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पश्चिम चम्पारण जिले के प्रत्येक मतदाता 11 नवंबर को अपने मताधिकार का प्रयोग करे : जिला निर्वाचन पदाधिकारी

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 शत-प्रतिशत मतदान के लक्ष्य को लेकर पश्चिम चम्पारण में जागरूकता की नई लहर.जिला निर्वाचन पदाधिकारी के दिशा-निर्देश में लगातार आयोजित किए जा रहे हैं मतदाता जागरूकता कार्यक्रम.महिला और युवा मतदाताओं पर दिया जा रहा है विशेष ध्यान...... बेतिया.बिहार विधान सभा आम निर्वाचन-2025 के अवसर पर पश्चिम चम्पारण जिला प्रशासन द्वारा शत-प्रतिशत मतदान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मतदाता जागरूकता अभियान को व्यापक स्तर पर चलाया जा रहा है.इसके तहत स्वीप कोषांग द्वारा जिला मुख्यालय से लेकर पंचायत एवं ग्राम स्तर तक निरंतर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं.        नोडल पदाधिकारी, जिला स्वीप कोषांग, श्रीमती नगमा तबस्सुम ने बताया कि ये सभी गतिविधियाँ जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-जिला पदाधिकारी, श्री धर्मेन्द्र कुमार के दिशा-निर्देश एवं मार्गदर्शन में संचालित की जा रही हैं. उन्होंने कहा कि स्वीप अभियान के तहत जिले के विभिन्न विद्यालयों, महाविद्यालयों, सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थानों के सहयोग से रैलियाँ, जागरूकता मार्च, नुक्कड़ नाटक, पोस्टर प्रतियोगिता, वॉल पेंटिंग, साइकिल रैली, और हस्ताक्षर अभ...

“पूर्णिया सदर अस्पताल में आईसीयू की अनुपलब्धता”

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  “पूर्णिया सदर अस्पताल में आईसीयू की अनुपलब्धता” पूर्णिया का अस्पताल, आईसीयू के बिना — वादों और उद्घाटनों के बीच दम तोड़ती स्वास्थ्य व्यवस्था पूर्णिया. बिहार के पूर्वोत्तर का प्रमुख जिला, जहाँ अब गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (GMCH) की स्थापना को विकास की दिशा में मील का पत्थर बताया गया था, आज भी सबसे बुनियादी सुविधा — आईसीयू (गहन चिकित्सा इकाई) — से वंचित है। यह स्थिति केवल प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण नहीं, बल्कि उस स्वास्थ्य तंत्र की पोल खोलती है जो आंकड़ों और उद्घाटनों में तो आगे है, पर जमीन पर अब भी जर्जर है. वादों की फेहरिस्त, हकीकत में सन्नाटा पूर्णिया सदर अस्पताल में आईसीयू की नींव 2019 में रखी गई थी. मशीनें खरीदी गईं, बेड लगाए गए, लेकिन प्रशिक्षित स्टाफ की कमी ने पूरे प्रोजेक्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया. अब, नवंबर 2025 तक, वही हालात हैं — मशीनें धूल खा रही हैं और मरीजों को रेफर करने का सिलसिला जारी है. हर दिन औसतन आठ गंभीर मरीजों को भागलपुर, सिलीगुड़ी या पटना भेजा जाता है, जिनमें से कई रास्ते में दम तोड़ देते हैं.नई बिल्डिंग में 30 बेड का अत्याधुनिक आईसीयू निर्माणा...

