पटना. भाकपा-माले व ऐपवा की एक राज्य स्तरीय जांच टीम आज फिर औरंगाबाद जिले के रफीगंज प्रखंड के चिरैला गांव पहुंची. इस जांच टीम में माले विधायक महानंद सिंह, मनोज मंजिल, ऐपवा की महासचिव मीना तिवारी, राज्य अध्यक्ष सरोज चौबे और औरंगाबाद माले जिला सचिव मुनारिक राम शामिल थे.जांच टीम इस मामले की जांच कर रहे थाना प्रभारी से बात की लेकिन उनकी जांच का दायरा केवल प्रेम तक सीमित है लेकिन अन्य लड़कियों ने क्यों जहर खाया इसका जवाब उनके पास नहीं है.जांच टीम को मृतक लड़की काजल कुमारी की मां के द्वारा किया गया एफआईआर की काॅपी और कुछ अन्य तथ्य मिले, जिसके आलोक में जांच दल ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की अपनी मांग को फिर से दुहराया है.
एफआईआर की काॅपी में यह कहा गया है कि अनिषा कुमारी, उम्र-15 वर्ष एक लड़के दीपू से प्रेम करती थी. जो गया जिले के गुरारू प्रखंड के पहाड़पुर गांव का रहने वाला है और उमेश पासवान का बेटा है. लेकिन दीपू ने अनिशा से शादी करने से इंकार कर दिया. उसके बाद अनिशा अपनी सभी सहेलियों को बुलाकर बघार में ले गई और सभी को जहर खाने को दिया. जिसमें 3 की घटना स्थल और एक की अस्पताल में मौत हो गई.
इस मामले में बच गई एक लड़की ने जांच टीम को बताया कि उसने वास्तव में जहर नहीं खाया. एक दूसरी लड़की ने मुंह में रखकर उगल दिया. जिसकी वजह से दोनों की जान बच गई. उसने यह भी कहा कि गांव के ही दबंग जाति समुदाय से आने वाले एक लड़के जिसका नाम गोलू बताया जा रहा है, ने दीपू व अनिशा को बात करते हुए देखा था. उसने इन दोनों का मोबाइल छीन लिया. उसके दो दिन बाद जहर खाने वाली घटना घटी. मोबाइल छीन लेने की रिपोर्ट पहले भी सामने आई है. जब पीड़िता के परिजनों ने उस मोबाइल पर संपर्क करना चाहा था, तो उनके साथ गाली-गलौज किया गया था.
यह भी सवाल यथावत खड़ा है कि आखिर इन नाबालिग लड़कियों को जहर दिया किसने?
जांच टीम ने जिले के आला अधिकारियों से बात करने की कोशिश की, लेकिन सफलता हासिल नहीं हो सकी. जांच टीम को एहसास हुआ कि पुलिस की जांच पूरी तरह से दीपू के खिलाफ है. लेकिन वह मोबाइल छीनने वाले लड़के को न तलाश रही है और न ही मोबाइल जब्त कर रही है.जांच टीम को इस बात की प्रबल आशंका है कि सच्चाई को छिपाया जा रहा है. मारी गई लड़कियों के परिजन खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं. वे भी दीपू को ही निशाना बना रहे हैं. उनके ऊपर दबाव की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है. पहले दिन भी दबंगों का दबाव जांच टीम ने महसूस किया था. दलितों का घर सवर्णों की बस्ती से घिरा हुआ है.
इसलिए जांच दल इस मामले की उच्चस्तरीय जांच की अपनी मांग दुहराती है. स्थानीय स्तर की जांच से मामले की सच्चाई सामने नहीं आ पाएगी.
आलोक कुमार

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