिभोज दिया गया .जिसमें फादर, सिस्टरों के साथ फादर गैब्रियल के परिवार के अलावा के आर हाई स्कूल के कुछ शिक्षक भी मौजूद थे. 


आलोक कुमार

रविवार 15 मई, 2022 को धन्य देवसहायम पिल्लई 'संत' बनेंगे

 

*भारतीय समयानुसार दोपहर 01:30 बजे


तमिलनाडु.पहले तमिलनाडु और वर्तमान में कन्याकुमारी जिले के विलवनकोड तहसील के नाट्टालम गाँव के एक हिन्दु परिवार में  धन्य देवसहायम पिल्लई का जन्म 1712 में हुआ.जन्म के 310 साल के बाद नाट्टालम गाँव में जश्न का माहौल है.आज रविवार 15 मई, 2022 को धन्य देवसहायम पिल्लई 'संत' बनेंगे.इसके साथ ही भारतीय संतों के श्रेणी में आ जाएंगे.इस बीच संत पापा फ्राँसिस ने अपने प्रशासन काल में कुल 909 संतों की आधिकारिक घोषणा की है. इस आंकड़े में 813 "ओट्रेंटो के शहीद" शामिल हैं, जो 1480 में दक्षिणी इटली शहर में मारे गए थे और 2013 में संत घोषित किए गए.

देवसहायम पिल्लई का जन्म तमिलनाडु के वर्तमान कन्याकुमारी जिले के विलवनकोड तहसील के नाट्टालम गाँव के एक हिन्दु परिवार में 1712 में हुआ.उनके पिता वासुदेवन नम्पूतिरि नामक ब्राह्मण थे और उनकी माता देवकी अम्माल नायर समुदाय की स्त्री थी. बचपन में उनका नाम नीलकण्ठन था और लोग उनको ’नीलम’ पुकारते थे.नायर समुदाय के लोग उस समय के समाज के प्रतिष्ठित लोगों में थे. ट्रावनकोर राज्य के राजा, राज्य के ज़्यादातर अधिकारी और सैनिक नायर समुदाय के ही थे. उस समुदाय की परम्परा के अनुसार बच्चे माता के समुदाय के नाम से जाने जाते थे.नीलम ट्रावनकोर राजा के राजमहल में काम करते थे और राजमहल में उच्च स्तर पर काम करने के कारण लोग उनके नाम के साथ ’पिल्लई’ जोड़ कर बुलाते थे. उनके पिता नाट्टालम के शिव मंदिर के पूजारी थे.

संस्कृत, तमिल और मलयालम भाषा के अतिरिक्त उन्हें युद्घ का भी प्रशिक्षण प्राप्त हुआ. नीलम पिल्लई युद्ध में निपुण थे; साथ ही राजमहल की सम्पत्तियों की देखरेख की जिम्मेदारी भी उन्हें सौंपी गयी थी.वे राजा और राजमहल के अधिकारियों के प्रिय थे.वे हिन्दु धर्म को मानते थे और मंदिर और घर में हिन्दु देवी-देवताओं की पूजा करते थे.उनका विवाह उन्हीं के समुदाय भार्गवी अम्माल के साथ हुआ.

सन 1741 में डच सेना ने ट्रावनकोर पर आक्रमण किया. उनका विचार ट्रावनकोर में एक डच कॉलनी बनाने का था. शुरू में कोलच्चल में उन्हें सफलता हासिल हुयी, परन्तु बाद में राजा मार्तान्डवर्मा की सेना ने डच सेना को हरा कर के कर्नल दे लान्नोय (De Lannoy) और उनके साथ 23 सैनिकों को बंदी बना दिया.राजा ने उन्हें मृत्यु और राजा की सेना में शामिल होने के बीच चयन करने का मौका दिया. वे राजा की सेना में शामिल हो गये.

राजा ने यह निर्णय लिया कि इन यूरोपीय सैनिकों की सहायता से अपनी सेना का आधुनीकरण करें ताकि अपने राज्य को और विस्तृत बना सकें.नीलम पिल्लई राजा की सेना के एक प्रमुख अधिकारी थे. धीरे-धीरे नीलम और दे लान्नोय के बीच दोस्ती शुरू हुयी. दे लान्नोय ने राजा के सैनिकों तथा राजा के अंगरक्षकों को अच्छा प्रशिक्षण दिया. इस पर प्रसन्न हो कर राजा ने दे लान्नोय को राजमहल में तैनात सैनिकों के अधिकारी का पद प्रदान किया. दे लान्नोय ने उन सैनिकों को इतना अच्छा प्रशिक्षण दिया कि राजा ने मदुरई के सैनिक दल को वापस भेजा जिस के लिए अब तक वे हर महीने साठ हजार रुपये दे रहे थे.