“सभी मृत विश्वासियों का स्मरण दिवस: आत्माओं के लिए प्रार्थना का दिन”

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 “सभी मृत विश्वासियों का स्मरण दिवस: आत्माओं के लिए प्रार्थना का दिन” पटना.  आज, 2 नवंबर, कैथोलिक समुदाय विश्व भर में ‘ऑल सोल्स डे’ (सभी मृत विश्वासियों का स्मरण दिवस) श्रद्धा और आस्था के साथ मनाता है.यह दिन उन सभी दिवंगत आत्माओं के लिए समर्पित होता है, जिन्होंने इस संसार को अलविदा कह दिया है, परंतु अब भी परमेश्वर की अनंत उपस्थिति में प्रवेश से पूर्व शुद्धिकरण की प्रक्रिया से गुजर रही हैं.      इस दिन का मूल भाव है — प्रार्थना, स्मरण और प्रेम का प्रदर्शन. कैथोलिक परंपरा के अनुसार, पृथ्वी पर जीवित विश्वासी अपने दिवंगत परिजनों के लिए मिस्सा (पवित्र बलिदान), प्रार्थना और दान के माध्यम से ईश्वर से कृपा की याचना करते हैं ताकि वे आत्माएं शीघ्र ही स्वर्ग में परम शांति प्राप्त कर सकें.       सुबह से ही चर्चों में विशेष पवित्र मिस्सा आयोजित किए जाते हैं, जहां श्रद्धालु परिवारजन अपने मृत परिजनों के नाम लेकर उनके लिए प्रार्थना करते हैं. प्रार्थना के पश्चात, लोग कब्रिस्तान जाकर कब्रों को फूलों से सजाते हैं, मोमबत्तियां जलाते हैं, और मौन साधकर अपने प्रियजनों क...

पवित्रता और मानवीयता का उत्सव 1 नवंबर

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  सभी संतों को नमन पटना.सभी संतों को नमन: पवित्रता और मानवीयता का उत्सव 1 नवंबर — यह तिथि केवल ईसाई कैलेंडर का एक दिन नहीं, बल्कि आत्मा की पवित्रता और मानवता की महानता का उत्सव है.इस दिन विश्व भर का ईसाई समुदाय ऑल सेंट्स डे या सर्व संतों का पर्व मनाता है — एक ऐसा अवसर, जब वे उन सभी संतों को स्मरण करते हैं जिन्होंने अपने जीवन को ईश्वर और मानवता की सेवा में अर्पित किया.     इतिहास की पवित्र गूंज इस परंपरा की जड़ें 609 ईस्वी में मिलते हैं, जब पोप बोनिफेस चतुर्थ ने रोम के प्रसिद्ध पैंथियन मंदिर को एक ईसाई चर्च में रूपांतरित कर दिया. इसे उन्होंने सेंट मैरी एंड द मार्टियर्स (सेंट मैरी और शहीदों का चर्च) के नाम से समर्पित किया.दो शताब्दियों बाद, 837 ईस्वी में पोप ग्रेगरी चतुर्थ ने इस पर्व को नवंबर में स्थानांतरित किया. तब से यह दिन न केवल पश्चिमी ईसाई जगत में, बल्कि विश्व के हर कोने में श्रद्धा और विनम्रता के साथ मनाया जाता है.     संतत्व का अर्थ ईसाई परंपरा में “संत” वह नहीं जो केवल मठों में तपस्या करता है, बल्कि वह भी है जो जीवन की कठोर वास्तविकताओं में भी करुणा और स...

"देश के गरीब और वंचित वर्गों को आत्मसम्मान और अधिकार की भावना दी"

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 *स्व. इंदिरा गांधी और सरदार पटेल को कांग्रेस ने किया याद   पटना .आज बिहार प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय, सदाकत आश्रम में भारत की प्रथम महिला प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्रीमती इंदिरा गांधी जी की 41वीं पुण्यतिथि पर उनकी प्रतिमा पर एवं भारत के लौह पुरुष, पूर्व गृह व रक्षा मंत्री स्व. सरदार वल्लभ भाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर उनके तैल चित्र पर माल्यार्पण किया गया.      इस अवसर पर राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत  ने इंदिरा गांधी जी के राष्ट्र निर्माण में योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अपने अदम्य साहस, निर्णायक नेतृत्व और भारत की एकता-अखंडता की रक्षा के लिए जो योगदान दिया, वह सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा. उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी जी ने गरीबी हटाओ का नारा देकर देश के गरीब और वंचित वर्गों को आत्मसम्मान और अधिकार की भावना दी.      अशोक गहलोत  ने साथ ही सरदार वल्लभभाई पटेल जी की जयंती पर उन्हें नमन करते हुए कहा कि लौह पुरुष पटेल ने अपने अद्भुत संगठन कौशल और दृढ़ संकल्प के बल पर 562 रियासतों का एकीकरण कर भारत की एकता की नींव रखी। उनके...

मोकामा सीट अपनी ऐतिहासिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि

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 पटना.मोकामा सीट अपनी ऐतिहासिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि के साथ-साथ बाहुबलियों के प्रभाव के लिए जानी जाती है. बाहुबली नेता अनंत सिंह यहां से कई बार विधायक रह चुके हैं. गंगा नदी के दक्षिण में बसे इस क्षेत्र में घोसवरी, मोकामा और पंडारक प्रखंड के कुछ गांव शामिल हैं. आगामी 2025 बिहार विधानसभा चुनाव में मोकामा सीट पर कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है, क्योंकि जातीय समीकरण और बाहुबली प्रभाव इस क्षेत्र की राजनीति को आकार देते हैं.             बिहार में चुनाव हो रहा है.कुल 243 सीटों पर चुनाव होना है.चुनाव दो चरणों में होना है.पहला चरण 6 नवंबर और दूसरा 11 नवंबर हो है.चुनाव परिणाम 14 नवंबर को आएगा.बिहार के लोगों की नजर मोकामा विधानसभा पर जा ठीक गयी है.भूमिहार बहुल मोकामा विधानसभा सीट पर इस बार दो बाहुबलियों की भिड़ंत होने वाली है. मोकामा के छोटे सरकार जदयू से चुनाव लड़ रहे हैं, तो सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी ने राजद के टिकट पर परचा भर दिया है. चुनाव भले वीणा लड़ रहीं हों, लेकिन मुकाबला अनंत सिंह बनाम सूरजभान सिंह ही बताया जा रहा है.अब दोनों बाहुबलि पसंद नहीं करते ...

इस त्याग ने बेटी को यह सोचने पर विवश किया

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  त्याग और अनुशासन का मौन स्तंभ पटना.1909 में जब सोनोरा स्मार्ट डोड ने मदर्स डे पर एक उपदेश सुना, तो उनके मन में यह प्रश्न उठा कि पिताओं के लिए भी कोई दिन क्यों न हो? माँ के प्रेम की तरह पिता का समर्पण भी तो समान रूप से आदरणीय है। इसी भाव से उन्होंने फादर्स डे की नींव रखी।उनकी प्रेरणा के केंद्र में उनके अपने पिता विलियम जैक्सन स्मार्ट थे — गृह युद्ध के एक सैनिक, जिन्होंने पत्नी के निधन के बाद छह बच्चों का पालन-पोषण अकेले किया.     इस त्याग ने बेटी को यह सोचने पर विवश किया कि पिता के मौन संघर्ष को भी समाज की मान्यता मिलनी चाहिए।उनके अथक प्रयासों का परिणाम था — 19 जून 1910, जब स्पोकेन, वाशिंगटन में पहला फादर्स डे मनाया गया. लेकिन इसे आधिकारिक मान्यता मिलने में लंबा समय लगा. अंततः 1972 में राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने इसे अमेरिका का राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया.आज भारत सहित अनेक देशों में यह पर्व जून के तीसरे रविवार को मनाया जाता है. 2025 में यह दिन 15 जून को पड़ा.वहीं, कुछ यूरोपीय देशों में इसे 19 मार्च को मनाने की परंपरा है.      हाल में कलकत्ता महाधर्मप्रांत म...