कर्नल दे लान्नोय और नीलम के बीच दोस्ती दृढ़ बनती गयी. नीलम के जीवन में कई अप्रिय घटनाएं हुयी और उन्हें अपनी सम्पत्ति भी खोनी पड़ा। विभिन्न प्रकार की परेशानियों के बीच नीलम बहुत चिन्तित थे.उन्होंने अपने दोस्त दे लान्नोय को अपनी परेशानियों के बारे में बताया.नीलम ने बताया कि हर प्रकार की पूजा करने के बाद भी उनको बहुत-सी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था. दे लान्नोय का ख्रीस्तीय विश्वास बहुत ही गहरा था.उन्होंने सब कुछ ध्यान से सुनने के बाद नीलम को बाइबिल के योब के ग्रन्थ की घटनाओं का विवरण सुनाया. नीलम ने ध्यान से सब कुछ सुना.योब के व्यक्तित्व का नीलम के ऊपर बहुत प्रभाव पड़ा. तत्पश्चात वे दोनों बार-बार धार्मिक शिक्षाओं पर चर्चा करते थे.आगे चलते नीलम ने बपतिस्मा ग्रहण कर एक ख्रीस्तीय विश्वासी बनने की इच्छा प्रकट की. ट्रावनकोर राज्य में तब ख्रीस्तीय बनाना कानून के विरुद्ध था.

इसलिए दे लान्नोय ने एक चिट्ठी दे कर नीलम को वडक्कनकुलम के नेमान मिशन में सेवारत येसु समाजी फादर जोवान्नी बपतिस्ता बुत्तारी के पास भेजा.नीलम को मालूम था कि राजमहल में सेवारत किसी अधिकारी को ख्रीस्तीय विश्वास अपनाने पर उसे मृत्युदण्ड भी दिया जा सकता है.

नीलम तुरन्त ही बपतिस्मा लेना चाह रहे थे.परन्तु फादर बुत्तारी ने नीलम के उद्देश्य की परीक्षा लेने तथा उन्हें धर्मशिक्षा देने के लक्ष्य से इंतजार करने की सलाह दी, लेकिन यह नहीं बताया कि उन्हें कितने समय तक इंतजार करना पडे़गा.नीलम ने ख्रीस्त के नाम पर न केवल बपतिस्मा लेने, बल्कि मरने के अपने दृढ़संकल्प को भी फादर बुत्तारी के सामने प्रकट किया.नौ महीनों के इंतजार के बाद 14 मई 1745 को फादर बुत्तारी ने नीलम को बपतिस्मा दिया. तब नीलम 32 साल के थे. बपतिस्मा के समय नीलम को ’देवसहायम’ नाम दिया गया.यह लाजरुस नाम का तमिल अनुवाद है.

बपतिस्मा के बाद उन्होंने अपनी पत्नी को भी ख्रीस्तीय धर्मशिक्षा दे कर ख्रीस्तीय बनने के लिए प्रेरित किया.शुरुआती हिचहिचाहट के बाद भार्गवी अम्माल ने बपतिस्मा ग्रहण कर ’ज्ञानापू’ नाम स्वीकार किया, जो तेरेसा नाम का तमिल अनुवाद है. देवसहायम ने राजा के सामने सेना की क्रिश्चियन बटालियन में शामिल होने की इच्छा प्रकट की.आगे चल कर उन्होंने सेना के कई सैनिकों को ख्रीस्तीय धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया.

देवसहायम ने न केवल अपने ख्रीस्तीय विश्वास के अनुसार जीवन बिताया, बल्कि ब्राह्मण लोगों के धर्माचरण की आलोचना भी की.कई बार उन्होंने ब्राह्मणों के साथ वाद-विवाद भी किया. क्रुद्ध हो कर उन्होंने देवसहायम को एक संकरे कमरे में कैद कर किया.राजा ने उन्हें मृत्यु दण्ड सुनाया. देवसहायम ने बड़ा आनन्द महसूस किया कि ख्रीस्त के नाम पर मरने के लिए वे योग्य पाये गये.लेकिन उनके वध के पहले किसी भविष्यवक्ता ने राजा को बताया कि नीलम को मारने पर उन्हें बड़ी विपत्ति भुगतनी पडे़गी. इस पर राजा ने अपनी आज्ञा को रद्द किया. नीलम को खेद हुआ कि वे अब येसु केलिए शहीद नही बन सकेंगे.

उनका अपमान करने के लिए शहर की गलियों से उनकी परेड निकाली गयी.लेकिन वे ईश्वर की स्तुति करते रहे. एक दिन रास्ते में वे प्यासे थे और पानी न दिये जाने पर उन्होंने एक पत्थर के सामने खडे हो कर प्रार्थना करने के बाद उस पत्थर को अपनी कुहनी से मारा और वहाँ से पानी निकलने लगा. उन्हें पेरुविलाय नामक जगह ले जाया गया.वहाँ पर उन्हें एक खुली जगह पर एक नीम के पेड से जंजीरों से कस कर बाँध दिया गया. सात महीनों तक दिन-रात हर प्रकार के मौसम में वे वहाँ पडे़ रहे. उनकी देखरेख करने वाले सैनिक उनके विश्वास और अच्छे व्यवहार से प्रभावित हो गये और उन के साथ अच्छा व्यवहार करने लगे. सैनिकों ने उन्हें भाग जाने का मौका भी दिया, लेकिन देवसहायम ने एक कायर की तरह भाग जाने के बजाय येसु के लिए दुख सहना उचित माना.इन सब के बीच कई लोग उनसे मिलने, उनकी प्रार्थना की याचना करने तथा उनकी आशिष ग्रहण करने आते थे.

14 जनवरी 1752 की रात को सैनिक देवसहायम पिल्लई को एक पहाड़ी पर ले गये. मृत्यु को करीब देख कर उन्होंने प्रार्थना करने के लिए कुछ समय माँगा. प्रार्थना के बाद उनके ऊपर गोलियाँ चलायी गयी.अपने गहरे विश्वास का प्रमाण देते हुए प्रभु येसु और माता मरियम के नाम लेकर चालीस साल की उम्र में उन्होंने मृत्यु का आलिंगन किया.सैनिकों ने उनके मृतशरीर को जंगल में फेंक दिया.

जब ख्रीस्तीय विश्वासियों को देवसहायम की मृत्यु की खबर मिली, तो वे उनके मृतशरीर की खोज में निकले. पाँच दिन की खोज के बाद उन्हें सिर्फ कुछ हड्डियाँ मिली, जिन्हें उन्होंने बड़े आदर के साथ कोट्टार के संत फ्रांसिस ज़ेवियर गिरजाघर में दफ़नाया.बपतिस्मा ग्रहण करने के बाद उन्होंने सात साल ख्रीस्तीय जीवन बिताया, उनमें से तीने साल वे जंजीरों से बंधे हुए थे.जीवित रहते ही लोगों ने देवसहायम एक संत माना. उनकी शहादत के बाद न केवल उनकी कब्र पर, बल्कि उनके जीवन से संबंधित सभी जगहों पर विश्वासियों की भीड़ लगने लगी. दिसंबर 2, 2012 को कोट्टार धर्मप्रान्त के नागरकोइल में देवसहायम पिल्लई को धन्य घोषित किया गया.जून 2012 में पोप बेनेडिक्ट XVI ने आधिकारिक घोषित किया गया.

21 फरवरी 2020 को, पोप फ्रांसिस ने देवसहायम, सीएल के हस्तक्षेप के लिए एक चमत्कार को मान्यता दी कैनोनेज़ेशन (सन्थूड) के लिए अपना रास्ता तय करना. वह संत बनने के लिए भारत में पहले कैथोलिक होंगे.


आलोक कुमार

The Configure Featured Post option in Blogger allows you to highlight a selected post prominently on

चिंगारी प्राइम न्यूज़

 About Us | चिंगारी प्राइम न्यूज़ Chingari Prime News एक स्वतंत्र हिंदी डिजिटल न्यूज़ और विचार मंच है, जिसका उद्देश्य सच्ची, तथ्यपरक और ज़मी...

How to Configure Popular Posts in Blogger The Popular Posts widget highlights your most viewed post